नमामि गंगे: गंगा बेसिन में जीपीआई अनुपालन 86 प्रतिशत पर
नमामि गंगे के अंतर्गत गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन 2017 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 86 प्रतिशत हुआ और बीओडी भार 72.46 प्रतिशत घटा।

चर्चा में क्यों
जल शक्ति मंत्रालय ने 13 अक्तूबर 2026 को नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण का ब्यौरा दिया और बताया कि गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन 2017 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 86 प्रतिशत हो गया तथा बेसिन का बीओडी भार 72.46 प्रतिशत घट गया।
जल शक्ति मंत्रालय ने 13 अक्तूबर 2026 को जारी समीक्षा में बताया कि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत कारखानों के अपशिष्ट पर पकड़ कैसे मजबूत हुई है। समीक्षा से पता चलता है कि कभी-कभार की छापेमारी की जगह अब हर साल होने वाली जांच, प्रयोगशाला के साक्ष्य और क्षेत्रवार लक्ष्यों की व्यवस्था बन गई है। इन इकाइयों को अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग अर्थात जीपीआई कहा जाता है।
जांच कौन करता है
इन इकाइयों की वार्षिक जांच 2017 में शुरू हुई थी और इसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण की भूमिका निभाता है। लक्ष्य गंगा बेसिन की हर जीपीआई तक पहुंचना है। मैदानी काम बाहरी एजेंसियों को, मुख्य रूप से राष्ट्रीय महत्व के तकनीकी संस्थानों को सौंपा जाता है, जो अपनी रिपोर्ट वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिये अपलोड करते हैं। हर दल में किसी तकनीकी संस्थान के कम से कम दो विशेषज्ञ और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक अधिकारी रहना आवश्यक है, तथा स्वच्छ गंगा के राज्य मिशन और जिला समितियां भी इसमें शामिल होती हैं। 2026 के चक्र के लिए 40 संस्थान नामित किए गए हैं, जबकि एक वर्ष पहले 25 संस्थान लगाए गए थे।
2025 के चक्र का दायरा
2025 के चक्र में कुल 3,703 इकाइयों की जांच हुई, जिनमें 1,296 गंगा बेसिन की और 2,407 यमुना बेसिन की थीं। छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 113 जिलों में फैले उद्योग देखे गए, जिनसे 46 सहायक तथा उप-सहायक नदियों में अपशिष्ट जाने की आशंका रहती है। दल उपचार संयंत्र के प्रवेश द्वार, निकास और वायु-मिश्रण टैंक से नमूने लेते हैं, पीएच, बीओडी, सीओडी, टीएसएस और टीडीएस मापते हैं, ऑनलाइन निगरानी के संपर्क की पुष्टि करते हैं, छिपे बाईपास ढूंढते हैं और गड़बड़ी की तस्वीर स्थान की मुहर के साथ दर्ज करते हैं। उस समय चालू 3,145 इकाइयों में 2,715 मानकों पर खरी उतरीं और 448 नहीं; ऐसी स्थिति में राज्य बोर्ड कारण बताओ नोटिस देते हैं और बंदी का आदेश भी दे सकते हैं।
2017 से 2025 तक बदलाव
| मानक (गंगा बेसिन) | 2017 | 2025 |
| अनुपालन | 39 प्रतिशत | 86 प्रतिशत |
| बीओडी भार | 26 टीपीडी | 7.16 टीपीडी |
| अपशिष्ट निस्सरण | 349 एमएलडी | 274.88 एमएलडी |
दोनों बेसिन को मिलाकर देखें तो अनुपालन 39 प्रतिशत से 70 प्रतिशत हुआ और बीओडी भार 26 टीपीडी से 12.02 टीपीडी रह गया, जबकि चालू इकाइयों की संख्या 888 से 3,154 हो गई। अकेले गंगा बेसिन में बीओडी भार 72.46 प्रतिशत और अपशिष्ट प्रवाह 21.24 प्रतिशत घटा।
चार्टर और जल की बचत
