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वन अधिकार अधिनियम की तीसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक श्रीनगर में

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 23 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में वन अधिकार अधिनियम के अमल की तीसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक सात राज्यों के साथ आयोजित की।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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वन अधिकार अधिनियम की तीसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक श्रीनगर में

चर्चा में क्यों

23 अक्टूबर 2026 को जनजातीय कार्य मंत्रालय ने वन अधिकार अधिनियम के अमल पर अपनी क्षेत्रीय समीक्षा श्रृंखला की तीसरी और अंतिम बैठक श्रीनगर में की, जिसमें सात राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश ने लंबित दावों तथा सामुदायिक वन अधिकारों की समीक्षा की।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के अमल पर तीसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में आयोजित की। महाराष्ट्र, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान तथा जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक की प्रगति, बाकी कठिनाइयों और प्राथमिकता वाले कदमों पर विचार किया। इस बैठक से क्षेत्रीय समीक्षा श्रृंखला पूरी हुई, जिसकी पहली बैठक 10 सितंबर 2026 को बेंगलुरु और दूसरी 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में हुई थी।

राष्ट्रीय तस्वीर

मुख्य संबोधन में मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अनंत प्रकाश पांडेय ने 31 अगस्त 2026 तक की स्थिति रखी। देश भर में लगभग 54 लाख दावे प्राप्त हुए थे। इनमें से 43.56 लाख दावे, यानी 80.64 प्रतिशत, निपटाए जा चुके थे, 25.42 लाख पट्टे लगभग 238 लाख एकड़ भूमि पर बांटे गए थे, 10.45 लाख दावे लंबित थे और 18.13 लाख खारिज हुए थे। उन्होंने कहा कि हर अस्वीकृति के साथ कारण सहित आदेश दावेदार को भेजा जाना चाहिए और अपील का कानूनी अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए, तथा राज्यों से लंबित दावों के लिए जिलेवार योजना बनाने और खारिज मामलों की फिर से समीक्षा करने को कहा।

सामुदायिक अधिकार और आवास अधिकार

सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों पर मंत्रालय ने टिकाऊ प्रबंधन की बात रखी और कहा कि सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजनाओं को वन विभाग की कार्य योजनाओं के साथ मिलाकर देखा जाए, जिसकी राह जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त पत्र से खुली है। मान्यता प्राप्त अधिकारों को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने से किसान आय सहायता तथा कृषि, मत्स्य पालन और आजीविका योजनाओं का लाभ मिल सकता है। राज्यों से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के आवास अधिकारों में तेजी लाने को कहा गया, क्योंकि ऐसे अधिकार अब तक देश के 75 पीवीटीजी में से केवल 11 के लिए मान्यता प्राप्त हैं।

मेजबान केंद्रशासित प्रदेश की स्थिति

जम्मू-कश्मीर ने बताया कि प्राप्त 48,287 दावों में से जिला स्तरीय समितियों ने 6,191 को मंजूरी दी और 6,178 पट्टे बांटे गए, जो लगभग 3,960 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं और अधिकांशतः सामुदायिक अधिकारों के तहत हैं। केंद्रशासित प्रदेश में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समिति और सभी 20 जिलों में जिला स्तरीय समितियां हैं, तथा एक परिपत्र के अनुसार पात्र अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी परिवारों को नियत प्रक्रिया पूरी होने से पहले बेदखल नहीं किया जाएगा। जनजातीय कार्य, जल शक्ति तथा वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री श्री जावेद अहमद राणा ने कहा कि यह अधिनियम वन पर निर्भर समुदायों की गरिमा, आजीविका और भविष्य की रक्षा करता है, और दावों के पारदर्शी व समयबद्ध निपटारे तथा ग्राम सभा की अधिक भागीदारी पर जोर दिया।

धनराशि और आगे की राह

निदेशक (एफआरए) श्रीमती समिधा सिंह ने उपलब्ध वित्तीय सहायता बताई - जनजातीय शोध संस्थानों को सहायता योजना के तहत मानचित्रण के लिए प्रति राज्य 25 लाख रुपये, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रत्येक सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना के लिए 15 लाख रुपये और तकनीकी सहायता के लिए 1 लाख रुपये। मंत्रालय ने राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेश से कहा कि वे प्रत्येक लंबित दावे के लिए देरी का चरण, कारण और जिम्मेदार प्राधिकारी बताते हुए जिलेवार कार्य योजना बनाएं, मिलान की गई मासिक प्रगति रिपोर्ट भेजें, डिजिटलीकरण तथा राजस्व एवं वन अभिलेखों में अधिकारों की प्रविष्टि पूरी करें, हर पीवीटीजी के लिए आवास अधिकार रोडमैप तैयार करें और मुख्य सचिवों की अध्यक्षता वाली समितियों से हर तिमाही प्रगति की समीक्षा कराएं।

संकेतक, 31 अगस्त 2026 तकआंकड़ा
देश भर में प्राप्त दावेलगभग 54 लाख
निपटाए गए दावे43.56 लाख (80.64 प्रतिशत)
बांटे गए पट्टे25.42 लाख, लगभग 238 लाख एकड़ पर
लंबित दावे10.45 लाख
खारिज दावे18.13 लाख
आवास अधिकार प्राप्त पीवीटीजी75 में से 11

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनवन अधिकार अधिनियम के अमल पर तीसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक
स्थानश्रीनगर, जम्मू-कश्मीर
आयोजकजनजातीय कार्य मंत्रालय
अधिनियमअनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006
सहभागीमहाराष्ट्र, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर
पिछली बैठकें10 सितंबर 2026 को बेंगलुरु और 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता
प्राप्त दावे (31 अगस्त 2026)लगभग 54 लाख
निपटाए गए दावे43.56 लाख, यानी 80.64 प्रतिशत
बांटे गए पट्टे25.42 लाख, लगभग 238 लाख एकड़ पर
लंबित और खारिज10.45 लाख लंबित, 18.13 लाख खारिज
पीवीटीजी आवास अधिकार75 में से 11 के लिए मान्यता प्राप्त
तिथि23 अक्टूबर 2026

परीक्षा की दृष्टि से

वन अधिकार अधिनियम का पूरा नाम और वर्ष (2006), तीनों मेजबान शहर क्रम से (बेंगलुरु, कोलकाता, श्रीनगर) तथा उनकी तिथियां, 31 अगस्त 2026 तक के राष्ट्रीय आंकड़े जिनमें 80.64 प्रतिशत निपटारा और 238 लाख एकड़ शामिल हैं, आवास अधिकार 75 में से केवल 11 पीवीटीजी के लिए, और 25 लाख, 15 लाख तथा 1 लाख रुपये की सहायता राशि याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

वन अधिकार अधिनियम के अमल पर तीसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक किस शहर में हुई?

  1. A.बेंगलुरु
  2. B.कोलकाता
  3. C.श्रीनगर
  4. D.नई दिल्ली
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. श्रीनगर

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने क्षेत्रीय समीक्षा श्रृंखला की तीसरी और अंतिम बैठक जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में की, जहां महाराष्ट्र, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गोवा, राजस्थान तथा मेजबान केंद्रशासित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने अधिनियम के तहत प्रगति की समीक्षा की।

Q2.राष्ट्रीयकठिन

31 अगस्त 2026 तक देश में प्राप्त वन अधिकार अधिनियम के दावों में से कितने प्रतिशत निपटाए जा चुके थे?

  1. A.80.64 प्रतिशत
  2. B.54 प्रतिशत
  3. C.43.56 प्रतिशत
  4. D.25.42 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 80.64 प्रतिशत

मंत्रालय ने बताया कि देश भर में लगभग 54 लाख दावे प्राप्त हुए थे और इनमें से 43.56 लाख दावे, यानी यही हिस्सा, उस तिथि तक निपटाए जा चुके थे।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

वन अधिकार अधिनियम के तहत आवास अधिकार अब तक देश के कितने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए मान्यता प्राप्त हैं?

  1. A.75 में से 75
  2. B.75 में से 11
  3. C.75 में से 20
  4. D.20 में से 11
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 75 में से 11

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने बताया कि देश के सभी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों में से केवल इतने के लिए आवास अधिकार मान्यता प्राप्त हैं, और इसी कारण राज्यों से मान्यता में तेजी लाने तथा प्रत्येक समूह के लिए आवास अधिकार रोडमैप बनाने को कहा गया।

Q4.राष्ट्रीयमध्यम

वन अधिकारों पर यह क्षेत्रीय समीक्षा श्रृंखला किस कानून के तहत आयोजित हुई?

  1. A.अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006
  2. B.भारतीय वन अधिनियम, 1927
  3. C.वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
  4. D.वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006

इस समीक्षा में इसी कानून के तहत प्राप्त और निपटाए गए दावे, बांटे गए पट्टे, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार तथा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के आवास अधिकार शामिल थे, और ये सभी व्यवस्थाएं इसी अधिनियम से निकलती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वन अधिकार अधिनियम पर तीसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक कहां हुई?

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में, 23 अक्टूबर 2026 को। इससे यह श्रृंखला पूरी हुई, जिसकी पहली बैठक 10 सितंबर 2026 को बेंगलुरु और दूसरी 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में हुई थी।

देश भर में वन अधिकार अधिनियम के कितने दावे निपटाए गए?

31 अगस्त 2026 तक प्राप्त लगभग 54 लाख दावों में से 43.56 लाख निपटाए गए, जो 80.64 प्रतिशत बैठता है, जबकि 10.45 लाख लंबित और 18.13 लाख खारिज थे।

कितने पीवीटीजी के लिए आवास अधिकार मान्यता प्राप्त हैं?

देश के 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों में से केवल 11 के लिए, इसी कारण राज्यों से आवास अधिकारों की मान्यता में तेजी लाने और हर समूह के लिए रोडमैप बनाने को कहा गया।

जम्मू-कश्मीर ने बैठक में क्या जानकारी दी?

प्राप्त 48,287 दावों में से जिला स्तरीय समितियों ने 6,191 को मंजूरी दी और लगभग 3,960 हेक्टेयर पर 6,178 पट्टे बांटे गए, जो अधिकांशतः सामुदायिक अधिकारों के तहत हैं, तथा सभी 20 जिलों में समितियां हैं।

स्रोत

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