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आईएनएसटी मोहाली ने डाई युक्त अपशिष्ट जल का फिल्टर बनाया

आईएनएसटी मोहाली के वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग आधारित नैनोफाइबर फिल्टर बनाया, जिसने 120 मिनट में वस्त्र उद्योग की एक डाई का 98.6 प्रतिशत रंग हटा दिया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आईएनएसटी मोहाली ने डाई युक्त अपशिष्ट जल का फिल्टर बनाया

चर्चा में क्यों

13 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी गई कि आईएनएसटी मोहाली के वैज्ञानिकों ने पॉलीलैक्टिक एसिड नैनोफाइबर में जिंक ऑक्साइड नैनोकण जोड़कर मशीन लर्निंग आधारित फिल्टर बनाया है, जो डाई से दूषित अपशिष्ट जल के उपचार का पर्यावरण अनुकूल रास्ता देता है।

नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी), मोहाली के अनुसंधानकर्ताओं ने ऐसा फिल्टर विकसित किया है जो औद्योगिक रंगों से दूषित पानी को साफ करता है। यह संस्थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। फिल्टर में प्राकृतिक स्रोत से तैयार जिंक ऑक्साइड नैनोकणों को झरझरा पॉलीलैक्टिक एसिड नैनोफाइबर के भीतर स्थिर किया गया है, जो प्रकृति में अपने आप गलने वाला पदार्थ है। प्रयोगशाला के काम के साथ मशीन लर्निंग का भी उपयोग हुआ और यह अध्ययन एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

समस्या क्या है

उद्योगों, विशेष रूप से वस्त्र इकाइयों से निकलने वाले रंग स्थिर, जहरीले और अपने आप धीरे-धीरे गलने वाले होते हैं। सोखना, अवसादन और फ्लोक्यूलेशन जैसी विधियां प्रदूषक को पानी से अलग कर देती हैं, पर उसे नष्ट करना आवश्यक नहीं, और अत्यधिक स्थिर रंगों के लिए जैविक उपचार धीमा पड़ता है। प्रकाश से प्रदूषक तोड़ने का रास्ता आकर्षक है, परंतु ऐसी प्रणालियों में उत्प्रेरक कणों को वापस पाना, उन्हें उपचारित पानी से अलग करना और प्रकाश से बने आवेशों के फिर जुड़ने को रोकना कठिन रहता है, साथ ही वे प्रकाश की उपलब्धता पर निर्भर रहती हैं।

नया फिल्टर कैसे काम करता है

दल ने जिंक ऑक्साइड को नैनोफाइबर के भीतर स्थिर किया और प्रकाश के साथ यांत्रिक कंपन भी जोड़ा। कंपन से पदार्थ में पीजोइलेक्ट्रिक ध्रुवीकरण बना, जिसने प्रकाश से बने इलेक्ट्रॉन और होल के पुनर्संयोजन को दबाया और रंग के अणुओं पर हमला करने वाली प्रतिक्रियाशील प्रजातियों का बनना बढ़ा दिया। उत्प्रेरक खुले चूर्ण के रूप में तैरने के बजाय इलेक्ट्रोस्पिनिंग से बनी झिल्ली में बैठा है, इसलिए सतह क्षेत्र अधिक मिलता है, झिल्ली यांत्रिक रूप से मजबूत रहती है और उपचारित पानी से उत्प्रेरक छानकर निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

हल्दी से हरित संश्लेषण

नैनोकण डॉ. अवीरू कुमार बसु की प्रयोगशाला में हल्दी के अर्क से तैयार किए गए, जिसमें करक्यूमिन, फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक यौगिकों ने अपचायक तथा स्थिरकारक की भूमिका निभाई। इस हरित मार्ग से पारंपरिक संश्लेषण में काम आने वाले हानिकारक अभिकर्मकों से बचाव होता है।

परीक्षणों के नतीजे

  • प्रकाश और पराध्वनि उत्तेजना एक साथ देने पर झिल्ली ने 120 मिनट के भीतर मेथिलीन ब्लू का 98.6 प्रतिशत और कांगो रेड का 96.7 प्रतिशत रंग हटा दिया।
  • इसने जीवाणुओं पर भी असर दिखाया और 6 घंटे बाद ई. कोली को लगभग 75 प्रतिशत तथा एस. ऑरियस को 71 प्रतिशत निष्क्रिय किया।
  • मशीन लर्निंग से यह अनुमान लगाया गया कि तरंगदैर्ध्य, समय, उत्प्रेरक की मात्रा, पराध्वनि आवृत्ति, प्रकाश की तीव्रता और रंग की सांद्रता के आधार पर रंग कितना हटेगा।

कहां उपयोग होगा

यह झिल्ली वस्त्र तथा अन्य उद्योगों के उस अपशिष्ट जल के उपचार में काम आ सकती है जिसमें कठिन कार्बनिक रंग और सूक्ष्मजीवी संदूषण दोनों हों। इसका उपयोग जीवाणुरोधी जल उपचार झिल्ली के रूप में तथा प्रकाश और कंपन आधारित उत्प्रेरण से पर्यावरणीय सफाई में भी किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

विकसित कियानैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी), मोहाली
मूल संस्थाविज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान
प्रयुक्त पदार्थहरित विधि से बने जिंक ऑक्साइड नैनोकण और जैव अपघटनीय पॉलीलैक्टिक एसिड नैनोफाइबर
हरित संश्लेषणहल्दी का अर्क, जिसमें करक्यूमिन, फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक यौगिक अपचायक तथा स्थिरकारक
प्रक्रियाफोटोकैटलिसिस के साथ पीजोकैटलिसिस, प्रकाश और यांत्रिक कंपन से
रंग हटाने की दर120 मिनट में मेथिलीन ब्लू का 98.6 प्रतिशत और कांगो रेड का 96.7 प्रतिशत
जीवाणुरोधी असर6 घंटे बाद ई. कोली लगभग 75 प्रतिशत और एस. ऑरियस 71 प्रतिशत निष्क्रिय
प्रकाशनएडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स

परीक्षा की दृष्टि से

संस्थान (आईएनएसटी मोहाली) और उसका मूल विभाग (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग), दोनों पदार्थ (जिंक ऑक्साइड नैनोकण तथा पॉलीलैक्टिक एसिड नैनोफाइबर), हरित संश्लेषण में हल्दी का अर्क, फोटोकैटलिसिस और पीजोकैटलिसिस का मेल, 120 मिनट में 98.6 तथा 96.7 प्रतिशत रंग हटाना, 75 और 71 प्रतिशत जीवाणु निष्क्रियता तथा पत्रिका का नाम याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

डाई से दूषित अपशिष्ट जल के उपचार के लिए मशीन लर्निंग आधारित फिल्टर किस संस्थान ने विकसित किया?

  1. A.नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली
  2. B.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
  3. C.राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, नागपुर
  4. D.भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली

व्याख्या

सही उत्तर नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। वहां के अनुसंधानकर्ताओं ने प्राकृतिक स्रोत से तैयार जिंक ऑक्साइड नैनोकणों को जैव अपघटनीय पॉलीलैक्टिक एसिड के झरझरा नैनोफाइबर में स्थिर किया और फिर प्रकाश के साथ यांत्रिक कंपन देकर पानी में घुले रंगों को तोड़ा। यह अध्ययन एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ। शेष तीनों विकल्प प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान हैं, परंतु इस फिल्टर का श्रेय उनमें किसी को नहीं दिया गया, इसलिए वे गलत हैं। परीक्षा के लिए संस्थान, उसके मूल विभाग, झिल्ली के दोनों पदार्थों और डॉ. अवीरू कुमार बसु की प्रयोगशाला को जोड़कर याद रखें। इस झिल्ली का उपयोग जीवाणुरोधी जल उपचार में भी किया जा सकता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

इस अनुसंधान में जिंक ऑक्साइड नैनोकण किस प्राकृतिक पदार्थ से संश्लेषित किए गए?

  1. A.नीम की पत्तियों का अर्क
  2. B.हल्दी का अर्क
  3. C.तुलसी का अर्क
  4. D.केले के छिलके का अर्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हल्दी का अर्क

व्याख्या

सही उत्तर हल्दी का अर्क है। नैनोकण डॉ. अवीरू कुमार बसु की प्रयोगशाला में हल्दी के अर्क से तैयार किए गए, जिसमें प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले करक्यूमिन, फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक यौगिकों ने अपचायक तथा स्थिरकारक की भूमिका निभाई। इस हरित मार्ग का महत्व यह है कि पारंपरिक संश्लेषण में प्रयुक्त हानिकारक अभिकर्मकों से बचा जाता है, अर्थात पानी साफ करने वाला पदार्थ स्वयं पर्यावरण अनुकूल ढंग से बनता है। शेष विकल्पों में ऐसे पादप पदार्थ हैं जो हरित संश्लेषण के अनुसंधान में सामान्यतः प्रयोग होते हैं, परंतु इस कार्य में उनका उपयोग नहीं हुआ, इसलिए वे आकर्षक होते हुए भी गलत हैं। हल्दी और जिंक ऑक्साइड का यह मेल याद रखें। इसी हरित मार्ग से बने नैनोकण झिल्ली में स्थिर किए गए।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

प्रकाश और पराध्वनि उत्तेजना के साथ नई झिल्ली ने मेथिलीन ब्लू का कितना रंग हटाया?

  1. A.120 मिनट में 71 प्रतिशत
  2. B.60 मिनट में 75 प्रतिशत
  3. C.120 मिनट में 96.7 प्रतिशत
  4. D.120 मिनट में 98.6 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 120 मिनट में 98.6 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 120 मिनट में 98.6 प्रतिशत है। प्रकाश और पराध्वनि उत्तेजना एक साथ देने पर पॉलीलैक्टिक एसिड तथा जिंक ऑक्साइड की झिल्ली ने इसी अवधि में मेथिलीन ब्लू का 98.6 प्रतिशत रंग हटा दिया। विकल्प ग दूसरे परीक्षित रंग कांगो रेड का आंकड़ा देता है, जिसका 96.7 प्रतिशत रंग इसी अवधि में हटा, इसलिए वह मिलता-जुलता परंतु गलत विकल्प है। विकल्प क और ख गलत हैं क्योंकि वे प्रतिशत जीवाणुरोधी परिणामों के हैं: पदार्थ ने 6 घंटे के संपर्क के बाद ई. कोली को लगभग 75 प्रतिशत और एस. ऑरियस को 71 प्रतिशत निष्क्रिय किया। रंग हटाने और जीवाणु निष्क्रिय करने के आंकड़े अलग-अलग याद रखना आवश्यक है, क्योंकि प्रश्न में इन्हें बदलकर पूछा जाता है। मशीन लर्निंग से यह अनुमान भी लगाया गया कि विभिन्न परिस्थितियों में रंग कितना हटेगा।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

नए फिल्टर में रंगों को तोड़ने के लिए कौन-सी दो प्रक्रियाएं मिलाई गई हैं?

  1. A.सोखना और फ्लोक्यूलेशन
  2. B.फोटोकैटलिसिस और पीजोकैटलिसिस
  3. C.अवसादन और जैविक उपचार
  4. D.विपरीत परासरण और क्लोरीनीकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. फोटोकैटलिसिस और पीजोकैटलिसिस

व्याख्या

सही उत्तर फोटोकैटलिसिस और पीजोकैटलिसिस है। यह फिल्टर प्रकाश तथा यांत्रिक कंपन, दोनों का एक साथ उपयोग करके रंगों को तोड़ता है। कंपन से पदार्थ में पीजोइलेक्ट्रिक ध्रुवीकरण बनता है, जो प्रकाश से उत्पन्न इलेक्ट्रॉन और होल के पुनर्संयोजन को रोकता है और इससे रंग के अणुओं पर हमला करने वाली प्रतिक्रियाशील प्रजातियों का बनना बढ़ जाता है। विकल्प क और ग गलत हैं, क्योंकि सोखना, फ्लोक्यूलेशन, अवसादन और जैविक उपचार पुरानी विधियां हैं: पहली श्रेणी प्रदूषक को अलग करती है, आवश्यक नहीं कि नष्ट करे, और स्थिर रंगों के लिए जैविक उपचार धीमा है। विकल्प घ की प्रक्रियाएं इस अध्ययन का हिस्सा नहीं थीं। झिल्ली में उत्प्रेरक बैठाने से उसे पानी से छानकर निकालने की समस्या भी हल होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डाई से दूषित अपशिष्ट जल का नया फिल्टर किस संस्थान ने विकसित किया?

नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली ने, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। फिल्टर में जिंक ऑक्साइड नैनोकण झरझरा पॉलीलैक्टिक एसिड नैनोफाइबर के भीतर स्थिर हैं और अध्ययन एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ।

जिंक ऑक्साइड नैनोकण कैसे तैयार किए गए?

हरित विधि से हल्दी के अर्क का उपयोग करके, जिसमें करक्यूमिन, फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक यौगिकों ने अपचायक तथा स्थिरकारक की भूमिका निभाई। इससे नैनोकणों के पारंपरिक संश्लेषण में काम आने वाले हानिकारक अभिकर्मकों से बचाव होता है।

परीक्षणों में झिल्ली का प्रदर्शन कैसा रहा?

प्रकाश और पराध्वनि उत्तेजना एक साथ देने पर इसने 120 मिनट में मेथिलीन ब्लू का 98.6 प्रतिशत और कांगो रेड का 96.7 प्रतिशत रंग हटाया, तथा 6 घंटे बाद ई. कोली को लगभग 75 प्रतिशत और एस. ऑरियस को 71 प्रतिशत निष्क्रिय किया।

स्रोत

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