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PM E-DRIVE: GARC को EV परीक्षण के लिए 221.13 करोड़

भारी उद्योग मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को बताया कि PM E-DRIVE के तहत चेन्नई के GARC को परीक्षण सुविधाओं के उन्नयन हेतु 221.13 करोड़ रुपये मिले हैं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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PM E-DRIVE: GARC को EV परीक्षण के लिए 221.13 करोड़

चर्चा में क्यों

भारी उद्योग मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को PM E-DRIVE के तहत GARC की प्रगति बताई — 221.13 करोड़ रुपये का आवंटन, प्रस्तावित लगभग सभी उपकरणों के खरीद आदेश, तथा ओरगडम, चेन्नई में नई EV, ADAS और क्रैश सुरक्षा प्रयोगशालाएँ।

चेन्नई के पास ओरगडम में स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) अपनी प्रयोगशालाओं को PM E-DRIVE योजना के धन से नया रूप दे रहा है। भारी उद्योग मंत्रालय ने 28 सितंबर 2026 को जारी विवरण में यह जानकारी दी। GARC मंत्रालय के राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड के अधीन काम करता है और केंद्रीय मोटर वाहन नियम के नियम 126 के अंतर्गत अधिकृत परीक्षण एजेंसी है। इसी दर्जे के कारण वह वाहनों तथा कल-पुर्जों की जाँच, होमोलोगेशन और प्रमाणन कर सकता है। पावरट्रेन, उत्सर्जन, EMC, फटीग, इलेक्ट्रिक वाहन और सुरक्षा जाँच इसके काम के दायरे में आते हैं।

PM E-DRIVE का पूरा नाम

PM E-DRIVE का पूरा नाम पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट है। इस योजना का कुल परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है, जिसमें से 780 करोड़ रुपये केवल देश की परीक्षण एजेंसियों को उन्नत बनाने के लिए रखे गए हैं। योजना 31 मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगी।

GARC का हिस्सा और नई प्रयोगशालाएँ

GARC को योजना से 221.13 करोड़ रुपये दिए गए हैं। केंद्र ने जितने उपकरण प्रस्तावित किए थे, उनमें से लगभग सभी के लिए खरीद आदेश जारी हो चुके हैं और जो सामान पहुँच गया है उसकी स्थापना शुरू हो गई है। बनाई या उन्नत की जा रही सुविधाएँ इस प्रकार हैं:

  • AIS-156 मानक के अनुसार बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन की जाँच
  • AIS-004 भाग 3 Rev.1 के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की EMI तथा EMC जाँच
  • भारी व्यावसायिक वाहनों की जाँच के लिए अलग सुविधा
  • उन्नत पावरट्रेन प्रयोगशाला
  • डमी तथा उनके अंशांकन उपकरणों सहित उन्नत निष्क्रिय सुरक्षा जाँच
  • उपकरणों और सॉफ्ट टारगेट के साथ उन्नत चालक सहायता प्रणाली (ADAS) की जाँच
  • वाहन कल-पुर्जों की जाँच

दुर्घटना को पल-पल पकड़ने वाला कैमरा

सबसे चर्चित जोड़ है एक अत्यधिक तेज़ और उच्च रिज़ॉल्यूशन वाली इमेजिंग प्रणाली। इसके UHD-4K कैमरे प्रति सेकंड 750 फ्रेम तक और फुल HD में प्रति सेकंड 3,000 फ्रेम तक रिकॉर्डिंग करते हैं। अभियंता इसका उपयोग सामने, बगल और पीछे से होने वाले क्रैश परीक्षणों में करेंगे, ताकि देखा जा सके कि वाहन का ढाँचा किस तरह दबता है, बैठा व्यक्ति किस दिशा में उछलता है और एयरबैग ठीक किस क्षण खुलता है। सुरक्षा विश्लेषण और होमोलोगेशन की फाइल, दोनों के लिए इतनी बारीकी ज़रूरी होती है।

आँकड़े एक नज़र में

विवरणआँकड़ा
PM E-DRIVE का कुल परिव्यय10,900 करोड़ रुपये
परीक्षण एजेंसियों के लिए780 करोड़ रुपये
GARC को आवंटित221.13 करोड़ रुपये
योजना की अवधि31 मार्च 2028 तक
CMVR का नियमनियम 126

यह खर्च इसलिए मायने रखता है कि भारत में बिकने वाले वाहन को भारत में ही प्रमाणित कराना पड़ता है। देश के भीतर मजबूत प्रयोगशालाएँ होने पर इलेक्ट्रिक दोपहिया, बसें, बैटरी पैक और चालक सहायता प्रणालियाँ विदेश भेजे बिना मंजूरी पा सकेंगी, और डिज़ाइन से शोरूम तक का रास्ता छोटा होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

परीक्षण केंद्रग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC), ओरगडम, चेन्नई
मूल संस्थाराष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड, भारी उद्योग मंत्रालय
योजनापीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (PM E-DRIVE)
योजना का परिव्यय10,900 करोड़ रुपये, जिसमें 780 करोड़ रुपये परीक्षण एजेंसियों के लिए
GARC को आवंटन221.13 करोड़ रुपये
योजना की अवधि31 मार्च 2028 तक
परीक्षण का विधिक आधारकेंद्रीय मोटर वाहन नियम, नियम 126
हाई स्पीड इमेजिंगUHD-4K में 750 fps; फुल HD में 3,000 fps

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें — GARC ओरगडम, चेन्नई में है और राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड, भारी उद्योग मंत्रालय के अधीन है; PM E-DRIVE का पूरा नाम; परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये जिसमें 780 करोड़ रुपये परीक्षण एजेंसियों के लिए; GARC को 221.13 करोड़ रुपये; अवधि 31 मार्च 2028 तक; तथा CMVR का नियम 126।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) किस केंद्रीय योजना के तहत अपनी परीक्षण सुविधाओं का उन्नयन कर रहा है?

  1. A.फेम इंडिया चरण-II
  2. B.PM E-DRIVE
  3. C.पीएम-कुसुम
  4. D.एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के लिए पीएलआई योजना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. PM E-DRIVE

व्याख्या

सही उत्तर PM E-DRIVE है, यानी भारी उद्योग मंत्रालय की पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट योजना। राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड के अधीन काम करने वाला GARC इसी योजना के धन से अपनी प्रयोगशालाएँ नई कर रहा है और इसके लिए उसे 221.13 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। योजना का कुल परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है, इसमें 780 करोड़ रुपये केवल परीक्षण एजेंसियों के लिए हैं, और यह 31 मार्च 2028 तक चलेगी। विकल्प A यानी फेम इंडिया चरण-II इलेक्ट्रिक गतिशीलता का पुराना कार्यक्रम है, यहाँ उसका नाम नहीं है। विकल्प C यानी पीएम-कुसुम किसानों के सौर पंपों से जुड़ी योजना है, वाहन परीक्षण से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D की पीएलआई योजना बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए है, परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए नहीं, इसलिए वह भी गलत है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

PM E-DRIVE योजना का कुल परिव्यय कितना है?

  1. A.7,800 करोड़ रुपये
  2. B.10,900 करोड़ रुपये
  3. C.13,500 करोड़ रुपये
  4. D.22,113 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 10,900 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 10,900 करोड़ रुपये है। यही पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट योजना का कुल परिव्यय है, और इसके भीतर 780 करोड़ रुपये देश में वाहनों को प्रमाणित करने वाली परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए अलग रखे गए हैं। योजना 31 मार्च 2028 तक प्रभावी है। विकल्प A का आँकड़ा परीक्षण एजेंसियों वाले 780 करोड़ रुपये के घटक से मिलता-जुलता दिखता है, परंतु वह पूरे परिव्यय का नाम नहीं है। विकल्प C का आँकड़ा भारी उद्योग मंत्रालय ने कहीं नहीं बताया। विकल्प D में ओरगडम, चेन्नई के GARC को मिले 221.13 करोड़ रुपये की छाया है, जो परीक्षण घटक में एक केंद्र का हिस्सा है, पूरी योजना का आकार नहीं। अभ्यर्थी तीनों राशियों को अलग-अलग याद रखें — योजना का कुल, परीक्षण एजेंसियों का घटक और एक एजेंसी का आवंटन।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

PM E-DRIVE के तहत उन्नयन के लिए चर्चा में रहा ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) कहाँ स्थित है?

  1. A.मानेसर, हरियाणा
  2. B.ओरगडम, चेन्नई
  3. C.अहमदनगर, महाराष्ट्र
  4. D.पीथमपुर, मध्य प्रदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ओरगडम, चेन्नई

व्याख्या

सही उत्तर ओरगडम, चेन्नई है। ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर चेन्नई के बाहरी हिस्से में ओरगडम में स्थित है और भारी उद्योग मंत्रालय के राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड के अधीन कार्य करता है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम के नियम 126 के तहत यह अधिकृत परीक्षण एजेंसी है, इसलिए वाहनों तथा कल-पुर्जों की जाँच के साथ होमोलोगेशन और प्रमाणन भी करता है। इसकी नई व उन्नत सुविधाओं में AIS-156 मानक पर इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी जाँच, AIS-004 भाग 3 Rev.1 के तहत EMI तथा EMC जाँच, भारी व्यावसायिक वाहनों की जाँच, उन्नत पावरट्रेन प्रयोगशाला, उन्नत निष्क्रिय सुरक्षा परीक्षण और ADAS परीक्षण शामिल हैं। विकल्प A, C और D देश के अन्य वाहन परीक्षण व अनुसंधान संस्थानों से जुड़े स्थान हैं, परंतु इनमें कोई भी GARC का स्थान नहीं है, इसलिए तीनों गलत हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM E-DRIVE का पूरा नाम क्या है?

पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट। इस योजना का परिव्यय 10,900 करोड़ रुपये है, जिसमें 780 करोड़ रुपये परीक्षण एजेंसियों के उन्नयन के लिए हैं, और यह 31 मार्च 2028 तक प्रभावी है।

PM E-DRIVE के तहत GARC को कितनी राशि मिली है?

221.13 करोड़ रुपये। ओरगडम, चेन्नई स्थित GARC ने प्रस्तावित लगभग सभी उपकरणों के खरीद आदेश जारी कर दिए हैं और स्थापना का काम शुरू हो गया है।

GARC किस नियम के तहत अधिकृत परीक्षण एजेंसी है?

केंद्रीय मोटर वाहन नियम के नियम 126 के तहत। GARC भारी उद्योग मंत्रालय के राष्ट्रीय ऑटोमोटिव बोर्ड के अधीन कार्य करता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS