आईडीबीआई बैंक: हिस्सेदारी घटाने पर मंत्रालय का स्पष्टीकरण
वित्त मंत्रालय ने 17 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 में सरकार को बैंक में हिस्सेदारी घटाने से रोकने वाला कोई प्रावधान नहीं है।

चर्चा में क्यों
वित्त मंत्रालय ने 17 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी से जुड़े विधायी घटनाक्रमों पर स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003, दिल्ली उच्च न्यायालय के 17 दिसंबर 2018 के निर्णय और केंद्रीय बजट भाषणों का हवाला दिया गया।
वित्त मंत्रालय ने 17 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी से जुड़ी विधायी स्थिति पर स्पष्टीकरण जारी किया। मीडिया के कुछ हिस्सों में वर्ष 2003 के संसदीय घटनाक्रम पर टिप्पणियाँ आने के बाद मंत्रालय ने दोहराया कि अधिनियमित कानून सरकार को बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या उससे पूरी तरह बाहर निकलने से नहीं रोकता।
स्पष्टीकरण की पृष्ठभूमि
मंत्रालय ने घटनाक्रम का क्रम फिर से रखा। केंद्रीय बजट 2003 पर चर्चा और आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 पर संसदीय बहस के दौरान एक संशोधन लाया गया था, जिसका उद्देश्य सरकारी हिस्सेदारी में कमी को सीमित करना था। वह संशोधन अंततः अस्वीकार हो गया और संसद द्वारा पारित कानून का हिस्सा नहीं बना।
दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला
यह प्रश्न आगे ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय पहुँचा, जिसका निर्णय 17 दिसंबर 2018 को सुनाया गया। न्यायालय ने रिट याचिका खारिज कर दी। निर्णय के पैरा 41 और 42 में कहा गया कि लगभग 15 वर्ष पहले विधायी बहस के दौरान सदन में दिए गए वक्तव्य केंद्र सरकार को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम करने से नहीं रोक सकते, क्योंकि प्रस्तावित परंतुक को शामिल न करने के निहितार्थ से संसद अवगत थी और सदन में दिया गया भाषण कानून के पाठ की जगह नहीं ले सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि अधिनियम की भाषा में कोई अस्पष्टता नहीं है और उसमें हिस्सेदारी घटाने या विनिवेश पर रोक लगाने वाला कोई प्रावधान नहीं है।
वचनबद्धता विबंधन लागू नहीं
यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल) के सिद्धांत पर सीधे विचार हुआ। चुनौती इसी आधार पर दी गई थी कि संसद में दिया गया आश्वासन सरकार पर बाध्यकारी है। न्यायालय ने इस सिद्धांत को यहाँ पूरी तरह अप्रासंगिक बताया, क्योंकि वे वक्तव्य कानून बनाने की प्रक्रिया में दिए गए थे और उन्हें कर्मचारियों के प्रति ऐसा आश्वासन नहीं माना जा सकता जिसके भरोसे उन्होंने अपने हित के विरुद्ध कोई कदम उठाया हो।
बजट भाषणों में नीति
मंत्रालय ने दो बजट भाषणों का हवाला दिया। केंद्रीय बजट 2016-17 के भाषण के पैरा 93 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनना होगा, बैंक बोर्ड ब्यूरो उसी वर्ष कार्यशील किया जाएगा, बैंकों के समेकन का रोडमैप प्रस्तुत होगा, आईडीबीआई बैंक के रूपांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से नीचे लाने के विकल्प पर भी विचार करेगी। केंद्रीय बजट 2021-22 के भाषण के पैरा 84 में तत्कालीन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एयर इंडिया, बीपीसीएल, भारतीय नौवहन निगम, भारतीय कंटेनर निगम, बीईएमएल, पवन हंस, नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और आईडीबीआई बैंक से जुड़े रणनीतिक विनिवेश सौदे उसी वर्ष पूरे करने की बात कही थी, तथा दो अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण का प्रस्ताव रखा था, जिसके लिए विधायी संशोधन लाए जाने थे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जारीकर्ता | वित्त मंत्रालय |
|---|---|
| स्पष्टीकरण की तिथि | 17 अक्टूबर 2026 |
| संबंधित कानून | आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 |
| न्यायालय | दिल्ली उच्च न्यायालय |
| मामला | ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ एवं अन्य |
| निर्णय की तिथि | 17 दिसंबर 2018 |
| उल्लिखित पैरा | 41 और 42 |
| अप्रासंगिक सिद्धांत | वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल) |
| केंद्रीय बजट 2016-17 | हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से नीचे लाने के विकल्प पर विचार |
| केंद्रीय बजट 2021-22 | आईडीबीआई बैंक रणनीतिक विनिवेश सौदों की सूची में |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: कानून (आईडीबीआई निरसन अधिनियम, 2003), संशोधन का अस्वीकार होना, न्यायालय (दिल्ली उच्च न्यायालय) और निर्णय की तिथि (17 दिसंबर 2018), मामले का नाम, उल्लिखित पैरा (41 और 42), अप्रासंगिक ठहराया गया सिद्धांत (वचनबद्धता विबंधन) तथा दो बजट भाषण — 2016-17 में हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से नीचे और 2021-22 में रणनीतिक विनिवेश।
अभ्यास प्रश्न
आईडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी की कमी को सीमित करने वाला संशोधन किस कानून पर संसदीय बहस के दौरान प्रस्तुत किया गया था?
