कॉयर विकास योजना (CVY) किस केंद्रीय मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है?
- A.वस्त्र मंत्रालय
- B.कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
- C.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- D.सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय है, जो कॉयर विकास योजना को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में चलाता है। इसका मकसद कॉयर क्षेत्र का टिकाऊ विकास तथा कॉयर कारीगरों और कॉयर उद्योग को सहारा देना है। योजना के तहत नई मशीनों, तकनीक और उत्पादों का विकास होता है, हुनर का प्रशिक्षण तथा प्रचार कार्यक्रम चलाए जाते हैं, देश और विदेश दोनों बाजारों में बिक्री बढ़ाई जाती है, प्रचार तथा व्यापार मेलों से जागरूकता फैलाई जाती है, बिक्री बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है, निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों तक पहुंचाया जाता है और क्षेत्र के आंकड़े तैयार कर प्रकाशित किए जाते हैं। कॉयर एक रेशा, खेती का उप-उत्पाद और निर्यात की वस्तु होने पर भी यह योजना वस्त्र मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय या वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के पास नहीं है, इसलिए विकल्प A, B और C गलत हैं। कामकाज कॉयर बोर्ड और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ मिलकर होता है।
पूरा लेख पढ़ें: कॉयर निर्यात 305% बढ़कर ₹6,614.40 करोड़ पर पहुंचा
अभ्यास प्रश्न
कॉयर और कॉयर उत्पादों का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक तथा निर्यातक देश कौन है?
- A.इंडोनेशिया
- B.भारत
- C.फिलीपींस
- D.श्रीलंका
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कॉयर बनाने और उसे विदेश भेजने, दोनों में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है और विश्व के कुल कॉयर उत्पादन का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारतीय इकाइयों से आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कॉयर और कॉयर उत्पादों का निर्यात कितने मूल्य का रहा?
- A.₹1,630.33 करोड़
- B.₹3,284.75 करोड़
- C.₹6,614.40 करोड़
- D.₹16,000 करोड़
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सही उत्तर ₹6,614.40 करोड़ है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में कॉयर और कॉयर उत्पादों के निर्यात का मूल्य है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर कितनी कॉयर इकाइयां दर्ज हैं और उनसे कितने लोगों को रोजगार मिलता है?
- A.11,000 से अधिक इकाइयां, 1.2 लाख लोगों को रोजगार
- B.21,000 से अधिक इकाइयां, 2.3 लाख लोगों को रोजगार
- C.31,000 से अधिक इकाइयां, 4.5 लाख लोगों को रोजगार
- D.51,000 से अधिक इकाइयां, 8.1 लाख लोगों को रोजगार
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इन इकाइयों को उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर लाने से वे औपचारिक एमएसएमई नीति-तंत्र का हिस्सा बन जाती हैं, जिससे उन्हें कर्ज, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ी सरकारी मदद मिल पाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी किस अधिनियम के अंतर्गत होती है?
- A.खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957
- B.अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002
- C.राज्यक्षेत्रीय जलसीमा अधिनियम, 1976
- D.तटीय विनियमन क्षेत्र अधिनियम, 2011
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इस ढांचे का उद्देश्य समुद्र तल के खनिज संसाधनों के आवंटन में पारदर्शिता रखना और देश की अपतटीय संभावना का क्रमबद्ध अन्वेषण कराना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अपतटीय खनिज ब्लॉक नीलामी में लेनदेन सलाहकार कौन है?
- A.भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
- B.एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड
- C.एमएसटीसी
- D.राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास
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शेष तीनों विकल्प इसी कार्यक्रम में शामिल थे, परंतु उनकी भूमिका अलग थी, इसीलिए वे आकर्षक भ्रामक विकल्प बनते हैं।
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