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डीएफएस ने अनुसूचित जाति लाभार्थियों की रिपोर्टिंग अनिवार्य की

एनसीएससी के हस्तक्षेप के बाद वित्तीय सेवा विभाग ने एसएलबीसी और यूटीएलबीसी को अनुसूचित जाति लाभार्थियों की योजना-वार तथा बैंक-वार रिपोर्टिंग का निर्देश दिया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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डीएफएस ने अनुसूचित जाति लाभार्थियों की रिपोर्टिंग अनिवार्य की

चर्चा में क्यों

7 अक्टूबर 2026 को सामाजिक न्याय मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के हस्तक्षेप के बाद वित्तीय सेवा विभाग ने एसएलबीसी तथा यूटीएलबीसी संयोजकों के लिए अनुसूचित जाति लाभार्थियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग के निर्देश जारी किए हैं।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की बैंकर्स समितियों से कहा है कि वे प्रमुख सरकारी वित्तीय योजनाओं में सहायता पाने वाले अनुसूचित जाति के लाभार्थियों का हिसाब योजना-वार और बैंक-वार रखें। यह कदम राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के हस्तक्षेप के बाद उठाया गया है।

मामला कैसे शुरू हुआ

24 सितंबर 2026 को आयोग के सचिव श्री विवेक कुमार देवांगन ने वित्तीय सेवा विभाग के सचिव को पत्र लिखा। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की रिपोर्टों में यह आंकड़ा दिखता ही नहीं था कि प्रमुख योजनाओं में कितने प्रतिशत अनुसूचित जाति परिवारों और लाभार्थियों को सहायता मिली। जिन योजनाओं का नाम लिया गया उनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई तथा एमएसएमई बिजनेस लोन शामिल हैं।

आयोग का कहना था कि इन आंकड़ों के बिना वह संविधान के अनुच्छेद 338(5)(सी) से मिले उस दायित्व को पूरा नहीं कर पा रहा, जिसके तहत उसे अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना है।

निर्देशों में क्या है

  • एसएलबीसी और यूटीएलबीसी के संयोजक अपनी आवधिक समीक्षा बैठकों में सहायता प्राप्त अनुसूचित जाति लाभार्थियों की संख्या तथा प्रतिशत, योजना-वार और बैंक-वार, रखेंगे।
  • यही जानकारी आयोग के साथ नियमित रूप से साझा की जाएगी।
  • आंकड़ों की उपलब्धता और संकलन में आने वाली दिक्कतों सहित कार्रवाई रिपोर्ट 9 अक्टूबर 2026 तक विभाग को भेजनी होगी।
  • की गई कार्रवाई पर अद्यतन जानकारी 30 दिनों के भीतर देनी होगी।
  • रिपोर्टिंग उन्हीं आंकड़ों पर आधारित होगी जो बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के पास पहले से हैं, ताकि परिभाषाओं तथा कार्यप्रणाली में एकरूपता रहे और समानांतर व्यवस्था न बने।

विभाग ने 5 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संयोजकों को ये निर्देश जारी किए। आयोग ने कहा है कि वह कार्यान्वयन पर नजर रखेगा और संबंधित पक्षों से जुड़ा रहेगा। योजना-वार तथा बैंक-वार आंकड़े सामने आने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि वित्तीय समावेशन का लाभ वास्तव में अनुसूचित जाति परिवारों तक पहुंच रहा है या नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोगराष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी)
निर्देश जारी करने वाला विभागवित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय
निर्देश की तिथि5 अक्टूबर 2026
किसे रिपोर्ट देनी हैसभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एसएलबीसी तथा यूटीएलबीसी संयोजक
क्या बताना हैअनुसूचित जाति लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत, योजना-वार तथा बैंक-वार
योजनाएंपीएमएमवाई, स्टैंड-अप इंडिया, पीएमईजीपी, पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई, एमएसएमई बिजनेस लोन
कार्रवाई रिपोर्ट की तिथि9 अक्टूबर 2026
अद्यतन जानकारी30 दिनों के भीतर
संवैधानिक प्रावधानअनुच्छेद 338(5)(सी)
एनसीएससी सचिवश्री विवेक कुमार देवांगन

परीक्षा की दृष्टि से

दोनों संस्थाएं (एनसीएससी और वित्तीय सेवा विभाग), संवैधानिक आधार (अनुच्छेद 338(5)(सी)), रिपोर्ट देने वाली समितियां (एसएलबीसी तथा यूटीएलबीसी), छह योजनाओं के नाम, पत्र की तिथि (24 सितंबर 2026), निर्देश की तिथि (5 अक्टूबर 2026), कार्रवाई रिपोर्ट की अंतिम तिथि (9 अक्टूबर 2026) और 30 दिन की अवधि याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.बैंकिंग और वित्तआसान

अनुसूचित जाति लाभार्थियों के आंकड़े योजना-वार और बैंक-वार देने का निर्देश किस विभाग ने जारी किया है?

  1. A.वित्तीय सेवा विभाग
  2. B.व्यय विभाग
  3. C.राजस्व विभाग
  4. D.आर्थिक कार्य विभाग
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. वित्तीय सेवा विभाग

व्याख्या

सही उत्तर वित्तीय सेवा विभाग है। वित्त मंत्रालय का यही विभाग बैंकों, बीमा और वित्तीय समावेशन की योजनाओं से जुड़ा है, और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा कमी बताए जाने के बाद इसी ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की समितियों के संयोजकों को निर्देश जारी किए। विकल्प ख यानी व्यय विभाग सार्वजनिक व्यय प्रबंधन, वित्तीय नियमों और वेतन संबंधी मामलों को देखता है, इसलिए बैंकर्स समितियों को निर्देश देना उसका काम नहीं है। विकल्प ग यानी राजस्व विभाग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से जुड़ा है तथा उसके अधीन दो बोर्ड काम करते हैं, जिनका इस निर्देश से कोई संबंध नहीं। विकल्प घ यानी आर्थिक कार्य विभाग समष्टि आर्थिक नीति, बजट और बाहरी सहायता देखता है। इसलिए केवल विकल्प क ही सही है।

Q2.बैंकिंग और वित्तमध्यम

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के मूल्यांकन का दायित्व किस संवैधानिक प्रावधान से मिलता है?

  1. A.अनुच्छेद 338(5)(सी)
  2. B.अनुच्छेद 330
  3. C.अनुच्छेद 341
  4. D.अनुच्छेद 342
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अनुच्छेद 338(5)(सी)

व्याख्या

सही उत्तर अनुच्छेद 338(5)(सी) है। आयोग ने वित्तीय सेवा विभाग को बताया था कि बैंकर्स समिति की रिपोर्टों में अनुसूचित जाति लाभार्थियों के आंकड़े न होने से उसका वह संवैधानिक दायित्व बाधित हो रहा है, जिसके तहत उसे अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना होता है। इसी कारण उसने योजना-वार तथा बैंक-वार आंकड़े मांगे। विकल्प ख लोकसभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण से जुड़ा है, यानी राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय है, मूल्यांकन का नहीं। विकल्प ग राष्ट्रपति को यह शक्ति देता है कि वे किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में अनुसूचित जातियों को अधिसूचित करें। विकल्प घ यही काम अनुसूचित जनजातियों के लिए करता है। इसलिए केवल पहला विकल्प सही है।

Q3.बैंकिंग और वित्तमध्यम

बैंकर्स समितियों को वित्तीय सेवा विभाग को कार्रवाई रिपोर्ट कब तक भेजनी है?

  1. A.5 अक्टूबर 2026
  2. B.9 अक्टूबर 2026
  3. C.24 सितंबर 2026
  4. D.30 अक्टूबर 2026
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 9 अक्टूबर 2026

व्याख्या

सही उत्तर 9 अक्टूबर 2026 है। निर्देशों में कहा गया है कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों तथा केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समितियों के संयोजक अनुसूचित जाति लाभार्थियों की जानकारी आयोग के साथ नियमित रूप से साझा करें और इसी तिथि तक वित्तीय सेवा विभाग को कार्रवाई रिपोर्ट भेजें, जिसमें यह भी बताया जाए कि आंकड़े कहां तक उपलब्ध हैं और संकलन में क्या दिक्कतें आ रही हैं। की गई कार्रवाई पर अद्यतन जानकारी अलग से तीस दिनों के भीतर देनी है। विकल्प क वह तिथि है जब विभाग ने स्वयं संयोजकों को निर्देश जारी किए थे, जवाब की अंतिम तिथि नहीं। विकल्प ग वह तिथि है जब आयोग के सचिव ने विभाग को पत्र लिखा था और मामला शुरू हुआ था। विकल्प घ का निर्देशों में कोई उल्लेख नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस मामले में आयोग ने किस संवैधानिक प्रावधान का हवाला दिया?

अनुच्छेद 338(5)(सी) का, जिसके तहत आयोग को अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना होता है। बैंकर्स समिति की रिपोर्टों में आंकड़े न होने से यह दायित्व बाधित हो रहा था।

अब किन योजनाओं में अनुसूचित जाति लाभार्थियों के आंकड़े देने होंगे?

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई तथा एमएसएमई बिजनेस लोन में, जिनका नाम आयोग के पत्र में लिया गया था।

बैंकर्स समितियों को कब तक जवाब देना है?

कार्रवाई रिपोर्ट 9 अक्टूबर 2026 तक वित्तीय सेवा विभाग को पहुंचनी चाहिए और की गई कार्रवाई पर अद्यतन जानकारी 30 दिनों के भीतर देनी होगी। रिपोर्टिंग पहले से उपलब्ध आंकड़ों पर ही आधारित होगी।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 7 अक्टूबर 2026

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