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GK24

फिजी में प्री-कॉप31 बैठक: भूपेंद्र यादव ने भारत का नेतृत्व किया

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने फिजी में यूएनएफसीसीसी की प्री-कॉप31 बैठक में भारत का नेतृत्व करते हुए पेरिस करार के अमल में तेज़ी लाने का आह्वान किया।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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फिजी में प्री-कॉप31 बैठक: भूपेंद्र यादव ने भारत का नेतृत्व किया

चर्चा में क्यों

7 अक्टूबर 2026 को फिजी में हुई यूएनएफसीसीसी की प्री-कॉप31 बैठक में भारत का नेतृत्व करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कॉप31 से समझ की दूरियाँ पाटने, मौजूदा प्रतिबद्धताएँ पूरी करने और पेरिस करार के अमल में तेज़ी लाने का आह्वान किया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 7 अक्टूबर 2026 को फिजी में हुई यूएनएफसीसीसी की प्री-कॉप31 बैठक के पूर्ण सत्र को संबोधित किया। यह सत्र कॉप31 की प्राथमिकताओं पर केंद्रित था। इस बैठक में वे भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं। बैठक की सह-मेज़बानी ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु मिलकर कर रहे हैं।

भारत ने क्या मांग रखी

मंत्री ने प्रतिनिधियों के सामने तीन बातें रखीं — समझ के स्तर पर जो दूरियाँ अब भी बची हैं उन्हें पाटना, जो जलवायु वादे पहले किए जा चुके हैं उन्हें निभाना, और पेरिस करार को ज़मीन पर उतारने की गति बढ़ाना। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने तुवालु के लोगों के साहस को सलाम किया, जो बदलती जलवायु की चुनौतियों से डटकर लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तुवालु का उदाहरण दुनिया के लिए उम्मीद, भरोसा और मिलकर लड़ने का संकल्प मज़बूत करता है।

लक्ष्य तय हैं, साधन नहीं

श्री यादव ने याद दिलाया कि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने की महत्वाकांक्षा सहित दीर्घकालिक उद्देश्य और लक्ष्य यूएनएफसीसीसी तथा पेरिस करार के तहत पहले ही तय हो चुके हैं। उनके अनुसार अब जो कमी है वह अमल के साधनों की है। इसलिए ध्यान अब इस आकलन पर होना चाहिए कि दुनिया पहले से तय इन लक्ष्यों की ओर अपनी यात्रा कितनी तेज़ कर सकती है।

सहमति, निर्णय और अमल

कॉप31 अध्यक्षता ने अपने एजेंडे के केंद्र में तीन विषय रखे हैं — सहमति, निर्णय-प्रक्रिया और अमल। इन पर मंत्री ने कहा कि दिशा और दीर्घकालिक लक्ष्यों को लेकर व्यापक सहमति पहले से मौजूद है। जिन दूरियों को पाटना बाकी है, वे एक ओर विज्ञान और दूसरी ओर पारंपरिक ज्ञान तथा समुदाय की रीतियों के बीच हैं, व्यवहार और नैतिकता के बीच हैं, तथा हाथ में उपलब्ध संसाधनों और महसूस की जा रही ज़रूरतों के बीच हैं। निर्णय के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि पक्षकारों से अपेक्षित मुख्य फ़ैसला यही है कि वे अपनी प्रतिबद्धताओं को सही अर्थ और भावना में पूरा करें और हर पक्षकार को ऐसा करने में सक्षम बनाएँ। अमल के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि प्रयास वहाँ जाने चाहिए जहाँ ज़रूरत सबसे तीखी है और असर बहुसंख्य लोगों को दिखता है। उन्होंने क्षमता निर्माण बढ़ाने पर ज़ोर दिया और देशों से हर वर्ष ठोस उदाहरण तथा सफलता की कहानियाँ सामने लाने का आग्रह किया, जो बड़े असर वाले शमन, बड़े पैमाने के अनुकूलन और अमल के साधनों की ईमानदार आपूर्ति को दर्शाएँ।