पांच क्षेत्रों के लिए अलग चार्टर हैं, लुगदी एवं कागज, चीनी, आसवनी, वस्त्र और चर्मशोधन, क्योंकि पहले के आकलन में बेसिन की लगभग 70 प्रतिशत जीपीआई और 88 प्रतिशत प्रदूषण भार इनका ही था। चीनी मिलों ने प्रति टन गन्ने पर ताजे जल की खपत 155 लीटर से 58 लीटर कर दी, और पुनर्चक्रित रेशे वाली 60 कागज मिलें अब शून्य द्रव निस्सरण पर चलती हैं, जिससे अनुमानित 928.89 एमएलडी भूजल बचता है। उसी वर्ष जांचे गए 41 सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों में 40 चालू थे, जिनकी क्षमता 514.53 एमएलडी और उपयोग 286.31 एमएलडी था, तथा 27 संयंत्र निर्धारित मानकों पर खरे उतरे। मंत्रालय के अनुसार प्रतिदिन लगभग 719 मिलियन लीटर भूजल बचा, सालाना ऊर्जा बचत करीब 1,277.6 मेगावाट रही और कार्बन पदचिह्न में अनुमानित 1,162.6 टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य की कमी आई। रामगंगा, कोसी, ढेला और बहेला जैसी नदियों में जल गुणवत्ता सुधरी है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्यक्रम | नमामि गंगे, जल शक्ति मंत्रालय |
|---|---|
| राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण | केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) |
| 2025 में जांची गई जीपीआई | 3,703 (गंगा बेसिन 1,296; यमुना बेसिन 2,407) |
| विस्तार | छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 113 जिले; 46 सहायक और उप-सहायक नदियां |
| गंगा बेसिन में अनुपालन | 2017 में 39 प्रतिशत से 2025 में 86 प्रतिशत |
| गंगा बेसिन में बीओडी भार | 26 टीपीडी से 7.16 टीपीडी, 72.46 प्रतिशत की कमी |
| गंगा बेसिन में अपशिष्ट निस्सरण | 349 एमएलडी से 274.88 एमएलडी, 21.24 प्रतिशत कम |
| चालू जीपीआई | 2017 के 888 से बढ़कर 2025 में 3,154 |
| जांच करने वाले संस्थान | 2026 चक्र के लिए 40 नामित, 2025 में 25 लगाए गए |
| जांचे गए सीईटीपी | 41, जिनमें 40 चालू और 27 मानकों पर खरे |
| चार्टर वाले क्षेत्र | लुगदी एवं कागज, चीनी, आसवनी, वस्त्र, चर्मशोधन |
| भूजल की बचत | प्रतिदिन लगभग 719 मिलियन लीटर |
परीक्षा की दृष्टि से
2025 के आंकड़े याद रखें: 3,703 जीपीआई की जांच, जिनमें 1,296 गंगा बेसिन और 2,407 यमुना बेसिन के, 113 जिले और 46 सहायक नदियां। गंगा बेसिन में अनुपालन 2017 के 39 प्रतिशत से 2025 में 86 प्रतिशत; बीओडी भार 26 टीपीडी से 7.16 टीपीडी, 72.46 प्रतिशत की कमी; अपशिष्ट प्रवाह 21.24 प्रतिशत घटा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण है, 2026 चक्र के लिए 40 तकनीकी संस्थान नामित हैं, और चार्टर वाले पांच क्षेत्र हैं लुगदी एवं कागज, चीनी, आसवनी, वस्त्र तथा चर्मशोधन।
अभ्यास प्रश्न
नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत 2025 में गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन स्तर कितना था?
- A.39 प्रतिशत
- B.86 प्रतिशत
- C.70 प्रतिशत
- D.95 प्रतिशत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 86 प्रतिशत है। जल शक्ति मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन 2017 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 86 प्रतिशत हो गया, और यह सुधार वार्षिक निरीक्षण, स्वतंत्र तकनीकी आकलन तथा क्षेत्र-विशिष्ट चार्टर से संभव हुआ। विकल्प क गलत है क्योंकि 39 प्रतिशत वर्ष 2017 का आरंभिक स्तर था, उसी वर्ष केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से वार्षिक निरीक्षण तंत्र शुरू हुआ था। विकल्प ग गलत है क्योंकि 70 प्रतिशत का आंकड़ा गंगा और यमुना दोनों बेसिन की सभी जांची गई इकाइयों को मिलाकर बनता है, जो अकेले गंगा बेसिन से बड़ा समूह है। विकल्प घ गलत है क्योंकि 95 प्रतिशत का उल्लेख आकलन में कहीं नहीं है। अनुपालन के साथ-साथ बेसिन का बीओडी भार 26 टीपीडी से 7.16 टीपीडी रह गया, जो 72.46 प्रतिशत की कमी है, और अपशिष्ट निस्सरण 349 एमएलडी से 274.88 एमएलडी हो गया।
नमामि गंगे के अंतर्गत 2025 के निरीक्षण चक्र में कितने अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की जांच की गई?
- A.1,296
- B.2,407
- C.3,703
- D.3,154
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 3,703 है। वर्ष 2025 के निरीक्षण चक्र में कुल 3,703 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की जांच हुई, जो छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 113 जिलों में फैले थे और जिनसे गंगा तथा यमुना की 46 सहायक एवं उप-सहायक नदियों में अपशिष्ट जाने की आशंका रहती है। विकल्प क गलत है क्योंकि 1,296 केवल गंगा बेसिन का हिस्सा है। विकल्प ख इसी कारण गलत है, क्योंकि 2,407 यमुना बेसिन का हिस्सा है और दोनों को जोड़ने पर पूरा आंकड़ा बनता है। विकल्प घ गलत है क्योंकि 3,154 उन इकाइयों की संख्या है जो 2025 में चालू पाई गईं, जबकि 2017 में यह संख्या 888 थी; यह जांची गई इकाइयों की संख्या नहीं है। निरीक्षण में उपचार संयंत्र के प्रवेश और निकास से नमूने, पीएच, बीओडी, सीओडी, टीएसएस तथा टीडीएस की माप, ऑनलाइन निगरानी की जांच और बाईपास के स्थान-चिह्नित साक्ष्य शामिल रहते हैं।
अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों के वार्षिक निरीक्षण के लिए राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण कौन संस्था है?
- A.राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन
- B.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- C.केंद्रीय भूजल बोर्ड
- D.राष्ट्रीय हरित अधिकरण
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड है। गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की वार्षिक निरीक्षण व्यवस्था 2017 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से शुरू हुई और समीक्षा में इसे ही राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण बताया गया है। निरीक्षण का काम तृतीय-पक्ष एजेंसियां करती हैं, मुख्य रूप से राष्ट्रीय महत्व के तकनीकी संस्थान, और 2026 के चक्र के लिए 40 संस्थान नामित किए गए हैं, जबकि एक वर्ष पहले 25 संस्थान लगाए गए थे। प्रत्येक निरीक्षण दल में तकनीकी संस्थान के कम से कम दो विशेषज्ञ और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक अधिकारी होना आवश्यक है। विकल्प क गलत है क्योंकि स्वच्छ गंगा मिशन कार्यक्रम चलाता है, यहां नामित नियामक नहीं है। विकल्प ग गलत है क्योंकि भूजल आकलन निरीक्षण पद्धति का केवल एक अंग है। विकल्प घ गलत है क्योंकि अधिकरण एक न्यायिक मंच है और इस निरीक्षण ढांचे में इसका उल्लेख नहीं है।
गंगा बेसिन में 2017 से 2025 के बीच बीओडी भार में कितनी कमी आई?
- A.21.24 प्रतिशत
- B.39 प्रतिशत
- C.72.46 प्रतिशत
- D.65 प्रतिशत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 72.46 प्रतिशत है। समीक्षा के अनुसार गंगा बेसिन का बीओडी भार 2017 के 26 टीपीडी से घटकर 2025 में 7.16 टीपीडी रह गया, जो 72.46 प्रतिशत की कमी बैठती है। विकल्प क गलत है क्योंकि 21.24 प्रतिशत उसी बेसिन में अपशिष्ट निस्सरण की कमी है, जो 349 एमएलडी से 274.88 एमएलडी हुआ, न कि कार्बनिक भार की। विकल्प ख गलत है क्योंकि 39 प्रतिशत वर्ष 2017 में अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन स्तर था, जो 2025 तक 86 प्रतिशत पहुंचा। विकल्प घ गलत है क्योंकि 65 प्रतिशत की कमी 2022 में चिह्नित अधिक प्रदूषण भार वाली इकाइयों के अलग अभियान से जुड़ी है, जिनका भार 18.68 टीपीडी से 6.381 टीपीडी रह गया। दोनों बेसिन को मिलाकर इसी अवधि में बीओडी भार 26 टीपीडी से 12.02 टीपीडी हुआ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन कितना सुधरा है?
नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत यह 2017 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 86 प्रतिशत हो गया। इसी अवधि में बेसिन का बीओडी भार 26 टीपीडी से 7.16 टीपीडी रह गया, यानी 72.46 प्रतिशत की कमी, और अपशिष्ट निस्सरण 349 एमएलडी से 274.88 एमएलडी हो गया।
2025 के निरीक्षण चक्र में कितने अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की जांच हुई?
कुल 3,703 इकाइयों की, जिनमें 1,296 गंगा बेसिन और 2,407 यमुना बेसिन की थीं। ये छह राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश के 113 जिलों में थीं और इनसे 46 सहायक एवं उप-सहायक नदियों में अपशिष्ट जाने की आशंका रहती है।
इन वार्षिक निरीक्षणों के लिए राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण कौन है?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड। जीपीआई की वार्षिक जांच 2017 में इसके सहयोग से शुरू हुई, काम तृतीय-पक्ष तकनीकी संस्थान करते हैं, और 2026 के चक्र के लिए 40 ऐसे संस्थान नामित हुए हैं, जबकि पिछले वर्ष 25 थे।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322666 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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