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GK24

दवा विपणन प्रथाओं की समीक्षा के लिए केंद्र ने समिति गठित की

फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने 23 अक्टूबर 2026 को नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास की अध्यक्षता में यूसीपीएमपी ढांचे की समीक्षा के लिए समिति बनाई।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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दवा विपणन प्रथाओं की समीक्षा के लिए केंद्र ने समिति गठित की — GK24 title card

चर्चा में क्यों

23 अक्टूबर 2026 को फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने दवा विपणन प्रथाओं के नियामक ढांचे की समीक्षा और यूसीपीएमपी की निगरानी मजबूत करने की सिफारिश के लिए एक समिति गठित की।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अधीन फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने देश में दवा विपणन प्रथाओं को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे की जांच के लिए एक समिति गठित की है। इस समिति से कहा गया है कि वह निगरानी, पर्यवेक्षण और प्रवर्तन को मजबूत करने के उपाय सुझाए, जिससे दवा क्षेत्र में अनैतिक प्रथाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

समिति में कौन

नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। दो सदस्य हैं - पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती प्रीति सूदन और मेदांता के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन। समिति को निर्धारित परामर्श प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपनी पहली बैठक की तिथि से दो महीने के भीतर सिफारिशें सौंपनी होंगी।

जिस संहिता की समीक्षा होगी

दवा विपणन प्रथाओं के लिए समान संहिता (यूसीपीएमपी) 2015 में एक स्वैच्छिक, उद्योग-संचालित स्व-नियामक व्यवस्था के रूप में लाई गई थी। इसका उद्देश्य दवाओं के नैतिक विपणन को बढ़ावा देना तथा दवा कंपनियों और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच संपर्क को नियंत्रित करना था। विभाग ने बाद में यूसीपीएमपी 2024 जारी की, जिसने 2015 की संहिता का स्थान लिया और उसे लागू करने का ढांचा मजबूत किया। अभी 2024 की संहिता ही प्रभाव में है और नई समिति की समीक्षा वहीं से शुरू होती है।

विचारणीय विषय

  • अनैतिक दवा विपणन प्रथाओं से जुड़े सभी मुद्दों की समग्र और व्यापक जांच करना
  • निगरानी, पर्यवेक्षण और प्रवर्तन की मौजूदा व्यवस्थाओं की कारगरता परखना तथा अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी अनुपालन के लिए आवश्यक उपाय पहचानना
  • वर्तमान निगरानी और नियामक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता की जांच करना तथा नियामकीय, सांविधिक या अन्य उपाय और उन्हें लागू करने के लिए विधिक ढांचा सुझाना
  • हितधारकों तथा तकनीकी, पेशेवर एवं विषय विशेषज्ञों, संस्थानों या निकायों से चर्चा करना और सिफारिश देने से पहले उनके पक्ष पर निष्पक्ष विचार करना
  • इस क्षेत्र में अनैतिक विपणन रोकने से जुड़े किसी भी अन्य प्रासंगिक विषय पर विचार कर सिफारिश देना

अभ्यर्थी के लिए याद रखने की बात यह क्रम है - 2015 की स्वैच्छिक संहिता, 2024 की उससे अधिक मजबूत संहिता जिसने पहली का स्थान लिया, और अब एक विशेषज्ञ समिति, जिससे पूछा गया है कि इस संहिता के इर्द-गिर्द निगरानी और प्रवर्तन की मशीनरी पर्याप्त मजबूत है या नहीं, और जिसकी समय सीमा पहली बैठक से दो महीने है।

पदनाम
अध्यक्षडॉ. एम. श्रीनिवास, सदस्य, नीति आयोग
सदस्यश्रीमती प्रीति सूदन, पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव
सदस्यडॉ. नरेश त्रेहन, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मेदांता

महत्वपूर्ण तथ्य

गठनफार्मास्यूटिकल्स विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय
विषयदवा विपणन प्रथाओं का नियामक ढांचा
अध्यक्षडॉ. एम. श्रीनिवास, सदस्य, नीति आयोग
सदस्यश्रीमती प्रीति सूदन, पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव; डॉ. नरेश त्रेहन, सीएमडी, मेदांता
समय सीमापहली बैठक की तिथि से दो महीने
समीक्षाधीन संहितादवा विपणन प्रथाओं के लिए समान संहिता (यूसीपीएमपी)
यूसीपीएमपी की शुरुआत2015, स्वैच्छिक उद्योग-संचालित स्व-नियामक व्यवस्था के रूप में
प्रभावी संहितायूसीपीएमपी 2024, जिसने 2015 के संस्करण का स्थान लिया
तिथि23 अक्टूबर 2026

परीक्षा की दृष्टि से

यूसीपीएमपी का पूरा नाम, इसके पहले संस्करण का वर्ष (2015) और अब प्रभावी संहिता का वर्ष (2024), मूल मंत्रालय (रसायन और उर्वरक) तथा विभाग (फार्मास्यूटिकल्स), अध्यक्ष डॉ. एम. श्रीनिवास (नीति आयोग) और सदस्य प्रीति सूदन व नरेश त्रेहन, तथा पहली बैठक से गिनी जाने वाली दो महीने की समय सीमा याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयमध्यम

दवा विपणन प्रथाओं की समीक्षा के लिए गठित समिति का अध्यक्ष किसे बनाया गया है?

  1. A.श्रीमती प्रीति सूदन
  2. B.डॉ. नरेश त्रेहन
  3. C.डॉ. एम. श्रीनिवास
  4. D.केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. डॉ. एम. श्रीनिवास

सही उत्तर डॉ. एम. श्रीनिवास हैं, जो नीति आयोग के सदस्य हैं और जिन्हें फार्मास्यूटिकल्स विभाग द्वारा दवा विपणन प्रथाओं के ढांचे की जांच के लिए बनाई गई समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

Q2.राष्ट्रीयआसान

दवा विपणन प्रथाओं के लिए समान संहिता (यूसीपीएमपी) पहली बार किस वर्ष लाई गई थी?

  1. A.2015
  2. B.2024
  3. C.2019
  4. D.2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 2015

इसी वर्ष यह संहिता एक स्वैच्छिक, उद्योग-संचालित स्व-नियामक व्यवस्था के रूप में लाई गई थी, जिसका उद्देश्य दवाओं के नैतिक विपणन को बढ़ावा देना तथा दवा कंपनियों और स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच संपर्क को नियंत्रित करना था।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

दवा विपणन प्रथाओं पर बनी समिति को किस अवधि के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपनी हैं?

  1. A.पहली बैठक की तिथि से दो महीने
  2. B.गठन की तिथि से छह महीने
  3. C.पहली बैठक की तिथि से एक वर्ष
  4. D.गठन की तिथि से तीन महीने
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पहली बैठक की तिथि से दो महीने

समिति गठित करने वाले आदेश में यही अवधि तय की गई है और यह भी कहा गया है कि सिफारिशें देने से पहले समिति निर्धारित परामर्श प्रक्रिया पूरी करेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दवा विपणन प्रथाओं पर बनी समिति के अध्यक्ष कौन हैं?

नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास अध्यक्ष हैं। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती प्रीति सूदन और मेदांता के सीएमडी डॉ. नरेश त्रेहन इसके सदस्य हैं।

यूसीपीएमपी का पूरा नाम क्या है?

दवा विपणन प्रथाओं के लिए समान संहिता। यह 2015 में दवाओं के नैतिक विपणन के लिए स्वैच्छिक, उद्योग-संचालित स्व-नियामक व्यवस्था के रूप में लाई गई थी।

इस समय संहिता का कौन सा संस्करण प्रभाव में है?

यूसीपीएमपी 2024। इसने 2015 के संस्करण का स्थान लिया और कार्यान्वयन ढांचे को मजबूत किया, तथा समीक्षा का आदेश देते समय यही संहिता लागू थी।

समिति को कब तक रिपोर्ट देनी है?

अपनी पहली बैठक की तिथि से दो महीने के भीतर, निर्धारित परामर्श प्रक्रिया पूरी करने के बाद।

स्रोत

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