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GK24
राष्ट्रीयमध्यम

त्वचा रोगों पर नए मानक उपचार दिशानिर्देश किन चार पारंपरिक पद्धतियों के लिए हैं?

  1. A.आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और सिद्ध
  2. B.आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी
  3. C.आयुर्वेद, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा-रिग्पा
  4. D.सिद्ध, यूनानी, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी

सही उत्तर

B. आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी

व्याख्या

सही उत्तर आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी है। आयुष मंत्रालय ने इन चारों पद्धतियों में से प्रत्येक के लिए अलग मानक उपचार दिशानिर्देश दस्तावेज प्रकाशित किया है, और योग को इनमें एक समावेश के रूप में जोड़ा गया है, पांचवीं पद्धति के रूप में अलग दस्तावेज के साथ नहीं। विकल्प क में योग और प्राकृतिक चिकित्सा को गलत ढंग से अलग दिशानिर्देश वाली पद्धतियों के रूप में गिना गया है। विकल्प ग और विकल्प घ में सोवा-रिग्पा का नाम आता है, जो आयुष के अंतर्गत आने वाली पद्धतियों में से एक है, परंतु त्वचा रोग के इन दिशानिर्देशों वाली चार पद्धतियों में शामिल नहीं है। परीक्षार्थियों को यह भी याद रखना चाहिए कि दस्तावेज स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की आयुष इकाई ने तैयार किए और इन्हें 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जारी किया गया।

पूरा लेख पढ़ें: आयुष मंत्रालय के त्वचा रोग मानक उपचार दिशानिर्देश जारी

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Q1.राष्ट्रीयआसान

त्वचा रोगों पर आयुष के मानक उपचार दिशानिर्देश किस अवसर पर सार्वजनिक किए गए?

  1. A.विश्व स्वास्थ्य दिवस
  2. B.राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस
  3. C.11वां आयुर्वेद दिवस
  4. D.अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 11वां आयुर्वेद दिवस

व्याख्या

सही उत्तर 11वां आयुर्वेद दिवस है। आयुष मंत्रालय ने इसी अवसर को इन दिशानिर्देशों को सार्वजनिक करने के लिए चुना, जिससे यह जारी होना मंत्रालय के अपने आयोजनों के कैलेंडर से जुड़ जाता है। विकल्प क, विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के आयोजनों में आता है और यहां वह अवसर नहीं था। विकल्प ख, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, भारत में चिकित्सा पेशे को सम्मान देता है पर इस दस्तावेज से इसका संबंध नहीं है। विकल्प घ, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, एक स्वाभाविक अनुमान लगता है क्योंकि दिशानिर्देशों में योग को शामिल किया गया है, फिर भी इन्हें उस दिन जारी नहीं किया गया। परीक्षाओं के लिए संस्करण संख्या महत्वपूर्ण है, इसलिए याद रखें कि यह आयुर्वेद दिवस का ग्यारहवां आयोजन था।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

नए दिशानिर्देशों पर बोलने वाले आयुष के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौन हैं?

  1. A.श्री प्रतापराव जाधव
  2. B.वैद्य राजेश कोटेचा
  3. C.डॉ. लवनीश जी. कृष्णा
  4. D.श्री जगत प्रकाश नड्डा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. श्री प्रतापराव जाधव

व्याख्या

सही उत्तर श्री प्रतापराव जाधव हैं, जो राज्य मंत्री के रूप में आयुष मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभालते हैं और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा कि ये दिशानिर्देश राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में आयुष पद्धतियों के एकीकरण को गहरा करेंगे और सामान्य त्वचा रोगों के लिए सुरक्षित, प्रभावी तथा समग्र देखभाल में सहायक होंगे। विकल्प ख, वैद्य राजेश कोटेचा, आयुष मंत्रालय के सचिव हैं और उन्होंने मानकीकरण तथा प्रमाण आधारित व्यवहार पर अलग से बात की, पर वे अधिकारी हैं, मंत्री नहीं। विकल्प ग, डॉ. लवनीश जी. कृष्णा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक हैं और उन्होंने बहुविषयक सहयोग पर जोर दिया। विकल्प घ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का नाम है, जो भ्रामक विकल्प है क्योंकि महानिदेशालय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आता है।

Q3.राष्ट्रीयकठिन

वास्तविक नैदानिक परिस्थितियों में उपचार प्रोटोकॉल परखने के लिए आयुष इकाई ने किसके साथ साझेदारी की?

  1. A.अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान
  2. B.केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद
  3. C.आयुष निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार
  4. D.राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आयुष निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार

व्याख्या

सही उत्तर आयुष निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार है। क्षेत्र स्तर पर परीक्षण इस कवायद की उल्लेखनीय विशेषता रही। इस निदेशालय के अधीन प्राथमिक तथा द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के साथ प्रोटोकॉल परखे गए और रोजमर्रा के काम में उनकी उपयोगिता पर मिली प्रतिक्रिया अंतिम दस्तावेजों में शामिल की गई। विकल्प क, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, आयुर्वेद का बड़ा संस्थान है पर परीक्षण साझेदार के रूप में इसका नाम नहीं है। विकल्प ख, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, उन आयुष अनुसंधान परिषदों में है जिनकी तकनीकी विशेषज्ञता दस्तावेज बनाने में लगी, जो क्षेत्रीय परीक्षण से अलग भूमिका है। विकल्प घ, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा का नियामक है और इस प्रक्रिया में शामिल नहीं था। दस्तावेज तैयार करने में विशेषज्ञ परामर्श, शास्त्रीय ग्रंथों का अध्ययन, वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों का आकलन और सहमति आधारित विचार विमर्श शामिल रहे।

Q4.राष्ट्रीयकठिन

संग्रह में गंगा जी मंदिर का लकड़ी का मॉडल किस स्थान के मंदिर का है?

  1. A.उखीमठ
  2. B.मुखबा
  3. C.गंगोत्री
  4. D.हरिद्वार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मुखबा

व्याख्या

सही उत्तर मुखबा है। लकड़ी का मॉडल मुखबा स्थित गंगा जी मंदिर का है, और इसी वस्तु को उस कड़ी के रूप में बताया गया है जो प्रदर्शित उत्तराखंडी विरासत को नीलामी के उद्देश्य से जोड़ती है, क्योंकि गंगा राज्य के आध्यात्मिक जीवन के केंद्र में है और बिक्री उसी नदी के पुनरुद्धार में सहायक होती है। विकल्प क, उखीमठ, ओंकारेश्वर मंदिर का स्थान है, जो संग्रह के चार मंदिर मॉडलों में से एक और है, इसलिए यह सबसे आकर्षक गलत उत्तर बनता है। विकल्प ग, गंगोत्री, फोटो प्रिंट में दिखाए गए चारों धाम में से एक है, इस लकड़ी के मॉडल का स्थान नहीं। विकल्प घ, हरिद्वार, वह स्थान है जहां की मनसा देवी की फ्रेमयुक्त तस्वीर संग्रह में है। प्रत्येक वस्तु को उसके स्थान के साथ याद रखना ऐसे प्रश्नों का सबसे पक्का तरीका है।

Q5.राष्ट्रीयमध्यम

उत्तराखंड के स्मृति चिन्ह संग्रह में किस खिलाड़ी का हस्ताक्षरित बैडमिंटन रैकेट शामिल है?

  1. A.लक्ष्य सेन
  2. B.किदांबी श्रीकांत
  3. C.एच. एस. प्रणय
  4. D.सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लक्ष्य सेन

व्याख्या

सही उत्तर लक्ष्य सेन हैं, उत्तराखंड के बैडमिंटन खिलाड़ी जिनका हस्ताक्षरित रैकेट इस संग्रह में खेल जगत की एकमात्र वस्तु है, जबकि बाकी संग्रह राज्य की धार्मिक तथा सांस्कृतिक विरासत से गढ़ा गया है। परीक्षाओं में जो कड़ी पूछी जाती है वह खिलाड़ी का गृह राज्य है, क्योंकि पूरा संग्रह उत्तराखंड पर केंद्रित है। विकल्प ख, किदांबी श्रीकांत, आंध्र प्रदेश के अग्रणी एकल खिलाड़ी हैं और इस संग्रह से जुड़े नहीं हैं। विकल्प ग, एच. एस. प्रणय, केरल से हैं। विकल्प घ, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी, आंध्र प्रदेश के युगल विशेषज्ञ हैं। रैकेट के अलावा संग्रह में चार मंदिर मॉडल, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री तथा यमुनोत्री का फोटो प्रिंट, ऐपन लोक कलाकृति और सात उत्तराखंडी या पहाड़ी टोपियां शामिल हैं। नीलामी से मिलने वाली राशि नमामि गंगे कार्यक्रम को दी जाती है और बोली आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन लगाई जा सकती है।