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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

नए फिल्टर में रंगों को तोड़ने के लिए कौन-सी दो प्रक्रियाएं मिलाई गई हैं?

  1. A.सोखना और फ्लोक्यूलेशन
  2. B.फोटोकैटलिसिस और पीजोकैटलिसिस
  3. C.अवसादन और जैविक उपचार
  4. D.विपरीत परासरण और क्लोरीनीकरण

सही उत्तर

B. फोटोकैटलिसिस और पीजोकैटलिसिस

व्याख्या

सही उत्तर फोटोकैटलिसिस और पीजोकैटलिसिस है। यह फिल्टर प्रकाश तथा यांत्रिक कंपन, दोनों का एक साथ उपयोग करके रंगों को तोड़ता है। कंपन से पदार्थ में पीजोइलेक्ट्रिक ध्रुवीकरण बनता है, जो प्रकाश से उत्पन्न इलेक्ट्रॉन और होल के पुनर्संयोजन को रोकता है और इससे रंग के अणुओं पर हमला करने वाली प्रतिक्रियाशील प्रजातियों का बनना बढ़ जाता है। विकल्प क और ग गलत हैं, क्योंकि सोखना, फ्लोक्यूलेशन, अवसादन और जैविक उपचार पुरानी विधियां हैं: पहली श्रेणी प्रदूषक को अलग करती है, आवश्यक नहीं कि नष्ट करे, और स्थिर रंगों के लिए जैविक उपचार धीमा है। विकल्प घ की प्रक्रियाएं इस अध्ययन का हिस्सा नहीं थीं। झिल्ली में उत्प्रेरक बैठाने से उसे पानी से छानकर निकालने की समस्या भी हल होती है।

पूरा लेख पढ़ें: आईएनएसटी मोहाली ने डाई युक्त अपशिष्ट जल का फिल्टर बनाया

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

डाई से दूषित अपशिष्ट जल के उपचार के लिए मशीन लर्निंग आधारित फिल्टर किस संस्थान ने विकसित किया?

  1. A.नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली
  2. B.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
  3. C.राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, नागपुर
  4. D.भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली

व्याख्या

सही उत्तर नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, मोहाली है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। वहां के अनुसंधानकर्ताओं ने प्राकृतिक स्रोत से तैयार जिंक ऑक्साइड नैनोकणों को जैव अपघटनीय पॉलीलैक्टिक एसिड के झरझरा नैनोफाइबर में स्थिर किया और फिर प्रकाश के साथ यांत्रिक कंपन देकर पानी में घुले रंगों को तोड़ा। यह अध्ययन एडवांस्ड फंक्शनल मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ। शेष तीनों विकल्प प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान हैं, परंतु इस फिल्टर का श्रेय उनमें किसी को नहीं दिया गया, इसलिए वे गलत हैं। परीक्षा के लिए संस्थान, उसके मूल विभाग, झिल्ली के दोनों पदार्थों और डॉ. अवीरू कुमार बसु की प्रयोगशाला को जोड़कर याद रखें। इस झिल्ली का उपयोग जीवाणुरोधी जल उपचार में भी किया जा सकता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

इस अनुसंधान में जिंक ऑक्साइड नैनोकण किस प्राकृतिक पदार्थ से संश्लेषित किए गए?

  1. A.नीम की पत्तियों का अर्क
  2. B.हल्दी का अर्क
  3. C.तुलसी का अर्क
  4. D.केले के छिलके का अर्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हल्दी का अर्क

व्याख्या

सही उत्तर हल्दी का अर्क है। नैनोकण डॉ. अवीरू कुमार बसु की प्रयोगशाला में हल्दी के अर्क से तैयार किए गए, जिसमें प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले करक्यूमिन, फ्लेवोनोइड्स और फेनोलिक यौगिकों ने अपचायक तथा स्थिरकारक की भूमिका निभाई। इस हरित मार्ग का महत्व यह है कि पारंपरिक संश्लेषण में प्रयुक्त हानिकारक अभिकर्मकों से बचा जाता है, अर्थात पानी साफ करने वाला पदार्थ स्वयं पर्यावरण अनुकूल ढंग से बनता है। शेष विकल्पों में ऐसे पादप पदार्थ हैं जो हरित संश्लेषण के अनुसंधान में सामान्यतः प्रयोग होते हैं, परंतु इस कार्य में उनका उपयोग नहीं हुआ, इसलिए वे आकर्षक होते हुए भी गलत हैं। हल्दी और जिंक ऑक्साइड का यह मेल याद रखें। इसी हरित मार्ग से बने नैनोकण झिल्ली में स्थिर किए गए।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

प्रकाश और पराध्वनि उत्तेजना के साथ नई झिल्ली ने मेथिलीन ब्लू का कितना रंग हटाया?

  1. A.120 मिनट में 71 प्रतिशत
  2. B.60 मिनट में 75 प्रतिशत
  3. C.120 मिनट में 96.7 प्रतिशत
  4. D.120 मिनट में 98.6 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 120 मिनट में 98.6 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर 120 मिनट में 98.6 प्रतिशत है। प्रकाश और पराध्वनि उत्तेजना एक साथ देने पर पॉलीलैक्टिक एसिड तथा जिंक ऑक्साइड की झिल्ली ने इसी अवधि में मेथिलीन ब्लू का 98.6 प्रतिशत रंग हटा दिया। विकल्प ग दूसरे परीक्षित रंग कांगो रेड का आंकड़ा देता है, जिसका 96.7 प्रतिशत रंग इसी अवधि में हटा, इसलिए वह मिलता-जुलता परंतु गलत विकल्प है। विकल्प क और ख गलत हैं क्योंकि वे प्रतिशत जीवाणुरोधी परिणामों के हैं: पदार्थ ने 6 घंटे के संपर्क के बाद ई. कोली को लगभग 75 प्रतिशत और एस. ऑरियस को 71 प्रतिशत निष्क्रिय किया। रंग हटाने और जीवाणु निष्क्रिय करने के आंकड़े अलग-अलग याद रखना आवश्यक है, क्योंकि प्रश्न में इन्हें बदलकर पूछा जाता है। मशीन लर्निंग से यह अनुमान भी लगाया गया कि विभिन्न परिस्थितियों में रंग कितना हटेगा।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

मसूरी में शहरी सेवा वितरण का यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम एनसीजीजी किस विभाग के अधीन आयोजित करता है?

  1. A.प्रशासनिक सुधार तथा लोक शिकायत विभाग
  2. B.कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग
  3. C.उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग
  4. D.व्यय विभाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रशासनिक सुधार तथा लोक शिकायत विभाग

व्याख्या

सही उत्तर प्रशासनिक सुधार तथा लोक शिकायत विभाग है। राष्ट्रीय सुशासन केंद्र इसी विभाग के अधीन काम करता है और कई देशों के सिविल सेवकों के लिए शहरी सेवा वितरण पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करता है, जो मसूरी में 12 से 23 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है। इस कार्यक्रम को विदेश मंत्रालय प्रायोजित करता है और यह भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के तहत भारत के अंतरराष्ट्रीय क्षमता निर्माण प्रयासों का हिस्सा है। इसमें भाग लेने वाले अधिकारी पेरू, कंबोडिया, नाइजीरिया, केन्या, फलस्तीन, लेबनान, गाम्बिया, इक्वाडोर और स्पेन सहित कई देशों से आए हैं। विकल्प बी सिविल सेवा कार्मिक मामलों से जुड़ा है, पर यहां आयोजक नहीं है, विकल्प सी उद्योग तथा व्यापार संवर्धन और विकल्प डी सार्वजनिक व्यय से जुड़े हैं, इनमें से कोई यह कार्यक्रम नहीं चलाता। क्रम याद रखें, एनसीजीजी, डीएआरपीजी, विदेश मंत्रालय का प्रायोजन और आईटीईसी ढांचा।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भाषिणी की भाषा तकनीक कितने सरकारी मंचों में जोड़ी गई है?

  1. A.1,253
  2. B.2,353
  3. C.3,500
  4. D.800
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2,353

व्याख्या

सही उत्तर 2,353 है। भाषिणी, जो भारत का भाषा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, की तकनीक इतने सरकारी मंचों में जोड़ी गई है और इनमें 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटें शामिल हैं, इसलिए विकल्प डी केवल वेबसाइटों की संख्या बताता है, कुल मंचों की नहीं। विकल्प ए और सी बताए गए आंकड़े नहीं हैं। यह मंच 36 भारतीय भाषाओं को लिखित रूप में, 23 भारतीय भाषाओं को वाणी में और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सहयोग देता है, तथा इस पर अब तक 9 अरब से अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुमान पूरे हुए हैं, जबकि रोजाना यह संख्या 2.4 करोड़ से अधिक रहती है। इसी क्षमता के कारण प्रभाग कई देशों के अधिकारियों के प्रशिक्षण में सजीव अनुवाद दे सका। पूरा समूह साथ याद रखें, 2,353 मंच, 800 से अधिक वेबसाइटें, 36 लिखित और 23 वाणी भाषाएं।