वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से कॉयर और कॉयर उत्पादों का निर्यात कितने मूल्य का रहा?
- A.₹1,630.33 करोड़
- B.₹3,284.75 करोड़
- C.₹6,614.40 करोड़
- D.₹16,000 करोड़
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर ₹6,614.40 करोड़ है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में कॉयर और कॉयर उत्पादों के निर्यात का मूल्य है। विकल्प A में दिया ₹1,630.33 करोड़ वित्त वर्ष 2014-15 का आंकड़ा है, जिसे आधार मानकर बढ़त नापी जाती है। तब से निर्यात चार गुना से अधिक हो चुका है, यानी 305.70% की बढ़त। विकल्प D में दिया ₹16,000 करोड़ पूरे भारतीय कॉयर उद्योग का कारोबार है, निर्यात से होने वाली कमाई नहीं, और यह कारोबार देश के सकल घरेलू उत्पाद का करीब 1% है। विकल्प B का आंकड़ा इस क्षेत्र से जुड़ा ही नहीं है। इस निर्यात के मुख्य खरीदार अमेरिका, चीन, नीदरलैंड, स्पेन और ब्रिटेन हैं। परीक्षार्थी निर्यात मूल्य, आधार वर्ष का मूल्य और प्रतिशत बढ़त, तीनों एक साथ याद रखें, क्योंकि प्रश्न किसी भी एक पर बन सकता है।
पूरा लेख पढ़ें: कॉयर निर्यात 305% बढ़कर ₹6,614.40 करोड़ पर पहुंचा
अभ्यास प्रश्न
कॉयर और कॉयर उत्पादों का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक तथा निर्यातक देश कौन है?
- A.इंडोनेशिया
- B.भारत
- C.फिलीपींस
- D.श्रीलंका
उत्तर देखें
कॉयर बनाने और उसे विदेश भेजने, दोनों में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है और विश्व के कुल कॉयर उत्पादन का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारतीय इकाइयों से आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कॉयर विकास योजना (CVY) किस केंद्रीय मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है?
- A.वस्त्र मंत्रालय
- B.कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
- C.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
- D.सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
उत्तर देखें
इसका मकसद कॉयर क्षेत्र का टिकाऊ विकास तथा कॉयर कारीगरों और कॉयर उद्योग को सहारा देना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर कितनी कॉयर इकाइयां दर्ज हैं और उनसे कितने लोगों को रोजगार मिलता है?
- A.11,000 से अधिक इकाइयां, 1.2 लाख लोगों को रोजगार
- B.21,000 से अधिक इकाइयां, 2.3 लाख लोगों को रोजगार
- C.31,000 से अधिक इकाइयां, 4.5 लाख लोगों को रोजगार
- D.51,000 से अधिक इकाइयां, 8.1 लाख लोगों को रोजगार
उत्तर देखें
इन इकाइयों को उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर लाने से वे औपचारिक एमएसएमई नीति-तंत्र का हिस्सा बन जाती हैं, जिससे उन्हें कर्ज, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ी सरकारी मदद मिल पाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के अपतटीय खनिज ब्लॉकों की नीलामी किस अधिनियम के अंतर्गत होती है?
- A.खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957
- B.अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002
- C.राज्यक्षेत्रीय जलसीमा अधिनियम, 1976
- D.तटीय विनियमन क्षेत्र अधिनियम, 2011
उत्तर देखें
इस ढांचे का उद्देश्य समुद्र तल के खनिज संसाधनों के आवंटन में पारदर्शिता रखना और देश की अपतटीय संभावना का क्रमबद्ध अन्वेषण कराना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अपतटीय खनिज ब्लॉक नीलामी में लेनदेन सलाहकार कौन है?
- A.भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
- B.एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड
- C.एमएसटीसी
- D.राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास
उत्तर देखें
शेष तीनों विकल्प इसी कार्यक्रम में शामिल थे, परंतु उनकी भूमिका अलग थी, इसीलिए वे आकर्षक भ्रामक विकल्प बनते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →