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पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030 जारी, एमओएसपीआई का कदम

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030 जारी की, जो 2022-2026 की रणनीति का विस्तार है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030 जारी, एमओएसपीआई का कदम — GK24 title card

चर्चा में क्यों

7 अक्टूबर 2026 को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030 दस्तावेज जारी किया, जो पर्यावरण लेखांकन के लिए उसकी 2022-2026 की रणनीति के बाद की रूपरेखा है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030 नाम का दस्तावेज जारी किया है। 7 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार यह उस पुरानी रूपरेखा का उत्तराधिकारी है जिसकी अवधि 2026 तक थी, और यह बताता है कि अगले चार वर्षों में देश पर्यावरण लेखांकन को किस दिशा में आगे बढ़ाएगा।

इसके पीछे का ढांचा

भारत पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए) का पालन करता है, जिसे संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग ने मान्यता दी है। मंत्रालय ने 2018 से पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर काम शुरू किया। विषय बहुत व्यापक होने के कारण लिखित रूपरेखा की जरूरत थी, इसलिए मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने भारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखा रणनीति 2022-2026 जारी की थी। उस दस्तावेज में सामग्री प्रवाह लेखा, महासागर लेखा, ऊर्जा लेखा तथा जैव विविधता और शहरी क्षेत्रों के विषयगत लेखा को उस अवधि का कार्य चुना गया था।

अब तक क्या हुआ

इस योजना के अनुसार मंत्रालय ने वन, जैव विविधता, आर्द्रभूमि, महासागर लेखा, मृदा, जल गुणवत्ता, फसल भूमि, ऊर्जा, अवशेष, शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और परागण सेवाओं पर अध्ययन, प्रकाशन तथा रिपोर्ट जारी किए हैं और लेखा का दायरा बढ़ाने का प्रयास भी किया है।

नई रणनीति में नया क्या

  • यह पुराने दस्तावेज का विस्तार है और नए विषयों या पुराने विषयों के बड़े दायरे के लिए व्यापक रूपरेखा देता है - वन, खनिज, मृदा संसाधन, भूमि, जल, कार्बन भंडार, पर्यावरण संबंधी गतिविधियां, जैव विविधता तथा पर्यावरण सांख्यिकी।
  • विषयों का चयन ग्रीन नेशनल अकाउंट इन इंडिया - ए फ्रेमवर्क रिपोर्ट की सिफारिशों और एसईईए केंद्रीय ढांचे के आधार पर हुआ है।
  • यह कार्य बिंदु तय करता है, आंकड़ों की कमी पर ध्यान देता है, संभावित स्रोत बताता है, नीतिगत प्रभावों की चर्चा करता है तथा प्राथमिक क्षेत्र और पड़ाव तय करता है जिससे प्रगति नापी जा सके।

इसका महत्व

राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को राष्ट्रीय लेखा ढांचे के भीतर मान्यता मिली है, जिससे मंत्रालय के अनुसार पर्यावरण लेखांकन का महत्व और बढ़ जाता है। यह रूपरेखा प्राकृतिक संसाधन, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के बीच संबंध समझने तथा आंकड़ों की कमी पहचानने में मदद करेगी। मंत्रालय इसे उन राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के लिए भी संदर्भ के रूप में देता है जो इस क्षेत्र में अपना काम शुरू या मजबूत करना चाहें, और इसे स्वयं विकसित होने वाला मार्गदर्शक उपकरण कहता है। दस्तावेज मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

महत्वपूर्ण तथ्य

दस्तावेजभारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030
जारी कियासांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई)
अपनाई गई प्रणालीपर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए)
मान्यता देने वाली संस्थासंयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग
काम शुरू2018
पुरानी रणनीतिभारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखा रणनीति 2022-2026, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी
पुरानी रणनीति के क्षेत्रसामग्री प्रवाह लेखा, महासागर लेखा, ऊर्जा लेखा, जैव विविधता तथा शहरी क्षेत्रों के विषयगत लेखा
नई रणनीति का आधारग्रीन नेशनल अकाउंट इन इंडिया - ए फ्रेमवर्क रिपोर्ट तथा एसईईए केंद्रीय ढांचा
संबंधित घटनाक्रमराष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता

परीक्षा की दृष्टि से

दस्तावेज और उसकी अवधि (भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030), मंत्रालय (एमओएसपीआई) और उसकी सांख्यिकी शाखा (राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय), अपनाई गई प्रणाली (एसईईए) तथा मान्यता देने वाली संस्था (संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग), काम शुरू होने का वर्ष (2018), पुरानी रणनीति (2022-2026) और नई रणनीति के दो आधार - ग्रीन नेशनल अकाउंट इन इंडिया - ए फ्रेमवर्क रिपोर्ट तथा एसईईए केंद्रीय ढांचा याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रिपोर्ट और सूचकांकआसान

'भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030' दस्तावेज किस मंत्रालय ने जारी किया?

  1. A.पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
  2. B.सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
  3. C.पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
  4. D.नीति आयोग
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय है, जिसे संक्षेप में एमओएसपीआई कहा जाता है। यह दस्तावेज उसी का संकलन है और उस पुरानी रणनीति के बाद आया है जिसकी अवधि 2026 में समाप्त हो रही थी। विकल्प A यानी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय स्वाभाविक अनुमान लगता है क्योंकि विषय पर्यावरण से जुड़ा है, पर पर्यावरण लेखांकन सांख्यिकीय कार्य है और यह विज्ञप्ति सांख्यिकी मंत्रालय से आई है, जिसके राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने पुरानी रूपरेखा जारी की थी। विकल्प C यानी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय गलत है क्योंकि विज्ञप्ति में उसका नाम नहीं है, भले महासागर लेखा कार्य के क्षेत्रों में शामिल है। विकल्प D यानी नीति आयोग भी गलत है, क्योंकि इस विज्ञप्ति में उसकी कोई भूमिका नहीं है।

Q2.रिपोर्ट और सूचकांकमध्यम

भारत जिस पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए) का पालन करता है, उसे किस संस्था ने मान्यता दी है?

  1. A.संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग
  2. B.विश्व बैंक
  3. C.संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
  4. D.अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग

व्याख्या

सही उत्तर संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग है। विज्ञप्ति स्पष्ट कहती है कि एमओएसपीआई पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली का पालन करता है, जिसे इस आयोग ने मान्यता दी है, और मंत्रालय ने 2018 से पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर काम शुरू किया। विकल्प B यानी विश्व बैंक गलत है क्योंकि विज्ञप्ति इस प्रणाली को मान्यता देने का श्रेय उसे नहीं देती, भले बैंक प्राकृतिक पूंजी से जुड़े अपने आकलन प्रकाशित करता है। विकल्प C यानी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम आकर्षक विकल्प है क्योंकि उसका कार्यक्षेत्र पर्यावरण है, पर यहां नामित संस्था सांख्यिकी आयोग है, जो सरकारी सांख्यिकी के मानक तय करता है। विकल्प D यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष गलत है क्योंकि उसका काम व्यापक आर्थिक और वित्तीय सांख्यिकी से जुड़ा है।

Q3.रिपोर्ट और सूचकांककठिन

भारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखा रणनीति 2022-2026 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन कार्य क्षेत्र चुना गया था?

  1. A.सामग्री प्रवाह लेखा
  2. B.उपभोक्ता मूल्य सूचकांक लेखा
  3. C.भुगतान संतुलन लेखा
  4. D.मौद्रिक समुच्चय
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सामग्री प्रवाह लेखा

व्याख्या

सही उत्तर सामग्री प्रवाह लेखा है। मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की पुरानी रूपरेखा में सामग्री प्रवाह लेखा, महासागर लेखा, ऊर्जा लेखा तथा जैव विविधता और शहरी क्षेत्रों के विषयगत लेखा को उस अवधि के कार्य क्षेत्र के रूप में चुना गया था। उसी के अनुसार मंत्रालय ने वन, जैव विविधता, आर्द्रभूमि, महासागर लेखा, मृदा, जल गुणवत्ता, फसल भूमि, ऊर्जा, अवशेष, शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और परागण सेवाओं पर अध्ययन तथा प्रकाशन जारी किए। विकल्प B गलत है क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खुदरा महंगाई नापता है और पर्यावरण लेखांकन का हिस्सा नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि भुगतान संतुलन लेखा शेष विश्व के साथ लेनदेन दर्ज करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि मौद्रिक समुच्चय केंद्रीय बैंक की मुद्रा एवं बैंकिंग सांख्यिकी का विषय है।

Q4.रिपोर्ट और सूचकांकमध्यम

नई रणनीति में पर्यावरण लेखांकन का महत्व बढ़ाने वाला कौन सा घटनाक्रम बताया गया है?

  1. A.राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता
  2. B.राष्ट्रीय कार्बन क्रेडिट एक्सचेंज की शुरुआत
  3. C.आर्थिक सर्वेक्षण में हरित विकास पर नया अध्याय
  4. D.राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय में विलय
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता है। विज्ञप्ति कहती है कि इस प्रणाली के तहत हुए घटनाक्रम, विशेष रूप से राष्ट्रीय लेखा ढांचे के भीतर प्राकृतिक संसाधन लेखांकन की मान्यता, पर्यावरण लेखांकन का महत्व बढ़ाते हैं, और रूपरेखा में शामिल विषय प्राकृतिक संसाधन, अर्थव्यवस्था तथा पर्यावरण के बीच संबंध समझने और आंकड़ों की कमी पहचानने में मदद करेंगे। विकल्प B गलत है क्योंकि दस्तावेज में किसी कार्बन क्रेडिट एक्सचेंज का उल्लेख नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि इस विज्ञप्ति में आर्थिक सर्वेक्षण की चर्चा नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि किसी विलय की बात नहीं कही गई; राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का नाम केवल पुरानी रणनीति जारी करने वाली संस्था के रूप में आया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030 किस मंत्रालय ने जारी की?

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने। यह दस्तावेज उसकी पुरानी रणनीति 2022-2026 का विस्तार है और देश में पर्यावरण लेखांकन के विकास का मार्गदर्शन करता है।

भारत पर्यावरण लेखा के लिए कौन सी प्रणाली अपनाता है?

पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए), जिसे संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग ने मान्यता दी है। मंत्रालय 2018 से पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है।

नई रणनीति में कौन से विषय शामिल हैं?

वन, खनिज, मृदा संसाधन, भूमि, जल, कार्बन भंडार, पर्यावरण संबंधी गतिविधियां, जैव विविधता तथा पर्यावरण सांख्यिकी। इन विषयों का चयन ग्रीन नेशनल अकाउंट इन इंडिया - ए फ्रेमवर्क रिपोर्ट और एसईईए केंद्रीय ढांचे के आधार पर हुआ।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS