पेरिस में पहले अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को मोदी का संबोधन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस के पेरिस में आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस से संबोधित किया और भारत के लक्ष्य बताए।

चर्चा में क्यों
10 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस के पेरिस में आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस से संबोधित किया और 2035 तक स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन तथा 2040 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य दोहराया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 सितंबर 2026 को फ्रांस के पेरिस में हुए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। वे इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने इसे अपनी तरह का पहला सम्मेलन बताया। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को समय पर पहल करने और निमंत्रण देने के लिए धन्यवाद दिया।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष की संभावनाएं असीमित हैं और इसका सही उपयोग करने का दायित्व सब पर है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कक्षाओं में भीड़ बढ़ रही है, प्रौद्योगिकी लगातार अधिक शक्तिशाली हो रही है और इस क्षेत्र में हिस्सेदारों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। उनका सुझाव स्पष्ट था। देशों को आपस में टकराने के बजाय साथ काम करना चाहिए। उन्हें तुरंत लाभ के पीछे भागने के बजाय दीर्घकालिक टिकाऊपन देखना चाहिए। उन्हें किसी को बाहर रखने के बजाय सबको साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने इस सोच को वसुधैव कुटुंबकम से जोड़ा, जिसका अर्थ उन्होंने एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य बताया। उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक आंकड़ों का आदान-प्रदान खुलेपन और ईमानदारी के साथ हो, ताकि वे जनहित में काम आएं।
भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां
उन्होंने कहा कि इस यात्रा के केंद्र में इसरो है, जिसे कम लागत में बड़ी सफलता देने वाले मिशनों के लिए दुनिया भर में सराहा जाता है। भारतीय रॉकेट अब तक 34 देशों के 430 से अधिक पेलोड अंतरिक्ष में पहुंचा चुके हैं। उपग्रहों का उपयोग मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और नौवहन में होता है और इसका लाभ किसानों तथा मछुआरों तक पहुंचता है। उन्होंने आदित्य-एल1 का उल्लेख किया, जो इस समय सूर्य का अध्ययन कर रहा है, और याद दिलाया कि पिछले वर्ष एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचा था। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 के कारण भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बना।
आगे के लक्ष्य
| स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन | 2035 तक |
| चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री | 2040 तक |
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, इसलिए अब उद्यमशीलता की ऊर्जा इसरो की उत्कृष्टता से जुड़ रही है।
फ्रांस से जुड़ाव
उन्होंने याद दिलाया कि 1960 के दशक में थुम्बा से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू होने के समय से ही फ्रांस एक भरोसेमंद साझेदार रहा है। आज दोनों देश पृथ्वी अवलोकन और उन्नत प्रौद्योगिकियों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने फ्रांस और पूरी दुनिया को भारत की आगामी अंतरिक्ष यात्रा में सहयात्री बनने का न्योता दिया। अंत में उन्होंने कहा कि सभी देश मिलकर अंतरिक्ष का अन्वेषण करें, मिलकर नवाचार करें और मिलकर उसकी रक्षा करें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | पहला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन |
|---|---|
| स्थान | पेरिस, फ्रांस |
| संबोधन | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से |
| पहल और निमंत्रण | फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों |
| विदेशी पेलोड | 34 देशों के 430 से अधिक पेलोड प्रक्षेपित |
| स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन | लक्ष्य वर्ष 2035 |
| चंद्रमा पर भारतीय यात्री | लक्ष्य वर्ष 2040 |
| सूर्य मिशन | आदित्य-एल1 |
| चंद्रमा पर पहली उपलब्धि | चंद्रयान-3 दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरा |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि पेरिस की यह बैठक पहला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन थी, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर वीडियो कॉन्फ्रेंस से इसे संबोधित किया, 34 देशों के 430 से अधिक पेलोड का आंकड़ा, 2035 में स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री के लक्ष्य, सूर्य मिशन आदित्य-एल1 तथा चंद्रयान-3 की दक्षिणी ध्रुव लैंडिंग।
अभ्यास प्रश्न
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को संबोधित किया, वह कहां आयोजित हुआ?
- A.बर्लिन
- B.पेरिस
- C.रोम
- D.मैड्रिड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पेरिस
व्याख्या
सही उत्तर पेरिस है। विज्ञप्ति के अनुसार प्रधानमंत्री ने फ्रांस के पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को समय पर पहल करने और सौहार्दपूर्ण निमंत्रण देने के लिए धन्यवाद दिया तथा इसे अपनी तरह का पहला सम्मेलन बताया। अपने समापन संदेश में भी उन्होंने इसी शहर का नाम लेते हुए कहा कि पेरिस का यह सम्मेलन स्पष्ट संदेश दे कि सभी देश मिलकर अंतरिक्ष का अन्वेषण करेंगे, मिलकर नवाचार करेंगे और मिलकर उसकी रक्षा करेंगे। विकल्प बर्लिन गलत है, क्योंकि इस सम्मेलन के संदर्भ में जर्मनी या उसके किसी शहर का उल्लेख कहीं नहीं है। विकल्प रोम भी गलत है, क्योंकि इटली का नाम पूरे विवरण में नहीं आता। विकल्प मैड्रिड इसी कारण गलत है, क्योंकि स्पेन का कोई उल्लेख नहीं मिलता। विज्ञप्ति में केवल फ्रांस, उसकी राजधानी और वहां के राष्ट्रपति का नाम आता है, इसलिए पेरिस ही एकमात्र सही उत्तर है।
सम्मेलन में बताए गए लक्ष्य के अनुसार भारत अपना स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन किस वर्ष तक स्थापित करना चाहता है?
- A.2030
- B.2035
- C.2040
- D.2045
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2035
व्याख्या
सही उत्तर 2035 है। देश की भविष्य की रूपरेखा बताते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत 2035 तक स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा और 2040 तक एक अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजेगा। विज्ञप्ति में आगे की केवल यही दो तिथियां दी गई हैं और इनमें पहली तिथि अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़ी है। विकल्प 2040 सबसे भ्रमित करने वाला है, क्योंकि यह वर्ष विज्ञप्ति में आता तो है, लेकिन वह चंद्रमा पर मानव भेजने से जुड़ा है, अंतरिक्ष स्टेशन से नहीं; दोनों को आपस में मिला देने पर अंक कट जाएगा। विकल्प 2030 विज्ञप्ति में कहीं नहीं है और उसे केवल एक सामान्य दिखने वाले लक्ष्य वर्ष के रूप में रखा गया है। विकल्प 2045 भी इस संबोधन के विवरण में नहीं मिलता। याद रखने का आसान तरीका यह है कि पहले स्टेशन बनेगा और उसके पांच वर्ष बाद चंद्रमा पर उतरने का लक्ष्य है।
किस भारतीय मिशन का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इससे भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरने वाला पहला देश बना?
- A.चंद्रयान-2
- B.चंद्रयान-3
- C.आदित्य-एल1
- D.गगनयान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चंद्रयान-3
व्याख्या
सही उत्तर चंद्रयान-3 है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान-3 के कारण भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट उतरने वाला पहला देश बना और इस लैंडिंग ने दुनिया के लिए एक नया मानक तय किया। विकल्प चंद्रयान-2 गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति में इस उपलब्धि का श्रेय उसे कहीं नहीं दिया गया और इस प्रसंग में केवल तीसरे चंद्र मिशन का नाम आता है। विकल्प आदित्य-एल1 गलत है, क्योंकि उसका उल्लेख इसी हिस्से में होने के बावजूद पूरी तरह अलग उद्देश्य से है; उसे सूर्य के रहस्यों का अध्ययन करने वाला मिशन बताया गया है, चंद्र मिशन नहीं। विकल्प गगनयान का नाम इस विज्ञप्ति में आता ही नहीं है; संबोधन में केवल यह कहा गया कि पिछले वर्ष एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचा था, जो एक अलग तथ्य है और किसी मिशन का नाम नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पहला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन कहां हुआ?
फ्रांस के पेरिस में। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंस से इसे संबोधित किया, जिसकी पहल और निमंत्रण राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से आया था।
भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन कब तक बनाना चाहता है?
2035 तक। प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में यह भी बताया कि भारत 2040 तक एक अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की योजना पर काम कर रहा है।
भारतीय रॉकेटों ने कितने विदेशी पेलोड प्रक्षेपित किए हैं?
इसरो की प्रक्षेपण सेवाओं की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय रॉकेट 34 देशों के 430 से अधिक पेलोड अंतरिक्ष में पहुंचा चुके हैं।
स्रोत
- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पेरिस में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को संबोधित किया (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- प्रधानमंत्री के पेरिस में आयोजित इंटरनेशनल स्पेस समिट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किए गए संबोधन का मूल पाठ (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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