जल जीवन मिशन 2.0 की समीक्षा आईआईएम बंगलूरू में हुई
आईआईएम बंगलूरू में जल जीवन मिशन 2.0 की क्षेत्रीय समीक्षा में बताया गया कि ग्रामीण नल जल कनेक्शन 3.27 करोड़ से बढ़कर 15.96 करोड़ परिवारों तक पहुंच गए हैं।

चर्चा में क्यों
7 अक्टूबर 2026 को जल शक्ति मंत्रालय ने आईआईएम बंगलूरू में हुई जल जीवन मिशन 2.0 की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक की जानकारी दी, जिसमें नल जल कवरेज के ताजा आंकड़े और सुधार की प्राथमिकताएं सामने रखी गईं।
जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग ने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक भारतीय प्रबंध संस्थान बंगलूरू में की। बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीना ने की, जिसमें राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव तथा मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन भी मौजूद रहे।
मुख्य आंकड़े
सचिव ने बताया कि मिशन ने ग्रामीण पेयजल की पहुंच बदल दी है। अब 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन हैं, जबकि अगस्त 2019 में मिशन की शुरुआत के समय यह संख्या केवल 3.27 करोड़ परिवार थी।
| बैठक | जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षेत्रीय समीक्षा |
| स्थान | आईआईएम बंगलूरू |
| अध्यक्षता | अशोक के. के. मीना, सचिव, पेयजल और स्वच्छता विभाग |
| वर्तमान नल कनेक्शन | 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार |
| शुरुआत में | 3.27 करोड़ परिवार, अगस्त 2019 |
मिशन 2.0 में बदलाव
सचिव ने दूसरे चरण को अवसंरचना बनाने से हटकर टिकाऊ और जवाबदेह सेवा वितरण की दिशा में बड़ा मोड़ बताया। उन्होंने राज्यों से स्वीकृत योजनाओं पर खर्च तेज करने को कहा, लेकिन यह भी कि धन पूरी तरह काम करने वाली व्यवस्था में बदले, जिसमें स्रोत से घर तक जुड़ाव, पक्के डिजिटल रिकॉर्ड और कारगर निगरानी हो। गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में एक गांव तथा बहु गांव योजनाओं को गति देने पर भी जोर रहा।
बैठक में रखे निष्कर्ष
जल सेवा अध्ययन के आधार पर उन्होंने कहा कि पाइपलाइन में रिसाव और टूटन आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं, इसके बाद बिजली कटौती तथा कम वोल्टेज की समस्या आती है। मिशन निदेशक ने जोड़ा कि कई क्षेत्रों में बिजली की खराब गुणवत्ता सेवा पर असर डाल रही है और बिजली लागत घटाने से परिचालन की टिकाऊ क्षमता सुधरेगी। पेयजल परिसंपत्तियों के सौरीकरण पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से बातचीत चल रही है।
आईआईएम बंगलूरू में जल जीवन मिशन प्रोफेसर चेयर प्रो. गोपाल नायक ने मिशन की योजनाओं में बिजली लागत के अनुकूलन पर अध्ययन प्रस्तुत किया, जिसमें ग्रिड आधारित और सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्थाओं तथा उनके परिचालन एवं जीवनचक्र खर्च की तुलना की गई। एक अन्य प्रस्तुति में जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली के आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि मिशन शुरू होने के बाद कई पेयजल गुणवत्ता मानकों पर अनुपालन बेहतर हुआ है।
सुधार की प्राथमिकताएं
राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य कार्यान्वयन योजनाओं, वित्तीय समाधान, पीएम-जनमन गांवों में हर घर जल प्रमाणन, जल अर्पण, डिजिटल प्रशासन और जल गुणवत्ता प्रबंधन पर चर्चा की। सचिव ने स्वतंत्र जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था बनाने, ग्राम पंचायतों तक जल गुणवत्ता की जानकारी पहुंचाने तथा ग्राम सभाओं द्वारा निष्कर्षों की समीक्षा पर बल दिया। मिशन निदेशक ने राज्यों से सभी हर घर जल गांवों में जल अर्पण पूरा करने, आंगनवाड़ी केंद्रों में जांच तेज करने तथा स्रोत की टिकाऊ क्षमता की योजना के लिए निर्णय सहायक प्रणाली का उपयोग करने को कहा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बैठक | जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षेत्रीय समीक्षा |
|---|---|
| स्थान | भारतीय प्रबंध संस्थान बंगलूरू |
| विभाग | पेयजल और स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय |
| अध्यक्षता | अशोक के. के. मीना, सचिव |
| मिशन निदेशक | कमल किशोर सोअन, अपर सचिव तथा मिशन निदेशक, एनजेजेएम |
| वर्तमान नल कनेक्शन | 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवार |
| शुरुआत में | 3.27 करोड़ परिवार, अगस्त 2019 |
| मिशन 2.0 का केंद्रबिंदु | टिकाऊ और जवाबदेह सेवा वितरण |
| बाधा का सबसे बड़ा कारण | पाइपलाइन में रिसाव और टूटन |
| अध्ययन प्रस्तुत | प्रो. गोपाल नायक, जेजेएम प्रोफेसर चेयर, आईआईएम बंगलूरू |
परीक्षा की दृष्टि से
स्थान (आईआईएम बंगलूरू), विभाग और मंत्रालय, सचिव तथा मिशन निदेशक के नाम, कवरेज के आंकड़े यानी अब 15.96 करोड़ से अधिक परिवार और अगस्त 2019 में शुरुआत पर 3.27 करोड़, मिशन 2.0 का बदला केंद्रबिंदु, जल सेवा अध्ययन का रिसाव संबंधी निष्कर्ष तथा जल अर्पण, हर घर जल और पीएम-जनमन जैसे शब्द याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
जल जीवन मिशन के अंतर्गत कितने ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन बताए गए?
