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भारत-फ्रांस अंतरिक्ष सहयोग: त्रिष्णा, गगनयान और स्टार्टअप पर जोर

फ्रांस के अंतरिक्ष मंत्री प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट ने नई दिल्ली में डॉ. जितेंद्र सिंह से भेंट की और दोनों देशों ने त्रिष्णा तथा गगनयान पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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भारत-फ्रांस अंतरिक्ष सहयोग: त्रिष्णा, गगनयान और स्टार्टअप पर जोर

चर्चा में क्यों

प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट के नेतृत्व में फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर मानव अंतरिक्ष उड़ान, सूक्ष्म गुरुत्व अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग तक भारत-फ्रांस अंतरिक्ष साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।

फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष मंत्री प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। बातचीत में अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन, नवाचार वर्ष, सेफिप्रा और नीली अर्थव्यवस्था जैसे विषय शामिल रहे।

छह दशक पुराना रिश्ता

मंत्री ने कहा कि दोनों देशों का अंतरिक्ष सहयोग उतना ही पुराना है जितनी उनकी अंतरिक्ष एजेंसियां। इसकी शुरुआत साउंडिंग रॉकेट परीक्षणों से हुई थी। इसरो और फ्रांसीसी एजेंसी सीएनईएस ने मिलकर मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल उपग्रह बनाए, तथा प्रक्षेपण यान के इंजन विकास में भी साझेदारी रही है।

त्रिष्णा और मानव अंतरिक्ष उड़ान

तीसरे संयुक्त उपग्रह त्रिष्णा का काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है। मंत्री ने गगनयान कार्यक्रम में सीएनईएस के सहयोग की सराहना की, जिसमें उपभोग्य सामग्री की आपूर्ति और फ्लाइट सर्जनों का प्रशिक्षण शामिल है। दोनों पक्षों ने सूक्ष्म गुरुत्व अनुसंधान और पैराबोलिक उड़ानों पर भी चर्चा शुरू की है। बेंगलुरु में जल चक्र एवं त्रिष्णा मिशन कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें इसरो जनसंपर्क सामग्री उपलब्ध कराएगा।

स्टार्टअप की नई भूमिका

सुधारों के बाद देश में निजी क्षेत्र का दायरा तेजी से बढ़ा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 400 से अधिक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप अब रॉकेट निर्माण, उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि आगे का सहयोग केवल सरकारी संस्थाओं तक सीमित न रहकर उद्योग और इन युवा कंपनियों को भी जोड़े।

विज्ञान का व्यापक दायरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति द्वारा फरवरी में शुरू किया गया नवाचार वर्ष इस साझेदारी का आधार बना है। जैव प्रौद्योगिकी, डिजिटल विज्ञान और महासागर विज्ञान में भी सहयोग जारी है, जिसके लिए सेफिप्रा और भारत-फ्रांस संयुक्त केंद्र माध्यम बने हुए हैं। नीली अर्थव्यवस्था के तहत गहन महासागर मिशन में भी संभावनाएं बताई गईं। प्रो. बैप्टिस्ट ने त्रिष्णा को दोनों देशों की साझा उपलब्धि का उदाहरण बताया।

महत्वपूर्ण तथ्य

भारतीय मंत्रीडॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
फ्रांसीसी मंत्रीप्रो. फिलिप बैप्टिस्ट, उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष मंत्री
स्थाननई दिल्ली
संयुक्त उपग्रहमेघा-ट्रॉपिक्स और सरल (इसरो-सीएनईएस)
तीसरा संयुक्त उपग्रहत्रिष्णा
गगनयान में सहयोगसीएनईएस द्वारा उपभोग्य सामग्री तथा फ्लाइट सर्जनों का प्रशिक्षण
अंतरिक्ष स्टार्टअप400 से अधिक
आगामी कार्यक्रमजल चक्र एवं त्रिष्णा मिशन कार्यक्रम, बेंगलुरु
द्विपक्षीय ढांचाभारत-फ्रांस नवाचार वर्ष तथा सेफिप्रा

परीक्षा की दृष्टि से

दोनों मंत्रियों के नाम, इसरो-सीएनईएस के दो संयुक्त उपग्रह मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल, तीसरा संयुक्त उपग्रह त्रिष्णा, गगनयान में सीएनईएस का सहयोग, 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप तथा नवाचार वर्ष याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

हाल ही में चर्चा में रहा त्रिष्णा उपग्रह भारत का किस देश के साथ तीसरा संयुक्त उपग्रह है?

  1. A.जापान
  2. B.फ्रांस
  3. C.जर्मनी
  4. D.इजरायल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. फ्रांस

व्याख्या

सही उत्तर फ्रांस है। त्रिष्णा को भारत और फ्रांस का तीसरा संयुक्त उपग्रह बताया गया है और इसका काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है। इससे पहले इसरो तथा फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस ने मिलकर मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल उपग्रह बनाए थे। जापान विकल्प गलत है, क्योंकि यहां जिस साझेदारी की चर्चा है वह भारत और फ्रांस के बीच है; फ्रांसीसी मंत्री ने स्वयं त्रिष्णा को दोनों देशों की साझा उपलब्धि का उदाहरण बताया। जर्मनी भी गलत है, क्योंकि नई दिल्ली में डॉ. जितेंद्र सिंह से मिलने वाला प्रतिनिधिमंडल फ्रांस का था, जिसका नेतृत्व प्रो. फिलिप बैप्टिस्ट कर रहे थे। इजरायल विकल्प भी सही नहीं है, क्योंकि इस बातचीत में अंतरिक्ष, सेफिप्रा और नीली अर्थव्यवस्था जैसे सभी विषय भारत-फ्रांस सहयोग से जुड़े थे और किसी इजरायली एजेंसी का इसमें कोई उल्लेख नहीं है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

निम्नलिखित में से कौन सा उपग्रह इसरो और फ्रांसीसी एजेंसी सीएनईएस ने मिलकर बनाया था?

  1. A.मेघा-ट्रॉपिक्स
  2. B.ओशनसैट-3
  3. C.रीसैट-2बी
  4. D.एमिसैट
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मेघा-ट्रॉपिक्स

व्याख्या

सही उत्तर मेघा-ट्रॉपिक्स है। इसे सरल उपग्रह के साथ इसरो और सीएनईएस द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित बताया गया है, और दोनों को उस साझेदारी का पड़ाव कहा गया जो साउंडिंग रॉकेट परीक्षणों से शुरू हुई थी। ओशनसैट-3 विकल्प गलत है, क्योंकि यह भारत की महासागर निगरानी शृंखला का उपग्रह है और इसे संयुक्त परियोजना के रूप में नहीं गिनाया गया। रीसैट-2बी भी गलत है, क्योंकि यह भारत की रडार इमेजिंग शृंखला से संबंधित है और मंत्री द्वारा गिनाए गए संयुक्त उपग्रहों में इसका नाम नहीं है। एमिसैट विकल्प भी सही नहीं है, क्योंकि संयुक्त उपग्रहों की सूची में केवल मेघा-ट्रॉपिक्स, सरल और आगामी त्रिष्णा शामिल हैं। दोनों देशों के बीच प्रक्षेपण यान के इंजन विकास में भी सहयोग रहा है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

मंत्री के अनुसार भारत में इस समय कितने अंतरिक्ष स्टार्टअप काम कर रहे हैं?

  1. A.100 से अधिक
  2. B.250 से अधिक
  3. C.400 से अधिक
  4. D.800 से अधिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 400 से अधिक

व्याख्या

सही उत्तर 400 से अधिक है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों और निजी तंत्र के विस्तार के बाद देश में इतने स्टार्टअप रॉकेट निर्माण, उपग्रह निर्माण तथा अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में सक्रिय हो चुके हैं। उन्होंने इसी आधार पर कहा कि दोनों देशों के सहयोग का अगला चरण सरकारी संस्थाओं, उद्योगों और स्टार्टअप को एक साथ लाकर बड़ा तंत्र और व्यापक संसाधन आधार तैयार कर सकता है। शेष तीनों विकल्प गलत हैं, क्योंकि मंत्री ने केवल यही एक आंकड़ा दिया और उसे निजी अंतरिक्ष तंत्र की तेज वृद्धि के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया। यह आंकड़ा सुधारों के बाद की स्थिति दर्शाता है। अंतरिक्ष क्षेत्र में हुए सुधारों के बाद निजी कंपनियों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है और यही आंकड़ा उस बदलाव को दर्शाता है। मंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देशों के शोध संस्थान, उद्योग और युवा कंपनियां आपस में जुड़ें तो नवाचार का दायरा और चौड़ा होगा तथा संसाधनों का साझा आधार तैयार होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसरो और सीएनईएस ने कौन से उपग्रह मिलकर बनाए हैं?

इसरो और सीएनईएस ने मेघा-ट्रॉपिक्स तथा सरल उपग्रह मिलकर बनाए हैं। त्रिष्णा दोनों एजेंसियों का तीसरा संयुक्त उपग्रह है, जिसका काम आगे बढ़ रहा है।

गगनयान में फ्रांस किस तरह सहयोग कर रहा है?

सीएनईएस गगनयान के लिए उपभोग्य सामग्री उपलब्ध करा रहा है और फ्लाइट सर्जनों को प्रशिक्षण दे रहा है। सूक्ष्म गुरुत्व अनुसंधान तथा पैराबोलिक उड़ानों पर भी बातचीत शुरू हुई है।

भारत में कितने अंतरिक्ष स्टार्टअप काम कर रहे हैं?

सुधारों के बाद देश में 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप रॉकेट निर्माण, उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS