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GK24

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय मिशन के चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन — GK24 title card

चर्चा में क्यों

23 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया, जो स्वामी चिन्मयानंद द्वारा स्थापित चिन्मय मिशन का वैश्विक आयोजन है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह आयोजन चिन्मय मिशन का है, जिसकी स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। प्रधानमंत्री ने इसे भावुक कर देने वाला अवसर बताया और कहा कि मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक ऋषि द्वारा स्थापित चिन्मय विचार है, और जो चिन्मय है वह स्वभाव से ही अमर और अमृतमय है।

तीन दशक पुरानी भेंट की याद

कार्यक्रम में होलोबोट के जरिए स्वामी चिन्मयानंद से संवाद का अनुभव कराया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे वे 1993 में वडोदरा में हुई अपनी भेंट के दिनों में पहुंच गए। उन्होंने बताया कि वे स्वामीजी को शिकागो आने का न्योता देने गए थे, जहां विश्व धर्म संसद की शताब्दी मनाई जा रही थी, यानी स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक संबोधन के सौ साल। स्वामीजी ने अमेरिका में इस आयोजन के लिए लोगों को जोड़ा और उसी वर्ष 3 अगस्त को सैन डिएगो में उनका देहावसान हो गया। 11 सितंबर को शिकागो के समागम में उनकी कमी महसूस की गई। प्रधानमंत्री के अनुसार उनकी अंतिम बातचीत का सार युवा शक्ति के निर्माण पर था।

मिशन का काम

  • स्वामी चिन्मयानंद ने उपनिषद, वेदांत और शास्त्रों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए गीता ज्ञान यज्ञ शुरू किया।
  • देश में 100 से अधिक चिन्मय शिक्षण संस्थान लाखों विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय मूल्य भी दे रहे हैं।
  • उनके रेडियो कार्यक्रम आर्ट ऑफ मैन मेकिंग ने अनगिनत लोगों का मार्गदर्शन किया, और उनके गुरु स्वामी शिवानंद ने उन्हें जाओ और सिंह की तरह गर्जना करो का आशीर्वाद दिया था।
  • उनकी जन्म शताब्दी पर 2015 में एक स्मारक सिक्का जारी हुआ था।
  • उन्होंने एकनाथ रानडे के संकल्प का साथ दिया और कन्याकुमारी के समुद्र में बने विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए सबसे पहला आर्थिक सहयोग दिया।

स्वयंसेवकों की यात्रा

प्रधानमंत्री ने चिन्मय अमृत महोत्सव के युवा स्वयंसेवकों की सराहना की, जिन्होंने 300 दिनों में 40,000 किलोमीटर की यात्रा कर एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि आज मिशन से जुड़े लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक राजदूत की तरह काम कर रहे हैं और भारतीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।

लक्ष्य 2047

उपनिषद की उस पंक्ति का उल्लेख करते हुए, जो हमें अमृत की संतान कहती है, प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के पचहत्तरवें वर्ष पर अमृत महोत्सव का विचार विकसित भारत की नींव रखने और मानवता के प्रति देश की पुरानी चिंता को फिर जगाने के लिए था। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के श्री राम मंदिर, उज्जैन के महाकाल महालोक, केदारनाथ और बद्रीनाथ के पुनर्निर्माण तथा चोरी गई प्राचीन मूर्तियों की वापसी को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी और चिन्मय मिशन की शताब्दी का कालखंड साथ पड़ेंगे, इसलिए दोनों यात्राएं साथ चलेंगी, और उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज को विभाजनकारी ताकतों के विरुद्ध एकजुट करने तथा हर नागरिक को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने का आह्वान किया।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनचिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन
उद्घाटनप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
स्थानभारत मंडपम, नई दिल्ली
तारीख23 अक्टूबर 2026
संस्थाचिन्मय मिशन, संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद
शुरू किया अभियानगीता ज्ञान यज्ञ, उपनिषद और वेदांत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए
शिक्षण संस्थान100 से अधिक चिन्मय शिक्षण संस्थान
स्मारक सिक्काजन्म शताब्दी पर 2015 में जारी
पहला आर्थिक सहयोगविवेकानंद रॉक मेमोरियल, कन्याकुमारी (एकनाथ रानडे का संकल्प)
स्वयंसेवकों का संपर्क300 दिनों में 40,000 किलोमीटर, एक लाख से अधिक युवा
उल्लेखित पड़ाव2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी और मिशन की शताब्दी का कालखंड साथ

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें आयोजन का नाम (चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन), स्थान (भारत मंडपम, नई दिल्ली), उद्घाटन करने वाले प्रधानमंत्री, चिन्मय मिशन के संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद, गीता ज्ञान यज्ञ, 2015 का स्मारक सिक्का, कन्याकुमारी के विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए पहला सहयोग और स्वयंसेवकों की 300 दिनों में 40,000 किलोमीटर की यात्रा।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन कहां हुआ?

  1. A.विज्ञान भवन, नई दिल्ली
  2. B.भारत मंडपम, नई दिल्ली
  3. C.यशोभूमि, द्वारका
  4. D.राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत मंडपम, नई दिल्ली

प्रधानमंत्री ने 23 अक्टूबर 2026 को यहीं चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया, जो स्वामी चिन्मयानंद द्वारा स्थापित चिन्मय मिशन का वैश्विक आयोजन है।

Q2.राष्ट्रीयआसान

जिस चिन्मय मिशन का वैश्विक सम्मेलन नई दिल्ली में हुआ, उसकी स्थापना किसने की थी?

  1. A.स्वामी विवेकानंद
  2. B.स्वामी शिवानंद
  3. C.एकनाथ रानडे
  4. D.स्वामी चिन्मयानंद
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. स्वामी चिन्मयानंद

उन्होंने उपनिषद, वेदांत और शास्त्रों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए गीता ज्ञान यज्ञ शुरू किया, और उनके रेडियो कार्यक्रम आर्ट ऑफ मैन मेकिंग ने बड़ी संख्या में लोगों का मार्गदर्शन किया।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

स्वामी चिन्मयानंद ने उपनिषद और वेदांत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए कौन सा अभियान शुरू किया?

  1. A.गीता ज्ञान यज्ञ
  2. B.सत्यार्थ प्रकाश अभियान
  3. C.वेदांत पदयात्रा
  4. D.धर्म जागरण यात्रा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. गीता ज्ञान यज्ञ

स्वामी चिन्मयानंद ने इसे इसलिए शुरू किया कि उपनिषद, वेदांत और शास्त्र कुछ विद्वानों तक सीमित न रहें, बल्कि सामान्य जीवन जीने वाले लोगों तक पहुंचें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किसने किया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय मिशन के इस वैश्विक आयोजन का उद्घाटन किया।

चिन्मय मिशन की स्थापना किसने की थी?

स्वामी चिन्मयानंद ने। उन्होंने उपनिषद, वेदांत और शास्त्रों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए गीता ज्ञान यज्ञ शुरू किया और उनके गुरु स्वामी शिवानंद थे।

किस स्मारक के लिए स्वामी चिन्मयानंद ने पहला आर्थिक सहयोग दिया था?

कन्याकुमारी के समुद्र में बने विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए, जो एकनाथ रानडे के संकल्प से बना था।

सम्मेलन में 2047 का जिक्र क्यों हुआ?

क्योंकि 2047 में भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी और चिन्मय मिशन की शताब्दी का कालखंड साथ पड़ेंगे, इसलिए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों यात्राएं साथ आगे बढ़ेंगी।

स्रोत

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