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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 55

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 55) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 19 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: मौलिक अधिकार, संसद में वित्तीय प्रक्रिया, राज्य के नीति निदेशक तत्व और अन्य। इनमें से 13 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2017, GS Paper Iआसान

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.अधिकार नागरिकों के विरुद्ध राज्य के दावे हैं।
  2. B.अधिकार वे विशेषाधिकार हैं जो किसी राज्य के संविधान में शामिल किए गए हैं।
  3. C.अधिकार राज्य के विरुद्ध नागरिकों के दावे हैं।
  4. D.अधिकार बहुतों के विरुद्ध कुछ नागरिकों के विशेषाधिकार हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अधिकार राज्य के विरुद्ध नागरिकों के दावे हैं।

व्याख्या

सही उत्तर है C, अधिकार राज्य के विरुद्ध नागरिकों के दावे हैं। अधिकार वह दावा है जो व्यक्ति करता है और जिसे राज्य मान्यता देता है तथा जिसका सम्मान करने के लिए वह बाध्य है।

राजनीतिक सिद्धांत में अधिकार स्वतंत्रता का वह क्षेत्र तय करते हैं जिसमें राज्य दखल नहीं दे सकता, और वे दशाएँ भी जिन्हें राज्य को सुनिश्चित करना होता है। भारतीय संविधान में यह विचार भाग III में सबसे स्पष्ट है: अनुच्छेद 12 उस "राज्य" को परिभाषित करता है जिसके विरुद्ध मौलिक अधिकार मिलते हैं, अनुच्छेद 13 उन्हें छीनने वाले कानून को शून्य घोषित करता है, और अनुच्छेद 32, जिसे डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने संविधान का "हृदय और आत्मा" कहा, राज्य द्वारा उल्लंघन होने पर नागरिक को सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।

A गलत है: नागरिकों पर राज्य के दावे कर्तव्य या दायित्व हैं, अधिकार नहीं।

B गलत है: अधिकार कृपा से दिए गए विशेषाधिकार नहीं हैं; कई अधिकार संविधान में लिखे अधिकारों से आगे भी होते हैं।

D गलत है: बहुतों के विरुद्ध कुछ लोगों के विशेषाधिकार अधिकारों के उलटे हैं, क्योंकि अधिकार सबके लिए समान होते हैं।

परीक्षा टिप: अधिकार = राज्य के विरुद्ध व्यक्ति का दावा; कर्तव्य = व्यक्ति पर राज्य का दावा।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

लोक सभा से भेजे गए धन विधेयक को राज्य सभा को कितने दिनों के भीतर लौटाना होता है?

  1. A.7 दिन
  2. B.14 दिन
  3. C.21 दिन
  4. D.30 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 14 दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, 14 दिन है। अनुच्छेद 109 के अनुसार लोक सभा द्वारा पारित धन विधेयक राज्य सभा के पास जाता है, जिसे उसे चौदह दिन के भीतर सिफारिशों के साथ या उनके बिना लौटाना होता है; यदि वह उस अवधि में न लौटाया जाए तो विधेयक उसी रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है जिस रूप में लोक सभा ने उसे पारित किया था। लोक सभा राज्य सभा की किसी भी सिफारिश को मानने या छोड़ने के लिए स्वतंत्र है। A गलत है, क्योंकि किसी विधेयक का कोई वित्तीय चरण सात दिन का नहीं है। C गलत है, क्योंकि इक्कीस दिन की अवधि धन विधेयक से संबंधित नहीं है। D गलत है, क्योंकि तीस दिन भी धन विधेयक की संवैधानिक अवधि नहीं है; अभ्यर्थी कभी-कभी इसे उन छह मासों से मिला देते हैं, जिन तक राज्य सभा साधारण विधेयक रोक सकती है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iआसान

भारत के संविधान का कौन-सा भाग कल्याणकारी राज्य के आदर्श की घोषणा करता है?

