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राष्ट्रीय एससी-एसटी हब: खरीद करीब 39 गुना बढ़ी

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब के तहत एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से सरकारी खरीद 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

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राष्ट्रीय एससी-एसटी हब: खरीद करीब 39 गुना बढ़ी

चर्चा में क्यों

8 अक्टूबर 2026 को जारी सरकारी पृष्ठभूमि दस्तावेज में राष्ट्रीय एससी-एसटी हब का लेखा-जोखा सामने रखा गया, जिसके तहत एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीद करीब 39 गुना बढ़कर 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये हो गई।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय की योजना राष्ट्रीय एससी-एसटी हब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के बीच कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए बनाई गई थी। इस योजना से जुड़े उद्यमों से होने वाली सरकारी खरीद में तेज उछाल दर्ज हुआ है।

योजना एक नजर में

यह योजना 18 अक्टूबर 2016 को शुरू हुई और इसे राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के जरिये लागू किया जाता है। कारोबार के हर चरण में एससी/एसटी उद्यमों के सामने आने वाली दिक्कतों पर यह काम करती है और वित्त, प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन तथा बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराती है। सरकारी खरीद इसका मुख्य जरिया है।

पहुंच और खरीद

शुरुआत से अब तक योजना ने 1,90,414 लाभार्थियों की मदद की है और 54,499 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षित किया है। ये आंकड़े 31 जुलाई 2026 तक के हैं। एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीद करीब 39 गुना बढ़ चुकी है, जो 2015-16 के 99.37 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये हो गई। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और असम इस योजना के तहत पांच अग्रणी राज्य रहे। वर्ष 2025-26 में यह खरीद 12,524 उद्यमों से हुई, जबकि 27 राज्यों के 47 संस्थानों के जरिये 10,717 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण मिला, जिनमें 24 आकांक्षी जिले भी शामिल थे। प्रशिक्षित लोगों में 55 प्रतिशत महिलाएं थीं। पाठ्यक्रम सरकारी खरीद और जेम से जुड़े अवसरों के हिसाब से बनाए गए, जिनमें कैफेटेरिया प्रबंधन, खाद्य उत्पादन, वेल्डिंग, कैड-कैम, लॉन्ड्री सेवाएं, फैशन डिजाइनिंग, सिलाई और बांस से जुड़े काम शामिल थे।

सहायता के घटक

  • एससीएलसीएसएस: संस्थागत कर्ज से खरीदे गए संयंत्र, मशीनरी और उपकरण पर 25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये है। वर्ष 2016 से मार्च 2026 तक इसने 3,160 उद्यमों को 356.10 करोड़ रुपये की मदद दी, जो 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिलों तक पहुंची।
  • एसपीआरएस: एनएसआईसी के साथ पंजीकरण, जिससे निविदा दस्तावेज मुफ्त मिलते हैं और बयाना राशि जमा करने से छूट मिलती है।
  • एसएमएएस: हर वित्त वर्ष में चार घरेलू और दो अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने की सुविधा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए सूक्ष्म उद्यमों को 3 लाख, लघु को 2.5 लाख और मध्यम को 1.5 लाख रुपये तक सहायता मिलती है। वर्ष 2025-26 में 141 उद्यमों ने 4 घरेलू प्रदर्शनियों में भाग लिया, सीपीएसई के साथ 247 विशेष विक्रेता विकास कार्यक्रम हुए, 197 ई-निविदा कार्यशालाएं और 230 जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित हुईं।
  • बैंक कर्ज प्रसंस्करण शुल्क, निष्पादन बैंक गारंटी शुल्क और उत्पाद परीक्षण शुल्क पर 80 प्रतिशत की वापसी, जिसकी सीमा हर मामले में 1 लाख रुपये है, तथा निर्यात संवर्धन परिषद की सदस्यता पर 80 प्रतिशत या 20,000 रुपये तक।
  • एनआईआरएफ के शीर्ष 50 प्रबंधन संस्थानों में 1 से 30 दिन के प्रशिक्षण पर 90 प्रतिशत या 1 लाख रुपये तक की वापसी, और जेम, ई-खादी, ट्राइफेड, ट्राइब्स इंडिया तथा एमएसएमई मार्ट की सदस्यता पर 80 प्रतिशत या 25,000 रुपये तक।

खरीद का प्रावधान

सार्वजनिक खरीद नीति के तहत केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपनी सालाना खरीद का 25 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यमों से करना होता है, जिसमें कुल खरीद का 4 प्रतिशत एससी/एसटी स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए आरक्षित है। बिजनेस एक्सेलरेटर कार्यक्रम रणनीति, कीमत तय करने, कामकाज की कुशलता और बाजार में स्थिति पर मार्गदर्शन देता है। इससे जुड़े उद्यमों ने पावर ग्रिड से 8.48 लाख रुपये की निविदाएं और सेल से हाइड्रोलिक सिलिंडर की 5.10 लाख रुपये की निविदा हासिल की।

महत्वपूर्ण तथ्य

योजनाराष्ट्रीय एससी-एसटी हब (एनएसएसएच)
शुरुआत18 अक्टूबर 2016
मंत्रालयसूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय
लागू करने वाली संस्थाराष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी)
लाभार्थी31 जुलाई 2026 तक 1,90,414
प्रशिक्षित अभ्यर्थी31 जुलाई 2026 तक 54,499
2025-26 में खरीद12,524 उद्यमों से 4,013.42 करोड़ रुपये
2015-16 में खरीद99.37 करोड़ रुपये, तब से करीब 39 गुना वृद्धि
अग्रणी राज्यउत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम
एससीएलसीएसएस सब्सिडीलागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम 25 लाख रुपये
एससीएलसीएसएस का दायरा3,160 उद्यम, 356.10 करोड़ रुपये, 27 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिले
खरीद नीति का प्रावधानखरीद का 25 प्रतिशत एमएसई से, 4 प्रतिशत एससी/एसटी उद्यमों से

परीक्षा की दृष्टि से

योजना की शुरुआत (18 अक्टूबर 2016), लागू करने वाली संस्था (एनएसआईसी) और मंत्रालय (एमएसएमई), खरीद में उछाल (2015-16 के 99.37 करोड़ से 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये), 1,90,414 लाभार्थी और 54,499 प्रशिक्षित अभ्यर्थी, पांच अग्रणी राज्य, एससीएलसीएसएस की 25 प्रतिशत सब्सिडी जिसकी सीमा 25 लाख रुपये है, तथा सार्वजनिक खरीद नीति के 25 और 4 प्रतिशत के प्रावधान याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना किस संस्था के जरिये लागू की जाती है?

  1. A.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
  2. B.राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम
  3. C.खादी और ग्रामोद्योग आयोग
  4. D.राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम है। राष्ट्रीय एससी-एसटी हब 18 अक्टूबर 2016 को शुरू हुआ था और इसे एनएसआईसी के जरिये लागू किया जाता है। यही निगम एकल बिंदु पंजीकरण योजना भी चलाता है, जिसमें पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यमों को निविदा दस्तावेज मुफ्त मिलते हैं और बयाना राशि जमा करने से छूट मिलती है। विकल्प A यानी भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक लघु उद्यम क्षेत्र के लिए विकास वित्त संस्थान है और उसे कर्ज देता है, पर इस योजना को लागू करने वाली संस्था वह नहीं है। विकल्प C यानी खादी और ग्रामोद्योग आयोग खादी तथा ग्रामोद्योग को बढ़ावा देता है और अलग रोजगार कार्यक्रम चलाता है। विकल्प D यानी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम दूसरे मंत्रालय के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए कर्ज पर काम करता है। परीक्षा के लिए याद रखें कि योजना का मूल मंत्रालय एमएसएमई है और लागू करने वाली संस्था एनएसआईसी।

Q2.सरकारी योजनाएंमध्यम

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब के तहत वर्ष 2025-26 में एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से कितनी खरीद हुई?

  1. A.99.37 करोड़ रुपये
  2. B.356.10 करोड़ रुपये
  3. C.1,013.42 करोड़ रुपये
  4. D.4,013.42 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 4,013.42 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 4,013.42 करोड़ रुपये है, जो वर्ष 2025-26 में 12,524 सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीदा गया। यह आंकड़ा इसलिए अहम है कि यह 2015-16 के 99.37 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 39 गुना वृद्धि दिखाता है, यानी विकल्प A शुरुआती बिंदु है, ताजा आंकड़ा नहीं। विकल्प B यानी 356.10 करोड़ रुपये विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना के तहत 2016 से मार्च 2026 तक दी गई राशि है, जिससे 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिलों में 3,160 उद्यमों को मदद मिली, इसलिए वह एक घटक का आंकड़ा है, कुल खरीद का नहीं। विकल्प C आधा-अधूरा याद रखने वालों को फंसाने के लिए रखा गया है। इसके साथ यह नीति भी याद रखें कि केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और सीपीएसई की सालाना खरीद का 25 प्रतिशत एमएसई से और कुल खरीद का 4 प्रतिशत एससी/एसटी उद्यमों से होना चाहिए।

Q3.सरकारी योजनाएंकठिन

सार्वजनिक खरीद नीति के तहत कुल खरीद का कितना हिस्सा एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए आरक्षित है?

  1. A.2 प्रतिशत
  2. B.4 प्रतिशत
  3. C.10 प्रतिशत
  4. D.25 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 4 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 4 प्रतिशत है। केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपनी सालाना खरीद का 25 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यमों से करना होता है, और इसी के भीतर कुल खरीद का 4 प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए आरक्षित है। विकल्प D यानी 25 प्रतिशत एमएसई से जुड़ा बड़ा प्रावधान है और इस सवाल में सबसे आम भ्रम भी यही है, इसलिए दोनों आंकड़े अलग-अलग याद रखने चाहिए। विकल्प A और C यानी 2 और 10 प्रतिशत इस नीति में नहीं आते। इसी प्रावधान के कारण एकल बिंदु पंजीकरण योजना महत्वपूर्ण है, क्योंकि एनएसआईसी के साथ पंजीकरण से निविदा दस्तावेज मुफ्त मिलते हैं और बयाना राशि से छूट मिलती है। यही वजह है कि एससी/एसटी उद्यमों से खरीद 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये तक पहुंची।

Q4.सरकारी योजनाएंमध्यम

संस्थागत कर्ज से खरीदे गए संयंत्र और मशीनरी पर राष्ट्रीय एससी-एसटी हब कितनी पूंजी सब्सिडी देता है?

  1. A.15 प्रतिशत, अधिकतम 15 लाख रुपये
  2. B.25 प्रतिशत, अधिकतम 25 लाख रुपये
  3. C.35 प्रतिशत, अधिकतम 50 लाख रुपये
  4. D.50 प्रतिशत, अधिकतम 1 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 25 प्रतिशत, अधिकतम 25 लाख रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 25 प्रतिशत, अधिकतम 25 लाख रुपये है, जो विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना के तहत मिलता है। यह सब्सिडी नए और पहले से चल रहे एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म तथा लघु उद्यमों को संस्थागत कर्ज के जरिये संयंत्र, मशीनरी और उपकरण में निवेश पर मिलती है, और इसमें उत्पाद या क्षेत्र की कोई पाबंदी नहीं है, यानी निर्माण तथा सेवा दोनों तरह के उद्यम शामिल हैं। बाकी विकल्पों में दी गई दरें और सीमाएं योजना में नहीं हैं। इसके साथ योजना का रिकॉर्ड भी याद रखें, यानी 2016 से मार्च 2026 तक 3,160 उद्यमों को 356.10 करोड़ रुपये की मदद और 27 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिलों तक पहुंच। बाकी घटक वापसी के रूप में काम करते हैं, जैसे कर्ज प्रसंस्करण शुल्क, बैंक गारंटी शुल्क और परीक्षण शुल्क पर 80 प्रतिशत या 1 लाख रुपये तक।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब कब शुरू हुआ और इसे कौन लागू करता है?

यह 18 अक्टूबर 2016 को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत शुरू हुआ और इसे राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के जरिये लागू किया जाता है।

एससी/एसटी उद्यमों से सरकारी खरीद कितनी बढ़ी है?

करीब 39 गुना, जो 2015-16 के 99.37 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये हो गई। वर्ष 2025-26 की यह खरीद 12,524 सूक्ष्म और लघु उद्यमों से हुई।

विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना में क्या मिलता है?

संस्थागत कर्ज से लिए गए संयंत्र, मशीनरी और उपकरण पर 25 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये है। वर्ष 2016 से मार्च 2026 तक इसने 3,160 उद्यमों को 356.10 करोड़ रुपये दिए, जो 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिलों तक पहुंचे।

एससी/एसटी उद्यमों के लिए खरीद में कितना हिस्सा आरक्षित है?

केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और सीपीएसई को सालाना खरीद का 25 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यमों से करना होता है, और कुल खरीद का 4 प्रतिशत एससी/एसटी स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए आरक्षित है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC CHSL