सफलता किस पैमाने पर आँकी जाए

उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरणों को साल-दर-साल साझा करने और बड़ा करने से ज़मीनी नतीजे बेहतर मिलेंगे। अंत में उन्होंने कहा कि एन्टाल्या में सफलता केवल नए लक्ष्यों या घोषणाओं से नहीं आँकी जानी चाहिए, बल्कि इससे कि अमल वाकई तेज़ हुआ या नहीं, मदद उन लोगों तक पहुँची या नहीं जिन्हें उसकी सबसे अधिक ज़रूरत है, और जो समाधान पहले से कारगर हैं उन्हें बड़े पैमाने पर ले जाया गया या नहीं।

प्री-कॉप क्या है

प्री-कॉप वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होने वाली तैयारी बैठक होती है। इस वर्ष यह सम्मेलन नवंबर में तुर्किये के एन्टाल्या शहर में होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनयूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 बैठक
स्थानफिजी
तिथि7 अक्टूबर 2026
सह-मेज़बानऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु
भारत का नेतृत्वभूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री
कॉप31 का स्थानएन्टाल्या, तुर्किये
कॉप31 का महीनानवंबर 2026
तापमान महत्वाकांक्षावैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
अध्यक्षता के तीन विषयसहमति, निर्णय-प्रक्रिया और अमल

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि कॉप31 नवंबर 2026 में तुर्किये के एन्टाल्या में हो रहा है; प्री-कॉप31 बैठक फिजी में हुई और उसकी सह-मेज़बानी ऑस्ट्रेलिया, फिजी तथा तुवालु ने की; भारत का नेतृत्व पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया; पेरिस करार की तापमान महत्वाकांक्षा 1.5 डिग्री सेल्सियस है; और कॉप31 अध्यक्षता के तीन विषय सहमति, निर्णय-प्रक्रिया तथा अमल हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप31 किस शहर में आयोजित हो रहा है?

  1. A.बाकू, अज़रबैजान
  2. B.एन्टाल्या, तुर्किये
  3. C.सुवा, फिजी
  4. D.बेलेम, ब्राज़ील
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एन्टाल्या, तुर्किये

व्याख्या

सही उत्तर एन्टाल्या, तुर्किये है। प्री-कॉप वह तैयारी बैठक होती है जो वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होती है, और इस वर्ष वह मुख्य सम्मेलन नवंबर में तुर्किये के एन्टाल्या शहर में हो रहा है। विकल्प C यानी फिजी का सुवा गलत है, क्योंकि फिजी ने तैयारी बैठक प्री-कॉप31 की मेज़बानी की थी, मुख्य सम्मेलन की नहीं; तैयारी बैठक के स्थान और सम्मेलन के स्थान को आपस में मिला देना इस प्रश्न पर सबसे आम भूल है। विकल्प A यानी अज़रबैजान का बाकू गलत है, क्योंकि कॉप31 की प्राथमिकताओं पर दिए गए भारत के वक्तव्य में अज़रबैजान का कोई उल्लेख नहीं है। विकल्प D यानी ब्राज़ील का बेलेम भी इसी कारण गलत है, क्योंकि ब्राज़ील का नाम कहीं नहीं आता। आने वाले सम्मेलन का स्थान केवल एन्टाल्या बताया गया है, और मंत्री ने सफलता के पैमाने की चर्चा करते हुए इसी नाम का प्रयोग किया।

Q2.पर्यावरणमध्यम

यूएनएफसीसीसी की प्री-कॉप31 बैठक, जिसमें भारत ने भाग लिया, की सह-मेज़बानी किन देशों ने की?

  1. A.भारत, फिजी और ऑस्ट्रेलिया
  2. B.तुर्किये, ऑस्ट्रेलिया और तुवालु
  3. C.ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु
  4. D.फिजी, समोआ और टोंगा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु

व्याख्या

सही उत्तर ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु है। प्री-कॉप31 बैठक की सह-मेज़बानी इन तीन देशों ने की, और भारत उसमें एक भागीदार पक्षकार के रूप में अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि भारत ने बैठक में हिस्सा लिया और अपने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, परंतु वह मेज़बानों में शामिल नहीं था। विकल्प B गलत है, क्योंकि तुर्किये वह देश है जो वर्ष के अंत में एन्टाल्या में मुख्य सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है; तैयारी बैठक के सह-मेज़बानों में उसका नाम नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि समोआ और टोंगा फिजी के प्रशांत पड़ोसी होने के बावजूद मेज़बानी के संदर्भ में कहीं नहीं आते। याद रखने योग्य बात यही है कि तैयारी बैठक प्रशांत देशों और ऑस्ट्रेलिया ने साझा की, जबकि मुख्य सम्मेलन तुर्किये के पास है।

Q3.पर्यावरणआसान

फिजी में हुई यूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किस मंत्री ने किया?

  1. A.केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री
  2. B.केंद्रीय विदेश मंत्री
  3. C.केंद्रीय जल शक्ति मंत्री
  4. D.केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री है, अर्थात भूपेंद्र यादव, जिन्होंने फिजी में हुई प्री-कॉप31 बैठक में भारत की अगुवाई की और कॉप31 की प्राथमिकताओं पर हुई पूर्ण चर्चा को संबोधित किया। यूएनएफसीसीसी और पेरिस करार के तहत होने वाली जलवायु वार्ताएँ पर्यावरण मंत्रालय के अधीन आती हैं, इसलिए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इसी विभाग के पास रहा। विकल्प B गलत है, क्योंकि विदेश मंत्री का नाम वक्तव्य में नहीं है और इन बैठकों में जलवायु वार्ता का दायित्व उनके पास नहीं होता। विकल्प C गलत है, क्योंकि जल शक्ति मंत्रालय जल संसाधन और स्वच्छता से जुड़ा है, जो एक अलग विषय है और उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि प्रतिनिधिमंडल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री की कोई भूमिका नहीं बताई गई। परीक्षार्थी प्री-कॉप और कॉप बैठकों को पर्यावरण मंत्रालय तथा भूपेंद्र यादव से जोड़कर याद रखें।

Q4.पर्यावरणमध्यम

मंत्री के अनुसार यूएनएफसीसीसी और पेरिस करार के तहत पहले से तय दीर्घकालिक तापमान महत्वाकांक्षा क्या है?

  1. A.वैश्विक तापमान वृद्धि 3 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
  2. B.वैश्विक तापमान वृद्धि 2.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
  3. C.वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
  4. D.वैश्विक तापमान वृद्धि 0.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना

व्याख्या

सही उत्तर वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना है। पूर्ण सत्र में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि दीर्घकालिक उद्देश्य और लक्ष्य, जिनमें यह महत्वाकांक्षा भी शामिल है, यूएनएफसीसीसी तथा पेरिस करार के तहत पहले ही तय हो चुके हैं, और अब कमी केवल अमल के समुचित साधनों की है। इसी तर्क पर उन्होंने कहा कि ध्यान नए लक्ष्य गढ़ने से हटकर इस आकलन पर जाना चाहिए कि देश पहले से तय लक्ष्यों की ओर कितनी तेज़ी से बढ़ सकते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि तीन डिग्री की वृद्धि किसी भी सहमत महत्वाकांक्षा से कहीं ऊपर है और जलवायु कार्रवाई का उद्देश्य ऐसी स्थिति को टालना है। विकल्प B भी इसी कारण गलत है और वक्तव्य में ऐसा कोई आँकड़ा नहीं आता। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसी कोई सीमा संधि ढाँचे के तहत कभी स्वीकार नहीं की गई। पेरिस करार के साथ याद रखने योग्य आँकड़ा डेढ़ डिग्री ही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉप31 कहाँ आयोजित हो रहा है?

कॉप31, यानी इस वर्ष का संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन, नवंबर 2026 में तुर्किये के एन्टाल्या शहर में हो रहा है। उससे पहले की तैयारी बैठक प्री-कॉप31 फिजी में हुई।

प्री-कॉप31 बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 7 अक्टूबर 2026 को फिजी में हुई प्री-कॉप31 बैठक में भारत का नेतृत्व किया और कॉप31 की प्राथमिकताओं पर पूर्ण सत्र को संबोधित किया।

प्री-कॉप31 बैठक की सह-मेज़बानी किन देशों ने की?

ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालु ने इसकी सह-मेज़बानी की। प्री-कॉप वह तैयारी बैठक है जो देश वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले करते हैं।

भारत ने कॉप31 की सफलता आँकने का कौन-सा पैमाना सुझाया?

भूपेंद्र यादव ने कहा कि एन्टाल्या को केवल नए लक्ष्यों या घोषणाओं से नहीं, बल्कि इससे आँका जाना चाहिए कि अमल तेज़ हुआ या नहीं, सहायता ज़रूरतमंदों तक पहुँची या नहीं, और कारगर समाधान बड़े पैमाने पर पहुँचे या नहीं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS