तीन उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश बने शीर्ष अदालत के जज
राष्ट्रपति ने गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों सुनीता अग्रवाल, देवेंद्र कुमार उपाध्याय तथा अपारेश कुमार सिंह को शीर्ष अदालत में नियुक्त किया।

चर्चा में क्यों
05 अक्टूबर 2026 को विधि एवं न्याय मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति ने गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया तथा अलग से दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अतिरिक्त न्यायाधीश की नियुक्ति भी की।
विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 05 अक्टूबर 2026 को बताया कि राष्ट्रपति ने उच्च न्यायालयों के तीन कार्यरत मुख्य न्यायाधीशों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति संविधान द्वारा राष्ट्रपति को दी गई शक्तियों के अंतर्गत की गई है।
किन न्यायाधीशों को पदोन्नति मिली
- न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, जो गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं। उनका मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद है।
- न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय, जो दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। उनका मूल उच्च न्यायालय भी इलाहाबाद ही है।
- न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह, जो तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। उनका मूल उच्च न्यायालय झारखंड है।
इस प्रकार तीन में से दो न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय से तथा एक झारखंड उच्च न्यायालय से आते हैं। अधिसूचना में नामित तीन न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल एकमात्र महिला न्यायाधीश हैं।
उसी दिन दूसरी नियुक्ति
उसी दिन जारी एक अलग अधिसूचना में मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति ने न्यायिक अधिकारी श्री गुरविंदर पाल सिंह को दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद की गई, जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति से पहले संविधान में अपेक्षित चरण है।
दोनों अधिसूचनाओं का अंतर
सर्वोच्च न्यायालय की नियुक्ति और उच्च न्यायालय की नियुक्ति संविधान के भिन्न प्रावधानों के अंतर्गत होती है, इसलिए दोनों विज्ञप्तियों में प्रक्रिया का वर्णन भी अलग शब्दों में है। उच्च न्यायालय से पदोन्नत न्यायाधीश किसी राज्य की सर्वोच्च अदालत का नेतृत्व छोड़कर देश की शीर्ष अदालत में बैठता है, जबकि अतिरिक्त न्यायाधीश की नियुक्ति एक नियत अवधि के लिए होती है और उसके बाद स्थायी नियुक्ति पर विचार किया जाता है। दोनों अधिसूचनाएं नई दिल्ली में विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा जारी की गईं।
परीक्षा के लिए मुख्य बात
परीक्षार्थी के लिए उपयोगी जोड़ी न्यायाधीश और उनके न्यायालय की है, अर्थात सुनीता अग्रवाल के साथ गुजरात, देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ दिल्ली और अपारेश कुमार सिंह के साथ तेलंगाना। तीनों पदोन्नति के समय मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे और इनमें पहले दो का मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद है। यह जानकारी नियुक्ति पर आधारित प्रश्नों में सीधे पूछी जाती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| घोषणा | विधि एवं न्याय मंत्रालय, 05 अक्टूबर 2026 |
|---|---|
| नियुक्ति प्राधिकारी | भारत के राष्ट्रपति, संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत |
| गुजरात उच्च न्यायालय से | न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल (मूल उच्च न्यायालय: इलाहाबाद) |
| दिल्ली उच्च न्यायालय से | न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय (मूल उच्च न्यायालय: इलाहाबाद) |
| तेलंगाना उच्च न्यायालय से | न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह (मूल उच्च न्यायालय: झारखंड) |
| दिल्ली उच्च न्यायालय में नियुक्ति | श्री गुरविंदर पाल सिंह, न्यायिक अधिकारी, अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में |
| आवश्यक परामर्श | दिल्ली उच्च न्यायालय की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि किस न्यायाधीश ने कौन-सा उच्च न्यायालय संभाला था, अर्थात सुनीता अग्रवाल - गुजरात, देवेंद्र कुमार उपाध्याय - दिल्ली और अपारेश कुमार सिंह - तेलंगाना; मूल उच्च न्यायालय पहले दो का इलाहाबाद तथा तीसरे का झारखंड है; नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं; उच्च न्यायालय की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श होता है और दिल्ली उच्च न्यायालय के लिए गुरविंदर पाल सिंह का नाम आया।
अभ्यास प्रश्न
अक्टूबर 2026 में सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त की गईं न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल इससे पहले किस उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश थीं?
- A.इलाहाबाद उच्च न्यायालय
- B.गुजरात उच्च न्यायालय
- C.दिल्ली उच्च न्यायालय
- D.तेलंगाना उच्च न्यायालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गुजरात उच्च न्यायालय
व्याख्या
सही उत्तर गुजरात उच्च न्यायालय है। विधि एवं न्याय मंत्रालय की अधिसूचना में न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल को गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बताया गया है, और उनका मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद दर्ज है। विकल्प A गलत है, क्योंकि इलाहाबाद उनका मूल उच्च न्यायालय है, अर्थात वह न्यायालय जिससे वे मूलतः जुड़ी थीं, वह न्यायालय नहीं जिसका नेतृत्व वे पदोन्नति के समय कर रही थीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि उसी अधिसूचना में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय बताए गए हैं, जिनका मूल उच्च न्यायालय भी इलाहाबाद है। विकल्प D गलत है, क्योंकि तेलंगाना उच्च न्यायालय का नेतृत्व न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह कर रहे थे, जिनका मूल उच्च न्यायालय झारखंड है। परीक्षार्थी को न्यायाधीश और उनके न्यायालय की जोड़ी तथा न्यायाधीश और मूल उच्च न्यायालय की जोड़ी, दोनों को अलग-अलग याद रखना चाहिए, क्योंकि विज्ञप्ति में दोनों सूचनाएं दी गई हैं और दोनों पर प्रश्न बनते हैं।
05 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश किसे नियुक्त किया?
- A.श्री गुरविंदर पाल सिंह
- B.श्री अपारेश कुमार सिंह
- C.श्री देवेंद्र कुमार उपाध्याय
- D.श्री तन्मय कुमार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. श्री गुरविंदर पाल सिंह
व्याख्या
सही उत्तर श्री गुरविंदर पाल सिंह है। विधि एवं न्याय मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद न्यायिक अधिकारी श्री गुरविंदर पाल सिंह को दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि अपारेश कुमार सिंह तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे और उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया, किसी उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे और वे भी सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह नाम उस दिन की किसी भी न्यायिक अधिसूचना में नहीं है। ध्यान दें कि उच्च न्यायालय की नियुक्ति में विज्ञप्ति मुख्य न्यायाधीश से परामर्श का उल्लेख करती है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय की अधिसूचना केवल संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों की बात कहती है।
05 अक्टूबर 2026 को घोषित सर्वोच्च न्यायालय की नियुक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में कौन कथन सही है?
- A.पदोन्नत तीनों न्यायाधीशों का मूल उच्च न्यायालय झारखंड था
- B.पदोन्नत तीन में से दो न्यायाधीशों का मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद था
- C.तीनों न्यायाधीश एक ही उच्च न्यायालय से पदोन्नत हुए
- D.पदोन्नत न्यायाधीशों में कोई भी कार्यरत मुख्य न्यायाधीश नहीं था
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पदोन्नत तीन में से दो न्यायाधीशों का मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद था
व्याख्या
सही उत्तर यह है कि पदोन्नत तीन में से दो न्यायाधीशों का मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद था। अधिसूचना में न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय का मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद दर्ज है, जबकि न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह झारखंड उच्च न्यायालय से जुड़े हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि झारखंड केवल अपारेश कुमार सिंह का मूल उच्च न्यायालय है। विकल्प C गलत है, क्योंकि तीनों नियुक्ति के समय तीन भिन्न उच्च न्यायालयों, अर्थात गुजरात, दिल्ली और तेलंगाना का नेतृत्व कर रहे थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि अधिसूचना तीनों को नियुक्ति के समय उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बताती है, और इसी कारण विज्ञप्ति का शीर्षक भी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति से संबंधित है। परीक्षा के लिए न्यायालय और मूल उच्च न्यायालय, दोनों याद रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अक्टूबर 2026 में किन तीन मुख्य न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया?
गुजरात उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अपारेश कुमार सिंह को। इसकी घोषणा विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 05 अक्टूबर 2026 को की।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के राष्ट्रपति, जो संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हैं। उच्च न्यायालय की नियुक्ति में राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद निर्णय लेते हैं, जैसा दिल्ली उच्च न्यायालय की अधिसूचना में दर्ज है।
दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश किसे नियुक्त किया गया?
न्यायिक अधिकारी श्री गुरविंदर पाल सिंह को 05 अक्टूबर 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया, और यह नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद हुई।
स्रोत
- https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2319337 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2319338 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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