बुसान में सोनोवाल: जहाज़ पुनर्चक्रण पर साइप्रस का भारत को समर्थन
बुसान में सर्बानंद सोनोवाल को भारतीय जहाज़ पुनर्चक्रण यार्डों की यूरोपीय संघ मान्यता के लिए साइप्रस का समर्थन मिला, कोरियाई कंपनियों से भी बात हुई।

चर्चा में क्यों
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया के बुसान में बैठकें कीं, जहां साइप्रस ने भारतीय जहाज़ पुनर्चक्रण यार्डों की यूरोपीय संघ मान्यता का समर्थन किया और कोरियाई कंपनियों ने निवेश में रुचि दिखाई।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया के बुसान में कोरियाई समुद्री संस्थानों, जहाज़ निर्माताओं और शिपिंग कंपनियों के साथ तथा साइप्रस की पोत परिवहन उपमंत्री के साथ बैठकों का दौर किया। बातचीत में जहाज़ निर्माण में निवेश, समुद्री उपकरणों का उत्पादन, समुद्री वित्त, बंदरगाह विकास, पोत परिवहन, हरित तकनीक और जहाज़ पुनर्चक्रण शामिल रहे। सरकार का घोषित लक्ष्य है कि 2047 तक भारत जहाज़ निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री सेवाओं का वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी केंद्र बन जाए।
साइप्रस का समर्थन
द्विपक्षीय बैठक में साइप्रस की पोत परिवहन उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस ने दोहराया कि उनका देश पात्र भारतीय जहाज़ पुनर्चक्रण यार्डों को यूरोपीय संघ की मान्यता दिलाने के भारत के प्रयास का समर्थन करता है। इस मान्यता से यूरोपीय जहाज़ मालिक अपने पुराने जहाज़ क़ानूनी रूप से भारतीय यार्डों में भेज सकेंगे। दोनों मंत्रियों ने पोत परिवहन, समुद्री निवेश, नाविकों के कल्याण और समुद्री सेवाओं पर भी चर्चा की। सुश्री हाजीमानोलिस ने बताया कि नवंबर में साइप्रस की लगभग 25 प्रमुख कंपनियां पोत परिवहन, जहाज़ प्रबंधन और समुद्री तकनीक में साझेदारी देखने भारत आने वाली हैं, और दोनों पक्ष भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी को व्यापारिक नतीजों में बदलने पर सहमत हुए।
कोरियाई उद्योग, हरित शिपिंग और वित्त
- सेजिन हेवी इंडस्ट्रीज़ के मुख्य कार्यकारी किम जिन-जोंग के साथ बड़े जहाज़ ब्लॉक, एलपीजी और एलएनजी कार्गो टैंक तथा क्रायोजेनिक संरचनाओं पर बात हुई, जो गैस को बहुत कम तापमान पर तरल बनाए रखती हैं। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने भी इस कंपनी के साथ ब्लॉक निर्माण की संभावना देखी।
- कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष यांग वोन-चांग के साथ उपकरण उत्पादन, शोध, परीक्षण, प्रमाणन, हरित प्रणोदन और स्मार्ट पोत तकनीक तथा प्रस्तावित इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर के साथ सहयोग पर चर्चा हुई।
- शिपिंग कंपनी एचएमएम के साथ अपने जहाज़ भारत में पंजीकृत कराने, भारतीय नाविकों की भर्ती, हांगकांग कन्वेंशन का पालन करने वाले भारतीय पुनर्चक्रण यार्डों के उपयोग और अधिक भारतीय बंदरगाहों तक सेवा बढ़ाने पर बात हुई।
- कोरिया ओशन बिज़नेस कॉर्पोरेशन के साथ बंदरगाह ढांचे और पोत परिवहन में निवेश पर चर्चा हुई, तथा कोरियाई वित्तदाताओं के सामने समुद्री विकास कोष और सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन रखे गए।
आंकड़े जो भारत ने रखे
सोनोवाल ने कोरियाई पक्ष को बताया कि भारत ने लगभग 7.8 अरब डॉलर का जहाज़ निर्माण सहायता पैकेज मंज़ूर किया है, मेगा जहाज़ निर्माण समूह विकसित किए जा रहे हैं और 400 से अधिक जहाज़ों की ऐसी शृंखला सामने है, जिसका अनुमानित मूल्य 23 अरब डॉलर है। एक बड़ी कोरियाई शिपिंग लाइन ने भारत में जहाज़ पंजीकरण, भारत में बने कंटेनरों और आने वाले वाढवण बंदरगाह में रुचि दिखाई। मंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री बदलाव मज़बूत निवेश, नवाचार और टिकाऊ भारत-कोरिया साझेदारी के बड़े अवसर देता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मंत्री | सर्बानंद सोनोवाल, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग |
|---|---|
| बैठकों का स्थान | बुसान, दक्षिण कोरिया |
| साइप्रस की मंत्री | मरीना हाजीमानोलिस, पोत परिवहन उपमंत्री |
| साइप्रस का समर्थन | पात्र भारतीय जहाज़ पुनर्चक्रण यार्डों को यूरोपीय संघ मान्यता दिलाने में |
| साइप्रस की यात्रा | नवंबर में लगभग 25 प्रमुख कंपनियां भारत आएंगी |
| वित्त के साधन | समुद्री विकास कोष और सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन |
| प्रस्तावित संस्थान | इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर, जहाज़ डिज़ाइन, शोध, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए |
| ऑर्डर शृंखला | 400 से अधिक जहाज़, अनुमानित मूल्य 23 अरब डॉलर |
| लक्ष्य | 2047 तक जहाज़ निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री सेवाओं का वैश्विक केंद्र |
परीक्षा की दृष्टि से
शहर (बुसान, दक्षिण कोरिया), मंत्री (सर्बानंद सोनोवाल, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग), साइप्रस की मंत्री (मरीना हाजीमानोलिस), जहाज़ पुनर्चक्रण यार्डों के लिए यूरोपीय संघ मान्यता, हांगकांग कन्वेंशन, समुद्री विकास कोष, सागरमाला फाइनेंस कॉर्पोरेशन, वाढवण बंदरगाह और लक्ष्य वर्ष 2047 याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
भारतीय जहाज़ पुनर्चक्रण यार्डों को यूरोपीय संघ की मान्यता दिलाने के भारत के प्रयास का समर्थन किस देश ने दोहराया?
- A.दक्षिण कोरिया
- B.साइप्रस
- C.यूनान
- D.माल्टा
उत्तर देखें
उसकी पोत परिवहन उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस ने बुसान में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाक़ात की और दोहराया कि उनका देश पात्र भारतीय जहाज़ पुनर्चक्रण सुविधाओं को यूरोपीय संघ की मान्यता दिलाने के भारत के प्रयास का समर्थन करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत किस वर्ष तक जहाज़ निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री सेवाओं का वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी केंद्र बनना चाहता है?
- A.2030
- B.2035
- C.2040
- D.2047
उत्तर देखें
बुसान की बैठकों में यही लक्ष्य रखा गया कि उस वर्ष तक भारत जहाज़ निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री सेवाओं का वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी केंद्र बन जाए, जो देश की स्वतंत्रता की एक सदी का वर्ष भी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रस्तावित इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर किस काम के लिए राष्ट्रीय मंच के रूप में सोचा गया है?
- A.जहाज़ डिज़ाइन, शोध, परीक्षण और प्रशिक्षण
- B.विदेशी ध्वज वाले जहाज़ों का पंजीकरण
- C.बंदरगाह रियायतों की नीलामी
- D.समुद्री बीमा और दावों का निपटारा
उत्तर देखें
कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष के साथ बैठक में मंत्री ने इस केंद्र को इन्हीं कामों का राष्ट्रीय मंच बताया और कहा कि कोरियाई तकनीकी विशेषज्ञता के साथ देश में ही परीक्षण और प्रमाणन होने से भारत में बने समुद्री उपकरण अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरेंगे तथा भारतीय…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय जहाज़ पुनर्चक्रण यार्डों की यूरोपीय संघ मान्यता का समर्थन किस देश ने किया?
साइप्रस ने। उसकी पोत परिवहन उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस ने दक्षिण कोरिया के बुसान में सर्बानंद सोनोवाल के साथ द्विपक्षीय बैठक में यह समर्थन दोहराया।
इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर क्या है?
यह जहाज़ डिज़ाइन, शोध, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय मंच है। बुसान में कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ इसके सहयोग पर चर्चा हुई, ताकि भारत में बने समुद्री उपकरण अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें।
भारत का समुद्री केंद्र बनने का लक्ष्य वर्ष कौन सा है?
2047। सरकार का लक्ष्य है कि उस वर्ष तक भारत जहाज़ निर्माण, पोत परिवहन और समुद्री सेवाओं का वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी केंद्र बने, जिसके लिए लगभग 7.8 अरब डॉलर का सहायता पैकेज और मेगा निर्माण समूह तैयार हो रहे हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2329195 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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