बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम 2026, 1891 का कानून हटा
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 पहली अक्टूबर 2026 से लागू होगा और 1891 के औपनिवेशिक कानून की जगह लेगा, डिजिटल बैंक रिकॉर्ड अब साक्ष्य होंगे।

चर्चा में क्यों
पीआईबी ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 पर विस्तृत जानकारी जारी की, जो पहली अक्टूबर 2026 से लागू होगा और 1891 के अधिनियम की जगह बैंक अभिलेखों को साक्ष्य मानने का प्रौद्योगिकी-निरपेक्ष ढांचा देगा।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 पहली अक्टूबर 2026 से लागू हो रहा है और यह बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891 की जगह लेगा। पुराना कानून उस औपनिवेशिक दौर में बना था जब बैंकिंग पूरी तरह कागज पर चलती थी। नया अधिनियम तय करता है कि बैंक के रिकॉर्ड अदालत में साक्ष्य के रूप में किस तरह स्वीकार किए जाएंगे, और वह ऐसा प्रौद्योगिकी-निरपेक्ष ढांचे में करता है जो भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल, तीनों तरह के रिकॉर्ड पर समान रूप से लागू होता है।
कानून कहां लागू होगा
यह अधिनियम किसी भी विधिक कार्यवाही, मध्यस्थता तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 या प्रचलित किसी अन्य विधि के अधीन होने वाली जांच या पूछताछ में लागू होगा, जहां भी साक्ष्य लिया जाता है या लिया जा सकता है। बैंकर्स बुक्स में बहीखाते, दैनिक पुस्तिकाएं, रोकड़ बही, लेखा पुस्तकें तथा वे सभी अभिलेख शामिल हैं जो बैंक अपने सामान्य कामकाज में रखता है, चाहे वे कागज पर लिखे हों या किसी भी प्रकार की डेटा भंडारण प्रणाली में रखे गए हों।
क्या बदला
नया अधिनियम पुराने कानून का मूल विचार बनाए रखता है, यानी बैंक रिकॉर्ड प्रमाणित प्रतियों के जरिये सिद्ध किए जाते हैं, और फिर उसे आधुनिक बनाता है। अब बैंकर्स बुक का इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल अभिलेख भी साक्ष्य के रूप में ग्राह्य, वैध और विधिक रूप से प्रवर्तनीय होगा, बशर्ते तीन शर्तें पूरी हों। पहली, प्रति उस प्रविष्टि की सच्ची प्रतिलिपि हो और अभिलेखों को सही ढंग से दर्शाती या उनसे उचित रूप से व्युत्पन्न हो। दूसरी, डेटा में कोई अनधिकृत परिवर्तन न पाया गया हो। तीसरी, प्रणाली की अखंडता और सटीकता को प्रभावित करने वाली छेड़छाड़ या ऐसी कोई घटना न पाई गई हो। प्रमाणीकरण मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर से किया जा सकता है।
बैंक अधिकारियों को राहत
बैंकर्स बुक की विषय-वस्तु मूल पुस्तक पेश किए बिना प्रमाणित प्रति से सिद्ध की जा सकती है। इसलिए सामान्य स्थिति में किसी बैंक अधिकारी को न पुस्तक पेश करने के लिए और न गवाह के रूप में पेश होने के लिए बाध्य किया जा सकता, विशेषकर तब जब बैंक स्वयं उस कार्यवाही में पक्षकार न हो। अधिकारी को केवल अदालत के लिखित आदेश पर बुलाया जा सकता है, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो। अधिनियम ने विशेष कारण भी बताए हैं, यानी प्रविष्टि की सटीकता या प्रामाणिकता संदिग्ध होना, किसी घटना के कारण अभिलेख रखने की नियमितता बाधित होना, या बैंक का अदालत के पिछले आदेश का पालन न करना।
बैंकों से आगे विस्तार
पुराने कानून की तरह यह अधिनियम भी बैंकिंग कंपनियों तथा किसी डाकघर बचत बैंक या मनीऑर्डर कार्यालय पर लागू होता है। इससे आगे बढ़कर यह सरकार को यह अधिकार देता है कि वह अधिसूचना जारी कर इसके प्रावधानों को वित्तीय क्षेत्र की किसी भी संस्था या संस्थाओं के वर्ग तक बढ़ा सके।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अधिनियम | बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 |
|---|---|
| लागू होने की तिथि | पहली अक्टूबर 2026 |
| किसकी जगह | बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891 |
| मंत्रालय | विधि और न्याय मंत्रालय |
| कहां लागू | विधिक कार्यवाही, मध्यस्थता तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 या अन्य प्रचलित विधि के अधीन जांच |
| बैंकर्स बुक्स | बहीखाते, दैनिक पुस्तिकाएं, रोकड़ बही, लेखा पुस्तकें तथा किसी भी डेटा भंडारण रूप में रखे अभिलेख |
| मुख्य बदलाव | इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल अभिलेख ग्राह्य, प्रमाणीकरण मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर से |
| अधिकारी को समन | केवल विशेष कारण दर्ज करने वाले अदालत के लिखित आदेश पर |
| विस्तार | सरकार अधिसूचना से वित्तीय क्षेत्र की किसी संस्था या वर्ग तक बढ़ा सकती है |
परीक्षा की दृष्टि से
नए अधिनियम का वर्ष (2026), जिस कानून की जगह लिया (1891), लागू होने की तिथि (पहली अक्टूबर 2026), जिस संहिता की जांच इसमें शामिल है (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023), इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख की तीन शर्तें, विशेष कारण शब्द तथा सरकार द्वारा अधिसूचना से विस्तार का प्रावधान याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 किस पुराने कानून की जगह ले रहा है?
- A.बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891
- B.भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
- C.बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949
- D.परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891
व्याख्या
सही उत्तर है बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891। नया अधिनियम उसी नाम के साथ नए वर्ष में आया है और उस औपनिवेशिक कानून का स्थान लेता है, जो उस समय बना था जब बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह कागज पर चलती थी। विकल्प B गलत है, क्योंकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम साक्ष्य का सामान्य कानून है और यहां उसकी जगह नहीं ली जा रही। विकल्प C गलत है, क्योंकि बैंकिंग विनियमन अधिनियम बैंकिंग कंपनियों के विनियमन से जुड़ा है, न कि उनके अभिलेखों की ग्राह्यता से। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि परक्राम्य लिखत अधिनियम चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र से संबंधित है। दोनों वर्ष, यानी पुराना 1891 और नया 2026, जोड़कर याद रखें। परीक्षा में प्रायः यही पूछा जाता है कि नए अधिनियम ने किस पुराने कानून का स्थान लिया, इसलिए नाम के साथ दोनों वर्ष भी ठीक-ठीक स्मरण रखने चाहिए।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 किस तिथि से लागू हो रहा है?
- A.पहली अप्रैल 2026
- B.पहली अक्टूबर 2026
- C.पहली जनवरी 2027
- D.पंद्रह अगस्त 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पहली अक्टूबर 2026
व्याख्या
सही उत्तर है पहली अक्टूबर 2026। सरकारी जानकारी में स्पष्ट कहा गया है कि अधिनियम इसी तिथि से लागू होगा और उसी दिन से यह पुराने कानून का स्थान ले लेगा। विकल्प A वित्तीय वर्ष की पहली तारीख है, जो लागू होने से जुड़े हर प्रश्न में सामान्य भ्रामक विकल्प के रूप में रखी जाती है, इसलिए यहां गलत है। विकल्प C तिथि को अगले कैलेंडर वर्ष में खिसका देता है और गलत है। विकल्प D एक राष्ट्रीय तिथि है, जिसका इस कानून से कोई संबंध नहीं। किसी नए कानून के बारे में लागू होने की तिथि सबसे अधिक पूछे जाने वाले विवरणों में है, इसलिए तिथि के साथ यह भी याद रखें कि उसी दिन से यह ढांचा विधिक कार्यवाही, मध्यस्थता और जांच पर लागू होगा।
नए अधिनियम के अनुसार बैंक अधिकारी को गवाह के रूप में पेश होने या बैंकर्स बुक देने के लिए कब कहा जा सकता है?
- A.जब भी मुकदमे का कोई पक्षकार इसकी मांग करे
- B.केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो
- C.केवल रिज़र्व बैंक की पूर्व अनुमति से
- D.केवल तभी जब बैंक स्वयं कार्यवाही में पक्षकार हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो
व्याख्या
सही उत्तर है केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो। अधिनियम बैंकर्स बुक की विषय-वस्तु को मूल पुस्तक पेश किए बिना प्रमाणित प्रति से सिद्ध करने की अनुमति देता है, इसलिए अधिकारी को सामान्यतः पेश होने के लिए बाध्य नहीं किया जाता, विशेषकर तब जब बैंक पक्षकार न हो। अधिनियम ने विशेष कारण भी गिनाए हैं, यानी प्रविष्टि की सटीकता या प्रामाणिकता पर संदेह, अभिलेख रखने की नियमितता में बाधा, या बैंक द्वारा अदालत के पिछले आदेश का पालन न करना। विकल्प A इस संरक्षण को ही समाप्त कर देता है। विकल्प C ऐसी अनुमति जोड़ता है जिसकी अधिनियम में कोई आवश्यकता नहीं। विकल्प D एक परिस्थिति बताता है, विधिक कसौटी नहीं, इसलिए वह भी गलत है।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 में किस संहिता के अधीन होने वाली जांच और पूछताछ का स्पष्ट उल्लेख है?
- A.भारतीय न्याय संहिता
- B.भारतीय साक्ष्य अधिनियम
- C.भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
- D.सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
व्याख्या
सही उत्तर है भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023। अधिनियम कहता है कि इसका उपयोग किसी भी विधिक कार्यवाही, मध्यस्थता तथा इसी संहिता या प्रचलित किसी अन्य विधि के अधीन होने वाली जांच या पूछताछ में होगा, जहां साक्ष्य लिया जाता है या लिया जा सकता है। विकल्प A उस आपराधिक संहिता का नाम है जो अपराधों और दंड से जुड़ी है, और यहां उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प B नई आपराधिक संहिताओं में साक्ष्य से जुड़ा कानून है, जो सुनने में निकट लगता है पर इस प्रावधान में उसका नाम नहीं आता। विकल्प D सिविल प्रक्रिया से जुड़ी संहिता है, जिसे अधिनियम ने अलग से नहीं गिनाया। तीनों नई आपराधिक संहिताओं को अलग-अलग याद रखें। परीक्षा में इन संहिताओं के नाम आपस में बदलकर विकल्प बनाए जाते हैं, इसलिए प्रत्येक संहिता का विषय अलग-अलग जोड़कर याद रखना लाभदायक रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 किस कानून की जगह ले रहा है?
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891 की। वह औपनिवेशिक दौर का कानून तब बना था जब बैंकिंग पूरी तरह कागज आधारित थी, और नया अधिनियम पहली अक्टूबर 2026 से प्रौद्योगिकी-निरपेक्ष ढांचे के साथ लागू होगा।
नया अधिनियम कब से लागू होगा?
पहली अक्टूबर 2026 से। उस तिथि से बैंक के भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल अभिलेख नए अधिनियम में तय नियमों के अनुसार साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाएंगे।
क्या बैंक अधिकारी को अदालत में पेश होने के लिए बाध्य किया जा सकता है?
सामान्यतः नहीं। विषय-वस्तु प्रमाणित प्रति से सिद्ध की जा सकती है, और अधिकारी को केवल तब बुलाया जा सकता है जब अदालत लिखित आदेश में विशेष कारण दर्ज करे, जैसे किसी प्रविष्टि की प्रामाणिकता पर संदेह।
क्या यह अधिनियम केवल बैंकों पर लागू होता है?
यह बैंकिंग कंपनियों तथा डाकघर बचत बैंक या मनीऑर्डर कार्यालय पर लागू होता है, और सरकार अधिसूचना जारी कर इसे वित्तीय क्षेत्र की किसी अन्य संस्था या संस्थाओं के वर्ग तक भी बढ़ा सकती है।
स्रोत
- Bankers Books Evidence Act, 2026 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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