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सीसीयूएस: नेट जीरो के लिए 20,000 करोड़ रुपये की योजना

कार्बन कैप्चर पर जारी पृष्ठभूमि दस्तावेज में केंद्रीय बजट 2026-27 की 20,000 करोड़ रुपये की सीसीयूएस योजना और 2070 तक नेट जीरो की राह बताई गई।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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सीसीयूएस: नेट जीरो के लिए 20,000 करोड़ रुपये की योजना

चर्चा में क्यों

27 अक्टूबर 2026 के पीआईबी पृष्ठभूमि दस्तावेज में भारत के सीसीयूएस ढांचे का ब्योरा दिया गया, जिसमें केंद्रीय बजट 2026-27 की 20,000 करोड़ रुपये की योजना और आईआईटी बॉम्बे की फील्ड प्रयोगशाला शामिल हैं। इसी दिन भारत मंडपम में ईएसटीआईसी-2026 शुरू हुआ।

27 अक्टूबर 2026 को जारी सरकारी पृष्ठभूमि दस्तावेज में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) को उन उद्योगों के उत्सर्जन घटाने का रास्ता बताया गया, जो केवल बिजली पर नहीं जा सकते। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड को केवल कचरा गैस नहीं, बल्कि एक संसाधन माना गया है और इस तकनीक को 2070 तक नेट जीरो के राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ा गया है।

कठिन क्षेत्रों के लिए जरूरी क्यों

नीति आयोग ने इस्पात, सीमेंट, तेल एवं गैस, पेट्रो रसायन, रसायन और उर्वरक को ऐसे क्षेत्र माना है जिनका उत्सर्जन घटाना कठिन है, क्योंकि इनमें कार्बन डाइऑक्साइड ईंधन जलने से ही नहीं, उत्पादन प्रक्रिया से भी निकलती है। अनुमान है कि इन उद्योगों और ताप बिजली का उत्सर्जन 2030 तक लगभग 2,300 मिलियन टन सालाना हो जाएगा। अगस्त 2026 तक देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों का हिस्सा 45.12 प्रतिशत था, इसलिए मौजूदा संयंत्रों को बंद करने की जगह उनका उत्सर्जन साफ करना होगा।

पूरी प्रक्रिया

पहले संयंत्र में निकलने वाली गैसों से कार्बन डाइऑक्साइड अलग की जाती है, फिर उसे शुद्ध, सुखाकर संपीडित किया जाता है। ढुलाई आमतौर पर पाइपलाइन से होती है और लंबी दूरी के लिए जहाजों का उपयोग किया जाता है। अंत में इसका उपयोग किया जाता है, जैसे तेल की बेहतर निकासी, यूरिया, हरित मेथनॉल, कंक्रीट, खाद्य एवं पेय उत्पाद और शैवाल आधारित उत्पादों में, या इसे खाली हो चुके तेल तथा गैस भंडारों, गहरे खारे जलभृतों और बेसाल्ट चट्टानों में गहरे भूमिगत भंडारित कर दिया जाता है। कोयला गैसीकरण, जिसमें लगभग 800 से 1,600 डिग्री सेल्सियस तापमान पर कोयले से सिनगैस बनती है, कैप्चर के साथ मिलकर ब्लू हाइड्रोजन बनाने में काम आता है।

नीति और परियोजनाएं

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में फरवरी 2026 में सीसीयूएस योजना की घोषणा हुई, जिसके लिए पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये रखे गए। इसके दायरे में बिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन क्षेत्र हैं।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने दिसंबर 2025 में सीसीयूएस शोध रोडमैप जारी किया, जबकि नीति आयोग ने नवंबर 2022 में नीतिगत ढांचा प्रस्तुत किया था।
  • राष्ट्रीय सीसीयूएस केंद्र 2022 में आईआईटी बॉम्बे और जेएनसीएएसआर, बेंगलूरु में बने। देश की पहली एकीकृत सीसीयूएस फील्ड प्रयोगशाला मई 2026 में आईआईटी बॉम्बे में शुरू हुई, जो रोजाना 3 टन तक कार्बन डाइऑक्साइड पकड़ सकती है।
  • क्लस्टर के लिए गुजरात का तट, ओडिशा और झारखंड की पट्टी तथा पूर्वोत्तर भारत चुने गए हैं। मिशन इनोवेशन के तहत भारत ने 13 साझेदार देशों के साथ काम किया है।

ईएसटीआईसी-2026

यह दस्तावेज उस समय आया जब नई दिल्ली के भारत मंडपम में उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन का दूसरा संस्करण ईएसटीआईसी-2026 शुरू हुआ। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद इसे 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज विषय पर आयोजित कर रही है। इसमें 12 विषय क्षेत्र शामिल हैं और कार्बन कैप्चर जैसी ऊर्जा तकनीकों पर भी चर्चा हो रही है।

महत्वपूर्ण तथ्य

पूरा नामकार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस)
बजट योजनाफरवरी 2026 में केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित, पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये
शामिल क्षेत्रबिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन
नेट जीरो लक्ष्य2070
उत्सर्जन अनुमान2030 तक कठिन क्षेत्रों और ताप बिजली से लगभग 2,300 मिलियन टन सालाना
फील्ड प्रयोगशालापहली एकीकृत सीसीयूएस फील्ड प्रयोगशाला, आईआईटी बॉम्बे, मई 2026, रोजाना 3 टन तक क्षमता
राष्ट्रीय सीसीयूएस केंद्र2022 में आईआईटी बॉम्बे और जेएनसीएएसआर, बेंगलूरु में स्थापित
जीवाश्म ईंधन हिस्साअगस्त 2026 तक स्थापित बिजली क्षमता का 45.12 प्रतिशत
ईएसटीआईसी-2026दूसरा संस्करण, 27 से 29 अक्टूबर 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली, आयोजक सीएसआईआर

परीक्षा की दृष्टि से

नेट जीरो का लक्ष्य वर्ष 2070, 20,000 करोड़ रुपये की बजट योजना और उसके पांच क्षेत्र, दिसंबर 2025 का डीएसटी रोडमैप, नवंबर 2022 का नीति आयोग ढांचा, दो राष्ट्रीय सीसीयूएस केंद्र, आईआईटी बॉम्बे की फील्ड प्रयोगशाला तथा ईएसटीआईसी-2026 का विषय, आयोजक और तिथियां याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

केंद्रीय बजट 2026-27 में सीसीयूएस योजना के लिए पांच वर्षों में कितनी राशि रखी गई?

  1. A.5,000 करोड़ रुपये
  2. B.10,000 करोड़ रुपये
  3. C.20,000 करोड़ रुपये
  4. D.50,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 20,000 करोड़ रुपये

कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण की योजना की घोषणा फरवरी 2026 में हुई और वित्त मंत्रालय ने पांच वर्षों के लिए यही राशि रखी, जो बिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन इन पांच औद्योगिक क्षेत्रों के लिए है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत की पहली एकीकृत सीसीयूएस फील्ड प्रयोगशाला किस संस्थान में है?

  1. A.आईआईटी दिल्ली
  2. B.आईआईटी बॉम्बे
  3. C.आईआईटी मद्रास
  4. D.आईआईएससी बेंगलूरु
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईआईटी बॉम्बे

देश की पहली एकीकृत सीसीयूएस फील्ड प्रयोगशाला का उद्घाटन वहीं मई 2026 में हुआ और यह कैप्चर, उपयोग तथा स्थायी भूगर्भीय भंडारण को एक ही प्रायोगिक मंच पर लाती है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे ईएसटीआईसी-2026 का आयोजक कौन है?

  1. A.इसरो
  2. B.डीआरडीओ
  3. C.सीएसआईआर
  4. D.आईसीएमआर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सीएसआईआर

वही उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के दूसरे संस्करण ईएसटीआईसी-2026 का आयोजन 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज विषय पर कर रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीय बजट 2026-27 में सीसीयूएस योजना के लिए कितनी राशि रखी गई है?

पांच वर्षों के लिए 20,000 करोड़ रुपये, जिसकी घोषणा फरवरी 2026 में हुई। यह राशि बिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन इन पांच औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर को बढ़ावा देने के लिए है।

भारत की पहली एकीकृत सीसीयूएस फील्ड प्रयोगशाला कहां है?

आईआईटी बॉम्बे में, जिसका उद्घाटन मई 2026 में हुआ। यह औद्योगिक उत्सर्जन और वायुमंडल से रोजाना 3 टन तक कार्बन डाइऑक्साइड पकड़कर उसे कार्बोनेट तथा बाइकार्बोनेट उत्पादों में बदल सकती है।

ईएसटीआईसी-2026 का विषय क्या है?

क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज। इस सम्मेलन का दूसरा संस्करण सीएसआईआर की ओर से 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में 12 विषय क्षेत्रों के साथ हो रहा है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS