अंडमान सागर के दो अपतटीय खनिज ब्लॉक नीलामी के लिए पेश
खान मंत्रालय ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी पर कार्यक्रम किया; अंडमान सागर के दोनों ब्लॉक 1,632 वर्ग किलोमीटर में हैं।

चर्चा में क्यों
13 अक्टूबर 2026 को खान मंत्रालय ने नई दिल्ली में अंडमान सागर के दो अपतटीय खनिज ब्लॉकों, सीवेल राइज-01 और वेस्ट सीवेल रिज-01, की नीलामी पर आउटरीच कार्यक्रम किया, जिनका कुल क्षेत्र 1,632 वर्ग किलोमीटर है।
खान मंत्रालय ने नई दिल्ली में अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी पर एक आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें संभावित बोलीदाता, सलाहकार संस्थाएं और सरकारी एजेंसियां शामिल हुईं। मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को निविदा आमंत्रण सूचना जारी कर अंडमान सागर में स्थित दो ब्लॉकों के परिचालन अधिकार देने की प्रक्रिया शुरू की थी। कार्यक्रम में इन ब्लॉकों, लागू नियमों, बोली की प्रक्रिया और अन्वेषण के लिए उपलब्ध सहायता की जानकारी दी गई।
दोनों ब्लॉक
नीलामी में सीवेल राइज-01 और वेस्ट सीवेल रिज-01 ब्लॉक रखे गए हैं। दोनों में बहुधात्विक पिंड और परत मिलते हैं, और दोनों समग्र लाइसेंस के लिए पेश किए गए हैं, जिसके तहत धारक पहले अन्वेषण करता है और फिर उत्पादन की ओर बढ़ सकता है। सीवेल राइज-01 का क्षेत्र 632 वर्ग किलोमीटर है और वेस्ट सीवेल रिज-01 का 1,000 वर्ग किलोमीटर, इसलिए नीलामी में रखा कुल क्षेत्र 1,632 वर्ग किलोमीटर बैठता है। इन बहुधात्विक पिंडों और परतों में निकल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज होते हैं, जो उद्योग तथा नई तकनीकों के लिए आवश्यक हैं।
अधिकारियों ने क्या कहा
खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने कहा कि आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा बदलाव और प्रतिस्पर्धी निर्माण के लिए देश की खनिज आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने पूर्वी तट पर बन रहे क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क की ओर ध्यान दिलाया, जो समुद्र तल से निकले खनिजों के प्रसंस्करण में सहायक होगा। अतिरिक्त सचिव वीणा कुमारी डरमल ने नीलामी से जुड़े नीतिगत सुधार बताए। हितधारकों की राय पर मंत्रालय ने ब्लॉकों की सीमाएं नए सिरे से तय की हैं और पिंड तथा परत वाले ब्लॉकों का क्षेत्र बढ़ाया है, जिससे अन्वेषण में अधिक सहूलियत मिले। उन्होंने बताया कि विशेष आर्थिक क्षेत्र में आधारभूत पर्यावरणीय आंकड़े जुटाने और पर्यावरण प्रबंधन योजना बनाने से जुड़े संदर्भ-निर्देश अन्य केंद्रीय मंत्रालयों को टिप्पणी के लिए भेजे गए हैं और उन्हें शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा।
नीलामी में किसकी क्या भूमिका
- भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने ब्लॉकों की भूवैज्ञानिक विशेषताएं और खनिज संभावना प्रस्तुत की।
- लेनदेन सलाहकार एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड ने निविदा शर्तें और नीलामी प्रक्रिया समझाई।
- नीलामी मंच उपलब्ध कराने वाली एमएसटीसी ने निविदा दस्तावेज खरीदने और बोली जमा करने की प्रक्रिया बताई।
- राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास ने समग्र लाइसेंस धारकों को अन्वेषण खर्च की आंशिक वापसी देने वाली योजना की जानकारी दी।
कानून और तिथियां
नीलामी अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत हो रही है, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा अपतटीय क्षेत्र खनिज (नीलामी) नियम, 2024 भी लागू हैं। निविदा दस्तावेजों की बिक्री 1 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई। पूर्व-बोली सम्मेलन 4 नवंबर 2026 को होगा और प्रश्न भेजने की अंतिम तिथि 13 नवंबर 2026 है। दस्तावेज 21 दिसंबर 2026 तक खरीदे जा सकते हैं और बोली जमा करने की अंतिम तिथि 28 दिसंबर 2026 है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आयोजन | अपतटीय खनिज ब्लॉक नीलामी पर आउटरीच कार्यक्रम, नई दिल्ली |
|---|---|
| मंत्रालय | खान मंत्रालय |
| ब्लॉक | सीवेल राइज-01 और वेस्ट सीवेल रिज-01, अंडमान सागर |
| क्षेत्र | 632 वर्ग किमी और 1,000 वर्ग किमी, कुल 1,632 वर्ग किमी |
| खनिज | बहुधात्विक पिंड और परत, जिनमें निकल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज |
| लाइसेंस | समग्र लाइसेंस |
| कानून | अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 (2023 में संशोधित); नीलामी नियम, 2024 |
| लेनदेन सलाहकार | एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड |
| नीलामी मंच | एमएसटीसी |
| बोली की अंतिम तिथि | 28 दिसंबर 2026 |
परीक्षा की दृष्टि से
दोनों ब्लॉकों के नाम, उनका सागर (अंडमान सागर), क्षेत्र (632 और 1,000 वर्ग किमी, कुल 1,632 वर्ग किमी), खनिज (बहुधात्विक पिंड और परत, जिनमें निकल, कोबाल्ट, तांबा, मैंगनीज), अधिनियम 2002 और उसका 2023 का संशोधन, नीलामी नियम 2024, लेनदेन सलाहकार एसबीआईकैप्स, मंच एमएसटीसी तथा बोली की अंतिम तिथि 28 दिसंबर 2026 याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
खान मंत्रालय द्वारा नीलामी में रखे गए दोनों अपतटीय खनिज ब्लॉक किस सागर में स्थित हैं?
- A.अरब सागर
- B.अंडमान सागर
- C.लक्षद्वीप सागर
- D.ओडिशा तट के पास बंगाल की खाड़ी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर अंडमान सागर है। नीलामी में रखे गए दोनों ब्लॉक, सीवेल राइज-01 और वेस्ट सीवेल रिज-01, अंडमान सागर में स्थित हैं और दोनों में बहुधात्विक पिंड तथा परत मिलते हैं। सीवेल राइज-01 का क्षेत्र 632 वर्ग किलोमीटर और वेस्ट सीवेल रिज-01 का 1,000 वर्ग किलोमीटर है, इसलिए नीलामी कुल 1,632 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की है। प्रत्येक ब्लॉक समग्र लाइसेंस के लिए पेश किया गया है, जिसके तहत धारक पहले अन्वेषण करता है और फिर उत्पादन की दिशा में बढ़ता है। शेष विकल्प गलत हैं, क्योंकि 1 अक्टूबर 2026 को जारी निविदा आमंत्रण सूचना में अरब सागर, लक्षद्वीप सागर या ओडिशा तट के किसी ब्लॉक को शामिल नहीं किया गया था। ब्लॉकों के नाम के साथ निकल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज भी याद रखें।
नीलामी में रखे गए दोनों अपतटीय खनिज ब्लॉकों का कुल क्षेत्र कितना है?
- A.632 वर्ग किलोमीटर
- B.1,000 वर्ग किलोमीटर
- C.1,632 वर्ग किलोमीटर
- D.2,632 वर्ग किलोमीटर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 1,632 वर्ग किलोमीटर है। इसमें सीवेल राइज-01 का हिस्सा 632 वर्ग किलोमीटर है और वेस्ट सीवेल रिज-01 का 1,000 वर्ग किलोमीटर, इसलिए दोनों मिलकर पूछा गया आंकड़ा बनाते हैं। विकल्प क केवल छोटे ब्लॉक का क्षेत्र देता है और विकल्प ख केवल बड़े ब्लॉक का, इसलिए दोनों गलत हैं, जबकि विकल्प घ दोनों का जोड़ ही नहीं है। मंत्रालय ने संभावित बोलीदाताओं की राय सुनकर ब्लॉकों की सीमाएं नए सिरे से तय की थीं और पिंड तथा परत वाले ब्लॉकों का क्षेत्र बढ़ाया था, जिससे समुद्र में अन्वेषण के लिए अधिक गुंजाइश बने। दोनों ब्लॉक अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत समग्र लाइसेंस के लिए पेश हैं। प्रत्येक ब्लॉक का अलग क्षेत्र भी याद रखें।
अपतटीय खनिज ब्लॉक नीलामी में लेनदेन सलाहकार कौन है?
- A.भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
- B.एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड
- C.एमएसटीसी
- D.राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड है, जो लेनदेन सलाहकार के रूप में काम कर रही है और जिसने कार्यक्रम में नीतिगत ढांचा, नीलामी प्रक्रिया तथा बोली की शर्तें समझाईं। शेष तीनों विकल्प इसी कार्यक्रम में शामिल थे, परंतु उनकी भूमिका अलग थी, इसीलिए वे आकर्षक भ्रामक विकल्प बनते हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने दोनों ब्लॉकों की भूवैज्ञानिक विशेषताएं और खनिज संभावना प्रस्तुत की। एमएसटीसी नीलामी मंच उपलब्ध कराती है और उसने दस्तावेज खरीदने तथा बोली जमा करने की प्रक्रिया दिखाई। राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास ने समग्र लाइसेंस धारकों को अन्वेषण खर्च की आंशिक वापसी देने वाली योजना बताई। नीलामी से जुड़े प्रश्न अक्सर इसी विभाजन पर पूछे जाते हैं। इसलिए सलाहकार, मंच और अन्वेषण सहायता देने वाली संस्था के नाम अलग-अलग याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रश्न किसी एक भूमिका पर बन सकता है।
भारत के अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी किस अधिनियम के अंतर्गत होती है?
- A.खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957
- B.अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002
- C.राज्यक्षेत्रीय जलसीमा अधिनियम, 1976
- D.तटीय विनियमन क्षेत्र अधिनियम, 2011
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 है, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ और जिसके साथ अपतटीय क्षेत्र खनिज (नीलामी) नियम, 2024 लागू होते हैं। इस ढांचे का उद्देश्य समुद्र तल के खनिज संसाधनों के आवंटन में पारदर्शिता रखना और देश की अपतटीय संभावना का क्रमबद्ध अन्वेषण कराना है। शेष विकल्प इस नीलामी के लिए गलत हैं, क्योंकि 1957 का अधिनियम भूमि पर खनिज रियायतों से जुड़ा है और अन्य दो विकल्प अपतटीय ब्लॉकों की नीलामी का प्रावधान नहीं करते। कानून के साथ तिथियां भी याद रखें: दस्तावेजों की बिक्री 1 अक्टूबर 2026 से, पूर्व-बोली सम्मेलन 4 नवंबर 2026, प्रश्नों की अंतिम तिथि 13 नवंबर 2026, दस्तावेज खरीद 21 दिसंबर 2026 तक और बोली 28 दिसंबर 2026 तक।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत ने कौन-से दो अपतटीय खनिज ब्लॉक नीलामी में रखे हैं?
सीवेल राइज-01 और वेस्ट सीवेल रिज-01, दोनों अंडमान सागर में। सीवेल राइज-01 का क्षेत्र 632 वर्ग किलोमीटर और वेस्ट सीवेल रिज-01 का 1,000 वर्ग किलोमीटर है, तथा दोनों समग्र लाइसेंस के लिए पेश हैं।
इन ब्लॉकों में कौन-से खनिज मिलते हैं?
बहुधात्विक पिंड और परत, जिनमें निकल, कोबाल्ट, तांबा और मैंगनीज होते हैं। ये धातुएं उद्योग, ऊर्जा बदलाव और नई तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण हैं, और पूर्वी तट पर क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क बन रहा है।
यह नीलामी किस कानून के अंतर्गत हो रही है?
अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002 के अंतर्गत, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा अपतटीय क्षेत्र खनिज (नीलामी) नियम, 2024 के साथ। बोली एमएसटीसी मंच पर 28 दिसंबर 2026 तक जमा करनी होगी।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322967 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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