सीएसआईआर और दक्षिण-आरआईएस के बीच समझौता
सीएसआईआर और आरआईएस स्थित ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र दक्षिण ने 3 नवंबर 2026 को विज्ञान और तकनीक साझा करने के लिए सहयोग पत्र पर हस्ताक्षर किए।

चर्चा में क्यों
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को बताया कि सीएसआईआर और आरआईएस स्थित ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र दक्षिण ने 3 नवंबर 2026 को सहयोग पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसका मकसद ग्लोबल साउथ के देशों के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को आगे बढ़ाना है।
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और दक्षिण ने 3 नवंबर 2026 को सहयोग पत्र पर हस्ताक्षर किए। दक्षिण वह ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र है, जो विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) में स्थित है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस समझौते की घोषणा 4 नवंबर 2026 को की। दोनों संस्थाएं ग्लोबल साउथ के देशों के लिए क्षमता निर्माण, संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी साझेदारी पर मिलकर काम करेंगी।
दक्षिण का उद्देश्य
दक्षिण इस सोच पर खड़ा है कि विकासशील देश एक-दूसरे से सबसे तेजी से सीखते हैं। यह ऐसे समाधान तैयार करने को बढ़ावा देता है, जो टिकाऊ हों, सस्ते हों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हों। इसके लिए संसाधनों को साझा करना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अनुभवों का आदान-प्रदान और साझा रणनीति अपनाई जाती है। मकसद है इन देशों की साझा समस्याओं का हल निकालना और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में रफ्तार बढ़ाना।
सीएसआईआर क्या लाता है
सीएसआईआर इस साझेदारी में वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान का विशाल आधार लेकर आता है। साथ में उसके पास ऐसी प्रौद्योगिकियों का भंडार है, जो तुरंत लगाई जा सकती हैं, सस्ती हैं और आसानी से ढाली जा सकती हैं। ये साझेदार देशों की विकास जरूरतों के अनुकूल मानी जाती हैं और इनसे व्यापक प्रसार, उद्योग की भागीदारी तथा नए उद्यम खड़े होने की गुंजाइश बनती है।
किसने क्या कहा
सीएसआईआर के अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मामलों के निदेशालय के प्रमुख डॉ. रमा स्वामी बंसल ने विकासशील देशों के आपसी जुड़ाव के महत्व को रेखांकित किया और साझा प्राथमिकताओं पर नए तरह के संयुक्त मॉडल की संभावना बताई। आरआईएस के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने इस जुड़ाव को वैज्ञानिक दक्षता और नवाचार को व्यावहारिक साझा समाधानों में बदलने का अहम पड़ाव बताया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, अधोसंरचना, कृषि, नील अर्थव्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था को सबसे संभावनाशील क्षेत्र बताया।
चार उद्देश्य
- हर परिस्थिति के अनुकूल हल खोजने के लिए संयुक्त नीति अध्ययन कराना
- विकास कार्यों का दायरा बढ़ाने में सक्षम संस्थाओं और एजेंसियों को जोड़ना
- क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास और कौशल उन्नयन को बढ़ावा देना
- विकास के अनुभव, श्रेष्ठ पद्धतियां और सफलता की कहानियां दर्ज करना और बांटना
यह क्यों अहम है
यह व्यवस्था दक्षिण-दक्षिण सहयोग का मंच बनने के लिए सोची गई है, जो अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को जोड़े और उपयुक्त विज्ञान एवं तकनीक के हस्तांतरण, अनुकूलन तथा उपयोग को आसान बनाए। सीएसआईआर की प्रयोगशाला ताकत को दक्षिण की विदेशी पहुंच के साथ रखकर दोनों पक्ष ग्लोबल साउथ में सस्ती और स्थानीय रूप से उपयुक्त तकनीक पहुंचाना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| हस्ताक्षरकर्ता | वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और आरआईएस स्थित दक्षिण |
|---|---|
| दस्तावेज | सहयोग पत्र (लेटर ऑफ एसोसिएशन) |
| हस्ताक्षर तिथि | 3 नवंबर 2026 |
| दक्षिण | ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र |
| मेजबान संस्थान | विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) |
| मंत्रालय | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय |
| सीएसआईआर अधिकारी | डॉ. रमा स्वामी बंसल, प्रमुख, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मामले |
| आरआईएस अधिकारी | प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा, महानिदेशक |
| प्राथमिकता क्षेत्र | स्वास्थ्य सेवा, अधोसंरचना, कृषि, नील अर्थव्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था |
| बड़ा लक्ष्य | दक्षिण-दक्षिण सहयोग और सतत विकास लक्ष्य |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: दोनों हस्ताक्षरकर्ता (सीएसआईआर और आरआईएस स्थित दक्षिण), दस्तावेज का नाम (सहयोग पत्र, समझौता ज्ञापन नहीं), हस्ताक्षर की तिथि (3 नवंबर 2026), दक्षिण का पूरा अर्थ (ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र), आरआईएस का पूरा नाम, दोनों नामित अधिकारी, पांच प्राथमिकता क्षेत्र और घोषणा करने वाला मंत्रालय (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)।
अभ्यास प्रश्न
सीएसआईआर ने जिस दक्षिण केंद्र के साथ सहयोग पत्र पर हस्ताक्षर किए, वह किस संस्थान में स्थित है?
- A.विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस)
- B.भारतीय विश्व मामलों की परिषद
- C.नीति आयोग
- D.भारतीय विदेश व्यापार संस्थान
उत्तर देखें
ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र दक्षिण इसी संस्थान में स्थित है और इसी हैसियत से उसने 3 नवंबर 2026 को सीएसआईआर के साथ सहयोग पत्र पर हस्ताक्षर किए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएसआईआर के साथ समझौता करने वाला दक्षिण निम्नलिखित में से क्या है?
- A.विकास सहायता ज्ञान केंद्र
- B.ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र
- C.दक्षिणी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मिशन
- D.विकासशील एशिया ज्ञान नेटवर्क
उत्तर देखें
दक्षिण यही है और यह विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली में स्थित है, जहां से वह विकासशील देशों के बीच ज्ञान और आपसी सीख फैलाने का काम करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएसआईआर-दक्षिण सहयोग पत्र के तहत निम्नलिखित में से किसे प्रमुख सहयोग क्षेत्र के रूप में नहीं बताया गया?
- A.स्वास्थ्य सेवा
- B.नील अर्थव्यवस्था
- C.अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवाएं
- D.डिजिटल अर्थव्यवस्था
उत्तर देखें
आरआईएस के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने पांच क्षेत्रों को विशेष रूप से संभावनाशील बताया था: स्वास्थ्य सेवा, अधोसंरचना, कृषि, नील अर्थव्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएसआईआर-दक्षिण समझौते का मुख्य लक्ष्य किस प्रकार के सहयोग को मजबूत करना है?
- A.उत्तर-उत्तर सहयोग
- B.दक्षिण-दक्षिण सहयोग
- C.ट्रांस-अटलांटिक सहयोग
- D.आर्कटिक सहयोग
उत्तर देखें
पूरे समझौते का ढांचा इसी पर टिका है, क्योंकि दक्षिण ग्लोबल साउथ के देशों के लिए काम करता है और सीएसआईआर अपनी तुरंत लगने वाली, सस्ती तथा ढाली जा सकने वाली तकनीकें इसी समूह तक पहुंचा रहा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीएसआईआर और दक्षिण-आरआईएस ने क्या और कब हस्ताक्षर किए?
दोनों ने 3 नवंबर 2026 को सहयोग पत्र पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ग्लोबल साउथ के देशों के लिए क्षमता निर्माण, अनुसंधान सहयोग और प्रौद्योगिकी साझेदारी से जुड़ा है और इसकी घोषणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने की।
दक्षिण क्या है और कहां स्थित है?
दक्षिण ग्लोबल साउथ उत्कृष्टता केंद्र है, जो विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस) में स्थित है। यह टिकाऊ, सस्ते और स्थानीय रूप से प्रासंगिक समाधानों के जरिये विकासशील देशों के बीच ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देता है।
समझौते के तहत सहयोग के कौन से क्षेत्र चिह्नित किए गए?
आरआईएस के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने स्वास्थ्य सेवा, अधोसंरचना, कृषि, नील अर्थव्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था को वे प्रमुख क्षेत्र बताया, जहां सीएसआईआर और दक्षिण मिलकर काम कर सकते हैं।
सहयोग पत्र के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
परिस्थिति के अनुकूल हल के लिए संयुक्त नीति अध्ययन, विकास कार्यों का विस्तार करने के लिए संस्थाओं को जोड़ना, क्षमता निर्माण और कौशल उन्नयन को बढ़ावा देना, तथा विकास के अनुभव दर्ज करके बांटना, जिससे सामूहिक आत्मनिर्भरता मजबूत हो।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2332389 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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