जल जीवन मिशन के अंतर्गत कितने ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन बताए गए?
- A.3.27 करोड़ से अधिक
- B.11.50 करोड़ से अधिक
- C.15.96 करोड़ से अधिक
- D.19.20 करोड़ से अधिक
सही उत्तर
C. 15.96 करोड़ से अधिक
व्याख्या
सही उत्तर 15.96 करोड़ से अधिक है। जल जीवन मिशन 2.0 की क्षेत्रीय समीक्षा में पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव ने बताया कि ग्रामीण पेयजल की पहुंच पूरी तरह बदल गई है और अब 15.96 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि 3.27 करोड़ वह संख्या है जो मिशन की शुरुआत के समय थी, यानी यह आधार आंकड़ा है, वर्तमान नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बैठक में बीच का ऐसा कोई आंकड़ा नहीं रखा गया। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह बताई गई कवरेज से अधिक है। परीक्षा के लिहाज से दोनों आंकड़े जोड़ी के रूप में महत्वपूर्ण हैं, शुरुआत में 3.27 करोड़ और अब 15.96 करोड़ से अधिक, जो बदलाव का पैमाना दिखाते हैं। यह भी याद रखें कि मिशन अगस्त 2019 में शुरू हुआ था और दूसरे चरण में इसका जोर अवसंरचना बनाने से हटकर टिकाऊ तथा जवाबदेह सेवा वितरण पर आ गया है।
पूरा लेख पढ़ें: जल जीवन मिशन 2.0 की समीक्षा आईआईएम बंगलूरू में हुई
अभ्यास प्रश्न
जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक किस संस्थान में हुई?
- A.आईआईएम बंगलूरू
- B.आईआईएम अहमदाबाद
- C.आईआईटी मद्रास
- D.आईआईएम कोझिकोड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आईआईएम बंगलूरू
व्याख्या
सही उत्तर आईआईएम बंगलूरू है। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग ने यह क्षेत्रीय समीक्षा बैठक भारतीय प्रबंध संस्थान बंगलूरू में आयोजित की, जहां इसी संस्थान में जल जीवन मिशन प्रोफेसर चेयर संभालने वाले प्रो. गोपाल नायक ने मिशन की योजनाओं में बिजली लागत के अनुकूलन पर अध्ययन भी प्रस्तुत किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि अहमदाबाद में ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि स्थान प्रबंध संस्थान था, प्रौद्योगिकी संस्थान नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि कोझिकोड परिसर की इस समीक्षा में कोई भूमिका नहीं थी और बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीना ने की थी। अभ्यर्थी इस संस्थान को प्रोफेसर चेयर तथा ग्रिड और सौर व्यवस्थाओं की तुलना वाले अध्ययन से जोड़कर याद रखें।
बैठक में रखे गए जल सेवा अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार ग्रामीण जल आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा कारण क्या है?
- A.बिजली कटौती
- B.पाइपलाइन में रिसाव और टूटन
- C.भूजल का घटता स्तर
- D.प्रशिक्षित कर्मियों की कमी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पाइपलाइन में रिसाव और टूटन
व्याख्या
सही उत्तर पाइपलाइन में रिसाव और टूटन है। जल सेवा अध्ययन के निष्कर्षों का हवाला देते हुए सचिव ने बैठक में कहा कि पाइपलाइन में रिसाव और टूटन ग्रामीण जल आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं और इसके बाद बिजली कटौती तथा कम वोल्टेज की समस्याएं आती हैं। विकल्प A इसी कारण गलत है, क्योंकि बिजली से जुड़ी समस्याओं को दूसरे स्थान पर रखा गया है, हालांकि मिशन निदेशक ने यह जोड़ा कि कई क्षेत्रों में बिजली की खराब गुणवत्ता सेवा पर असर डालती है और लागत घटाने से टिकाऊ क्षमता सुधरेगी। विकल्प C गलत है, क्योंकि भूजल का घटता स्तर व्यापक चिंता होने पर भी यहां सबसे बड़ा कारण नहीं बताया गया। विकल्प D गलत है, क्योंकि कर्मियों की कमी से जुड़ा ऐसा कोई निष्कर्ष इस समीक्षा में नहीं आया।
पीएमजीएसवाई चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए किस केंद्रीय मंत्री ने जीपीएस आधारित निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अधिक उपयोग की बात कही?
- A.नितिन गडकरी
- B.शिवराज सिंह चौहान
- C.कमलेश पासवान
- D.रोहित कंसल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. शिवराज सिंह चौहान
व्याख्या
सही उत्तर शिवराज सिंह चौहान है, जो केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हैं। उन्होंने चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए क्षेत्र सत्यापन, निगरानी और समय पर निर्णय लेने के लिए डिजिटल तकनीक, जीपीएस आधारित निगरानी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यापक उपयोग पर जोर दिया, साथ ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की तेज तैयारी, बेहतर निर्माण गुणवत्ता और मजबूत जवाबदेही की बात कही। विकल्प A गलत है, क्योंकि सड़क परिवहन विभाग अलग है और उस मंत्री का नाम यहां नहीं आया; यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय चलाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि कमलेश पासवान राज्य मंत्री हैं, जिन्होंने विलंबित कार्यों और पांच वर्ष की रखरखाव अवधि पर बात की। विकल्प D गलत है, क्योंकि रोहित कंसल ग्रामीण विकास सचिव हैं, मंत्री नहीं, और उन्होंने योजना में जोड़े गए नए साधनों की जानकारी देते हुए रखरखाव तथा गुणवत्ता को अनिवार्य बताया था। परीक्षा के लिए तीनों पदाधिकारियों के नाम और उनके पद अलग-अलग याद रखना उपयोगी होगा।
पीएमजीएसवाई-IV के अंतर्गत कितनी पात्र असंपर्कित बस्तियों को जोड़ा जाना है?
- A.12,500
- B.25,000
- C.62,500
- D.1,00,000
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 25,000
व्याख्या
सही उत्तर 25,000 है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मौजूदा चरण का उद्देश्य 25,000 पात्र असंपर्कित बस्तियों को संपर्क सुविधा देना है और इसके लिए 70,125 करोड़ रुपये के बजट से लगभग 62,500 किलोमीटर हर मौसम की सड़कों का लक्ष्य रखा गया है। विकल्प A गलत है, क्योंकि आधा किया हुआ ऐसा कोई आंकड़ा योजना की समीक्षा में नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 62,500 सड़क की लंबाई का लक्ष्य है, बस्तियों की गिनती नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस चरण के लिए यह आंकड़ा घोषित नहीं हुआ। अभ्यर्थी चिंतन शिविर में बताई गई दीर्घकालिक उपलब्धि भी याद रखें, यानी 25 वर्षों में विभिन्न चरणों के अंतर्गत बनी लगभग 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें। यह शिविर नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ था और इसमें राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, नीति निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए थे, इसलिए स्थान भी याद रखें।
पीएमजीएसवाई-IV के लिए घोषित बजट कितना है?
- A.62,500 करोड़ रुपये
- B.70,125 करोड़ रुपये
- C.25,000 करोड़ रुपये
- D.80,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 70,125 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 70,125 करोड़ रुपये है। इस बजट के साथ पीएमजीएसवाई-IV में लगभग 62,500 किलोमीटर हर मौसम में चलने योग्य सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि 25,000 पात्र असंपर्कित बस्तियों तक संपर्क पहुंचे। विकल्प A गलत है, क्योंकि 62,500 इस चरण में सड़क की लंबाई का आंकड़ा है, धनराशि का नहीं, और जल्दबाजी में ये दोनों आंकड़े आपस में बदल जाते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि 25,000 जोड़ी जाने वाली बस्तियों की संख्या है, रुपये का आंकड़ा नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि योजना की समीक्षा में ऐसा कोई गोल आंकड़ा नहीं आया। ये तीनों आंकड़े भारत मंडपम में 5 और 6 अक्टूबर 2026 को हुए चिंतन शिविर में एक साथ सामने आए, इसलिए इन्हें समूह में याद रखें, और इनके साथ यह भी ध्यान रखें कि पिछले 25 वर्षों में इस योजना के विभिन्न चरणों के अंतर्गत लगभग 8 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बन चुकी हैं, जो परीक्षा में अक्सर पूछा जाने वाला आंकड़ा है।