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येटी ड्रोन के लिए टीडीबी और आइडियाफोर्ज में 151 करोड़ का समझौता

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड आरडीआई कोष से 151 करोड़ रुपये देगा, जिससे आइडियाफोर्ज भारी भार उठाने वाला स्वायत्त हवाई रसद वाहन येटी विकसित करेगी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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येटी ड्रोन के लिए टीडीबी और आइडियाफोर्ज में 151 करोड़ का समझौता

चर्चा में क्यों

14 अक्टूबर 2026 को प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ समझौता किया, जिसके तहत भारी भार उठाने वाले स्वायत्त हवाई रसद वाहन येटी के विकास के लिए आरडीआई कोष से 151 करोड़ रुपये मिलेंगे। परियोजना की कुल लागत 302 करोड़ रुपये है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने मुंबई, महाराष्ट्र की आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत अनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष से 151 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह राशि येटी के विकास पर खर्च होगी, जो भारी भार उठाने वाला और लंबी दूरी तक उड़ने वाला स्वायत्त हवाई रसद वाहन है।

समझौते में क्या है

पूरी परियोजना की लागत 302 करोड़ रुपये आंकी गई है, इसलिए बोर्ड का हिस्सा लगभग आधी लागत के बराबर है और यह ऋण वित्तपोषण के रूप में मिलेगा। मकसद इस तकनीक को प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (टीआरएल)-4 से टीआरएल-9 तक पहुंचाना है, यानी उस चरण तक, जहां प्रणाली वास्तविक संचालन में खरी उतर चुकी होती है। इसके लिए जरूरी इंजीनियरिंग, एकीकरण, परीक्षण और सत्यापन पर यह सहायता खर्च होगी, जो तकनीकी, सुरक्षा और नियामक शर्तों के अधीन रहेगी।

येटी किस काम के लिए बना है

येटी एक स्वायत्त वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग वाला फिक्स्ड-विंग हाइब्रिड मानवरहित हवाई वाहन है। यह मेल अहम है, क्योंकि यह हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठता और उतरता है, लेकिन लंबी उड़ान के लिए फिक्स्ड विंग बनाए रखता है। इसी से वह ऐसे इलाकों में भारी सामान दूर तक ले जा सकता है जहां सड़कें कमजोर हैं या मौसम साथ नहीं देता।

भार क्षमता200 किलोग्राम तक
लक्षित सीमा200 किलोमीटर तक
परिचालन ऊंचाईसमुद्र तल से 6,500 मीटर तक
लैंडिंग क्षेत्रलगभग 15 मीटर गुणा 15 मीटर

तकनीक की खास बातें

  • वितरित और अतिरेकपूर्ण प्रणोदन तथा विद्युत संरचना, जिससे खराबी सहने की क्षमता बढ़ती है
  • ऐसा नेविगेशन जो उपग्रह संकेत न मिलने पर भी काम करता है
  • 200 किलोमीटर तक पहुंचने वाला संचार लिंक
  • कंटेनर में परिवहन, जिससे वाहन जल्दी ले जाकर तैयार किया जा सके
  • ऊंचे इलाकों, रेगिस्तान और समुद्री परिस्थितियों के लिए मौसम-प्रतिरोधी बनावट

यह क्यों अहम है

यह परियोजना डीप टेक्नोलॉजी क्षेत्र में आती है और इसका उप-क्षेत्र इंटेलिजेंट सिस्टम तथा रोबोटिक्स है। टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा कि स्वदेशी भारी भार वाले हवाई प्लेटफॉर्म दूरदराज और दुर्गम जगहों तक पहुंच सुधार सकते हैं, और आरडीआई कोष ऐसी प्रौद्योगिकी-प्रधान परियोजनाओं के लिए है जिन्हें विकास से तैनाती तक पहुंचने के लिए लगातार निवेश चाहिए। उम्मीदवारों के लिए यह सरकार की ओर से किसी भारतीय डीपटेक कंपनी को मैदान तक पहुंचाने में मदद का साफ उदाहरण है।

महत्वपूर्ण तथ्य

समझौताप्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड, मुंबई, महाराष्ट्र
टीडीबी सहायता151 करोड़ रुपये, ऋण वित्तपोषण के रूप में
कोषअनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष
कुल परियोजना लागत302 करोड़ रुपये
प्लेटफॉर्मयेटी, भारी भार वाला लंबी दूरी का स्वायत्त हवाई रसद वाहन (वीटीओएल फिक्स्ड-विंग हाइब्रिड यूएवी)
प्रौद्योगिकी लक्ष्यटीआरएल-4 से टीआरएल-9 तक
भार और सीमा200 किलोग्राम तक; लक्षित सीमा 200 किलोमीटर तक
परिचालन ऊंचाईसमुद्र तल से 6,500 मीटर तक
लैंडिंग क्षेत्रलगभग 15 मीटर गुणा 15 मीटर
क्षेत्रडीप टेक्नोलॉजी; उप-क्षेत्र इंटेलिजेंट सिस्टम और रोबोटिक्स
मंत्रालयविज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग; टीडीबी सचिव श्री राजेश कुमार पाठक

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि टीडीबी का समझौता मुंबई की आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ हुआ, सहायता 151 करोड़ रुपये है और कुल लागत 302 करोड़ रुपये, कोष का नाम अनुसंधान विकास और नवाचार कोष है, प्लेटफॉर्म येटी है, यह वीटीओएल फिक्स्ड-विंग हाइब्रिड मानवरहित वाहन है, लक्ष्य टीआरएल-4 से टीआरएल-9 है, तथा विशेषताएं हैं 200 किलोग्राम भार, 200 किलोमीटर सीमा, 6,500 मीटर ऊंचाई और 15 गुणा 15 मीटर का लैंडिंग क्षेत्र।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

येटी परियोजना के लिए प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड कितनी वित्तीय सहायता देने पर सहमत हुआ है?

  1. A.101 करोड़ रुपये
  2. B.151 करोड़ रुपये
  3. C.251 करोड़ रुपये
  4. D.302 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 151 करोड़ रुपये

प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड को अनुसंधान विकास और नवाचार कोष के तहत इतनी सहायता देने पर सहमति दी है और यह ऋण वित्तपोषण के रूप में मिलेगी।

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Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

येटी अधिकतम कितना भार ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है?

  1. A.50 किलोग्राम
  2. B.100 किलोग्राम
  3. C.200 किलोग्राम
  4. D.500 किलोग्राम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 200 किलोग्राम

येटी को 200 किलोग्राम तक भार उठाने के लिए डिजाइन किया गया है और संयोग से इसकी लक्षित सीमा भी किलोमीटर में यही संख्या है, इसलिए दोनों तथ्य साथ याद रखना आसान रहता है।

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Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

येटी समुद्र तल से अधिकतम कितनी ऊंचाई पर संचालन के लिए डिजाइन किया गया है?

  1. A.4,500 मीटर
  2. B.5,500 मीटर
  3. C.6,500 मीटर
  4. D.8,500 मीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 6,500 मीटर

येटी को समुद्र तल से 6,500 मीटर तक की परिचालन ऊंचाई के लिए डिजाइन किया गया है, और इसी वजह से इसे पहाड़ी तथा ऊंचे इलाकों के काम के लिए सोचा जा सकता है।

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Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

येटी के विकास का समझौता आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ किस संस्था ने किया?

  1. A.रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
  2. B.प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड
  3. C.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
  4. D.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड

टीडीबी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करता है और इसी ने मुंबई की आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ अनुसंधान विकास और नवाचार कोष से सहायता देने का समझौता किया है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

येटी क्या है और इसे कौन विकसित कर रहा है?

येटी भारी भार उठाने वाला और लंबी दूरी तक उड़ने वाला स्वायत्त हवाई रसद वाहन है, जिसे मुंबई की आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी लिमिटेड प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के आरडीआई कोष से 151 करोड़ रुपये की सहायता से विकसित कर रही है।

येटी कितना भार और कितनी दूरी तक जा सकेगा?

यह 200 किलोग्राम तक भार ले जाने के लिए बना है, इसकी लक्षित सीमा 200 किलोमीटर तक है और परिचालन ऊंचाई समुद्र तल से 6,500 मीटर तक है। इसे लगभग 15 गुणा 15 मीटर का लैंडिंग क्षेत्र चाहिए।

इस परियोजना की कुल लागत कितनी है?

302 करोड़ रुपये। इसमें से प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अनुसंधान विकास और नवाचार कोष के तहत ऋण वित्तपोषण के जरिये 151 करोड़ रुपये दे रहा है।

इस परियोजना में टीआरएल-9 का क्या मतलब है?

प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर 9 वह चरण है जहां प्रणाली वास्तविक संचालन में खरी उतर चुकी होती है। येटी को इंजीनियरिंग, एकीकरण, परीक्षण और सत्यापन के जरिये टीआरएल-4 से टीआरएल-9 तक पहुंचाया जाना है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS