अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम से 590 विद्यार्थी पूर्वोत्तर पहुंचे
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम के तहत एक साल में 590 से अधिक विद्यार्थी पूर्वोत्तर घूमे, मंत्री सिंधिया ने मिजोरम में संवाद किया।

चर्चा में क्यों
13 अक्टूबर 2026 को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने बताया कि अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम से एक वर्ष में 590 से अधिक विद्यार्थी पूर्वोत्तर भारत घूम चुके हैं, इसी दिन मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मिजोरम विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से बातचीत की।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) ने 13 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसके अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम के जरिये पिछले एक वर्ष में देश के दूसरे हिस्सों के 590 से अधिक विद्यार्थी पूर्वोत्तर भारत की यात्रा कर चुके हैं। यह आंकड़ा उस समय सामने आया जब संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मिजोरम के दो दिवसीय दौरे के दौरान मिजोरम विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से बातचीत की।
कार्यक्रम क्या है
अष्टलक्ष्मी दर्शन डोनर मंत्रालय की एक अनुभव और आदान-प्रदान पहल है। इसके तहत पूर्वोत्तर के बाहर के राज्यों के युवाओं को इस क्षेत्र के आठ राज्यों में लाया जाता है, ताकि वे यहां की कला, त्योहार, भोजन, भाषाओं और शिक्षण संस्थानों को किताबों में पढ़ने के बजाय अपनी आंखों से देख सकें। मिजोरम विश्वविद्यालय में मंत्री जिस समूह से मिले, वह गोवा और चंडीगढ़ से आया था और उनसे यात्रा के अनुभव पूछे गए।
नाम का अर्थ
पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को देश की अष्टलक्ष्मी, यानी समृद्धि के आठ रूप कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस क्षेत्र के लिए यही संबोधन प्रयोग करते हैं और कार्यक्रम इसी सोच पर खड़ा है — पूर्वोत्तर को देश की दूरस्थ सीमा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय समृद्धि का स्रोत मानना।
मंत्री ने क्या कहा
विद्यार्थियों से बातचीत में सिंधिया ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, उसकी जीवित परंपराओं और विकास की संभावनाओं पर बात की। उनका कहना था कि इस तरह की यात्राएं दो तरफ काम करती हैं। बाहर से आया विद्यार्थी पूर्वोत्तर को उसकी अपनी शर्तों पर समझना सीखता है, और क्षेत्र नीतियों से अधिक आपसी परिचय के बल पर देश के शेष हिस्से से जुड़ता है। मंत्रालय ने इसे जन-से-जन संपर्क मजबूत करने का माध्यम बताया।
विकसित भारत 2047 से जोड़
मंत्रालय ने इस पहल को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के भीतर रखा, यानी स्वतंत्रता की शताब्दी तक विकसित भारत का संकल्प। इसके साथ तीन बातें गिनाई गईं — युवाओं की भागीदारी बढ़ाना, देश की विविधता का उत्सव मनाना और राष्ट्रीय विकास यात्रा में पूर्वोत्तर की भूमिका को बड़ा करना। परीक्षार्थी के लिए इसे डोनर मंत्रालय की युवा संपर्क योजना के रूप में याद रखना सबसे उपयोगी है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्यक्रम | अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम |
|---|---|
| संचालक मंत्रालय | पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) |
| अब तक विद्यार्थी | एक वर्ष में 590 से अधिक |
| मंत्री | ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया (संचार तथा डोनर) |
| संवाद स्थल | मिजोरम विश्वविद्यालय, मिजोरम |
| विद्यार्थी कहां से आए | गोवा और चंडीगढ़ |
| अष्टलक्ष्मी | पूर्वोत्तर के आठ राज्य |
| जुड़ा लक्ष्य | विकसित भारत 2047 |
परीक्षा की दृष्टि से
कार्यक्रम का नाम (अष्टलक्ष्मी दर्शन), संचालक मंत्रालय (पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय), भागीदारी का आंकड़ा (एक वर्ष में 590 से अधिक विद्यार्थी), मंत्री (ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया), संवाद का स्थान (मिजोरम विश्वविद्यालय), आने वाले विद्यार्थियों के राज्य (गोवा और चंडीगढ़), अष्टलक्ष्मी का अर्थ आठ पूर्वोत्तर राज्य, और विकसित भारत 2047 से जुड़ाव याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम किस केंद्रीय मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है?
- A.संस्कृति मंत्रालय
- B.शिक्षा मंत्रालय
- C.पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय
- D.पर्यटन मंत्रालय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) है। अष्टलक्ष्मी दर्शन इसी मंत्रालय की युवा संपर्क पहल है, जिसके तहत पूर्वोत्तर के बाहर के राज्यों के विद्यार्थियों को क्षेत्र के आठ राज्यों में लाया जाता है, ताकि वे वहां की संस्कृति, संस्थानों और विकास कार्यों को सीधे देख सकें। संचार तथा डोनर मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मिजोरम विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान इसका उल्लेख किया और मंत्रालय ने भागीदारी का आंकड़ा एक वर्ष में 590 से अधिक विद्यार्थी बताया। विकल्प A यानी संस्कृति मंत्रालय गलत है, क्योंकि सांस्कृतिक आदान-प्रदान इसका उद्देश्य होने पर भी यह संस्कृति क्षेत्र की योजना नहीं है। विकल्प B यानी शिक्षा मंत्रालय गलत है, क्योंकि यह यात्रा किसी पाठ्यक्रम या छात्रवृत्ति व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। विकल्प D यानी पर्यटन मंत्रालय भी गलत है, क्योंकि इसका घोषित लक्ष्य पर्यटन बढ़ाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकीकरण और युवाओं की भागीदारी है।
अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम के तहत पिछले एक वर्ष में कितने विद्यार्थी शामिल हुए हैं?
- A.290 से अधिक
- B.450 से अधिक
- C.590 से अधिक
- D.860 से अधिक
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 590 से अधिक है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम के लिए पिछले एक वर्ष का यही भागीदारी आंकड़ा दिया है और परीक्षा में इसी संख्या के पूछे जाने की संभावना सबसे अधिक है। इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से विद्यार्थी आते हैं; मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया मिजोरम विश्वविद्यालय में जिस समूह से मिले, वह गोवा और चंडीगढ़ से आया था। विकल्प A और B में संख्या वास्तविक आंकड़े से कम है, जबकि विकल्प D में यह अधिक बताई गई है, इसलिए तीनों गलत हैं। इस संख्या के साथ तीन बातें जोड़कर याद रखें — कार्यक्रम चलाने वाला मंत्रालय, क्षेत्र के आठ राज्यों को देश की अष्टलक्ष्मी कहने की सोच, और मंत्रालय द्वारा इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ना।
पूर्वोत्तर भारत के लिए प्रयुक्त 'अष्टलक्ष्मी' शब्द में 'अष्ट' किसे दर्शाता है?
- A.क्षेत्र के आठ राज्य
- B.क्षेत्र के आठ सीमावर्ती जिले
- C.क्षेत्र की आठ प्रमुख नदियां
- D.आठ स्वायत्त जनजातीय परिषदें
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर क्षेत्र के आठ राज्य है। पूर्वोत्तर भारत को देश की अष्टलक्ष्मी कहा जाता है, यानी समृद्धि के आठ रूप, जिनमें क्षेत्र का प्रत्येक राज्य एक रूप माना गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस क्षेत्र के लिए यही संबोधन प्रयोग करते हैं और डोनर मंत्रालय का अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम इसी विचार पर आधारित है — यात्रा पर आए विद्यार्थियों को यह दिखाना कि पूर्वोत्तर देश की समृद्धि का स्रोत है, कोई दूरस्थ छोर नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इस शब्द में गिनती राज्यों की होती है, सीमावर्ती जिलों की नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि क्षेत्र की नदियां महत्वपूर्ण होने पर भी इस नाम का आधार नहीं हैं। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि स्वायत्त जनजातीय परिषदें इनमें से कुछ राज्यों की संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और अष्टलक्ष्मी में गिने गए आठ का अर्थ वे नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम क्या है?
यह पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की पहल है, जिसके तहत देश के दूसरे हिस्सों के विद्यार्थियों को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में लाकर वहां की संस्कृति और विकास से परिचित कराया जाता है। एक वर्ष में 590 से अधिक विद्यार्थी इसमें शामिल हुए हैं।
अब तक कितने विद्यार्थी इस कार्यक्रम में शामिल हुए हैं?
डोनर मंत्रालय के अनुसार पिछले एक वर्ष में 590 से अधिक विद्यार्थी इस कार्यक्रम के तहत पूर्वोत्तर भारत की यात्रा कर चुके हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों को अष्टलक्ष्मी क्यों कहा जाता है?
क्षेत्र के आठ राज्यों को देश की अष्टलक्ष्मी यानी समृद्धि के आठ रूप कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस संबोधन से पूर्वोत्तर को देश के विकास के केंद्र में रखते हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322586 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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