- A.3.27 करोड़ से अधिक
- B.11.50 करोड़ से अधिक
- C.15.96 करोड़ से अधिक
- D.19.20 करोड़ से अधिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 15.96 करोड़ से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर 15.96 करोड़ से अधिक है। जल जीवन मिशन 2.0 की क्षेत्रीय समीक्षा में पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव ने बताया कि ग्रामीण पेयजल की पहुंच पूरी तरह बदल गई है और अब 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि 3.27 करोड़ वह संख्या है जो मिशन की शुरुआत के समय थी, यानी यह आधार आंकड़ा है, वर्तमान नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बैठक में बीच का ऐसा कोई आंकड़ा नहीं रखा गया। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह बताई गई कवरेज से अधिक है। परीक्षा के लिहाज से दोनों आंकड़े जोड़ी के रूप में महत्वपूर्ण हैं, शुरुआत में 3.27 करोड़ और अब 15.96 करोड़ से अधिक, जो बदलाव का पैमाना दिखाते हैं। यह भी याद रखें कि मिशन अगस्त 2019 में शुरू हुआ था और दूसरे चरण में इसका जोर अवसंरचना बनाने से हटकर टिकाऊ तथा जवाबदेह सेवा वितरण पर आ गया है।
जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक किस संस्थान में हुई?
- A.आईआईएम बंगलूरू
- B.आईआईएम अहमदाबाद
- C.आईआईटी मद्रास
- D.आईआईएम कोझिकोड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आईआईएम बंगलूरू
व्याख्या
सही उत्तर आईआईएम बंगलूरू है। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग ने यह क्षेत्रीय समीक्षा बैठक भारतीय प्रबंध संस्थान बंगलूरू में आयोजित की, जहां इसी संस्थान में जल जीवन मिशन प्रोफेसर चेयर संभालने वाले प्रो. गोपाल नायक ने मिशन की योजनाओं में बिजली लागत के अनुकूलन पर अध्ययन भी प्रस्तुत किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि अहमदाबाद में ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि स्थान प्रबंध संस्थान था, प्रौद्योगिकी संस्थान नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि कोझिकोड परिसर की इस समीक्षा में कोई भूमिका नहीं थी और बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीना ने की थी। अभ्यर्थी इस संस्थान को प्रोफेसर चेयर तथा ग्रिड और सौर व्यवस्थाओं की तुलना वाले अध्ययन से जोड़कर याद रखें।
बैठक में रखे गए जल सेवा अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार ग्रामीण जल आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा कारण क्या है?
- A.बिजली कटौती
- B.पाइपलाइन में रिसाव और टूटन
- C.भूजल का घटता स्तर
- D.प्रशिक्षित कर्मियों की कमी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पाइपलाइन में रिसाव और टूटन
व्याख्या
सही उत्तर पाइपलाइन में रिसाव और टूटन है। जल सेवा अध्ययन के निष्कर्षों का हवाला देते हुए सचिव ने बैठक में कहा कि पाइपलाइन में रिसाव और टूटन ग्रामीण जल आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं और इसके बाद बिजली कटौती तथा कम वोल्टेज की समस्याएं आती हैं। विकल्प A इसी कारण गलत है, क्योंकि बिजली से जुड़ी समस्याओं को दूसरे स्थान पर रखा गया है, हालांकि मिशन निदेशक ने यह जोड़ा कि कई क्षेत्रों में बिजली की खराब गुणवत्ता सेवा पर असर डालती है और लागत घटाने से टिकाऊ क्षमता सुधरेगी। विकल्प C गलत है, क्योंकि भूजल का घटता स्तर व्यापक चिंता होने पर भी यहां सबसे बड़ा कारण नहीं बताया गया। विकल्प D गलत है, क्योंकि कर्मियों की कमी से जुड़ा ऐसा कोई निष्कर्ष इस समीक्षा में नहीं आया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जल जीवन मिशन के अंतर्गत अब कितने ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन हैं?
15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास, जबकि अगस्त 2019 में मिशन शुरू होने के समय यह संख्या केवल 3.27 करोड़ परिवार थी।
मिशन 2.0 की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक कहां हुई?
भारतीय प्रबंध संस्थान बंगलूरू में। इसकी अध्यक्षता जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीना ने की।
जल जीवन मिशन 2.0 का केंद्रबिंदु किस ओर बदला है?
अवसंरचना बनाने से हटकर टिकाऊ और जवाबदेह सेवा वितरण की ओर, जिसमें स्रोत की टिकाऊ क्षमता, जल गुणवत्ता निगरानी, डिजिटल प्रशासन और सामुदायिक भागीदारी शामिल हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2320327 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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