बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 किस पुराने कानून की जगह ले रहा है?
- A.बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891
- B.भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
- C.बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949
- D.परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
सही उत्तर
A. बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891
व्याख्या
सही उत्तर है बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891। नया अधिनियम उसी नाम के साथ नए वर्ष में आया है और उस औपनिवेशिक कानून का स्थान लेता है, जो उस समय बना था जब बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह कागज पर चलती थी। विकल्प B गलत है, क्योंकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम साक्ष्य का सामान्य कानून है और यहां उसकी जगह नहीं ली जा रही। विकल्प C गलत है, क्योंकि बैंकिंग विनियमन अधिनियम बैंकिंग कंपनियों के विनियमन से जुड़ा है, न कि उनके अभिलेखों की ग्राह्यता से। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि परक्राम्य लिखत अधिनियम चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र से संबंधित है। दोनों वर्ष, यानी पुराना 1891 और नया 2026, जोड़कर याद रखें। परीक्षा में प्रायः यही पूछा जाता है कि नए अधिनियम ने किस पुराने कानून का स्थान लिया, इसलिए नाम के साथ दोनों वर्ष भी ठीक-ठीक स्मरण रखने चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम 2026, 1891 का कानून हटा
अभ्यास प्रश्न
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 किस तिथि से लागू हो रहा है?
- A.पहली अप्रैल 2026
- B.पहली अक्टूबर 2026
- C.पहली जनवरी 2027
- D.पंद्रह अगस्त 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पहली अक्टूबर 2026
व्याख्या
सही उत्तर है पहली अक्टूबर 2026। सरकारी जानकारी में स्पष्ट कहा गया है कि अधिनियम इसी तिथि से लागू होगा और उसी दिन से यह पुराने कानून का स्थान ले लेगा। विकल्प A वित्तीय वर्ष की पहली तारीख है, जो लागू होने से जुड़े हर प्रश्न में सामान्य भ्रामक विकल्प के रूप में रखी जाती है, इसलिए यहां गलत है। विकल्प C तिथि को अगले कैलेंडर वर्ष में खिसका देता है और गलत है। विकल्प D एक राष्ट्रीय तिथि है, जिसका इस कानून से कोई संबंध नहीं। किसी नए कानून के बारे में लागू होने की तिथि सबसे अधिक पूछे जाने वाले विवरणों में है, इसलिए तिथि के साथ यह भी याद रखें कि उसी दिन से यह ढांचा विधिक कार्यवाही, मध्यस्थता और जांच पर लागू होगा।
नए अधिनियम के अनुसार बैंक अधिकारी को गवाह के रूप में पेश होने या बैंकर्स बुक देने के लिए कब कहा जा सकता है?
- A.जब भी मुकदमे का कोई पक्षकार इसकी मांग करे
- B.केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो
- C.केवल रिज़र्व बैंक की पूर्व अनुमति से
- D.केवल तभी जब बैंक स्वयं कार्यवाही में पक्षकार हो
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो
व्याख्या
सही उत्तर है केवल अदालत के लिखित आदेश पर, जिसमें विशेष कारण दर्ज हो। अधिनियम बैंकर्स बुक की विषय-वस्तु को मूल पुस्तक पेश किए बिना प्रमाणित प्रति से सिद्ध करने की अनुमति देता है, इसलिए अधिकारी को सामान्यतः पेश होने के लिए बाध्य नहीं किया जाता, विशेषकर तब जब बैंक पक्षकार न हो। अधिनियम ने विशेष कारण भी गिनाए हैं, यानी प्रविष्टि की सटीकता या प्रामाणिकता पर संदेह, अभिलेख रखने की नियमितता में बाधा, या बैंक द्वारा अदालत के पिछले आदेश का पालन न करना। विकल्प A इस संरक्षण को ही समाप्त कर देता है। विकल्प C ऐसी अनुमति जोड़ता है जिसकी अधिनियम में कोई आवश्यकता नहीं। विकल्प D एक परिस्थिति बताता है, विधिक कसौटी नहीं, इसलिए वह भी गलत है।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 2026 में किस संहिता के अधीन होने वाली जांच और पूछताछ का स्पष्ट उल्लेख है?
- A.भारतीय न्याय संहिता
- B.भारतीय साक्ष्य अधिनियम
- C.भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
- D.सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
व्याख्या
सही उत्तर है भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023। अधिनियम कहता है कि इसका उपयोग किसी भी विधिक कार्यवाही, मध्यस्थता तथा इसी संहिता या प्रचलित किसी अन्य विधि के अधीन होने वाली जांच या पूछताछ में होगा, जहां साक्ष्य लिया जाता है या लिया जा सकता है। विकल्प A उस आपराधिक संहिता का नाम है जो अपराधों और दंड से जुड़ी है, और यहां उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प B नई आपराधिक संहिताओं में साक्ष्य से जुड़ा कानून है, जो सुनने में निकट लगता है पर इस प्रावधान में उसका नाम नहीं आता। विकल्प D सिविल प्रक्रिया से जुड़ी संहिता है, जिसे अधिनियम ने अलग से नहीं गिनाया। तीनों नई आपराधिक संहिताओं को अलग-अलग याद रखें। परीक्षा में इन संहिताओं के नाम आपस में बदलकर विकल्प बनाए जाते हैं, इसलिए प्रत्येक संहिता का विषय अलग-अलग जोड़कर याद रखना लाभदायक रहता है।
हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को सरकारी बैंकों के लिए अवकाश किस वर्ष घोषित किया गया?
- A.2012
- B.2015
- C.2019
- D.2020
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2015
व्याख्या
सही उत्तर 2015 है। 21 सितंबर 2026 की अपील में वित्त मंत्रालय ने याद दिलाया कि बैंक कर्मचारियों के हित में सरकार ने 2015 में हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को सरकारी बैंकों के लिए अवकाश घोषित किया था। मंत्रालय के अनुसार बाकी शनिवार कार्य दिवस हैं और बहुत से नागरिकों के लिए बैंकिंग सेवाओं तक आसानी से पहुंचने का अहम मौका हैं।
बाकी वर्ष भ्रम के लिए हैं। यह तथ्य इसलिए अहम है क्योंकि यूनियनों की लंबित मांग, पांच दिवसीय बैंकिंग, हर शनिवार को अवकाश बना देगी। सरकार का तर्क है कि ग्राहक पहले ही महीने के दो शनिवार खो देते हैं, और 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल, सप्ताहांत और 30 सितंबर की छमाही क्लोज़िंग के साथ मिलकर, वित्त वर्ष के एक संवेदनशील समय पर बैंकिंग को प्रभावी रूप से पांच दिन बंद कर देगी।
सितंबर-अक्टूबर 2026 में बैंक यूनियनों ने मुख्य रूप से किस लंबित मांग को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है?
- A.कार्य-निष्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना की वापसी
- B.पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करना
- C.पुरानी पेंशन योजना की बहाली
- D.क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करना
व्याख्या
सही उत्तर पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करना है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और सरकारी बैंकों के कुछ अन्य संगठनों ने, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के समर्थन के साथ, दो मुख्य मांगें रखी थीं: बैंकों में पांच दिन का कार्य सप्ताह और कार्य-निष्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना की वापसी। वित्त मंत्रालय के अनुसार अब हड़ताल केवल पांच दिन के सप्ताह की मांग पर है, जिस पर अभी विचार चल रहा है।
पीएलआई योजना की वापसी जाल है। यह मूल दो मांगों में से एक थी, लेकिन सरकार ने योजना को स्थगित रखकर इसे पूरा कर दिया, इसलिए यह अब लंबित नहीं है। पुरानी पेंशन योजना और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलय इन हड़तालों का हिस्सा नहीं हैं। 11 सितंबर 2026 को एक दिन की हड़ताल हो चुकी है; 28 से 30 सितंबर को तीन दिन की और 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रस्तावित है।