नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत 2025 में गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन स्तर कितना था?
- A.39 प्रतिशत
- B.86 प्रतिशत
- C.70 प्रतिशत
- D.95 प्रतिशत
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 86 प्रतिशत है। जल शक्ति मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन 2017 के 39 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 86 प्रतिशत हो गया, और यह सुधार वार्षिक निरीक्षण, स्वतंत्र तकनीकी आकलन तथा क्षेत्र-विशिष्ट चार्टर से संभव हुआ। विकल्प क गलत है क्योंकि 39 प्रतिशत वर्ष 2017 का आरंभिक स्तर था, उसी वर्ष केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से वार्षिक निरीक्षण तंत्र शुरू हुआ था। विकल्प ग गलत है क्योंकि 70 प्रतिशत का आंकड़ा गंगा और यमुना दोनों बेसिन की सभी जांची गई इकाइयों को मिलाकर बनता है, जो अकेले गंगा बेसिन से बड़ा समूह है। विकल्प घ गलत है क्योंकि 95 प्रतिशत का उल्लेख आकलन में कहीं नहीं है। अनुपालन के साथ-साथ बेसिन का बीओडी भार 26 टीपीडी से 7.16 टीपीडी रह गया, जो 72.46 प्रतिशत की कमी है, और अपशिष्ट निस्सरण 349 एमएलडी से 274.88 एमएलडी हो गया।
पूरा लेख पढ़ें: नमामि गंगे: गंगा बेसिन में जीपीआई अनुपालन 86 प्रतिशत पर
अभ्यास प्रश्न
नमामि गंगे के अंतर्गत 2025 के निरीक्षण चक्र में कितने अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की जांच की गई?
- A.1,296
- B.2,407
- C.3,703
- D.3,154
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व्याख्या
सही उत्तर 3,703 है। वर्ष 2025 के निरीक्षण चक्र में कुल 3,703 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की जांच हुई, जो छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 113 जिलों में फैले थे और जिनसे गंगा तथा यमुना की 46 सहायक एवं उप-सहायक नदियों में अपशिष्ट जाने की आशंका रहती है। विकल्प क गलत है क्योंकि 1,296 केवल गंगा बेसिन का हिस्सा है। विकल्प ख इसी कारण गलत है, क्योंकि 2,407 यमुना बेसिन का हिस्सा है और दोनों को जोड़ने पर पूरा आंकड़ा बनता है। विकल्प घ गलत है क्योंकि 3,154 उन इकाइयों की संख्या है जो 2025 में चालू पाई गईं, जबकि 2017 में यह संख्या 888 थी; यह जांची गई इकाइयों की संख्या नहीं है। निरीक्षण में उपचार संयंत्र के प्रवेश और निकास से नमूने, पीएच, बीओडी, सीओडी, टीएसएस तथा टीडीएस की माप, ऑनलाइन निगरानी की जांच और बाईपास के स्थान-चिह्नित साक्ष्य शामिल रहते हैं।
अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों के वार्षिक निरीक्षण के लिए राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण कौन संस्था है?
- A.राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन
- B.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- C.केंद्रीय भूजल बोर्ड
- D.राष्ट्रीय हरित अधिकरण
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व्याख्या
सही उत्तर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड है। गंगा बेसिन के अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों की वार्षिक निरीक्षण व्यवस्था 2017 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से शुरू हुई और समीक्षा में इसे ही राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण बताया गया है। निरीक्षण का काम तृतीय-पक्ष एजेंसियां करती हैं, मुख्य रूप से राष्ट्रीय महत्व के तकनीकी संस्थान, और 2026 के चक्र के लिए 40 संस्थान नामित किए गए हैं, जबकि एक वर्ष पहले 25 संस्थान लगाए गए थे। प्रत्येक निरीक्षण दल में तकनीकी संस्थान के कम से कम दो विशेषज्ञ और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का एक अधिकारी होना आवश्यक है। विकल्प क गलत है क्योंकि स्वच्छ गंगा मिशन कार्यक्रम चलाता है, यहां नामित नियामक नहीं है। विकल्प ग गलत है क्योंकि भूजल आकलन निरीक्षण पद्धति का केवल एक अंग है। विकल्प घ गलत है क्योंकि अधिकरण एक न्यायिक मंच है और इस निरीक्षण ढांचे में इसका उल्लेख नहीं है।
गंगा बेसिन में 2017 से 2025 के बीच बीओडी भार में कितनी कमी आई?
- A.21.24 प्रतिशत
- B.39 प्रतिशत
- C.72.46 प्रतिशत
- D.65 प्रतिशत
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व्याख्या
सही उत्तर 72.46 प्रतिशत है। समीक्षा के अनुसार गंगा बेसिन का बीओडी भार 2017 के 26 टीपीडी से घटकर 2025 में 7.16 टीपीडी रह गया, जो 72.46 प्रतिशत की कमी बैठती है। विकल्प क गलत है क्योंकि 21.24 प्रतिशत उसी बेसिन में अपशिष्ट निस्सरण की कमी है, जो 349 एमएलडी से 274.88 एमएलडी हुआ, न कि कार्बनिक भार की। विकल्प ख गलत है क्योंकि 39 प्रतिशत वर्ष 2017 में अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योगों का अनुपालन स्तर था, जो 2025 तक 86 प्रतिशत पहुंचा। विकल्प घ गलत है क्योंकि 65 प्रतिशत की कमी 2022 में चिह्नित अधिक प्रदूषण भार वाली इकाइयों के अलग अभियान से जुड़ी है, जिनका भार 18.68 टीपीडी से 6.381 टीपीडी रह गया। दोनों बेसिन को मिलाकर इसी अवधि में बीओडी भार 26 टीपीडी से 12.02 टीपीडी हुआ।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति का एआई आधारित एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र कहां स्थित है?
- A.आनंद विहार
- B.शास्त्री पार्क
- C.केशोपुर
- D.नंद नगरी
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व्याख्या
सही उत्तर शास्त्री पार्क है, जहां दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने अपना एआई आधारित एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र बनाया है और जिसका दौरा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री तथा दिल्ली की मुख्यमंत्री ने किया। यह केंद्र वायु गुणवत्ता, धूल नियंत्रण स्थलों, परिवेशी शोर, औद्योगिक उत्सर्जन, पराली जलाने की घटनाओं, नागरिक शिकायतों और प्रवर्तन वाहनों के आंकड़े एक ही डिजिटल मंच पर लाता है तथा कैमरों और स्थान तकनीक से चौबीसों घंटे नजर रखता है। इसे पंद्रह बाहरी प्रणालियों से जोड़ा जाना है, जिनमें नौ जुड़ चुकी हैं और बाकी छह चरणबद्ध रूप से जोड़ी जा रही हैं। विकल्प A यानी आनंद विहार वह हॉटस्पॉट है जिसकी समीक्षा हुई और जहां से बसें रवाना हुईं, केंद्र का स्थान नहीं। विकल्प C और D उन पांच डिपो में से दो हैं जहां उसी दिन चार्जिंग स्टेशन शुरू हुए।
13 अक्टूबर 2026 को नए केंद्र शुरू होने के बाद दिल्ली में सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की कुल संख्या कितनी हो गई?
- A.47
- B.53
- C.60
- D.75
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व्याख्या
सही उत्तर 60 है। दिल्ली में पहले सैंतालीस निगरानी केंद्र थे, जिन्हें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान और आवास तथा शहरी कार्य से जुड़े मंत्रालय जैसी एजेंसियां चलाती हैं। समिति द्वारा लगाए तेरह नए केंद्रों के उद्घाटन के बाद यह जाल साठ केंद्रों का हो गया। विकल्प A नए केंद्र जुड़ने से पहले की संख्या है, इसलिए वह पुराना आंकड़ा है। विकल्प B गलत जोड़ से बना आंकड़ा है और घोषणा में कहीं नहीं आता, जबकि विकल्प D बहुत ऊंचा है। मंत्री ने बताया कि आबादी पर आधारित पुराने मानकों के अलावा अब हर पच्चीस वर्ग किलोमीटर पर एक केंद्र का ढांचा अपनाया गया है और इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य शहरों तक बढ़ाया जाएगा। आंकड़े बोर्ड के सर्वर और समीर मोबाइल ऐप से जनता तक पहुंचते हैं।