कॉयर निर्यात 305% बढ़कर ₹6,614.40 करोड़ पर पहुंचा
दुनिया के सबसे बड़े कॉयर उत्पादक भारत का कॉयर निर्यात बारह साल में 305.70% बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹6,614.40 करोड़ हो गया, 21,000 से अधिक इकाइयां चल रही हैं।

चर्चा में क्यों
14 अक्टूबर 2026 को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने भारत के कॉयर क्षेत्र की स्थिति सामने रखी। वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात ₹6,614.40 करोड़ रहा, बारह साल में 305.70% की बढ़त हुई और 21,000 से अधिक इकाइयों में 7 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है।
भारत कॉयर (नारियल रेशा) का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने इस क्षेत्र की ताजा तस्वीर सामने रखी है। कॉयर वह प्राकृतिक रेशा है जो नारियल के कड़े बाहरी छिलके से निकाला जाता है। देश के सबसे पुराने परंपरागत उद्योगों में गिना जाने वाला यह क्षेत्र उसी रेशे से रस्सी, चटाई, गद्दे, ब्रश और घर-गृहस्थी की दूसरी चीजें बनाता है। कच्चा माल नारियल का अपशिष्ट होने के कारण इसे पर्यावरण-हितैषी निर्माण माना जाता है और मंत्रालय इसकी प्रगति को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जोड़ता है।
क्षेत्र का आकार
दुनिया में बनने वाले कॉयर का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारत से आता है। उद्योग का कारोबार लगभग ₹16,000 करोड़ आंका गया है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का करीब 1% है। वित्त वर्ष 2025-26 में कॉयर और कॉयर उत्पादों का निर्यात ₹6,614.40 करोड़ का रहा। सबसे बड़े खरीदार अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन रहे। बाहर जाने वाले माल में कॉयर पिथ, रेशा, धागा और टफ्टेड चटाई सबसे आगे हैं। 21,000 से अधिक इकाइयां काम कर रही हैं, जिनसे 7 लाख से ज्यादा लोगों को सीधा और परोक्ष रोजगार मिलता है और इनमें 80% ग्रामीण घरों की महिलाएं हैं।
कॉयर विकास योजना
मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना कॉयर विकास योजना (CVY) इस क्षेत्र को आगे बढ़ाती है। इसके तहत नई मशीनों, तकनीक और उत्पादों पर खर्च होता है, कारीगरों को हुनर का प्रशिक्षण मिलता है, देश और विदेश में बिक्री बढ़ाई जाती है, प्रचार तथा मेलों में स्टॉल के लिए पैसा दिया जाता है, निर्यातकों को विदेशी प्रदर्शनियों तक पहुंचाया जाता है और क्षेत्र के आंकड़े तैयार किए जाते हैं।
बारह साल की उपलब्धियां
| निर्यात, वित्त वर्ष 2014-15 | ₹1,630.33 करोड़ |
| निर्यात, वित्त वर्ष 2025-26 | ₹6,614.40 करोड़ |
| इस अवधि में बढ़त | 305.70% |
| उद्यम पोर्टल पर इकाइयां | 21,000, रोजगार 2.3 लाख |
वर्ष 2014-15 से गिनें तो निर्यात चार गुना से अधिक हो गया है, यानी 305.70% की बढ़त। 68,000 से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 80% से अधिक महिलाएं हैं, और क्षेत्र में 150 से अधिक मशीनें, तकनीक तथा मूल्य-वर्धित उत्पाद सामने आए हैं। 1,000 से अधिक निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भेजा गया और निर्यात बाजार प्रोत्साहन के तहत 850 से अधिक उद्यमियों को ₹20 करोड़ से ज्यादा की मदद मिली। देश भर में 1,400 से अधिक प्रचार कार्यक्रम हुए और 950 से अधिक प्रदर्शनियों में भागीदारी की गई। विज्ञप्ति में महाराष्ट्र, केरल और आंध्र प्रदेश के उन उद्यमियों की कहानियां भी हैं जिन्होंने कॉयर बोर्ड और PMEGP की मदद से इकाइयां खड़ी कीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| क्षेत्र | कॉयर — नारियल के बाहरी छिलके से निकला रेशा |
|---|---|
| भारत का स्थान | कॉयर का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक |
| विश्व उत्पादन में हिस्सा | करीब दो-तिहाई |
| उद्योग का कारोबार | लगभग ₹16,000 करोड़; जीडीपी का करीब 1% |
| निर्यात, वित्त वर्ष 2025-26 | ₹6,614.40 करोड़ |
| निर्यात, वित्त वर्ष 2014-15 | ₹1,630.33 करोड़ |
| बढ़त | बारह साल में 305.70% |
| मुख्य खरीदार | अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन, ब्रिटेन |
| इकाइयां और रोजगार | 21,000 से अधिक इकाइयां; 7 लाख से ज्यादा कामगार, 80% ग्रामीण महिलाएं |
| उद्यम पोर्टल पर इकाइयां | 21,000 से अधिक, 2.3 लाख लोगों को रोजगार |
| योजना | कॉयर विकास योजना (CVY), एमएसएमई मंत्रालय |
| प्रशिक्षण | 68,000 से अधिक लोगों को, जिनमें 80% से ज्यादा महिलाएं |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि भारत कॉयर का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है और विश्व उत्पादन का करीब दो-तिहाई उससे आता है; वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात ₹6,614.40 करोड़, वित्त वर्ष 2014-15 में ₹1,630.33 करोड़, बढ़त 305.70%; कारोबार लगभग ₹16,000 करोड़ और जीडीपी में करीब 1%; 21,000 से अधिक इकाइयां तथा 7 लाख से ज्यादा कामगार, जिनमें 80% महिलाएं; योजना का नाम कॉयर विकास योजना, मंत्रालय एमएसएमई।
अभ्यास प्रश्न
कॉयर और कॉयर उत्पादों का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक तथा निर्यातक देश कौन है?
- A.इंडोनेशिया
- B.भारत
- C.फिलीपींस
- D.श्रीलंका
उत्तर देखें
कॉयर बनाने और उसे विदेश भेजने, दोनों में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है और विश्व के कुल कॉयर उत्पादन का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारतीय इकाइयों से आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कॉयर और कॉयर उत्पादों का निर्यात कितने मूल्य का रहा?
- A.₹1,630.33 करोड़
- B.₹3,284.75 करोड़
- C.₹6,614.40 करोड़
- D.₹16,000 करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर ₹6,614.40 करोड़ है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में कॉयर और कॉयर उत्पादों के निर्यात का मूल्य है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कॉयर विकास योजना (CVY) किस केंद्रीय मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है?
- A.वस्त्र मंत्रालय
- B.कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
- C.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- D.सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
उत्तर देखें
इसका मकसद कॉयर क्षेत्र का टिकाऊ विकास तथा कॉयर कारीगरों और कॉयर उद्योग को सहारा देना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर कितनी कॉयर इकाइयां दर्ज हैं और उनसे कितने लोगों को रोजगार मिलता है?
- A.11,000 से अधिक इकाइयां, 1.2 लाख लोगों को रोजगार
- B.21,000 से अधिक इकाइयां, 2.3 लाख लोगों को रोजगार
- C.31,000 से अधिक इकाइयां, 4.5 लाख लोगों को रोजगार
- D.51,000 से अधिक इकाइयां, 8.1 लाख लोगों को रोजगार
उत्तर देखें
इन इकाइयों को उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर लाने से वे औपचारिक एमएसएमई नीति-तंत्र का हिस्सा बन जाती हैं, जिससे उन्हें कर्ज, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ी सरकारी मदद मिल पाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कितने मूल्य का कॉयर निर्यात किया?
कॉयर और कॉयर उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में ₹6,614.40 करोड़ का रहा, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह ₹1,630.33 करोड़ था — बढ़त 305.70%। मुख्य खरीदार अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन हैं।
कॉयर विकास योजना कौन चलाता है?
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय इसे केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में चलाता है। इसमें नई मशीनों तथा उत्पादों, हुनर प्रशिक्षण, प्रचार, व्यापार मेलों में भागीदारी, बिक्री में मदद और क्षेत्र के आंकड़ों पर खर्च होता है।
भारत के कॉयर क्षेत्र में कितने लोगों को रोजगार मिलता है?
21,000 से अधिक इकाइयां 7 लाख से ज्यादा लोगों को सीधा और परोक्ष रोजगार देती हैं, जिनमें 80% ग्रामीण घरों की महिलाएं हैं। इनमें उद्यम पोर्टल पर दर्ज 21,000 से अधिक इकाइयों में 2.3 लाख लोग काम करते हैं।
कॉयर क्या है और इसे पर्यावरण-हितैषी क्यों कहा जाता है?
कॉयर नारियल के कड़े बाहरी छिलके से निकाला गया प्राकृतिक रेशा है। यह नारियल के उप-उत्पाद का उपयोग करता है और इससे चटाई, रस्सी तथा गद्दे बनते हैं, इसलिए इसे पर्यावरण-हितैषी निर्माण माना जाता है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2323051 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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