यह योजना 2030 तक कितनी कोयला गैसीकरण क्षमता के लक्ष्य में योगदान देगी?
- A.50 मिलियन टन
- B.75 मिलियन टन
- C.100 मिलियन टन
- D.200 मिलियन टन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 100 मिलियन टन है। विज्ञप्ति कहती है कि यह योजना 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने के सरकार के व्यापक लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगी, इसलिए 100 मिलियन टन और वर्ष 2030 की जोड़ी इस खबर से पूछे जाने वाले सबसे संभावित तथ्यों में है। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D देखने में संभव लगते हैं, पर विज्ञप्ति में इनका समर्थन नहीं है। दोहराते समय इस राष्ट्रीय लक्ष्य को योजना से जुड़े तीन अन्य आंकड़ों से अलग रखें, यानी 13 मई 2026 को मंत्रिमंडल से मंजूर ₹37,500 करोड़ का परिव्यय, लगभग 25 परियोजनाओं में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ का अपेक्षित निवेश, और करीब 50,000 प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार। गैसीकरण के उत्पाद भी याद रखें, यानी सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया, क्योंकि प्रश्न आंकड़ों की जगह इन उत्पादों पर भी बन सकता है।
पूरा लेख पढ़ें: कोयला गैसीकरण योजना: ₹37,500 करोड़, एनटीपीसी का आवेदन
अभ्यास प्रश्न
सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं की योजना का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?
- A.₹8,500 करोड़
- B.₹37,500 करोड़
- C.₹1 लाख करोड़
- D.₹6,000 करोड़
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कोयला मंत्रालय बताता है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को इसी कुल वित्तीय परिव्यय के साथ योजना को मंजूरी दी, और यही आंकड़ा प्रेस खबरों पर जारी स्पष्टीकरण की शुरुआत में भी आता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कोयला मंत्रालय ने गैसीकरण योजना में आवेदन करने वाली किन दो कंपनियों के नाम बताए?
- A.कोल इंडिया लिमिटेड और गेल
- B.तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड
- C.एनएलसी इंडिया और आईओसीएल
- D.सेल और ओएनजीसी
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मंत्रालय ने बताया कि उसे सूचित किया गया है कि दोनों कंपनियों ने ऑनलाइन पोर्टल से अपने आवेदन जमा कर दिए हैं, और इसी तथ्य से उसने यह दावा खारिज किया कि योजना में कोई आवेदक नहीं मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 के तहत सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पर पंजीकृत ई-कचरा रिसाइक्लर, रिफर्बिशर और उत्पादकों की संख्या 38 से बढ़कर कितनी हो गई?
- A.75 से अधिक
- B.100 से अधिक
- C.200 से अधिक
- D.500 से अधिक
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पिछले अभियान में शुरू हुए ई-कचरे पर ध्यान को आगे बढ़ाते हुए विशेष अभियान 6 में डीएआरपीजी ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और रिसाइक्लिंग उद्योग के साथ मिलकर सरकारी दफ्तरों को अधिकृत रिसाइक्लर, रिफर्बिशर और उत्पादकों से जोड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 के दौरान कबाड़ बेचकर सबसे अधिक आय किस मंत्रालय ने अर्जित की?
- A.कोयला मंत्रालय
- B.रेल मंत्रालय (रेलवे बोर्ड)
- C.रक्षा मंत्रालय (सैन्य मामलों का विभाग)
- D.पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
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इसके बाद सैन्य मामलों का विभाग 88.96 करोड़ रुपये, कोयला मंत्रालय 61.41 करोड़ रुपये और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 34.81 करोड़ रुपये के साथ रहे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विशेष अभियान 6 में ई-कचरे सहित कबाड़ के निपटान से कुल कितनी आय हुई?
- A.618.06 करोड़ रुपये
- B.770.50 करोड़ रुपये
- C.970.33 करोड़ रुपये
- D.1,120.40 करोड़ रुपये
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विशेष अभियान 6 पोर्टल के संकलित आंकड़ों के अनुसार सभी मंत्रालयों और विभागों ने ई-कचरे सहित कबाड़ बेचकर 970.33 करोड़ रुपये जुटाए, जो विशेष अभियान 5.0 से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है।
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