आरडीआई योजना में एडवांस्ड केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स जुड़े
भारत सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 से एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज को आरडीआई योजना के तहत वित्तपोषण के लिए पात्र बनाया।

चर्चा में क्यों
भारत सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी रूप से एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज को अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के अंतर्गत वित्तपोषण के लिए पात्र क्षेत्र बनाया। यह मंजूरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के प्रस्ताव पर दी।
केंद्र सरकार ने अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के दायरे में आने वाले प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की सूची बढ़ा दी है। एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज को अब इस योजना से धन पाने के पात्र एक अतिरिक्त क्षेत्र के रूप में जोड़ा गया है और यह व्यवस्था 8 अक्टूबर 2026 से लागू है।
मंजूरी किसने दी, प्रस्ताव किसका था
यह मंजूरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने दी। विभाग ने रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग (डीसीपीसी) के भेजे प्रस्ताव पर यह निर्णय लिया। डीसीपीसी रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन काम करता है और उसने मांग की थी कि रसायन तथा पेट्रोरसायन क्षेत्र को योजना के भीतर प्राथमिकता वाला क्षेत्र माना जाए। माना जा रहा है कि इस कदम से इस क्षेत्र में शोध कार्य गहरा होगा और भारतीय प्रयोगशालाएं तथा कंपनियां कठिन औद्योगिक उपयोगों के लिए अपनी स्वदेशी प्रौद्योगिकियां तैयार कर सकेंगी।
योजना का स्वरूप
आरडीआई योजना नवंबर 2025 में शुरू की गई थी और इसका कोष 1 लाख करोड़ रुपये का है। इसकी बुनावट ऐसी है कि सरकार सीधे खर्च करने के बजाय निजी पूंजी को शोध की दिशा में खींचे: बड़े बदलाव लाने में सक्षम परियोजनाओं को लंबी अवधि का ऋण और पुनर्वित्त आसान शर्तों पर दिया जाता है। योजना का लक्ष्य उन्नत प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाना, विदेशी प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारतीय उद्योग की ताकत बढ़ाना और महत्वपूर्ण तथा उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल करना भी है। योजना के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश तेजी से शोध का मजबूत आधार खड़ा कर रहा है और शोध करना आसान बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि नवाचार का आधुनिक ढांचा जड़ पकड़ सके।
मंत्रालय की प्रतिक्रिया
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने क्षेत्र को योजना में शामिल किए जाने का स्वागत किया और इसे रसायन तथा पेट्रोरसायन उद्योग के लिए अहम पड़ाव बताया। उनके अनुसार इस धन से शोध और नवाचार को वह बल मिलेगा जिसकी जरूरत लंबे समय से थी, और देश में रसायनों, पेट्रोरसायन उत्पादों, पॉलीमर तथा उनसे बनने वाली वस्तुओं के निर्माण के लिए बेहतर, सस्ती व अधिक कुशल तकनीकें विकसित हो सकेंगी।
परीक्षा की दृष्टि से महत्व
रसायन और पेट्रोरसायन उद्योग बड़े पैमाने पर विदेश से खरीदी गई तकनीक तथा महंगी आयातित सामग्री पर टिका है। इतने बड़े वित्तपोषण मंच में इस क्षेत्र को लाने का उद्देश्य उसी निर्भरता को घटाना, घरेलू विनिर्माण को ऊपर उठाना और औद्योगिक विकास की अगुवाई देश में ही बनी तकनीक से कराना है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना |
|---|---|
| नया प्रौद्योगिकी क्षेत्र | एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज |
| प्रभावी तिथि | 8 अक्टूबर 2026 |
| मंजूरी | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) |
| प्रस्ताव | रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग (डीसीपीसी), रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय |
| योजना की शुरुआत | नवंबर 2025 |
| कोष | 1 लाख करोड़ रुपये |
| केंद्रीय मंत्री | जगत प्रकाश नड्डा, रसायन एवं उर्वरक तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण |
| उद्देश्य | निजी क्षेत्र के शोध निवेश को बढ़ाने हेतु अनुकूल शर्तों पर दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त |
परीक्षा की दृष्टि से
योजना का नाम (अनुसंधान, विकास और नवाचार या आरडीआई योजना), शुरुआत का महीना और वर्ष (नवंबर 2025), कोष (1 लाख करोड़ रुपये), जोड़ा गया नया प्रौद्योगिकी क्षेत्र (एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज), प्रभावी तिथि (8 अक्टूबर 2026), मंजूरी देने वाला विभाग (डीएसटी), प्रस्ताव भेजने वाला विभाग (डीसीपीसी) और स्वागत करने वाले मंत्री (जगत प्रकाश नड्डा) याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज को किस योजना के तहत वित्तपोषण के लिए पात्र बनाया गया है?
- A.उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना
- B.अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना
- C.पीआरआईपी योजना
- D.राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन
उत्तर देखें
भारत सरकार ने एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज को इसी योजना के अंतर्गत धन पाने के पात्र एक अतिरिक्त प्रौद्योगिकी क्षेत्र के रूप में जोड़ा और यह व्यवस्था 8 अक्टूबर 2026 से लागू हुई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →रसायन एवं पेट्रोरसायन क्षेत्र को आरडीआई योजना में शामिल करने की मंजूरी किस विभाग ने दी?
- A.रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग
- B.उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग
- C.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
- D.वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग
उत्तर देखें
रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग इस संदर्भ में गलत है, क्योंकि डीसीपीसी प्रस्ताव भेजने वाला पक्ष था, मंजूरी देने वाला प्राधिकरण नहीं: उसने मांग की थी कि रसायन और पेट्रोरसायन को प्राथमिकता वाला क्षेत्र माना जाए और डीएसटी ने वह अनुरोध स्वीकार किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना का कोष कितना है?
- A.50,000 करोड़ रुपये
- B.1 लाख करोड़ रुपये
- C.2 लाख करोड़ रुपये
- D.10,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
आरडीआई योजना नवंबर 2025 में इसी आकार के कोष के साथ शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य शोध, विकास और नवाचार में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रेरित करना है, केवल सरकारी प्रयोगशालाओं को धन देना नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज का आरडीआई योजना में शामिल होना किस तिथि से प्रभावी है?
- A.1 अक्टूबर 2026
- B.8 अक्टूबर 2026
- C.14 अक्टूबर 2026
- D.8 नवंबर 2025
उत्तर देखें
सही उत्तर 8 अक्टूबर 2026 है, इसी तिथि से नया प्रौद्योगिकी क्षेत्र आरडीआई योजना के तहत वित्तपोषण के लिए पात्र हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरडीआई योजना क्या है और इसका कोष कितना है?
अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना नवंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के कोष के साथ शुरू की गई थी। यह अनुकूल शर्तों पर दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त देती है, ताकि निजी कंपनियां शोध, उन्नत तकनीक अपनाने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता पर निवेश करें।
आरडीआई योजना में कौन सा नया प्रौद्योगिकी क्षेत्र जोड़ा गया है?
एडवांस्ड केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और मटीरियल टेक्नोलॉजीज। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग का प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद यह क्षेत्र 8 अक्टूबर 2026 से आरडीआई वित्तपोषण के लिए पात्र हो गया।
रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग किस मंत्रालय के अधीन है?
यह रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। मंत्रालय के प्रभारी केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, जिनके पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण भी है, ने इस क्षेत्र के शामिल होने को उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
स्रोत
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