संपीडित बायोगैस के लिए गोबरधन योजना शुरू
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संपीडित बायोगैस के लिए 23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन केंद्रीय क्षेत्र योजना का शुभारंभ किया, जो दस वर्ष चलेगी।

चर्चा में क्यों
1 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संपीडित बायोगैस के लिए गोबरधन केंद्रीय क्षेत्र योजना, गोबरधन हैंडबुक और एकीकृत गोबरधन पोर्टल का शुभारंभ किया।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश में संपीडित बायोगैस (सीबीजी) उद्योग को बढ़ाने वाली केंद्रीय क्षेत्र योजना गोबरधन का शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 6 अगस्त 2026 को मंजूरी दी थी।
योजना का आकार और अवधि
योजना का परिव्यय 23,731 करोड़ रुपये है और यह वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक, यानी दस वर्ष तक चलेगी। लक्ष्य है घरेलू सीबीजी उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाकर करीब 5 एमएमएससीएमडी तक पहुँचाना, ताकि निवेशकों और कर्जदाताओं को लंबी अवधि की स्पष्टता मिले। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसका एकमात्र नोडल मंत्रालय है, जिससे पहले की बिखरी हुई सहायता योजनाओं की जगह एक ढाँचा सामने आया है।
छह हस्तक्षेप
- सीबीजी खरीद आश्वासन, जिसमें संयंत्रों को सिटी गैस वितरण क्षेत्रों या सीबीजी क्लस्टरों से जोड़ा जाएगा
- मूल्य निर्धारण ढाँचा, जिसमें प्रशासित मूल्य 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू रखा गया है
- नई परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रति टीपीडी पर 2 करोड़ रुपये तक पूंजीगत सहायता
- पाइपलाइन सहायता, जिसमें क्लस्टर पाइपलाइन के लिए पात्र पूंजीगत व्यय का 80 प्रतिशत तक और अकेले संयंत्रों के लिए 50 प्रतिशत तक
- एमएसएमई परियोजनाओं के लिए ऋण गारंटी, जो चूक की स्थिति में बकाया राशि के 85 प्रतिशत तक को कवर करेगी
- प्रौद्योगिकी, फीडस्टॉक आकलन और खाद के मूल्यवर्धन के लिए सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड
खरीद की बाध्यता
सीबीजी खरीद की जिम्मेदारी सिटी गैस वितरण कंपनियों पर है। सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) खंड के लिए उन्हें वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, अगले वर्ष 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2028-29 से 5 प्रतिशत सीबीजी खरीदनी होगी। ऋण गारंटी की सीमा सामान्य एमएसएमई परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपये और महिलाओं के नेतृत्व वाली परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये है।
साथ में क्या जारी हुआ
योजना के साथ दो चीजें शुरू हुईं: गोबरधन हैंडबुक, जो विकासकर्ताओं, राज्यों और वित्तीय संस्थानों के लिए मार्गदर्शिका है, और एकीकृत गोबरधन पोर्टल, जो आवेदनों के लिए एक ही डिजिटल खिड़की देता है।
क्षेत्र की स्थिति
| मानक | आँकड़ा |
|---|---|
| अगस्त 2026 तक चालू संयंत्र | 217 से अधिक |
| स्थापित क्षमता | 1,700 टीपीडी से अधिक |
| अनुमानित विदेशी मुद्रा बचत | 40,000 करोड़ रुपये से अधिक |
| जीडीपी में अनुमानित वृद्धि | 75,000 करोड़ रुपये से अधिक |
सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरत का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है, इसलिए घरेलू जैविक कचरे से गैस बनाना अहम है। योजना से 1.5 लाख से अधिक रोजगार, 10 मिलियन टन जीवाश्म ईंधन की जगह, 40 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड में कमी और 250 मिलियन टन जैविक खाद की आशा है। पुरी ने इसे कचरे से संपदा और अन्नदाता से ऊर्जादाता के विचार से जोड़ा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | गोबरधन, संपीडित बायोगैस के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना |
|---|---|
| शुभारंभ | केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी |
| परिव्यय | 23,731 करोड़ रुपये |
| अवधि | वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 (दस वर्ष) |
| मंत्रिमंडल की मंजूरी | 6 अगस्त 2026 |
| उत्पादन लक्ष्य | लगभग दस गुना वृद्धि, करीब 5 एमएमएससीएमडी |
| प्रशासित सीबीजी मूल्य | 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू |
| नोडल मंत्रालय | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |
| साथ में जारी | गोबरधन हैंडबुक और एकीकृत गोबरधन पोर्टल |
परीक्षा की दृष्टि से
परिव्यय 23,731 करोड़ रुपये, मंत्रिमंडल की मंजूरी 6 अगस्त 2026, अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36, प्रशासित मूल्य 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू, खरीद बाध्यता 3, 4 और 5 प्रतिशत तथा नोडल मंत्रालय याद रखें। छह हस्तक्षेप और साथ जारी हैंडबुक व एकीकृत पोर्टल भी पूछे जा सकते हैं।
अभ्यास प्रश्न
संपीडित बायोगैस क्षेत्र के लिए शुरू हुई गोबरधन योजना का परिव्यय कितना है?
