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GK24

राजस्थान 2025 पिछले वर्ष के GK प्रश्न

राजस्थान 2025 में पूछे गए GK प्रश्न, उत्तर और व्याख्या सहित।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q1.कला और संस्कृतिपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025कठिन

सूची-I व सूची-II को सुमेलित करते हुए राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैलियों एवं उनके चित्रकारों के संबंध में सही विकल्प चुनिये:

सूची-I

A. किशनगढ़

B. बीकानेर

C. मेवाड़

D. मारवाड़

सूची-II

(i) साहिबदीन

(ii) निहालचंद

(iii) अली रज़ा

(iv) शिवदास

  1. A.A-ii, B-iv, C-i, D-iii
  2. B.A-ii, B-iii, C-i, D-iv
  3. C.A-ii, B-iii, C-iv, D-i
  4. D.A-ii, B-i, C-iii, D-iv
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. A-ii, B-iii, C-i, D-iv

व्याख्या

सही उत्तर है B, A-ii, B-iii, C-i, D-iv। निहालचंद 18वीं शताब्दी में राजा सावंत सिंह, यानी कवि नागरीदास, के समय किशनगढ़ के प्रमुख चित्रकार थे; लंबी नाक, धनुषाकार भौंहों और कमल जैसी आँखों वाली उनकी 'बणी-ठणी' को भारत की मोनालिसा कहा जाता है। दिल्ली से आए उस्ताद अली रज़ा ने 17वीं शताब्दी में महाराजा कर्णसिंह के समय बीकानेर में काम किया, इसीलिए बीकानेर शैली में मुगल प्रभाव साफ दिखता है। साहिबदीन महाराणा जगत सिंह प्रथम के समय मेवाड़ के प्रमुख चित्रकार थे; 1628 की उनकी रागमाला और रामायण चित्रों ने उदयपुर शैली को आकार दिया। शिवदास की गिनती मारवाड़ यानी जोधपुर शैली के चित्रकारों में होती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें शिवदास को बीकानेर और अली रज़ा को मारवाड़ से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें शिवदास को मेवाड़ और साहिबदीन को मारवाड़ से जोड़ा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें साहिबदीन को बीकानेर और अली रज़ा को मेवाड़ से जोड़ा गया है। परीक्षा टिप: बणी-ठणी–निहालचंद–किशनगढ़; रागमाला–साहिबदीन–मेवाड़; अली रज़ा–बीकानेर; शिवदास–मारवाड़।

Q2.सामान्य विज्ञानपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025आसान

‘विशिष्ट रोगवाहक - जनित रोग - रोगाणु के प्रकार’ के गलत समुच्चय का चयन कीजिए।

  1. A.एडीस - चिकुनगुनिया - जीवाणु
  2. B.क्यूलेक्स - लिम्फेटिक फाइलेरिएसिस - परजीवी
  3. C.एनोफ़िलीज़ - मलेरिया - परजीवी
  4. D.एडीस - डेंगू - विषाणु
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एडीस - चिकुनगुनिया - जीवाणु

व्याख्या

सही उत्तर है A, एडीस - चिकुनगुनिया - जीवाणु। यह समुच्चय गलत है, क्योंकि चिकुनगुनिया जीवाणु से नहीं, बल्कि विषाणु, यानी चिकुनगुनिया वायरस से होता है। यह एडीस मच्छरों से फैलता है, यानी वही दिन में काटने वाले मच्छर जो डेंगू और ज़ीका भी फैलाते हैं, और इसमें तेज़ बुखार के साथ जोड़ों में भयंकर दर्द होता है। यह नाम पूर्वी अफ्रीका की मकोंडे भाषा के एक शब्द से आया है, जिसका अर्थ है 'जो झुका दे', क्योंकि दर्द से मरीज़ झुककर चलने लगता है। एडीस कूलर, टायर, गमलों और टंकियों में जमा साफ पानी में पनपता है, इसीलिए मानसून के बाद डेंगू और चिकुनगुनिया के मामले बढ़ते हैं। विकल्प B सही समुच्चय है, क्योंकि क्यूलेक्स मच्छर लिम्फेटिक फाइलेरिएसिस यानी हाथीपाँव फैलाता है, जो वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी जैसे परजीवी कृमियों से होता है। विकल्प C सही है, क्योंकि मादा एनोफिलीज़ मलेरिया फैलाती है, जो प्रोटोज़ोआ परजीवी प्लास्मोडियम से होता है। विकल्प D सही है, क्योंकि एडीस डेंगू भी फैलाता है, जो डेंगू वायरस से होता है। परीक्षा टिप: एडीस से डेंगू, चिकुनगुनिया और ज़ीका, तीनों विषाणु; एनोफिलीज़ से मलेरिया; क्यूलेक्स से फाइलेरिया और जापानी इंसेफेलाइटिस।

Q3.सामान्य विज्ञानपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025आसान

निम्नलिखित में से किसमें परिवर्तन के कारण मोतियाबिन्द में आँखों का प्राकृतिक लेंस धुँधला हो जाता है?

  1. A.प्रोटीन
  2. B.कार्बोहाइड्रेट
  3. C.वसा
  4. D.अश्रु ग्रन्थि
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्रोटीन

व्याख्या

सही उत्तर है A, प्रोटीन। आँख का लेंस मुख्य रूप से पानी और क्रिस्टलिन नाम के विशेष प्रोटीनों से बना होता है, जो इतने व्यवस्थित क्रम में जमे रहते हैं कि लेंस पारदर्शी रहता है और प्रकाश सीधे रेटिना तक पहुँचता है। उम्र बढ़ने के साथ, और मधुमेह, पराबैंगनी प्रकाश, धूम्रपान या चोट से और जल्दी, ये प्रोटीन टूटकर आपस में गुच्छे बना लेते हैं। ये गुच्छे प्रकाश को बिखेर देते हैं, जिससे लेंस धुँधला हो जाता है और दिखना धुँधला, मंद और चौंधयुक्त हो जाता है। लेंस का यही धुँधलापन मोतियाबिन्द है, और यह भारत में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक है। इसका इलाज एक छोटे ऑपरेशन से होता है, जिसमें धुँधला लेंस हटाकर कृत्रिम इंट्राऑक्युलर लेंस लगाया जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि लेंस कार्बोहाइड्रेट में बदलाव से धुँधला नहीं होता, हालाँकि मधुमेह में रक्त शर्करा अधिक होने से प्रोटीन की क्षति तेज़ होती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि वसा लेंस की पारदर्शी संरचना नहीं बनाती। विकल्प D गलत है, क्योंकि अश्रु ग्रन्थि आँख को नम रखती है और उसका लेंस से कोई संबंध नहीं है। परीक्षा टिप: मोतियाबिन्द = प्रोटीन के गुच्छों से धुँधला लेंस; ग्लूकोमा = आँख के भीतर बढ़ा दबाव।

Q4.भारतीय अर्थव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025मध्यम

भारत में 1991 के बाद शुरू हुए वित्तीय क्षेत्र के सुधारों से निम्न में से कौन सा सम्बन्धित नहीं है?

  1. A.पूँजी पर्याप्तता
  2. B.गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियाँ
  3. C.एफ. आर. बी. एम. अधिनियम (फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट)
  4. D.सरफेसी अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एफ. आर. बी. एम. अधिनियम (फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट)

व्याख्या

सही उत्तर है C, एफ. आर. बी. एम. अधिनियम। राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 एक राजकोषीय सुधार है: यह केंद्र सरकार को राजकोषीय और राजस्व घाटा घटाने तथा अपने उधार की जानकारी देने के लिए बाध्य करता है। इसका संबंध सरकार के बजट से है, बैंकों और वित्तीय बाज़ारों से नहीं। 1991 के बाद वित्तीय क्षेत्र के सुधार वित्तीय प्रणाली पर नरसिंहम समिति से शुरू हुए, जिसने बैंकिंग के ठोस नियम माँगे। बैंकों को अपनी जोखिम वाली परिसम्पत्तियों के अनुपात में पूँजी रखनी पड़ी, यानी बेसल मानकों पर आधारित पूँजी पर्याप्तता अनुपात, और डूबते कर्ज़ों को छिपाने के बजाय ईमानदारी से गैर-निष्पादित परिसम्पत्ति (NPA) के रूप में दिखाना पड़ा। विकल्प A गलत है, क्योंकि पूँजी पर्याप्तता मानक बैंकिंग सुधार का मुख्य हिस्सा थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि NPA के स्पष्ट नियम भी इसी सुधार का भाग थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि सरफेसी अधिनियम, 2002 बैंकों को अदालत गए बिना चूककर्ता की गिरवी संपत्ति ज़ब्त कर बेचने देता है, जो डूबे कर्ज़ वसूलने का बड़ा कदम था। परीक्षा टिप: बैंकिंग सुधार = पूँजी पर्याप्तता, NPA मानक, सरफेसी; FRBM = सरकार का राजकोषीय अनुशासन।

Q5.भूगोलपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025आसान

राजस्थान के किस जिले में ‘खड़ीन’ जल संरक्षण की प्रचलित विधि है?

  1. A.नागौर
  2. B.बीकानेर
  3. C.जैसलमेर
  4. D.पाली
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. जैसलमेर

व्याख्या

सही उत्तर है C, जैसलमेर। खड़ीन ढलान वाले खेत के निचले सिरे पर बनाया गया मिट्टी का लंबा बाँध है, ताकि ऊपर की पथरीली ज़मीन से बहकर आने वाला वर्षा जल उसके पीछे इकट्ठा हो जाए। मानसून में यह पानी मिट्टी में रिस जाता है, और सर्दियों में उसी नम ज़मीन पर बिना अलग सिंचाई के गेहूँ और चना जैसी फसलें उगाई जाती हैं, साथ ही बाँध के नीचे के कुओं का जल स्तर भी बढ़ता है। इस पद्धति का श्रेय जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों को दिया जाता है, जिन्होंने लगभग 15वीं शताब्दी में इसे विकसित किया, और यह जिले की पथरीली, ढलान वाली ज़मीन और बहुत कम वर्षा के अनुकूल है। यह थार में बहते वर्षा जल से खेती का सबसे अच्छा उदाहरण है। विकल्प A गलत है, क्योंकि नागौर खड़ीन पद्धति का मूल क्षेत्र नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि बीकानेर कुंड और कुई जैसी अन्य जल संरचनाओं के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि लूनी बेसिन के पूर्वी भाग का पाली वह क्षेत्र नहीं है जहाँ खड़ीन विकसित हुई। परीक्षा टिप: खड़ीन, पालीवाल ब्राह्मण, जैसलमेर; कुंड और टाँका वर्षा जल जमा करते हैं; कुई रिसाव का पानी देती है।

Q6.भूगोलपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025कठिन

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गये कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिये:

सूची-I (सहायक नदी)

A. राप्ती

B. तिस्ता

C. हिरण

D. पूर्णा

सूची-II (नदी)

(i) ब्रह्मपुत्र

(ii) नर्मदा

(iii) गोदावरी

(iv) घाघरा

  1. A.A-iv, B-ii, C-iii, D-i
  2. B.A-i, B-ii, C-iii, D-iv
  3. C.A-iii, B-i, C-iv, D-ii
  4. D.A-iv, B-i, C-ii, D-iii
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. A-iv, B-i, C-ii, D-iii

व्याख्या

सही उत्तर है D, A-iv, B-i, C-ii, D-iii। राप्ती नेपाल से निकलती है, उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के पास से बहती है और घाघरा में मिलती है, जो आगे गंगा से मिलती है। तिस्ता सिक्किम के हिमनदों से निकलती है, दार्जिलिंग की पहाड़ियों को काटती है और बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र से मिलती है, जिसे वहाँ जमुना कहते हैं। हिरण नर्मदा की एक छोटी सहायक नदी है, जो मध्य प्रदेश में उत्तर की ओर से उसमें मिलती है। पूर्णा महाराष्ट्र की अजंता पहाड़ियों से निकलकर गोदावरी में मिलती है; इसे ताप्ती में मिलने वाली दूसरी पूर्णा नदी से न मिलाएँ। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें तिस्ता को नर्मदा और पूर्णा को ब्रह्मपुत्र से जोड़ा गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें राप्ती को ब्रह्मपुत्र और हिरण को गोदावरी से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें राप्ती को गोदावरी की सहायक नदी बताया गया है। परीक्षा टिप: राप्ती–घाघरा, तिस्ता–ब्रह्मपुत्र, हिरण–नर्मदा, पूर्णा–गोदावरी, और दूसरी पूर्णा ताप्ती में मिलती है।

Q7.भूगोलपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025मध्यम

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

सूची-I (मरुस्थल)

A. गोबी

B. पैटागोनिया

C. विक्टोरिया

D. कालाहारी

सूची-II (अवस्थिति)

(i) दक्षिणी अफ्रीका

(ii) एशिया

(iii) दक्षिण अमेरिका

(iv) ऑस्ट्रेलिया

  1. A.A-ii, B-iii, C-iv, D-i
  2. B.A-iv, B-ii, C-iii, D-i
  3. C.A-ii, B-i, C-iii, D-iv
  4. D.A-iii, B-iv, C-i, D-ii
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. A-ii, B-iii, C-iv, D-i

व्याख्या

सही उत्तर है A, A-ii, B-iii, C-iv, D-i। गोबी एशिया का ठंडा मरुस्थल है, जो मंगोलिया और उत्तरी चीन में फैला है और डायनासोर के जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है। पैटागोनिया दक्षिण अमेरिका में दक्षिणी अर्जेंटीना में है; यह वृष्टि छाया मरुस्थल है, जो इसलिए सूखा है क्योंकि एंडीज़ पर्वत प्रशांत महासागर से आने वाली नम पछुआ हवाओं को रोक लेते हैं। ग्रेट विक्टोरिया ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा मरुस्थल है, जो पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में फैला है। कालाहारी दक्षिणी अफ्रीका में बोत्सवाना के अधिकांश भाग और नामीबिया तथा दक्षिण अफ्रीका के कुछ भागों में फैला है। पेपर बनाने वाले पैटागोनिया को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह महाद्वीप के पूर्वी भाग में है, जबकि अधिकांश गर्म मरुस्थल ठंडी समुद्री धाराओं के पास पश्चिमी किनारों पर मिलते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें गोबी को ऑस्ट्रेलिया और पैटागोनिया को एशिया में रखा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें पैटागोनिया दक्षिणी अफ्रीका में और विक्टोरिया दक्षिण अमेरिका में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें हर मरुस्थल का महाद्वीप गलत है। परीक्षा टिप: गोबी–एशिया, पैटागोनिया–दक्षिण अमेरिका, ग्रेट विक्टोरिया–ऑस्ट्रेलिया, कालाहारी–दक्षिणी अफ्रीका।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025आसान

केन्द्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना निम्नलिखित में से किस समिति की सिफ़ारिशों के आधार पर हुई थी?

  1. A.संथानम समिति
  2. B.केलकर समिति
  3. C.स्वर्ण सिंह समिति
  4. D.बक्शी टेकचंद समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संथानम समिति

व्याख्या

सही उत्तर है A, संथानम समिति। के. संथानम की अध्यक्षता वाली भ्रष्टाचार निवारण समिति (1962-64) ने सरकार में ईमानदारी पर नज़र रखने के लिए एक केंद्रीय संस्था की सिफारिश की, और फरवरी 1964 में केंद्र सरकार के एक कार्यकारी संकल्प से केन्द्रीय सतर्कता आयोग बना। लगभग चार दशक तक इसका अपना कोई कानून नहीं था; केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 ने इसे वैधानिक, बहु-सदस्यीय निकाय बनाया, जिसमें एक केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त होते हैं। यह संवैधानिक निकाय नहीं है, और परीक्षा में यही आम जाल होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि विजय केलकर की अध्यक्षता वाली समितियाँ कर सुधार और सार्वजनिक वित्त से जुड़ी थीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1976 की स्वर्ण सिंह समिति ने संविधान में मौलिक कर्तव्य जोड़ने की सिफारिश की थी। विकल्प D गलत है, क्योंकि बक्शी टेकचंद समिति ने आज़ादी के कुछ समय बाद 1947 के भ्रष्टाचार निरोधक कानून के कामकाज की समीक्षा की थी; उससे सतर्कता आयोग नहीं बना। परीक्षा टिप: संथानम समिति से 1964 में सतर्कता आयोग बना; वैधानिक दर्जा 2003 में मिला।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025कठिन

सूची-A का सूची-B से मिलान कीजिये और नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिये:

सूची-A (वाद)

A. इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण

B. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ

C. किहोतो होलोहन बनाम ज़चिल्हू

D. पी. संबामूर्ति बनाम आंध्र प्रदेश राज्य

सूची-B (संशोधन को चुनौती)

i. 42वाँ संशोधन

ii. 52वाँ संशोधन

iii. 39वाँ संशोधन

iv. 32वाँ संशोधन

  1. A.A-i, B-iii, C-iv, D-ii
  2. B.A-ii, B-iii, C-i, D-iv
  3. C.A-iv, B-ii, C-iii, D-i
  4. D.A-iii, B-i, C-ii, D-iv
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. A-iii, B-i, C-ii, D-iv

व्याख्या

सही उत्तर है D, A-iii, B-i, C-ii, D-iv। हर मामले में एक संशोधन को मूल ढांचे की कसौटी पर परखा गया। इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975) में उच्चतम न्यायालय ने 39वें संशोधन का वह भाग रद्द किया जिसने प्रधानमंत्री के चुनाव को अदालतों की पहुँच से बाहर कर दिया था, और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव को मूल ढांचे का हिस्सा माना। मिनर्वा मिल्स (1980) में 42वें संशोधन के वे प्रावधान रद्द हुए जो संसद को असीमित संशोधन शक्ति देते थे और सभी नीति निदेशक तत्वों को अनुच्छेद 14 और 19 के अधिकारों से ऊपर रखते थे। किहोतो होलोहन (1992) में 52वें संशोधन से आया दल-बदल विरोधी कानून वैध माना गया, पर अध्यक्ष के निर्णय को न्यायिक समीक्षा के दायरे में रखा गया। पी. संबामूर्ति (1987) में 32वें संशोधन से जुड़े अनुच्छेद 371D का वह खंड रद्द हुआ जो राज्य सरकार को न्यायाधिकरण का आदेश पलटने देता था। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें राज नारायण को 42वें संशोधन से जोड़ा गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें मिनर्वा मिल्स को 52वें से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें राज नारायण को 32वें से जोड़ा गया है। परीक्षा टिप: 39वाँ–राज नारायण, 42वाँ–मिनर्वा, 52वाँ–किहोतो, 32वाँ–संबामूर्ति।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025मध्यम

निम्नलिखित अनुच्छेदों के कौन से समूह द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार केवल भारत के ‘नागरिकों’ को अनुदत्त हैं?

  1. A.अनुच्छेद 14, 20, 23 और 30
  2. B.अनुच्छेद 15, 21, 25 और 28
  3. C.अनुच्छेद 20, 21, 25 और 30
  4. D.अनुच्छेद 15, 16, 19 और 30
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अनुच्छेद 15, 16, 19 और 30

व्याख्या

सही उत्तर है D, अनुच्छेद 15, 16, 19 और 30। केवल पाँच मौलिक अधिकार ऐसे हैं जो सिर्फ भारतीय नागरिकों को मिलते हैं। अनुच्छेद 15 धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव रोकता है; अनुच्छेद 16 सार्वजनिक नियोजन में अवसर की समानता देता है; अनुच्छेद 19 बोलने, सभा करने, संघ बनाने, घूमने, बसने और व्यवसाय करने की छह स्वतंत्रताएँ देता है; अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि और संस्कृति की रक्षा करता है; और अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थान खोलने और चलाने का अधिकार देता है। बाकी सभी अधिकार, जैसे विधि के समक्ष समता, जीवन का अधिकार और धर्म की स्वतंत्रता, विदेशियों सहित हर व्यक्ति को मिलते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 14, 20 और 23 हर व्यक्ति की रक्षा करते हैं, केवल नागरिकों की नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 21, 25 और 28 भी सभी व्यक्तियों पर लागू होते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 20, 21 और 25 हर व्यक्ति के अधिकार हैं, चाहे वह नागरिक हो या नहीं। परीक्षा टिप: केवल नागरिकों के अधिकार हैं 15, 16, 19, 29 और 30।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025मध्यम

भक्ति आंदोलन के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सत्य नहीं है?

  1. A.वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग की स्थापना की।
  2. B.निम्बार्क ने द्वैताद्वैत के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
  3. C.माध्वाचार्य ने सगुण भक्ति के स्थान पर निर्गुण भक्ति सिद्धांत को प्रतिपादित किया।
  4. D.रामानंद ने राम भक्ति परंपरा का प्रचार किया।
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. माध्वाचार्य ने सगुण भक्ति के स्थान पर निर्गुण भक्ति सिद्धांत को प्रतिपादित किया।

व्याख्या

सही उत्तर है C, माध्वाचार्य वाला कथन। यही कथन गलत है, क्योंकि माध्वाचार्य रूप और गुणों वाले साकार ईश्वर विष्णु के उपासक थे, इसलिए उनका मार्ग सगुण भक्ति था, निर्गुण नहीं। कर्नाटक के उडुपी से जुड़े 13वीं शताब्दी के आचार्य माध्व ने द्वैतवाद सिखाया: ईश्वर और जीव सदा अलग हैं, और जीव को मुक्ति केवल भक्ति तथा ईश्वर की कृपा से मिलती है। उन्होंने उडुपी में कृष्ण मंदिर की स्थापना की, जो आज भी उनकी परंपरा का केंद्र है। निर्गुण भक्ति, यानी निराकार ईश्वर की उपासना, कबीर, नानक और दादू जैसे संतों से जुड़ी है। विकल्प A सही कथन है, क्योंकि वल्लभाचार्य ने 'कृपा के मार्ग' पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जिसके केंद्र में श्रीनाथजी रूप में कृष्ण हैं। विकल्प B सही है, क्योंकि निम्बार्क ने द्वैताद्वैत का सिद्धांत दिया। विकल्प D सही है, क्योंकि रामानंद ने उत्तर भारत में राम भक्ति फैलाई और सभी जातियों के शिष्य बनाए, जिनमें कबीर और रैदास भी थे। परीक्षा टिप: शंकर अद्वैत, रामानुज विशिष्टाद्वैत, माध्व द्वैत, निम्बार्क द्वैताद्वैत, वल्लभ शुद्धाद्वैत।

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