  1. A.राज्य के नीति निदेशक तत्त्व
  2. B.मौलिक अधिकार
  3. C.प्रस्तावना
  4. D.सातवीं अनुसूची
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राज्य के नीति निदेशक तत्त्व

व्याख्या

सही उत्तर है A, राज्य के नीति निदेशक तत्त्व। भाग IV के नीति निदेशक तत्त्व वे सामाजिक और आर्थिक लक्ष्य तय करते हैं जो भारत को कल्याणकारी राज्य बनाते हैं।

अनुच्छेद 36 से 51 राज्य को निर्देश देते हैं कि वह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय पर आधारित व्यवस्था बनाए (अनुच्छेद 38), आजीविका के पर्याप्त साधन, संसाधनों का न्यायपूर्ण बँटवारा और समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करे (अनुच्छेद 39), काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार दे (अनुच्छेद 41) तथा काम की मानवोचित दशाएँ और प्रसूति सहायता दे (अनुच्छेद 42)। ये न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते (अनुच्छेद 37), पर देश के शासन में मूलभूत हैं। डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने इन्हें "अनोखी विशेषता" कहा था; ये आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं।

B गलत है: भाग III के मौलिक अधिकार राज्य पर सीमा लगाकर राजनीतिक लोकतंत्र स्थापित करते हैं।

C गलत है: प्रस्तावना न्याय, स्वतंत्रता और समानता के लक्ष्य सामान्य रूप में बताती है, कल्याणकारी राज्य का विस्तृत आदर्श निदेशक तत्त्वों में है।

D गलत है: सातवीं अनुसूची केवल संघ और राज्यों के बीच विषयों का बँटवारा करती है।

परीक्षा टिप: मौलिक अधिकार = राजनीतिक लोकतंत्र; नीति निदेशक तत्त्व (भाग IV, अनुच्छेद 36–51, आयरलैंड से) = सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र, कल्याणकारी राज्य।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग किस कानून के अंतर्गत गठित किया गया था?

  1. A.मानवाधिकार आयोग अधिनियम, 1991
  2. B.मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
  3. C.सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955
  4. D.जाँच आयोग अधिनियम, 1952
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993

व्याख्या

सही उत्तर B, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 है। यह कानून सितंबर 1993 में अध्यादेश के रूप में आया और 12 अक्टूबर 1993 को आयोग गठित हुआ, जिसके पहले अध्यक्ष भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र थे। विकल्प A गलत है क्योंकि सन 1991 का कोई मानवाधिकार आयोग अधिनियम नहीं है; वह वर्ष केवल पेरिस की उस कार्यशाला के लिए याद किया जाता है जिसने पेरिस सिद्धांत बनाए। विकल्प C गलत है क्योंकि सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 वस्तुतः अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम का बदला हुआ नाम है और अस्पृश्यता के आचरण को दंडित करता है, कोई आयोग नहीं बनाता। विकल्प D गलत है क्योंकि जाँच आयोग अधिनियम, 1952 के अंतर्गत सरकार किसी निश्चित लोक महत्व के विषय पर एक बार का जाँच आयोग नियुक्त करती है।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2020, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के संविधान के अनुसार, मतदान के लिए पात्र व्यक्ति को किसी राज्य में छह माह के लिए मंत्री बनाया जा सकता है, भले ही वह उस राज्य के विधानमंडल का सदस्य न हो। 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार, किसी आपराधिक अपराध में दोषसिद्ध और पाँच वर्ष के कारावास से दंडित व्यक्ति जेल से छूटने के बाद भी चुनाव लड़ने से स्थायी रूप से अयोग्य हो जाता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. न तो 1 और न ही 2

व्याख्या

सही उत्तर है D, न तो 1 और न ही 2। मंत्री बनने के लिए केवल मतदान की पात्रता पर्याप्त नहीं है, और दोषसिद्धि के बाद की अयोग्यता स्थायी नहीं होती।

कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 164(4) गैर-सदस्य को अधिकतम छह लगातार महीनों तक राज्य में मंत्री रहने देता है, पर उस व्यक्ति में विधानमंडल का सदस्य बनने की योग्यता होनी चाहिए, जिसके लिए विधानसभा हेतु न्यूनतम आयु 25 और विधान परिषद हेतु 30 वर्ष है। मतदाता के लिए केवल 18 वर्ष की आयु चाहिए, इसलिए मतदान की पात्रता मात्र से कोई मंत्री बनने योग्य नहीं हो जाता।

कथन 2 गलत है: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) दो वर्ष या अधिक के कारावास की सज़ा पाए व्यक्ति को दोषसिद्धि की तिथि से और रिहाई के बाद छह वर्ष तक अयोग्य करती है। यह अवधि पूरी होने पर रोक समाप्त हो जाती है; यह आजीवन नहीं है।

A गलत है: कथन 1 असत्य है।

B गलत है: कथन 2 असत्य है।

C गलत है: दोनों कथन असत्य हैं।

परीक्षा टिप: गैर-सदस्य मंत्री को छह माह में सदन का सदस्य बनना होता है (अनुच्छेद 75(5) और 164(4)); दो वर्ष या अधिक की सज़ा = सज़ा की अवधि और उसके बाद छह वर्ष तक अयोग्य।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता कौन करता है?

  1. A.भारत के राष्ट्रपति
  2. B.राज्यसभा के सभापति
  3. C.लोकसभा अध्यक्ष
  4. D.उपस्थित सबसे वरिष्ठ सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लोकसभा अध्यक्ष

व्याख्या

सही उत्तर C, लोकसभा अध्यक्ष है। अनुच्छेद 108 के अंतर्गत संयुक्त बैठक राष्ट्रपति बुलाते हैं, परंतु उसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं; उनकी अनुपस्थिति में लोकसभा उपाध्यक्ष और दोनों की अनुपस्थिति में राज्यसभा के उपसभापति पीठासीन होते हैं, और यह क्रम संसद की प्रक्रिया के नियमों में स्पष्ट रूप से दिया गया है। A, राष्ट्रपति, गलत है क्योंकि राष्ट्रपति संसद के किसी सदन या संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते और केवल अनुच्छेद 86 या 87 के अंतर्गत सदनों को संबोधित करते हैं। B, राज्यसभा के सभापति, जान-बूझकर रखा गया भ्रमकारी विकल्प है: उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हुए भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करते, यद्यपि राज्यसभा उस बैठक में सम्मिलित रहती है। D गलत है क्योंकि संविधान और प्रक्रिया नियम पीठासीन अधिकारियों का क्रम स्वयं नियत करते हैं और संयुक्त बैठक के लिए सदस्यों की वरिष्ठता पर कभी नहीं जाते। चूँकि लोकसभा बड़ा सदन है, संयुक्त बैठक में उसी का मत प्रभावी रहता है।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: NDA · NDA-I 2020, GATआसान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, निम्नलिखित में से किसे/किन्हें भारत की संसद का भाग बताया गया है?

1. लोक सभा

2. राज्य सभा

3. भारत का राष्ट्रपति

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 1 और 2
  3. C.केवल 2 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1, 2 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है D, 1, 2 और 3। अनुच्छेद 79 कहता है कि संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी।

ये दो सदन हैं राज्य सभा (राज्यों की परिषद) और लोक सभा (जनता का सदन)। राष्ट्रपति किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता और संसद में नहीं बैठता, फिर भी वह संसद का अभिन्न अंग है, क्योंकि दोनों सदनों से पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही कानून बनता है। राष्ट्रपति सदनों को आहूत और सत्रावसान करता है, लोक सभा को भंग करता है, सदनों को संबोधित करता है और सत्र न होने पर अध्यादेश जारी कर सकता है। यह व्यवस्था ब्रिटेन जैसी है, जहां क्राउन संसद का भाग है।

A गलत है: अकेली लोक सभा संसद नहीं है।

B गलत है: इसमें राष्ट्रपति छूट गया है, जिसका नाम अनुच्छेद 79 में स्पष्ट रूप से है।

C गलत है: इसमें सीधे निर्वाचित सदन, लोक सभा, छूट गई है।

परीक्षा टिप: संसद = राष्ट्रपति + राज्य सभा + लोक सभा (अनुच्छेद 79); संसद से जुड़े अनुच्छेद 79 से 122 तक हैं।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संसद में स्थगन प्रस्ताव किस सदन में रखा जा सकता है?

  1. A.केवल लोकसभा में
  2. B.केवल राज्यसभा में
  3. C.किसी भी सदन में
  4. D.दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल लोकसभा में

व्याख्या

सही उत्तर A, केवल लोकसभा में है। स्थगन प्रस्ताव केवल लोकसभा में स्वीकार होता है, क्योंकि इसमें सरकार के विरुद्ध निंदा का तत्व होता है और अनुच्छेद 75 की सामूहिक उत्तरदायित्व की व्यवस्था के कारण मंत्रिपरिषद की निंदा केवल लोकसभा कर सकती है। यह सदन का ध्यान अत्यावश्यक लोक महत्व के किसी निश्चित विषय की ओर खींचता है, इसके लिए पचास सदस्यों का समर्थन चाहिए, और स्वीकार हो जाने पर इस पर चर्चा कम से कम दो घंटे तीस मिनट चलनी चाहिए। B गलत है क्योंकि राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव का प्रावधान ही नहीं है; वहां सदस्य ऐसा विषय विशेष उल्लेख या ध्यानाकर्षण सूचना से उठाता है। C इसी कारण गलत है। D गलत है क्योंकि संयुक्त बैठक अनुच्छेद 108 के अंतर्गत केवल किसी विधेयक पर गतिरोध दूर करने के लिए बुलाई जाती है और वहां इस प्रकार का प्रस्ताव नहीं लिया जाता।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2025, GKआसान

चुनाव की 'फ़र्स्ट पास्ट द पोस्ट प्रणाली' के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता सही है?

  1. A.जीतने वाले उम्मीदवार को मतों का बहुमत न भी मिले
  2. B.एक निर्वाचन क्षेत्र से एक से अधिक प्रतिनिधि चुने जा सकते हैं
  3. C.मतदाता उम्मीदवार को नहीं, दल को मत देते हैं
  4. D.हर दल को विधायिका में उतनी सीटें मिलती हैं जितना उसका मत प्रतिशत है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जीतने वाले उम्मीदवार को मतों का बहुमत न भी मिले

व्याख्या

सही उत्तर है A, जीतने वाले उम्मीदवार को मतों का बहुमत न भी मिले। फ़र्स्ट पास्ट द पोस्ट में सबसे अधिक मत पाने वाला उम्मीदवार जीतता है, भले ही उसे कुल मतों के आधे से बहुत कम मिले हों। UPSC की आधिकारिक उत्तर कुंजी भी यही है।

भारत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव में यही प्रणाली अपनाता है, जिसे सरल बहुमत प्रणाली भी कहते हैं। देश निर्वाचन क्षेत्रों में बँटा है, हर क्षेत्र से एक सदस्य चुना जाता है, और मतदाता दल नहीं बल्कि उम्मीदवार चुनते हैं। कई उम्मीदवारों वाले मुकाबले में 35% मत पाने वाला भी जीत सकता है, यदि कोई दूसरा उससे आगे न हो। इसलिए किसी दल की सीटों का हिस्सा उसके मतों के हिस्से से काफ़ी अधिक या कम हो सकता है।

B गलत है: इस प्रणाली में एकल-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र होते हैं, जहाँ से केवल एक प्रतिनिधि चुना जाता है।

C गलत है: दल की सूची को मत देना आनुपातिक प्रतिनिधित्व की विशेषता है, इस प्रणाली की नहीं।

D गलत है: मतों के अनुपात में सीटें देना आनुपातिक प्रतिनिधित्व का ही उद्देश्य है।

परीक्षा टिप: लोकसभा और विधानसभाओं में FPTP; राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनाव में एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 7 Oct 2021, Shift 1आसान

किस आयोग ने सरकारी सेवाओं के सभी स्तरों पर ओबीसी उम्मीदवारों के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की थी?

  1. A.सरकारिया आयोग
  2. B.मंडल आयोग
  3. C.बलवंत आयोग
  4. D.कोठारी आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मंडल आयोग

व्याख्या

सही उत्तर है B, मंडल आयोग। बी. पी. मंडल की अध्यक्षता वाले द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने केंद्र सरकार की सेवाओं और सार्वजनिक उपक्रमों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी। यह आयोग 1979 में बना और 1980 में रिपोर्ट दी, जिसमें 3,743 जातियों को पिछड़ा बताया गया और जनसंख्या में ओबीसी का हिस्सा लगभग 52 प्रतिशत आँका गया। कोटा 27 प्रतिशत रखा गया ताकि कुल आरक्षण न्यायालय द्वारा बताई 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर रहे। यह सिफारिश 1990 में लागू हुई और उच्चतम न्यायालय ने 1992 के इंद्रा साहनी मामले में इसे वैध ठहराया। A गलत है क्योंकि 1983 के सरकारिया आयोग ने केंद्र-राज्य संबंधों की जाँच की थी। C गलत है क्योंकि 1957 की बलवंत राय मेहता समिति ने त्रिस्तरीय पंचायती राज की सिफारिश की थी। D गलत है क्योंकि 1964-66 का कोठारी आयोग शिक्षा से जुड़ा था। परीक्षा टिप: मंडल आयोग 1979, रिपोर्ट 1980, 27 प्रतिशत ओबीसी कोटा, इंद्रा साहनी 1992।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · CSE Prelims 2018, GS Paper Iमध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. भारत की संसद किसी विशेष कानून को भारत के संविधान की नौवीं अनुसूची में रख सकती है।

2. नौवीं अनुसूची में रखे गए कानून की वैधता की जाँच कोई भी न्यायालय नहीं कर सकता और उस पर कोई निर्णय नहीं दिया जा सकता।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.1 और 2 दोनों
  4. D.न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केवल 1

व्याख्या

सही उत्तर है A, केवल 1। संसद संविधान संशोधन द्वारा किसी कानून को नौवीं अनुसूची में जोड़ सकती है, पर ऐसा कानून न्यायिक समीक्षा से बाहर नहीं है।

नौवीं अनुसूची और अनुच्छेद 31B को 1951 के पहले संशोधन अधिनियम से जोड़ा गया था, ताकि भूमि सुधार कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती से बचाया जा सके। इसमें कानून केवल संविधान संशोधन द्वारा जोड़े जाते हैं, जो संसद अनुच्छेद 368 के तहत करती है। आई. आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) में सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि केशवानंद भारती निर्णय की तिथि, 24 अप्रैल 1973, के बाद नौवीं अनुसूची में रखे गए कानूनों की जाँच हो सकती है और मूल ढाँचे को क्षति पहुँचाने पर उन्हें रद्द किया जा सकता है।

B गलत है: कोएल्हो निर्णय के बाद कथन 2 गलत है।

C गलत है: केवल कथन 1 सही है।

D गलत है: कथन 1 सही है, क्योंकि संसद कानूनों को अनुसूची में रखती है।

परीक्षा टिप: नौवीं अनुसूची = पहला संशोधन 1951, अनुच्छेद 31B; कोएल्हो 2007 से 24 अप्रैल 1973 के बाद की प्रविष्टियाँ मूल ढाँचे की कसौटी पर।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संसद की प्रत्येक विभाग संबंधित स्थायी समिति में कितने सदस्य होते हैं?

  1. A.22 सदस्य
  2. B.25 सदस्य
  3. C.31 सदस्य
  4. D.45 सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 31 सदस्य

व्याख्या

सही उत्तर C, 31 सदस्य है। प्रत्येक विभाग संबंधित स्थायी समिति में इकतीस सदस्य होते हैं, जिनमें इक्कीस को अध्यक्ष लोकसभा से और दस को सभापति राज्यसभा से नामनिर्दिष्ट करता है। यह प्रणाली 1993 में सत्रह ऐसी समितियों से आरंभ हुई और 2004 में इसका पुनर्गठन हुआ, जिसके बाद चौबीस समितियां संपूर्ण केंद्र सरकार को कवर करती हैं। कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता और कार्यकाल एक वर्ष का होता है। ये समितियां अपने मंत्रालयों की अनुदान मांगों, उन्हें निर्दिष्ट विधेयकों, वार्षिक प्रतिवेदनों तथा दीर्घकालिक नीति दस्तावेजों की जांच करती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि बाईस लोक लेखा समिति और लोक उपक्रम समिति की संख्या है। विकल्प B गलत है क्योंकि पच्चीस किसी संसदीय समिति की संख्या नहीं है और यह केवल भ्रम के लिए रखा गया है। विकल्प D गलत है क्योंकि पैंतालीस किसी स्थायी समिति का आकार नहीं है; तीस की संख्या, बीस और दस के विभाजन के साथ, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति की है।

Q13.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2026, GKआसान

निम्नलिखित में से किस रिट का शाब्दिक अर्थ 'आपके पास शरीर है' है?

  1. A.बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस)
  2. B.परमादेश (मैंडमस)
  3. C.प्रतिषेध (प्रोहिबिशन)
  4. D.उत्प्रेषण (सर्टिओरारी)
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस)

व्याख्या

सही उत्तर है A, बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस)। लैटिन शब्द हेबियस कॉर्पस का शाब्दिक अर्थ है 'आपके पास शरीर है', और यह रिट व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करती है।

अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकते हैं। बंदी प्रत्यक्षीकरण में अदालत किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने वाले अधिकारी या व्यक्ति को आदेश देती है कि बंदी को अदालत के सामने पेश करे, ताकि हिरासत की वैधता जाँची जा सके। हिरासत गैरकानूनी हो तो व्यक्ति को तुरंत रिहा किया जाता है। यह रिट सरकारी अधिकारियों के साथ निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी जारी हो सकती है।

B गलत है: परमादेश का अर्थ है 'हम आदेश देते हैं'; यह किसी लोक अधिकारी को अपना कानूनी कर्तव्य निभाने को कहता है।

C गलत है: प्रतिषेध किसी निचली अदालत को चल रहे मामले में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकता है।

D गलत है: उत्प्रेषण का अर्थ है 'प्रमाणित करना'; इससे निचली अदालत का पहले से दिया गया आदेश रद्द किया जाता है।

परीक्षा टिप: हेबियस कॉर्पस = 'शरीर प्रस्तुत करो', मैंडमस = 'हम आदेश देते हैं', क्वो वारंटो = 'किस अधिकार से'।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · UPSC Civil Services Exam (Prelims) 2010मध्यम

लोक अदालतों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.लोक अदालतों को केवल मुकदमा-पूर्व अवस्था के मामलों को निपटाने का क्षेत्राधिकार है, किसी न्यायालय में लंबित मामलों का नहीं
  2. B.लोक अदालतें केवल दीवानी प्रकृति के मामले देख सकती हैं, आपराधिक नहीं
  3. C.प्रत्येक लोक अदालत में केवल कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी होते हैं, कोई अन्य व्यक्ति नहीं
  4. D.ऊपर दिया गया कोई भी कथन सही नहीं है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. ऊपर दिया गया कोई भी कथन सही नहीं है

व्याख्या

सही उत्तर है D, ऊपर दिया गया कोई भी कथन सही नहीं है। तीनों विवरणों में कोई एक बात ग़लत है, इसलिए चौथा विकल्प ही बचता है। लोक अदालतें विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत गठित की जाती हैं ताकि विवाद आपसी समझौते से निपटाए जा सकें, और उनके निर्णय को दीवानी न्यायालय की डिक्री माना जाता है जिसके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती। A गलत है क्योंकि लोक अदालत न्यायालय में पहले से लंबित मामला और मुकदमा-पूर्व अवस्था का विवाद, दोनों उठा सकती है। B गलत है क्योंकि वह दीवानी विवाद के साथ-साथ शमनीय आपराधिक मामला भी निपटा सकती है; केवल अशमनीय अपराध इससे बाहर रखे गए हैं। C गलत है क्योंकि लोक अदालत में कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी के साथ अन्य व्यक्ति भी होते हैं, आमतौर पर एक समाजसेवी और विधि व्यवसाय से जुड़ा एक सदस्य। परीक्षा टिप: 1987 का अधिनियम और यह नियम याद रखें कि लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है, उस पर अपील नहीं।

Q15.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

भारत के संविधान की किस अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून दिया गया है?

  1. A.नौवीं अनुसूची
  2. B.दसवीं अनुसूची
  3. C.ग्यारहवीं अनुसूची
  4. D.बारहवीं अनुसूची
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दसवीं अनुसूची

व्याख्या

सही उत्तर B, दसवीं अनुसूची है। दसवीं अनुसूची संविधान (बावनवां संशोधन) अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ी गई थी और वही बताती है कि संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य दल-बदल पर किन आधारों पर अयोग्य होता है, विलय को कब छूट मिलती है, पीठासीन अधिकारियों को क्या संरक्षण है और प्रश्न का निर्णय कौन करता है।

विकल्प A, नौवीं अनुसूची पहले संशोधन, 1951 से जुड़ी और उसमें अधिकतर भूमि सुधार कानून रखे गए, जिन्हें मूल अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती से संरक्षण मिला, किंतु आई. आर. कोएल्हो मामले के बाद वह आधारभूत ढांचे की कसौटी के अधीन है। विकल्प C, ग्यारहवीं अनुसूची 73वें संशोधन, 1992 से आई और पंचायतों के उनतीस विषय देती है। विकल्प D, बारहवीं अनुसूची 74वें संशोधन, 1992 से आई और नगरपालिकाओं के अठारह विषय देती है। दल-बदल केवल दसवीं अनुसूची का विषय है।

Q16.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2017 Official Papeआसान

निम्नलिखित में से किसे दबाव समूह माना जा सकता है?

  1. A.लोकसभा के सदस्य
  2. B.पंचायत के सदस्य
  3. C.मंत्रिमंडल के सदस्य
  4. D.किसी श्रमिक संघ के सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. किसी श्रमिक संघ के सदस्य

व्याख्या

सही उत्तर है D, किसी श्रमिक संघ के सदस्य। दबाव समूह साझा हित वाले लोगों का संगठित समूह होता है, जो चुनाव लड़े बिना और स्वयं सत्ता चाहे बिना सरकारी नीति को प्रभावित करने की कोशिश करता है, इसलिए बेहतर मजदूरी की माँग करने वाला श्रमिक संघ इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। दबाव समूह याचिका, हड़ताल, पैरवी, प्रचार और जनअभियानों के जरिए काम करते हैं; भारत में फिक्की जैसे व्यापारिक संगठन, किसान संगठन, जातीय संगठन और छात्र संघ इसी तरह सक्रिय रहते हैं। A गलत है क्योंकि लोकसभा के सदस्य निर्वाचित प्रतिनिधि हैं जो कानून बनाने वाली संस्था के भीतर बैठते हैं। B गलत है क्योंकि पंचायत के सदस्य स्थानीय स्वशासन के निर्वाचित पदाधिकारी होते हैं। C गलत है क्योंकि मंत्रिमंडल के सदस्य वह कार्यपालिका बनाते हैं जो उन्हीं निर्णयों को लेती है जिन्हें दबाव समूह प्रभावित करना चाहता है। परीक्षा टिप: यह पंक्ति याद रखें कि राजनीतिक दल सत्ता चाहता है, जबकि दबाव समूह केवल प्रभाव चाहता है।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से किया जाता है?

  1. A.अनुच्छेद 238
  2. B.अनुच्छेद 239
  3. C.अनुच्छेद 240
  4. D.अनुच्छेद 241
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 239

व्याख्या

सही उत्तर B, अनुच्छेद 239 है। अनुच्छेद 239(1) उपबंध करता है कि प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति, जिस सीमा तक वह ठीक समझे, अपने द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से करेगा और उसे जो पदनाम दे वही लागू होगा। इसी कारण केंद्र शासित प्रदेश में उपराज्यपाल या प्रशासक होता है, अपना राज्यपाल नहीं। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 238, जो पूर्ववर्ती भाग ख राज्यों पर भाग छह के लागू होने से संबंधित था, 1956 के सातवें संशोधन से निरसित हो गया और अब प्रभावी नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 240 पूरी तरह भिन्न शक्ति है: वह राष्ट्रपति को अंडमान-निकोबार तथा लक्षद्वीप जैसे नामित प्रदेशों के लिए विनियम बनाने देता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 241 केंद्र शासित प्रदेशों के उच्च न्यायालय से संबंधित है और संसद को ऐसा न्यायालय गठित करने की शक्ति देता है, जैसा उसने 1966 में दिल्ली के लिए किया।

Q18.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2017, Paper Iआसान

केंद्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना किसकी सिफारिश पर की गई थी?

  1. A.प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग
  2. B.गोरवाला समिति
  3. C.कृपलानी समिति
  4. D.संथानम समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. संथानम समिति

व्याख्या

सही उत्तर है D, संथानम समिति। केंद्रीय सतर्कता आयोग 1964 में एक सरकारी संकल्प द्वारा बनाया गया, के. संथानम की अध्यक्षता वाली भ्रष्टाचार निवारण समिति की सलाह पर।

संथानम समिति ने 1962 से 1964 तक काम किया और केंद्र सरकार के कार्यालयों में सतर्कता की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र संस्था की सिफारिश की। CVC पहले कार्यकारी संस्था थी; इसे 1998 में अध्यादेश से और फिर केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 से वैधानिक दर्जा मिला। इसमें एक केंद्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता की समिति की सलाह पर नियुक्त करते हैं।

A गलत है: 1966 के प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ने लोकपाल और लोकायुक्त की सिफारिश की थी, CVC की नहीं।

B गलत है: 1951 की गोरवाला रिपोर्ट सामान्य लोक प्रशासन से संबंधित थी।

C गलत है: 1949 की कृपलानी समिति ने रेलवे के कामकाज की जाँच की थी।

परीक्षा टिप: संथानम समिति → CVC (1964) और CBI (1963) भी।

Q19.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · CAPF 2017, Paper Iआसान

भारतीय संविधान में नौवीं अनुसूची किसके द्वारा जोड़ी गई थी?

  1. A.चौदहवाँ संशोधन
  2. B.पहला संशोधन
  3. C.तिरानवेवाँ संशोधन
  4. D.निन्यानवेवाँ संशोधन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पहला संशोधन

व्याख्या

सही उत्तर है B, पहला संशोधन। संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951 ने अनुच्छेद 31B के साथ नौवीं अनुसूची जोड़ी।

अदालतें संपत्ति के अधिकार के उल्लंघन के आधार पर जमींदारी उन्मूलन और अन्य भूमि सुधार कानूनों को रद्द करने लगी थीं। इन्हें बचाने के लिए पहले संशोधन ने नौवीं अनुसूची बनाई: इसमें रखे गए कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती थी। शुरुआत में इसमें 13 कानून थे और अब 280 से भी अधिक हैं। आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि 24 अप्रैल 1973 के बाद जोड़े गए कानून मूल ढाँचे को क्षति पहुँचाएँ तो उनकी समीक्षा हो सकती है।

A गलत है: 1962 के चौदहवें संशोधन ने पुदुचेरी को संघ में शामिल किया और कुछ केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विधानमंडल संभव बनाए।

C गलत है: 2005 के तिरानवेवें संशोधन ने निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में आरक्षण की अनुमति दी।

D गलत है: 2014 के निन्यानवेवें संशोधन ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बनाया, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।

परीक्षा टिप: पहला संशोधन 1951 = नौवीं अनुसूची + अनुच्छेद 31B, भूमि सुधारों की रक्षा के लिए।

Q20.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2026, GKमध्यम

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, भारत के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. यह न्यायालय की अनुमति से मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी न्यायालयी कार्यवाहियों में हस्तक्षेप कर सकता है 2. यह मानवाधिकार के क्षेत्र में अनुसंधान कर सकता है 3. यह स्वयं की पहल पर मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच नहीं कर सकता नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :

  1. A.1, 2 और 3
  2. B.केवल 1 और 2
  3. C.केवल 2 और 3
  4. D.केवल 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल 1 और 2

व्याख्या

सही उत्तर है B, केवल 1 और 2। NHRC न्यायालय की अनुमति से मानवाधिकार मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है और अनुसंधान को बढ़ावा दे सकता है, पर कथन 3 गलत है क्योंकि यह स्वयं संज्ञान ले सकता है।

NHRC मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 1993 में बना एक सांविधिक निकाय है। अधिनियम की धारा 12 में इसके कार्य दिए गए हैं। यह किसी उल्लंघन की जाँच याचिका मिलने पर या स्वतः संज्ञान से, यानी अपनी पहल पर, कर सकता है; अक्सर समाचारों के आधार पर ऐसा करता है। यह न्यायालय की अनुमति से वहाँ लंबित किसी ऐसी कार्यवाही में हस्तक्षेप कर सकता है जिसमें मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप हो। यह जेलों का दौरा, संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की समीक्षा तथा मानवाधिकार में अनुसंधान भी कर सकता है।

A गलत है: इसमें कथन 3 शामिल है, जबकि आयोग स्वतः संज्ञान ले सकता है।

C गलत है: कथन 3 गलत है और सही कथन 1 छूट गया है।

D गलत है: अकेला कथन 3 ही गलत कथन है।

परीक्षा टिप: NHRC = सांविधिक निकाय (अधिनियम 1993), स्वतः संज्ञान ले सकता है, न्यायालय में हस्तक्षेप केवल न्यायालय की अनुमति से।

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