- A.आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003
- B.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
- C.भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955
- D.भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934
उत्तर देखें
वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार केंद्रीय बजट 2003 पर चर्चा तथा इसी निरसन अधिनियम पर संसदीय बहस के दौरान एक संशोधन प्रस्तुत किया गया था, जो सरकार की हिस्सेदारी में कमी को सीमित करना चाहता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले का निर्णय किस न्यायालय ने सुनाया?
- A.भारत का उच्चतम न्यायालय
- B.दिल्ली उच्च न्यायालय
- C.बॉम्बे उच्च न्यायालय
- D.राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण
उत्तर देखें
स्पष्टीकरण के अनुसार आईडीबीआई अधिकारियों के संगठन ने हिस्सेदारी का प्रश्न दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष रखा था और न्यायालय ने 17 दिसंबर 2018 को निर्णय सुनाते हुए रिट याचिका खारिज कर दी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आईडीबीआई में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की चुनौती खारिज करते समय न्यायालय ने किस सिद्धांत को पूरी तरह अप्रासंगिक बताया?
- A.ग्रहण का सिद्धांत
- B.सार और तत्व का सिद्धांत
- C.वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल)
- D.आधारभूत ढाँचे का सिद्धांत
उत्तर देखें
चुनौती देने वालों का तर्क था कि संसद में दिया गया आश्वासन सरकार पर बाध्यकारी वचन बन जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किस केंद्रीय बजट भाषण में कहा गया था कि सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से नीचे लाने के विकल्प पर विचार करेगी?
- A.केंद्रीय बजट 2016-17
- B.केंद्रीय बजट 2021-22
- C.केंद्रीय बजट 2003
- D.केंद्रीय बजट 2014-15
उत्तर देखें
उस भाषण के पैरा 93 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सशक्त और प्रतिस्पर्धी बनना होगा, बैंक बोर्ड ब्यूरो उसी वर्ष कार्यशील किया जाएगा, बैंकों के समेकन का रोडमैप प्रस्तुत होगा, आईडीबीआई बैंक के रूपांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या आईडीबीआई (निरसन) अधिनियम, 2003 सरकार को बैंक में हिस्सेदारी घटाने से रोकता है?
नहीं। वित्त मंत्रालय के अनुसार हिस्सेदारी की कमी सीमित करने वाला संशोधन वर्ष 2003 में अस्वीकार हो गया था और दिल्ली उच्च न्यायालय ने 17 दिसंबर 2018 को कहा कि अधिनियम में ऐसी कोई रोक नहीं है।
इस मामले में न्यायालय ने किस सिद्धांत को अप्रासंगिक बताया?
वचनबद्धता विबंधन (प्रॉमिसरी एस्टॉपल) को। न्यायालय ने कहा कि विधायी बहस के दौरान सदन में दिए गए वक्तव्य सरकार को बाध्य नहीं करते और संसद द्वारा बनाए कानून की जगह नहीं ले सकते।
किस बजट भाषण में हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से नीचे लाने की बात पहली बार कही गई?
केंद्रीय बजट 2016-17 के भाषण में। इसके बाद केंद्रीय बजट 2021-22 के भाषण में आईडीबीआई बैंक को उसी वर्ष पूरे किए जाने वाले रणनीतिक विनिवेश सौदों में शामिल बताया गया।
स्रोत
- आईडीबीआई में सरकार की हिस्सेदारी से संबंधित विधायी घटनाक्रमों पर स्पष्टीकरण (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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