रणनीतिक विनिवेश में प्रक्रियागत निर्णय लेने तथा विचलन की अनुमति देने का अधिकार आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने किस निकाय को दिया, जिसने आईडीबीआई बैंक के सर्वोत्तम प्रस्ताव दौर की प्रक्रिया तय की?
- A.भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
- B.विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह
- C.भारतीय रिजर्व बैंक
- D.वित्तीय सेवाएं विभाग
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर विनिवेश पर सचिवों का कोर समूह है, जिसे सामान्यतः सीजीडी लिखा जाता है। वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण में बताया गया है कि जब सर्वोच्च वित्तीय बोली आरक्षित मूल्य से कम आ जाए, ऐसी स्थिति के लिए दीपम के पास कोई आंतरिक प्रक्रिया नहीं है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 16 अगस्त 2017 की बैठक में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया और तंत्र पर नोट को मंजूरी देते हुए सीजीडी को कठिनाइयां दूर करने, प्रक्रियागत विषयों पर नीतिगत निर्णय लेने और जहां सौदा पूरा करने के लिए आवश्यक हो वहां विचलन की अनुमति देने का अधिकार दिया था। इन्हीं अधिकारों से सीजीडी ने दूसरे दौर की प्रक्रिया तय की और मूल्यांकन पद्धति की समीक्षा की। विकल्प A गलत है क्योंकि बाजार नियामक की इस प्रक्रिया में ऐसी कोई प्रत्यायोजित भूमिका नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि केंद्रीय बैंक की भूमिका केवल 2019 के बाद आईडीबीआई को नियामकीय प्रयोजन से निजी बैंक मानने तक थी। विकल्प D गलत है क्योंकि स्पष्टीकरण में यह निर्णय सीजीडी का बताया गया है।
पूरा लेख पढ़ें: वित्त मंत्रालय ने आईडीबीआई बैंक पुनर्गठन पर स्पष्टीकरण दिया
अभ्यास प्रश्न
एलआईसी द्वारा बहुलांश हिस्सेदारी लेने के बाद आईडीबीआई बैंक किस वर्ष सरकारी स्वामित्व वाली से सरकारी नियंत्रण वाली बैंकिंग कंपनी बना?
- A.2015
- B.2017
- C.2019
- D.2021
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स्पष्टीकरण में कहा गया है कि आईडीबीआई उस वर्ष तक सरकार के स्वामित्व वाली बैंकिंग कंपनी था और एलआईसी द्वारा बहुलांश हिस्सेदारी लेने के बाद सरकार के नियंत्रण वाली कंपनी बन गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विवादित कर मांगों की क्षतिपूर्ति के बाद बोली से प्राप्त मूल्य में कितनी वृद्धि हुई?
- A.627 करोड़ रुपये
- B.1,450 करोड़ रुपये
- C.3,917 करोड़ रुपये
- D.5,280 करोड़ रुपये
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परिसंपत्ति मूल्यांकनकर्ता ने विवादित कर मांगों के लिए अतिरिक्त मूल्य जोड़ा और इन मांगों की क्षतिपूर्ति योग्य बोलीदाताओं की साझा मांग पर दी गई, जिसका उद्देश्य प्रस्ताव को ऊपर ले जाना था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार ग्रामीण बैंक के विवादों में सुलह कराने वाला अधिकारी कौन था?
- A.बैंकिंग लोकपाल, पटना
- B.सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना
- C.सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, बिहार
- D.औद्योगिक अधिकरण, पटना
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दोनों विवाद न्यायनिर्णयन से नहीं, बल्कि इसी अधिकारी के सुलह प्रयासों से सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझे। बैंकिंग लोकपाल बैंकों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतें देखता है और बैंक तथा उसके कर्मचारियों के विवाद में उसकी कोई भूमिका नहीं होती, इसलिए यह विकल्प गलत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्टूबर 2026 के दो औद्योगिक समझौते किस बैंक से जुड़े थे?
- A.बिहार ग्रामीण बैंक
- B.दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक
- C.बिहार राज्य सहकारी बैंक
- D.सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
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इसके प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच दो विवाद 22 और 23 अक्टूबर 2026 को सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय), पटना के सुलह प्रयासों से सुलझे, जो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के कार्यालय के अधीन हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बिहार ग्रामीण बैंक के दोनों समझौतों से कुल कितना वित्तीय लाभ अनुमानित है?
- A.10.52 करोड़ रुपये
- B.67.17 करोड़ रुपये
- C.77.69 करोड़ रुपये
- D.92.40 करोड़ रुपये
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10.52 करोड़ रुपये का विकल्प केवल दूसरे समझौते का लाभ है, जो 23 अक्टूबर 2026 को बिहार ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन के साथ करीब 2,500 कर्मचारियों के लिए हुआ, इसलिए यह पूरा नहीं बल्कि एक हिस्सा है।
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