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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 25

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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 25) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 13 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: संविधान का निर्माण, राष्ट्रपति की शक्तियां: वीटो, अध्यादेश और क्षमादान, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 19 April 2022, Shift 2कठिन

संविधान सभा को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 की किस धारा द्वारा मान्यता दी गई थी?

  1. A.6(2)
  2. B.10(1)
  3. C.12(2)
  4. D.8(1)
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 8(1)

व्याख्या

सही उत्तर है D, 8(1)। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 की धारा 8(1) ने प्रत्येक नए डोमिनियन की संविधान सभा को उसके विधानमंडल की शक्तियाँ दीं। यह अधिनियम ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई 1947 को पारित किया और यह 15 अगस्त 1947 से लागू हुआ। इसने ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान नामक दो डोमिनियन में बाँटा, देशी रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त की, और हर डोमिनियन की संविधान सभा को यह अधिकार दिया कि वह साधारण कानून बनाने वाली संस्था के रूप में भी काम करे और संविधान बनाने वाली संस्था के रूप में भी। कैबिनेट मिशन योजना के तहत 1946 में चुनी गई भारत की संविधान सभा इसी कारण 15 अगस्त 1947 से संप्रभु बन गई और उसे अपने कामों के लिए ब्रिटिश मंजूरी की जरूरत नहीं रही। विकल्प A गलत है, क्योंकि धारा 6 नए डोमिनियन विधानमंडलों की कानून बनाने की शक्ति से जुड़ी है। विकल्प B गलत है, क्योंकि धारा 10 सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की सेवाओं के अधिकारियों की सेवा शर्तें जारी रखती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि धारा 12 भारत में तैनात ब्रिटिश सेनाओं से संबंधित है। परीक्षा टिप: 1947 अधिनियम की धारा 8 संविधान सभा की धारा है और अधिनियम 15 अगस्त 1947 से लागू हुआ।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 17 Jan 2023, Shift 4मध्यम

राज्य के राज्यपाल को क्षमादान की शक्ति भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत प्राप्त है?

  1. A.अनुच्छेद 163
  2. B.अनुच्छेद 161
  3. C.अनुच्छेद 55
  4. D.अनुच्छेद 145
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 161

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 161। अनुच्छेद 161 राज्यपाल को यह शक्ति देता है कि वे उस अपराध के लिए दंडित किसी व्यक्ति को क्षमा, प्रविलंबन, विराम और परिहार दे सकें तथा दंड को निलंबित, कम या परिवर्तित कर सकें, जिस विषय पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति फैली हुई है। उनकी यह शक्ति अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की शक्ति से दो बातों में कम है — राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकते और सेना न्यायालय द्वारा दिए गए दंड में उनका कोई अधिकार नहीं होता, जबकि राष्ट्रपति दोनों कर सकते हैं। राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल भी इस शक्ति का प्रयोग राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद से संबंधित है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति बताता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 145 उच्चतम न्यायालय को प्रक्रिया के नियम बनाने की शक्ति देता है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति, अनुच्छेद 161 राज्यपाल की; मृत्युदंड और सेना न्यायालय के दंड में केवल राष्ट्रपति क्षमा दे सकते हैं।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · 19 Sept 2021कठिन

केंद्र सरकार की 'मंत्रिपरिषद' अस्तित्व में केवल तब आती है, जब

  1. A.सभी मंत्री पद की शपथ ले लें
  2. B.प्रधानमंत्री पद की शपथ ले लें
  3. C.विभागों का आवंटन हो जाए
  4. D.संसद का विश्वास प्राप्त हो जाए
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सभी मंत्री पद की शपथ ले लें

व्याख्या

सही उत्तर है A, सभी मंत्री पद की शपथ ले लें। मंत्रिपरिषद मंत्रियों से बना निकाय है, इसलिए वह तभी अस्तित्व में आती है जब उसके हर सदस्य को शपथ दिला दी जाए। अनुच्छेद 75 के अनुसार राष्ट्रपति पहले प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं और उसके बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की। अनुच्छेद 75(4) कहता है कि प्रत्येक मंत्री को राष्ट्रपति के समक्ष तीसरी अनुसूची में दिए प्रारूप में पद और गोपनीयता की शपथ लेनी होगी, और जब तक यह शपथ न हो, मंत्रिपरिषद में नामित व्यक्ति मंत्री के रूप में कार्य नहीं कर सकता। विकल्प B गलत है, क्योंकि प्रधानमंत्री की शपथ एक व्यक्ति को सरकार का प्रमुख बनाती है; अकेला मंत्री अभी परिषद नहीं होता। विकल्प C गलत है, क्योंकि विभागों का बँटवारा बाद का कार्य-आवंटन है और बिना विभाग वाला मंत्री भी मंत्री ही होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 75(3) के तहत लोकसभा का विश्वास परिषद को पद पर बनाए रखता है, उसे अस्तित्व में नहीं लाता। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 75(4) और तीसरी अनुसूची — पहले शपथ, बाद में विभाग।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 Feb 2019, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन द्वारा शिक्षा का अधिकार दिया गया?

  1. A.88वाँ संशोधन
  2. B.89वाँ संशोधन
  3. C.87वाँ संशोधन
  4. D.86वाँ संशोधन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 86वाँ संशोधन

व्याख्या

सही उत्तर है D, 86वाँ संशोधन। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 ने निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाया। इसने अनुच्छेद 21A जोड़ा, जिसके अनुसार राज्य छह से चौदह वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा। इसी संशोधन ने नीति निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 45 को बदलकर छह वर्ष से छोटे बच्चों की देखभाल का दायित्व राज्य पर रखा और अनुच्छेद 51A(k) जोड़ा, जो माता-पिता या संरक्षक का यह मूल कर्तव्य बनाता है कि वे बच्चे को विद्यालय भेजें। संसद ने इस अधिकार को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के रूप में लागू किया, जो 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि 88वाँ संशोधन सेवा कर से संबंधित था। विकल्प B गलत है, क्योंकि 89वें संशोधन ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग को दो अलग आयोगों में बाँटा। विकल्प C गलत है, क्योंकि 87वें संशोधन ने परिसीमन का आधार 2001 की जनगणना कर दिया। परीक्षा टिप: 86वाँ संशोधन, अनुच्छेद 21A और आरटीई अधिनियम 2009 — तीनों को एक साथ याद रखें।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 11 फरवरी 2025, शिफ्ट 2मध्यम

1950 में भारत के मुख्य न्यायाधीश के अलावा सर्वोच्च न्यायालय में कितने अन्य न्यायाधीश थे?

  1. A.छह
  2. B.आठ
  3. C.सात
  4. D.पांच
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सात

व्याख्या

सही उत्तर सात है। 1950 में जब सर्वोच्च न्यायालय शुरू हुआ, तब अनुच्छेद 124(1) में भारत के एक मुख्य न्यायाधीश और अधिकतम सात अन्य न्यायाधीशों, यानी कुल आठ, का प्रावधान था, "जब तक संसद कानून द्वारा अधिक संख्या तय न करे"। न्यायालय का काम बढ़ने पर संसद ने कई बार इस शक्ति का प्रयोग किया: 1956 में 11, 1960 में 14, 1978 में 18, 1986 में 26, 2009 में 31 और 2019 में 34 न्यायाधीश, और मई 2026 में एक अध्यादेश ने स्वीकृत संख्या बढ़ाकर 38 कर दी, यानी मुख्य न्यायाधीश और 37 न्यायाधीश।

गलत विकल्प आसपास की संख्याएं हैं, जो आधे-अधूरे याद तथ्यों को पकड़ने के लिए रखी गई हैं। आठ मुख्य न्यायाधीश समेत कुल संख्या है, और इसीलिए आकर्षक लगता है; छह और पांच का कोई आधार नहीं है। प्रश्न ध्यान से पढ़ें: "मुख्य न्यायाधीश के अलावा" का अर्थ है कि उत्तर में मुख्य न्यायाधीश शामिल नहीं हैं। यह भी ध्यान दें कि न्यायाधीशों की संख्या संसद का एक अधिनियम, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956, तय करता है, संविधान संशोधन नहीं, इसीलिए इसे अपेक्षाकृत आसानी से बदला जा सकता है।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 15 Oct 2020, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने उस नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता की थी, जिसने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया?

  1. A.जे.एस. खेहर
  2. B.दीपक मिश्रा
  3. C.एच.जे. कनिया
  4. D.टी.एस. ठाकुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जे.एस. खेहर

व्याख्या

सही उत्तर है A, जे.एस. खेहर। न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश थे, जब 24 अगस्त 2017 को नौ न्यायाधीशों की पीठ ने न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में फैसला सुनाया, और उन्होंने ही पीठ की अध्यक्षता की। पीठ ने एकमत से माना कि निजता मौलिक अधिकार है, जो मुख्यतः अनुच्छेद 21 के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार तथा भाग III की स्वतंत्रताओं से सुरक्षित है। इसने एम.पी. शर्मा (1954) और खड़क सिंह (1962) के पुराने फैसले पलट दिए, जिनमें कहा गया था कि संविधान ऐसा कोई अधिकार नहीं देता। यह मामला आधार योजना की चुनौती से निकला था। खेहर भारत के पहले सिख मुख्य न्यायाधीश भी थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि दीपक मिश्रा एक सप्ताह बाद मुख्य न्यायाधीश बने और धारा 377 तथा व्यभिचार के फैसलों की पीठों में थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि एच.जे. कनिया 1950 में भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि टी.एस. ठाकुर जनवरी 2017 में सेवानिवृत्त हो गए थे। परीक्षा टिप: पुट्टस्वामी 2017, नौ न्यायाधीश, अनुच्छेद 21, सीजेआई खेहर।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: बिहार · 30 Sept, 2023आसान

भारत के उच्चतम न्यायालय ने संविधान के 'आधारभूत ढाँचे' का सिद्धांत पहली बार किस मामले में दिया था?

  1. A.गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य
  2. B.केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
  3. C.मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ
  4. D.(1) और (2) दोनों
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य

व्याख्या

सही उत्तर है B, केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य। सन 1973 के इस मामले में तेरह जजों की पीठ ने, जो उच्चतम न्यायालय की अब तक की सबसे बड़ी पीठ है, सात के मुकाबले छह मतों से कहा कि संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, पर उसके आधारभूत ढाँचे को नष्ट या क्षतिग्रस्त नहीं कर सकती। संविधान की सर्वोच्चता, गणतांत्रिक और लोकतांत्रिक शासन, पंथनिरपेक्षता, शक्तियों का पृथक्करण, न्यायिक पुनरावलोकन तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तब से इसी आधारभूत ढाँचे के अंग माने जाते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि गोलकनाथ (1967) ने बिल्कुल अलग रुख लिया था कि संसद मौलिक अधिकारों में संशोधन कर ही नहीं सकती, और वह फैसला केशवानंद में पलट दिया गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि मिनर्वा मिल्स (1980) ने पहले से मौजूद इसी सिद्धांत को लागू करके 42वें संशोधन के कुछ भाग रद्द किए। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह सिद्धांत एक ही मामले में दिया गया था। परीक्षा टिप: गोलकनाथ 1967, केशवानंद 1973, मिनर्वा मिल्स 1980।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 10 May 2022, Shift 1मध्यम

भारत में, किसी राज्य की न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की नियुक्ति _________ द्वारा की जाती है।

  1. A.उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  2. B.प्रधानमंत्री
  3. C.भारत के राष्ट्रपति
  4. D.राज्य के राज्यपाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. राज्य के राज्यपाल

व्याख्या

सही उत्तर है D, राज्य के राज्यपाल। संविधान का अनुच्छेद 234 कहता है कि राज्य की न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, और यह उन नियमों के अनुसार होती है जो राज्य लोक सेवा आयोग तथा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद बनाए जाते हैं। जिला न्यायाधीशों के लिए अलग से अनुच्छेद 233 है; उनकी नियुक्ति भी राज्यपाल करते हैं, पर उच्च न्यायालय से परामर्श करके। सेवा में आने के बाद अनुच्छेद 235 के तहत इन अधिकारियों की तैनाती, पदोन्नति और छुट्टी पर नियंत्रण उच्च न्यायालय का होता है, इसी से अधीनस्थ न्यायपालिका स्वतंत्र रहती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि परामर्श उच्च न्यायालय से लिया जाता है, नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश नहीं करते। विकल्प B गलत है, क्योंकि राज्य की न्यायिक सेवा में प्रधानमंत्री की कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति अनुच्छेद 124 और 217 के तहत उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश नियुक्त करते हैं। परीक्षा टिप: 233 जिला न्यायाधीश, 234 अन्य न्यायिक अधिकारी, 235 उच्च न्यायालय का नियंत्रण।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · 17 Nov 2018, Shift 1मध्यम

अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को किसके प्रवर्तन की अधिकारिता प्राप्त है?

  1. A.सिविल अधिकार
  2. B.स्वीकृति अधिकार
  3. C.मौलिक अधिकार
  4. D.बाल अधिकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. मौलिक अधिकार

व्याख्या

सही उत्तर है C, मौलिक अधिकार। अनुच्छेद 226 प्रत्येक उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति देता है। पाँच रिट हैं — बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा। वास्तव में अनुच्छेद 226 का दायरा अनुच्छेद 32 से अधिक व्यापक है, क्योंकि उच्च न्यायालय ये रिट मौलिक अधिकारों के लिए और 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी जारी कर सकता है, जिसमें साधारण विधिक अधिकार भी आ जाते हैं; जबकि अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित है। दूसरा अंतर यह है कि अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है और उसे छीना नहीं जा सकता, पर अनुच्छेद 226 की शक्ति मौलिक अधिकार नहीं है। विकल्प A गलत है, क्योंकि साधारण सिविल अधिकारों का प्रवर्तन नियमित अदालतों में सिविल वाद से होता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि 'स्वीकृति अधिकार' नाम की कोई श्रेणी संविधान में नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि बाल अधिकार किशोर न्याय अधिनियम जैसे कानूनों और NCPCR जैसी संस्थाओं से आते हैं, अनुच्छेद 226 से नहीं। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 32 — सर्वोच्च न्यायालय, केवल मौलिक अधिकार; अनुच्छेद 226 — उच्च न्यायालय, व्यापक।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · 15 October 2022, Shift 1मध्यम

भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग निम्नलिखित में से किस मंत्रालय के अधीन है?

  1. A.गृह मंत्रालय
  2. B.रक्षा मंत्रालय
  3. C.वित्त मंत्रालय
  4. D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. गृह मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर है A, गृह मंत्रालय। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है, क्योंकि भारत में मानवाधिकार के लिए यही नोडल मंत्रालय है। यह आयोग संवैधानिक नहीं, बल्कि सांविधिक निकाय है, जिसे मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत बनाया गया और जिसने 12 अक्टूबर 1993 से काम शुरू किया। इसकी अध्यक्षता भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश करते हैं, जिनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं, और यह मानवाधिकार उल्लंघन या लोक सेवक की लापरवाही की शिकायतों की जाँच करता है, यद्यपि इसकी सिफारिशें परामर्शात्मक होती हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि रक्षा मंत्रालय सशस्त्र बलों से जुड़ा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि वित्त मंत्रालय राजस्व और व्यय देखता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि विकल्प A सही है। परीक्षा टिप: एनएचआरसी सांविधिक निकाय, अधिनियम 1993, गृह मंत्रालय के अधीन।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 02 Dec 2022, Shift 1आसान

भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक एक ____________ है।

  1. A.दो सदस्यीय निकाय
  2. B.तीन सदस्यीय निकाय
  3. C.एक सदस्यीय निकाय
  4. D.छह सदस्यीय निकाय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एक सदस्यीय निकाय

व्याख्या

सही उत्तर है C, एक सदस्यीय निकाय। संविधान का अनुच्छेद 148 भारत के एक नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की व्यवस्था करता है, इसलिए यह पद एक ही व्यक्ति संभालता है, कोई समूह नहीं। राष्ट्रपति उन्हें अपने हस्ताक्षर और मुहर वाले अधिपत्र से नियुक्त करते हैं, वे छह वर्ष तक या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, पद पर रहते हैं, और उन्हें केवल उसी तरह हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को, जिससे उनकी स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है। वे संघ और राज्यों के लेखों की लेखापरीक्षा करते हैं, और उनके प्रतिवेदन संसद या राज्य विधानमंडल के सामने रखे जाते हैं, जहाँ लोक लेखा समिति उनकी जाँच करती है। विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि सीएजी कभी दो, तीन या छह सदस्यीय निकाय नहीं रहा; यह पद एक ही अधिकारी के पास होता है, जिनकी सहायता भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग करता है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 148 का सीएजी एकल सदस्यीय पद है, जबकि निर्वाचन आयोग और यूपीएससी बहु-सदस्यीय निकाय हैं।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 14 Oct 2020, Shift 3आसान

भारत के संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए संवैधानिक उपाय देता है?

  1. A.अनुच्छेद 40
  2. B.अनुच्छेद 32
  3. C.अनुच्छेद 38
  4. D.अनुच्छेद 36
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 32

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 32। अनुच्छेद 32 हर व्यक्ति को यह अधिकार देता है कि मौलिक अधिकार के उल्लंघन पर वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सके, और यह स्वयं एक मौलिक अधिकार है। इसके तहत न्यायालय पाँच रिट जारी कर सकता है: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा। डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा कहा था, क्योंकि लागू कराने का रास्ता न हो तो भाग III के अधिकारों का अर्थ ही नहीं रहता। अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को इससे व्यापक रिट शक्ति देता है, पर वह मौलिक अधिकार नहीं है। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 40 एक नीति निर्देशक तत्व है, जो राज्य से ग्राम पंचायतों के गठन की बात कहता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 38 न्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था बनाने का निर्देशक तत्व है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 36 केवल भाग IV के लिए राज्य शब्द की परिभाषा देता है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 32 सर्वोच्च न्यायालय, अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय, और मौलिक अधिकार केवल 32 है।

Q13.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 1 Sept 2022, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित में से किसे 1967 में भारत की राजभाषाओं की सूची में जोड़ा गया था?

  1. A.मणिपुरी
  2. B.नेपाली
  3. C.कोंकणी
  4. D.सिंधी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सिंधी

व्याख्या

सही उत्तर है D, सिंधी। सिंधी को 1967 के 21वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में जोड़ा गया था।

आठवीं अनुसूची उन भाषाओं की सूची है जिन्हें संविधान मान्यता देता है, और अभ्यर्थी इनमें से किसी भी भाषा में सिविल सेवा परीक्षा दे सकता है। 1950 में इसमें 14 भाषाएँ थीं। 1967 में सिंधी पंद्रहवीं भाषा बनी, क्योंकि विभाजन के बाद बड़ी सिंधी भाषी आबादी भारत आई जिसका अपना कोई राज्य नहीं था। कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 1992 के 71वें संशोधन से एक साथ जोड़ा गया, तथा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 2003 के 92वें संशोधन से, जिससे सूची 22 भाषाओं की हो गई।

विकल्प A गलत है क्योंकि मणिपुरी 1992 में जोड़ी गई। विकल्प B गलत है क्योंकि नेपाली भी 1992 में आई। विकल्प C गलत है क्योंकि कोंकणी उसी 1992 के समूह में थी।

परीक्षा टिप: 21वाँ संशोधन 1967 में सिंधी; 71वाँ 1992 में कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली; 92वाँ 2003 में बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2019 Official Papeमध्यम

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कर्तव्यों का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में है?

  1. A.अनुच्छेद 146
  2. B.अनुच्छेद 147
  3. C.अनुच्छेद 148
  4. D.अनुच्छेद 149
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अनुच्छेद 149

व्याख्या

सही उत्तर है D, अनुच्छेद 149। अनुच्छेद 149 कहता है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) वही कर्तव्य निभाएगा और वही शक्तियाँ रखेगा जो संसद कानून बनाकर तय करे। इसी आधार पर CAG संघ और प्रत्येक राज्य के लेखों की, तथा सार्वजनिक धन से बड़े हिस्से में चलने वाली संस्थाओं की लेखा परीक्षा करता है। उसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति या राज्यपाल को जाती है, जो उसे विधानमंडल के सामने रखवाते हैं। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने CAG को संविधान के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी कहा था। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 146 उच्चतम न्यायालय के कर्मचारियों और व्यय से जुड़ा है। विकल्प B गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 147 संवैधानिक प्रश्नों की व्याख्या से संबंधित है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 148 CAG की नियुक्ति, शपथ, कार्यकाल और सेवा शर्तों की बात करता है, कर्तव्यों की नहीं। परीक्षा टिप: 148 नियुक्ति, 149 कर्तव्य, 150 लेखों का प्रारूप, 151 लेखा परीक्षा रिपोर्ट।

Q15.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · 28 Feb 2020, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से कौन भारत का केंद्रशासित प्रदेश नहीं है?

  1. A.लद्दाख और पुडुचेरी
  2. B.दमन और दीव तथा दादरा और नगर हवेली
  3. C.लक्षद्वीप
  4. D.मिज़ोरम
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. मिज़ोरम

व्याख्या

सही उत्तर है D, मिज़ोरम। मिज़ोरम पूर्ण राज्य है, केंद्रशासित प्रदेश नहीं। इसे 1972 में असम से अलग कर केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था और 1986 के मिज़ो समझौते के बाद 53वें संविधान संशोधन से यह 20 फरवरी 1987 को राज्य बना, उसी दिन जब अरुणाचल प्रदेश भी राज्य बना। यह अंतर महत्वपूर्ण है: केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन अनुच्छेद 239 के अंतर्गत राष्ट्रपति प्रशासक या उपराज्यपाल के माध्यम से करते हैं, जबकि राज्य का अपना राज्यपाल और अपनी सरकार संविधान के भाग VI के अनुसार होती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि लद्दाख 31 अक्टूबर 2019 से और पुडुचेरी 1962 से केंद्रशासित प्रदेश है, तथा दोनों पहली अनुसूची में केंद्रशासित प्रदेश के रूप में दर्ज हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को 26 जनवरी 2020 को मिलाकर एक केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि लक्षद्वीप अरब सागर में प्रवाल द्वीपों का केंद्रशासित प्रदेश है, जिसकी राजधानी कवरत्ती है। परीक्षा टिप: मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश 20 फरवरी 1987 को राज्य बने, गोवा 30 मई 1987 को।

Q16.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 08 May 2023, Shift 1आसान

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची के अनुसार भारत में कितनी राजभाषाएँ हैं?

  1. A.42
  2. B.12
  3. C.32
  4. D.22
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 22

व्याख्या

सही उत्तर है D, 22। संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ दर्ज हैं। 1950 में इसमें 14 भाषाएँ थीं। 1967 में 21वें संशोधन से सिंधी जोड़ी गई; 1992 में 71वें संशोधन से कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली; और 2003 में 92वें संशोधन से बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली जुड़ीं, जिससे संख्या 22 हो गई। हिंदी को समृद्ध करने के लिए संघ को इन्हीं भाषाओं से शब्द लेने हैं, और कई केंद्रीय परीक्षाएँ इन भाषाओं में दी जा सकती हैं। ध्यान रखें कि यह अनुसूची अपने आप इन 22 भाषाओं को संघ की राजभाषा नहीं बनाती। अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा बताता है, जिसके साथ अंग्रेज़ी भी चलती रहती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 42 उस संशोधन की संख्या है जिसने प्रस्तावना बदली थी। विकल्प B गलत है, क्योंकि 12 तो शुरुआती 14 से भी कम है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 32 भाषाएँ सूची में कभी नहीं रहीं। परीक्षा टिप: 1950 में 14 और 2003 में 22, अंतिम चार 92वें संशोधन से।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 01 Sept, 2025, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-से मामले लोक अदालत नहीं ले सकती है?

  1. A.गैर-शमनीय आपराधिक अपराध
  2. B.भूमि अधिग्रहण के मामले
  3. C.मोटर दुर्घटना दावे
  4. D.आपसी सहमति से तलाक के विवाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. गैर-शमनीय आपराधिक अपराध

व्याख्या

सही उत्तर है A, गैर-शमनीय आपराधिक अपराध। लोक अदालत दोनों पक्षों को समझौते तक लाकर काम करती है, इसलिए वह केवल उन मामलों को ले सकती है जिनमें पक्षकार समझौता करने के लिए स्वतंत्र हों। इसी कारण विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 19(5) ऐसे किसी भी अपराध को बाहर रखती है जो कानून के तहत शमनीय नहीं है, जैसे हत्या या बलात्कार, क्योंकि समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध किसी निजी समझौते से मिट नहीं सकता। लोक अदालत का अवार्ड दीवानी न्यायालय की डिक्री माना जाता है और उसके विरुद्ध अपील नहीं होती, इसीलिए सहमति इतनी महत्वपूर्ण है। विकल्प B गलत है क्योंकि भूमि अधिग्रहण से उठे मुआवजा विवाद लोक अदालतों में नियमित रूप से निपटाए जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि मोटर दुर्घटना दावे वहाँ आने वाले सबसे आम मामलों में हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि आपसी सहमति से तलाक ठीक वैसा ही सहमति वाला समझौता है जिसे लोक अदालत दर्ज कर सकती है। परीक्षा टिप: लोक अदालत — वैधानिक दर्जा 1987, अवार्ड अंतिम और अपील नहीं, कोई न्याय शुल्क नहीं, गैर-शमनीय अपराध बाहर।

Q18.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 22 सितंबर 2022, शिफ्ट 1आसान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 के एक प्रावधान के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ______ वर्ष की आयु तक पद पर रह सकते हैं।

  1. A.62
  2. B.60
  3. C.65
  4. D.67
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 65

व्याख्या

सही उत्तर 65 है। अनुच्छेद 124(2) कहता है कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद पर रहेंगे। न्यायाधीश इससे पहले राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र देकर पद छोड़ सकते हैं, या साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित अभिभाषण के बाद राष्ट्रपति उन्हें हटा सकते हैं। नियुक्ति के लिए कोई न्यूनतम आयु और कोई तय कार्यकाल नहीं है, इसलिए न्यायाधीश का कार्यकाल इस पर निर्भर करता है कि वे किस आयु में नियुक्त हुए।

गलत विकल्प दूसरे पदों की आयु हैं। बासठ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु है, जिसे 1963 में 15वें संशोधन ने 60 से बढ़ाया, और यही सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। साठ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की मूल सेवानिवृत्ति आयु थी, और 67 का कोई आधार नहीं है। याद रखने की जोड़ी है सर्वोच्च न्यायालय 65, उच्च न्यायालय 62। इसके विपरीत, नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और मुख्य चुनाव आयुक्त छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद पर रहते हैं।

Q19.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 9 दिसंबर 2022, शिफ्ट 1आसान

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को केवल ______ के आधार पर हटाया जा सकता है।

  1. A.संविधान का अनादर
  2. B.साबित कदाचार या असमर्थता
  3. C.हत्या के आरोप
  4. D.ज्ञान की कमी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. साबित कदाचार या असमर्थता

व्याख्या

सही उत्तर साबित कदाचार या असमर्थता है। अनुच्छेद 124(4) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को राष्ट्रपति के आदेश से तभी हटाया जा सकता है जब संसद का हर सदन, एक ही सत्र में, साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर ऐसा अभिभाषण पेश करे जिसे उसकी कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई का समर्थन हो। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 बताता है कि संसद के मतदान से पहले तीन सदस्यों की समिति आरोपों की जांच कैसे करती है।

बाकी विकल्प संविधान द्वारा मान्य आधार नहीं हैं। "संविधान का अनादर" राष्ट्रपति के महाभियोग के आधार, यानी "संविधान के अतिक्रमण", जैसा लगता है, और यही जाल है। हत्या के आरोप या ज्ञान की कमी को इसी प्रक्रिया से कदाचार या असमर्थता के रूप में साबित करना होगा; ये अलग आधार नहीं हैं। यह सख्त प्रक्रिया न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा करती है: सर्वोच्च न्यायालय का कोई न्यायाधीश आज तक नहीं हटाया गया, और 1993 में न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी के विरुद्ध पहला प्रस्ताव गिर गया।

Q20.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CTET · 1 जनवरी 2022आसान

केंद्र और राज्यों के बीच विवाद सर्वोच्च न्यायालय के किस क्षेत्राधिकार में आते हैं?

  1. A.मूल क्षेत्राधिकार
  2. B.अपीलीय क्षेत्राधिकार
  3. C.सलाहकारी क्षेत्राधिकार
  4. D.अवशिष्ट क्षेत्राधिकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मूल क्षेत्राधिकार

व्याख्या

सही उत्तर मूल क्षेत्राधिकार है। अनुच्छेद 131 के तहत केवल सर्वोच्च न्यायालय, पहली अदालत के रूप में, भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, एक ओर भारत सरकार और किसी राज्य तथा दूसरी ओर अन्य राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच के विवाद सुन सकता है। "मूल" का अर्थ है कि मामला अपील के रूप में आने के बजाय सर्वोच्च न्यायालय में ही शुरू होता है। विवाद में ऐसा कानूनी या तथ्यात्मक प्रश्न होना चाहिए जिस पर कोई कानूनी अधिकार निर्भर हो, और संसद अनुच्छेद 262 के तहत अंतरराज्यीय नदी जल विवादों को इससे बाहर कर सकती है।

बाकी विकल्प असली क्षेत्राधिकार हैं, लेकिन दूसरे मामलों के लिए। अपीलीय क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 132 से 134 और 136) उच्च न्यायालयों और दूसरे न्यायालयों से आने वाली अपीलों के लिए है। सलाहकारी क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143) राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए प्रश्नों के लिए है। "अवशिष्ट क्षेत्राधिकार" सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों की कोई श्रेणी ही नहीं है। यह प्रश्न भारतीय संघवाद के निर्णायक के रूप में न्यायालय की भूमिका दिखाता है: जब केंद्र और कोई राज्य असहमत हों, तो फैसला सर्वोच्च न्यायालय करता है।

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