- A.10,900 करोड़ रुपये
- B.23,731 करोड़ रुपये
- C.31,500 करोड़ रुपये
- D.45,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 23,731 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 23,731 करोड़ रुपये है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अगस्त 2026 को इसी परिव्यय के साथ गोबरधन को मंजूरी दी थी और योजना संपीडित बायोगैस क्षेत्र को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक दस वर्ष का ढाँचा देती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि योजना की संरचना में इस आकार की कोई राशि नहीं आती; जो छोटी राशियाँ दी गई हैं वे प्रति परियोजना सीमाएँ हैं, जैसे स्थापित क्षमता के प्रति टीपीडी पर 2 करोड़ रुपये तक पूंजीगत सहायता। विकल्प C भी इसी कारण गलत है और विद्यार्थी अक्सर परिव्यय को अर्थव्यवस्था को होने वाले लाभ से मिला देते हैं, जो सरकार के अनुसार जीडीपी में 75,000 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि है। विकल्प D गलत है और यह 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित विदेशी मुद्रा बचत के पास है, न कि योजना के खर्च के। इसलिए केवल B स्वीकृत परिव्यय है।
गोबरधन योजना का एकमात्र नोडल मंत्रालय कौन सा है?
- A.नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- B.कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
- C.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- D.जल शक्ति मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय है। गोबरधन का एक बड़ा बदलाव यही है कि अब संपीडित बायोगैस के लिए बिखरी हुई सहायता की जगह एक ही मंत्रालय जिम्मेदार है, और वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय है। मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने योजना का शुभारंभ किया और सचिव नीरज मित्तल ने संबोधन दिया, जिससे मंत्रालय और स्पष्ट हो जाता है। विकल्प A आकर्षक लगता है क्योंकि बायोगैस स्वच्छ ईंधन है, पर नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय यहाँ नोडल नहीं है। विकल्प B गलत है, भले ही किसान, सहकारी समितियाँ और गौशालाएँ फसल अवशेष व गोबर जैसा फीडस्टॉक देती हैं; फीडस्टॉक देने से कृषि मंत्रालय नोडल नहीं बन जाता। विकल्प D गलत है, क्योंकि जल शक्ति मंत्रालय जल संसाधन और स्वच्छता देखता है, गैस की खरीद या मूल्य निर्धारण नहीं। इसलिए C सही है।
गोबरधन योजना में संपीडित बायोगैस का प्रशासित मूल्य कितना तय किया गया है?
- A.1,500 रुपये प्रति एमएमबीटीयू
- B.2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू
- C.2,500 रुपये प्रति एमएमबीटीयू
- D.3,200 रुपये प्रति एमएमबीटीयू
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू
व्याख्या
सही उत्तर 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू है। योजना यह प्रशासित मूल्य तय करती है, जिससे उत्पादक अपनी आय का अनुमान पहले से लगा सकें; बिखरी सहायता और वित्त तक सीमित पहुँच के साथ अस्थिर आय इस क्षेत्र की पुरानी शिकायत रही है। विकल्प A, C और D गढ़े हुए आँकड़े हैं और मूल्य निर्धारण ढाँचे से इनका कोई संबंध नहीं। भ्रम इसलिए होता है कि योजना में मिलते-जुलते रूप के कई अंक हैं, जैसे सामान्य एमएसएमई परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपये और महिलाओं के नेतृत्व वाली परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये की गारंटी सीमा। याद रखें कि मूल्य निर्धारण छह हस्तक्षेपों में से एक है; बाकी हैं खरीद आश्वासन, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन विकास, ऋण गारंटी और सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड। मूल्य को गारंटी सीमा और प्रति टीपीडी 2 करोड़ रुपये की सहायता से अलग रखने पर B ही सही बैठता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोबरधन योजना का परिव्यय कितना है?
23,731 करोड़ रुपये। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 6 अगस्त 2026 को मंजूरी दी और यह संपीडित बायोगैस क्षेत्र के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक दस वर्ष का ढाँचा देती है।
गोबरधन का नोडल मंत्रालय कौन है?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एकमात्र नोडल मंत्रालय है। मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने योजना शुरू की और सचिव नीरज मित्तल ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
योजना में सीबीजी का कौन सा मूल्य तय हुआ है?
प्रशासित मूल्य 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू, जिससे उत्पादकों को आय का अनुमान पहले से मिल सके। नई परियोजनाओं को प्रति टीपीडी 2 करोड़ रुपये तक पूंजीगत सहायता भी मिलेगी।
गैस वितरण कंपनियों पर सीबीजी खरीद की बाध्यता क्या है?
सिटी गैस वितरण कंपनियों को सीएनजी परिवहन और घरेलू पीएनजी खंड में वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत सीबीजी खरीदनी होगी।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2317937 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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