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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 18

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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 18) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 20 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: प्रस्तावना, अधीनस्थ न्यायालय, न्यायाधिकरण और लोक अदालत, मौलिक अधिकार और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · 4 Aug 2018, Shift 2आसान

भारत में शासन के स्वरूप का वर्णन करने के लिए संविधान की प्रस्तावना में निम्नलिखित में से किस शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है?

  1. A.संघीय
  2. B.गणराज्य
  3. C.समाजवादी
  4. D.धर्मनिरपेक्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संघीय

व्याख्या

सही उत्तर है A, संघीय। प्रस्तावना भारत को संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य कहती है; इसमें संघीय (फेडरल) शब्द कहीं नहीं आता, बल्कि पूरे संविधान में यह शब्द नहीं है। अनुच्छेद 1 भारत को राज्यों का संघ कहता है। संविधान निर्माताओं ने यह शब्द जानबूझकर चुना, ताकि स्पष्ट हो कि राज्य किसी समझौते से नहीं जुड़े हैं और वे संघ से अलग नहीं हो सकते। समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता शब्द 1976 के 42वें संविधान संशोधन से जोड़े गए थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि गणराज्य प्रस्तावना में है और इसका अर्थ है कि राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है, वंशानुगत नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि समाजवादी शब्द 1976 में जोड़ा गया और प्रस्तावना का हिस्सा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि धर्मनिरपेक्ष भी प्रस्तावना में है, जिसका अर्थ है राज्य का अपना कोई धर्म नहीं। परीक्षा टिप: प्रस्तावना का क्रम याद रखें और संघीय शब्द इसमें नहीं है।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 6 Sept 2022, Shift 2आसान

अधीनस्थ न्यायालय की भूमिका क्या है?

  1. A.दीवानी और फौजदारी प्रकृति के मामलों पर विचार करना
  2. B.मूल अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए रिट जारी करना
  3. C.निचले न्यायालयों के निर्णयों पर अपील सुनना
  4. D.किसी भी न्यायालय से मामले अपने पास मँगाना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दीवानी और फौजदारी प्रकृति के मामलों पर विचार करना

व्याख्या

सही उत्तर है A, दीवानी और फौजदारी प्रकृति के मामलों पर विचार करना। अधीनस्थ न्यायालय जिला स्तर और उससे नीचे के न्यायालय हैं, जो दीवानी तथा फौजदारी मामलों की प्रारंभिक सुनवाई करते हैं।

भारतीय न्यायपालिका एकल पिरामिड के रूप में गठित है। शीर्ष पर उच्चतम न्यायालय, उसके बाद प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय और उसके नीचे अधीनस्थ न्यायालय होते हैं, जो उसी उच्च न्यायालय के नियंत्रण में कार्य करते हैं। दीवानी पक्ष में जिला न्यायाधीश सर्वोच्च होता है और उसके नीचे सिविल जज के न्यायालय आते हैं; फौजदारी पक्ष में सत्र न्यायाधीश सर्वोच्च होता है और नीचे न्यायिक मजिस्ट्रेट होते हैं। अनुच्छेद 233 से 237 इन्हीं न्यायालयों से संबंधित हैं, तथा जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है।

विकल्प B गलत है क्योंकि रिट उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 32 और उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत जारी करते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि अपील सुनना मुख्यतः उच्च न्यायालय का कार्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि मामलों का स्थानांतरण उच्च न्यायालयों की शक्ति है।

परीक्षा टिप: जिला और सत्र न्यायालय अधीनस्थ न्यायालय हैं; रिट केवल उच्चतम और उच्च न्यायालय जारी करते हैं।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · 4 Aug 2018, Shift 2मध्यम

भारतीय संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद मूल अधिकारों से असंगत विधियों से संबंधित है?

  1. A.अनुच्छेद 14
  2. B.अनुच्छेद 13
  3. C.अनुच्छेद 11
  4. D.अनुच्छेद 12
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 13

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 13। अनुच्छेद 13 कहता है कि मूल अधिकारों से असंगत या उन्हें कम करने वाली कोई भी विधि शून्य होगी, और यह संविधान लागू होने से पहले बनी विधियों तथा बाद में बनी विधियों, दोनों पर लागू होता है। यही अनुच्छेद मूल अधिकारों को प्रभावी बनाता है, क्योंकि इससे उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों को साधारण कानूनों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति मिलती है। अनुच्छेद 13(3) में विधि की परिभाषा इतनी व्यापक है कि उसमें अध्यादेश, आदेश, नियम, अधिसूचना और रूढ़ि तक शामिल हैं; 24वें संशोधन से जोड़ा गया खंड (4) संविधान संशोधनों को इस परिभाषा से बाहर रखता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता देता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता पर कानून बनाने की शक्ति देता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 12 केवल राज्य शब्द की परिभाषा देता है। परीक्षा टिप: 12 राज्य, 13 असंगत विधियाँ, 14 समता।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 15 Oct 2020, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने उस नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता की थी, जिसने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया?

  1. A.जे.एस. खेहर
  2. B.दीपक मिश्रा
  3. C.एच.जे. कनिया
  4. D.टी.एस. ठाकुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जे.एस. खेहर

व्याख्या

सही उत्तर है A, जे.एस. खेहर। न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश थे, जब 24 अगस्त 2017 को नौ न्यायाधीशों की पीठ ने न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में फैसला सुनाया, और उन्होंने ही पीठ की अध्यक्षता की। पीठ ने एकमत से माना कि निजता मौलिक अधिकार है, जो मुख्यतः अनुच्छेद 21 के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार तथा भाग III की स्वतंत्रताओं से सुरक्षित है। इसने एम.पी. शर्मा (1954) और खड़क सिंह (1962) के पुराने फैसले पलट दिए, जिनमें कहा गया था कि संविधान ऐसा कोई अधिकार नहीं देता। यह मामला आधार योजना की चुनौती से निकला था। खेहर भारत के पहले सिख मुख्य न्यायाधीश भी थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि दीपक मिश्रा एक सप्ताह बाद मुख्य न्यायाधीश बने और धारा 377 तथा व्यभिचार के फैसलों की पीठों में थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि एच.जे. कनिया 1950 में भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि टी.एस. ठाकुर जनवरी 2017 में सेवानिवृत्त हो गए थे। परीक्षा टिप: पुट्टस्वामी 2017, नौ न्यायाधीश, अनुच्छेद 21, सीजेआई खेहर।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 01 Dec 2022, Shift 2आसान

भारत के संविधान में मूल कर्तव्य किस प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जोड़े गए थे?

  1. A.नरसिम्हा राव
  2. B.चरण सिंह
  3. C.इंदिरा गांधी
  4. D.लाल बहादुर शास्त्री
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. इंदिरा गांधी

व्याख्या

सही उत्तर है C, इंदिरा गांधी। मूल कर्तव्य 1976 के 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए थे, जो आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते पारित हुआ। यह संशोधन स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर आया और कर्तव्यों को भाग 4क में अनुच्छेद 51क के रूप में रखा गया, जिसकी प्रेरणा सोवियत संविधान से ली गई थी। शुरू में दस कर्तव्य थे; ग्यारहवाँ कर्तव्य, जिसमें छह से चौदह वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर देने की बात है, 2002 के 86वें संशोधन से जोड़ा गया। निदेशक तत्वों की तरह ये कर्तव्य भी न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते। विकल्प A गलत है क्योंकि पी वी नरसिम्हा राव 1991 में प्रधानमंत्री बने और आर्थिक सुधारों से जुड़े हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि चरण सिंह 1979-80 में थोड़े समय के लिए प्रधानमंत्री रहे। विकल्प D गलत है क्योंकि लाल बहादुर शास्त्री 1964 से 1966 तक पद पर रहे। परीक्षा टिप: 42वें संशोधन ने मूल कर्तव्य और प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष तथा अखंडता शब्द जोड़े।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 16 Jun 2024मध्यम

प्रतिषेध रिट (Writ of Prohibition) सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट द्वारा किसे जारी किया जाने वाला आदेश है?

  1. A.किसी सरकारी अधिकारी को, कोई विशेष कार्रवाई करने से रोकते हुए
  2. B.संसद/विधानसभा को, मद्यनिषेध पर कानून बनाने के लिए
  3. C.निचली अदालत को, किसी मामले की कार्यवाही जारी रखने से रोकते हुए
  4. D.सरकार को, किसी असंवैधानिक नीति पर चलने से रोकते हुए
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. निचली अदालत को, किसी मामले की कार्यवाही जारी रखने से रोकते हुए

व्याख्या

सही उत्तर है C, निचली अदालत को, किसी मामले की कार्यवाही जारी रखने से रोकते हुए। प्रतिषेध रिट ऊपरी अदालत किसी निचली अदालत या अधिकरण को जारी करती है, ताकि वह अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर न जाए। सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 32 और हाई कोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करते हैं। प्रतिषेध निवारक है: यह मामला लंबित रहते ही जारी होता है और आगे की कार्यवाही रोक देता है। इसका साथी उत्प्रेषण (सर्टिओरारी) सुधारात्मक है, जो बिना अधिकार के दिया गया आदेश रद्द करता है। दोनों केवल न्यायिक और अर्ध-न्यायिक निकायों पर लागू होते हैं, विधायिका या निजी व्यक्ति पर नहीं। विकल्प A गलत है, क्योंकि सरकारी अधिकारियों को आदेश परमादेश से दिया जाता है, प्रतिषेध प्रशासनिक अधिकारियों को जारी नहीं होता। विकल्प B गलत है, क्योंकि कोई रिट विधायिका को कानून बनाने का आदेश नहीं दे सकती। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऐसी कोई रिट नहीं है; नीति की जाँच न्यायिक पुनर्विलोकन से होती है। परीक्षा टिप: प्रतिषेध मामला बीच में रोकता है, उत्प्रेषण आदेश बनने के बाद रद्द करता है।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 5 August 2017, Shift 1आसान

भारत का उपराष्ट्रपति बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी होनी चाहिए?

  1. A.30 वर्ष
  2. B.35 वर्ष
  3. C.40 वर्ष
  4. D.37 वर्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 35 वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर है B, 35 वर्ष। संविधान के अनुच्छेद 66(3) के अनुसार उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए व्यक्ति की आयु 35 वर्ष पूरी होनी चाहिए। इसी अनुच्छेद में यह भी कहा गया है कि उम्मीदवार भारत का नागरिक हो, राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता रखता हो और संघ, राज्य या किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन लाभ का पद धारण न करता हो। उपराष्ट्रपति का चुनाव पाँच वर्ष के लिए संसद के दोनों सदनों के सदस्यों, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, के निर्वाचक मंडल द्वारा एकल संक्रमणीय मत के आनुपातिक प्रतिनिधित्व से होता है। अनुच्छेद 58 के तहत राष्ट्रपति के लिए भी यही 35 वर्ष की आयु सीमा है। विकल्प A गलत है क्योंकि 30 वर्ष राज्यसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु है। विकल्प C और D गलत हैं क्योंकि संविधान में इस पद के लिए ऐसी कोई आयु सीमा नहीं दी गई है। परीक्षा टिप: लोकसभा 25 वर्ष, राज्यसभा 30 वर्ष तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति 35 वर्ष।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025कठिन

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. वह भारत की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है और उन पर प्रतिवेदन देता है।

2. वह भारत की संचित निधि से धन के निर्गमन और प्राप्ति पर नियंत्रण रखता है।

3. वह संघ या राज्य के राजस्व से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित सभी निकायों के व्यय की लेखापरीक्षा करता है और उन पर प्रतिवेदन देता है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। भारत का CAG लेखापरीक्षक है, जो खर्च हो जाने के बाद उसकी जाँच करता है; खज़ाने से पैसा निकलने पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 148 के तहत करते हैं और उसके कर्तव्य CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 में तय हैं। वह भारत और हर राज्य की संचित निधि से होने वाले सभी खर्चों की जाँच करता है, साथ ही संघ या राज्य के राजस्व से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों के खातों की भी। संघ के खातों पर उसकी रिपोर्ट अनुच्छेद 151 के तहत राष्ट्रपति को जाती है, जो उसे संसद के सामने रखवाते हैं और लोक लेखा समिति उसकी जाँच करती है। कथन 2 गलत है, क्योंकि संचित निधि से पैसा विनियोग अधिनियम के तहत कार्यपालिका निकालती है और ब्रिटेन के CAG के विपरीत भारत का CAG इसके निर्गमन को नियंत्रित नहीं करता। इसलिए विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि तीनों में कथन 2 शामिल है। परीक्षा टिप: भारत का CAG नियंत्रक कम और महालेखापरीक्षक ज़्यादा है; वह जाँच करता है, पैसा जारी नहीं करता।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 फरवरी 2025, शिफ्ट 1आसान

संविधान का अनुच्छेद 74 निम्नलिखित में से किसके बारे में है?

  1. A.राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
  2. B.राष्ट्रपति द्वारा उपराष्ट्रपति की नियुक्ति
  3. C.राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
  4. D.राष्ट्रपति द्वारा वित्त आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद है। अनुच्छेद 74(1) कहता है कि राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी, और राष्ट्रपति उस सलाह के अनुसार कार्य करेंगे। 42वें संशोधन (1976) ने यह सलाह बाध्यकारी बनाई, और 44वें संशोधन (1978) ने राष्ट्रपति को इसे एक बार पुनर्विचार के लिए लौटाने की अनुमति दी। अनुच्छेद 74(2) जोड़ता है कि कोई न्यायालय यह जांच नहीं कर सकता कि कोई सलाह दी गई या नहीं, और क्या दी गई।

बाकी विकल्प दूसरे अनुच्छेदों के तहत होने वाली नियुक्तियां बताते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 124 के तहत करते हैं। उपराष्ट्रपति नियुक्त होते ही नहीं; उन्हें अनुच्छेद 66 के तहत संसद के दोनों सदनों के सदस्य चुनते हैं। वित्त आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 280 के तहत करते हैं। अनुच्छेद 74 भारत में संसदीय शासन की नींव है: इसी कारण राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख के रूप में काम करते हैं, जबकि वास्तविक शक्ति मंत्रिपरिषद के पास है।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 12 Jan 2023, Shift 4कठिन

भारत के संविधान के किस भाग में संघ लोक सेवा आयोग की शक्तियाँ और कार्य दिए गए हैं?

  1. A.भाग XVII
  2. B.भाग XV
  3. C.भाग XVI
  4. D.भाग XIV
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. भाग XIV

व्याख्या

सही उत्तर है D, भाग XIV। संविधान का भाग XIV, जिसका शीर्षक संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ है, अनुच्छेद 308 से 323 तक फैला है और लोक सेवा आयोग इसी में आते हैं। अनुच्छेद 315 संघ के लिए संघ लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए राज्य लोक सेवा आयोग का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 316 सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल से, अनुच्छेद 317 उनके हटाए जाने से, अनुच्छेद 320 आयोगों के कार्यों से, मुख्य रूप से सेवाओं में नियुक्ति के लिए परीक्षा कराने से, और अनुच्छेद 323 उनकी वार्षिक रिपोर्ट से संबंधित है। संघ लोक सेवा आयोग एक संवैधानिक निकाय है और इसके अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि भाग XVII राजभाषा से संबंधित है। विकल्प B गलत है, क्योंकि भाग XV निर्वाचन और निर्वाचन आयोग से संबंधित है। विकल्प C गलत है, क्योंकि भाग XVI अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और आंग्ल-भारतीयों के विशेष उपबंधों से संबंधित है। परीक्षा टिप: भाग XIV सेवाएँ और यूपीएससी, भाग XV निर्वाचन, भाग XVI विशेष उपबंध, भाग XVII भाषा।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 20 April 2022, Shift 2मध्यम

वर्ष 1977 में निम्नलिखित में से किस पद के वेतन और भत्तों के लिए एक अधिनियम पारित किया गया था?

  1. A.राष्ट्रपति
  2. B.संसद में विपक्ष के नेता
  3. C.प्रधानमंत्री
  4. D.गवर्नर जनरल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. संसद में विपक्ष के नेता

व्याख्या

सही उत्तर है B, संसद में विपक्ष के नेता। संसद में विपक्ष के नेताओं का वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977 ने पहली बार इस पद को वैधानिक मान्यता दी और लोकसभा तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता के वेतन एवं सुविधाएँ तय कीं। इस अधिनियम के अनुसार विपक्ष का नेता वह होता है, जो सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता हो और जिसे अध्यक्ष या सभापति इस रूप में मान्यता दें; इस पद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। इस पद पर बैठा व्यक्ति सीबीआई निदेशक, केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, लोकपाल और मुख्य सूचना आयुक्त के चयन करने वाली समितियों का सदस्य होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि राष्ट्रपति के वेतन के लिए 1951 का अलग कानून है। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रधानमंत्री को मंत्रियों के वेतन संबंधी 1952 के कानून के तहत वेतन मिलता है। विकल्प D गलत है क्योंकि गवर्नर जनरल का पद 1950 में समाप्त हो गया था। परीक्षा टिप: विपक्ष का नेता 1977 से वैधानिक पद है और उसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलता है।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 08 May 2023, Shift 1आसान

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची के अनुसार भारत में कितनी राजभाषाएँ हैं?

  1. A.42
  2. B.12
  3. C.32
  4. D.22
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 22

व्याख्या

सही उत्तर है D, 22। संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ दर्ज हैं। 1950 में इसमें 14 भाषाएँ थीं। 1967 में 21वें संशोधन से सिंधी जोड़ी गई; 1992 में 71वें संशोधन से कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली; और 2003 में 92वें संशोधन से बोडो, डोगरी, मैथिली तथा संथाली जुड़ीं, जिससे संख्या 22 हो गई। हिंदी को समृद्ध करने के लिए संघ को इन्हीं भाषाओं से शब्द लेने हैं, और कई केंद्रीय परीक्षाएँ इन भाषाओं में दी जा सकती हैं। ध्यान रखें कि यह अनुसूची अपने आप इन 22 भाषाओं को संघ की राजभाषा नहीं बनाती। अनुच्छेद 343 देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा बताता है, जिसके साथ अंग्रेज़ी भी चलती रहती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 42 उस संशोधन की संख्या है जिसने प्रस्तावना बदली थी। विकल्प B गलत है, क्योंकि 12 तो शुरुआती 14 से भी कम है। विकल्प C गलत है, क्योंकि 32 भाषाएँ सूची में कभी नहीं रहीं। परीक्षा टिप: 1950 में 14 और 2003 में 22, अंतिम चार 92वें संशोधन से।

Q13.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 13 Dec 2022, Shift 4आसान

उच्चतम न्यायालय के निम्नलिखित में से किस क्षेत्राधिकार के तहत वह केंद्र और राज्य के बीच तथा राज्यों के आपसी विवाद सुलझाता है?

  1. A.अपीलीय
  2. B.परामर्शी
  3. C.रिट
  4. D.मूल
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. मूल

व्याख्या

सही उत्तर है D, मूल। संविधान का अनुच्छेद 131 उच्चतम न्यायालय को भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपसी विवादों में अनन्य मूल क्षेत्राधिकार देता है। अनन्य का अर्थ है कि ऐसे मामले कोई दूसरा न्यायालय नहीं सुन सकता, और मूल का अर्थ है कि मुकदमा सीधे उच्चतम न्यायालय में शुरू होता है, अपील के रूप में नहीं आता। यह अनुच्छेद उन विवादों पर लागू नहीं होता, जो संविधान लागू होने से पहले की किसी संधि या समझौते से उत्पन्न हुए हों। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 132 से 134 तक का अपीलीय क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालयों के संवैधानिक, दीवानी और फौजदारी निर्णयों की अपील से संबंधित है। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 143 के परामर्शी क्षेत्राधिकार में राष्ट्रपति किसी विधिक प्रश्न पर न्यायालय की राय ले सकते हैं, जो उन पर बाध्यकारी नहीं होती। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 32 का रिट क्षेत्राधिकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 131 मूल, 143 परामर्शी और 32 रिट।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · HSSC CET Group C, 5 Nov 2022, Shift 2मध्यम

भारत के संविधान का अनुच्छेद 395, जो संविधान का अंतिम अनुच्छेद भी है, निम्नलिखित में से किसके प्रावधान के बारे में बताता है?

  1. A.नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019
  2. B.नए राज्यों का गठन
  3. C.भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन
  4. D.आपात की उद्घोषणा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन

व्याख्या

सही उत्तर है C, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन। संविधान का अंतिम अनुच्छेद 395 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 और भारत शासन अधिनियम, 1935 को, 1935 के अधिनियम में संशोधन या जोड़ करने वाले कानूनों सहित, निरस्त करता है। इन ब्रिटिश कानूनों को हटाकर संविधान निर्माताओं ने संविधान को भारत में कानूनी सत्ता का एकमात्र स्रोत बना दिया और ब्रिटिश संसद से कानूनी संबंध समाप्त कर दिया। यह अनुच्छेद एक अपवाद भी रखता है: प्रिवी काउंसिल क्षेत्राधिकार उन्मूलन अधिनियम, 1949 को निरस्त नहीं किया गया। अनुच्छेद 395 भाग XXII में अनुच्छेद 393 (संक्षिप्त नाम) और अनुच्छेद 394 (प्रारंभ) के साथ है, और यह 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 संसद का बनाया साधारण कानून है, संविधान का अनुच्छेद नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि नए राज्यों का गठन अनुच्छेद 2 और 3 के तहत होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा अनुच्छेद 352 के तहत होती है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 395 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और भारत शासन अधिनियम 1935 को निरस्त करता है।

Q15.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 26 Jul 2023, Shift 4मध्यम

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का कर्तव्य क्या है?

  1. A.मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को देना।
  2. B.मंत्रिपरिषद के सदस्यों की नियुक्ति और उन्हें हटाना।
  3. C.विधान सभा के अध्यक्ष की नियुक्ति।
  4. D.महान्यायवादी के परामर्श से राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति।
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को देना।

व्याख्या

सही उत्तर है A, मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को देना। अनुच्छेद 167 में राज्यपाल के प्रति मुख्यमंत्री के कर्तव्य गिनाए गए हैं।

अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री को राज्य के प्रशासन तथा विधान संबंधी प्रस्तावों से जुड़े मंत्रिपरिषद के हर निर्णय की जानकारी राज्यपाल को देनी होती है, राज्यपाल जो सूचना मांगे वह देनी होती है, और यदि किसी विषय पर किसी एक मंत्री ने निर्णय ले लिया हो पर परिषद ने उस पर विचार न किया हो, तो उसे परिषद के सामने रखना होता है। यह अनुच्छेद 78 का राज्य स्तरीय रूप है, जिसमें राष्ट्रपति के प्रति प्रधानमंत्री के वही कर्तव्य दिए गए हैं।

B गलत है: मंत्रियों की नियुक्ति और उन्हें हटाने का काम अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर करते हैं। C गलत है: अध्यक्ष का चुनाव अनुच्छेद 178 के तहत विधान सभा के सदस्य करते हैं। D गलत है: महाधिवक्ता की नियुक्ति अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल करते हैं।

परीक्षा टिप: अनुच्छेद 78 - प्रधानमंत्री के कर्तव्य; अनुच्छेद 167 - मुख्यमंत्री के कर्तव्य।

Q16.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 09 March, 2023, Shift 3आसान

भारतीय संविधान की प्रस्तावना का विचार _______ के संविधान से लिया गया है।

  1. A.सोवियत संघ (वर्तमान रूस)
  2. B.कनाडा
  3. C.ब्रिटेन
  4. D.संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. संयुक्त राज्य अमेरिका

व्याख्या

सही उत्तर है D, संयुक्त राज्य अमेरिका। संविधान को प्रस्तावना से शुरू करने का विचार 1787 के अमेरिकी संविधान से आया, जो 'वी द पीपल ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स' से आरंभ होता है। भारत की प्रस्तावना भी 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है, जो दिखाता है कि संविधान अपनी शक्ति जनता से पाता है। इसी स्रोत से भारत ने मौलिक अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और न्यायिक पुनरावलोकन, राष्ट्रपति पर महाभियोग तथा सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया भी ली। 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा रखा गया उद्देश्य प्रस्ताव आगे चलकर हमारी प्रस्तावना बना, जो 26 नवंबर 1949 को अपनाई गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि सोवियत संघ से मौलिक कर्तव्य, न्याय का आदर्श और पंचवर्षीय योजनाएँ ली गईं। विकल्प B गलत है, क्योंकि कनाडा से मजबूत केंद्र वाला संघ, अवशिष्ट शक्तियाँ और राज्यपालों की नियुक्ति ली गई। विकल्प C गलत है, क्योंकि ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली, विधि का शासन, इकहरी नागरिकता और अध्यक्ष का पद लिया गया। परीक्षा टिप: प्रस्तावना और मौलिक अधिकार अमेरिका से, मौलिक कर्तव्य सोवियत संघ से।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 12 Nov, 2024, Shift 2मध्यम

भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद विधान परिषद की संरचना से संबंधित है?

  1. A.अनुच्छेद 168
  2. B.अनुच्छेद 171
  3. C.अनुच्छेद 181
  4. D.अनुच्छेद 169
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 171

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 171। यही अनुच्छेद राज्य की विधान परिषद की संरचना तय करता है।

अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों की संख्या विधानसभा की कुल संख्या के एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती और चालीस से कम नहीं हो सकती। इसकी सीटें एक निश्चित ढंग से भरी जाती हैं - एक तिहाई स्थानीय निकायों से, एक बटा बारह स्नातकों से, एक बटा बारह शिक्षकों से, एक तिहाई विधानसभा सदस्यों द्वारा और शेष सदस्य राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता या समाज सेवा के क्षेत्र से नामित किए जाते हैं। यह स्थायी सदन है, सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो वर्ष में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।

विकल्प A अनुच्छेद 168 राज्य विधानमंडल के गठन की बात करता है। विकल्प D अनुच्छेद 169 परिषद के सृजन और उत्सादन से जुड़ा है। विकल्प C अनुच्छेद 181 पदच्युति प्रस्ताव के समय अध्यक्ष के पीठासीन न होने से संबंधित है।

परीक्षा टिप: 168 गठन, 169 सृजन और समाप्ति, 171 संरचना।

Q18.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 09 March, 2023, Shift 4आसान

निम्नलिखित में से कौन भारतीय संविधान के भाग IX के अंतर्गत आता है?

  1. A.संघ और राज्यों के बीच संबंध
  2. B.अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र
  3. C.पंचायतें
  4. D.वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. पंचायतें

व्याख्या

सही उत्तर है C, पंचायतें। भारत के संविधान के भाग IX का शीर्षक ‘पंचायतें’ है। इसे 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया, जो 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ और अब इसी दिन राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है; यह भाग अनुच्छेद 243 से अनुच्छेद 243-O तक फैला है। भाग IX पंचायतों को गाँव, मध्यवर्ती और जिला स्तर का तीन-स्तरीय ढाँचा, पाँच वर्ष का निश्चित कार्यकाल, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के लिए स्थानों का आरक्षण, चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग और उनके वित्त की समीक्षा के लिए राज्य वित्त आयोग देता है; ग्यारहवीं अनुसूची में उन्हें सौंपे विषय गिनाए गए हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि संघ और राज्यों के संबंध भाग XI में हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र भाग X में, पाँचवीं और छठी अनुसूची के साथ आते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद भाग XII बनाते हैं। परीक्षा टिप: भाग IX पंचायतें और ग्यारहवीं अनुसूची, भाग IX-A नगरपालिकाएँ और बारहवीं अनुसूची।

Q19.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 7 March 2020, Shift 1आसान

भारत के संविधान में पहला संशोधन किस वर्ष किया गया था?

  1. A.1951
  2. B.1952
  3. C.1950
  4. D.1953
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 1951

व्याख्या

सही उत्तर है A, 1951। संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम 1951 में पारित हुआ, यानी संविधान लागू होने के लगभग सवा वर्ष बाद।

यह संशोधन पहले आम चुनाव से पहले अस्थायी संसद ने पारित किया था, जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। इसके द्वारा भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए नौवीं अनुसूची जोड़ी गई, अनुच्छेद 31A और 31B डाले गए, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति दी गई, तथा अनुच्छेद 19 के तहत वाक् स्वतंत्रता पर प्रतिबंध के आधार में लोक व्यवस्था, विदेशी राज्यों से मैत्री संबंध और अपराध के लिए उद्दीपन जोड़े गए।

B गलत है: 1952 पहले आम चुनाव का वर्ष है, पहले संशोधन का नहीं। C गलत है: 1950 में 26 जनवरी को संविधान लागू हुआ था। D गलत है: दूसरा और तीसरा संशोधन 1952 और 1954 के हैं।

परीक्षा टिप: पहला संशोधन, 1951 - नौवीं अनुसूची, अनुच्छेद 31A और 31B, वाक् स्वतंत्रता पर नए प्रतिबंध।

Q20.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 17 March 2020, Shift 3मध्यम

भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल क्या होता है?

  1. A.4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
  2. B.3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
  3. C.5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
  4. D.6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।

व्याख्या

सही उत्तर है D, 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो। मुख्य निर्वाचन आयुक्त पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष तक या पैंसठ वर्ष की आयु होने तक, जो भी पहले आए, पद पर रहते हैं; अन्य निर्वाचन आयुक्तों की भी यही शर्तें हैं। संविधान स्वयं कार्यकाल तय नहीं करता — अनुच्छेद 324 सेवा-शर्तें संसद के कानून पर छोड़ता है और वही कानून ये सीमाएँ तय करता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर वेतन मिलता है और उन्हें उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जिससे उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को केवल उनकी सिफारिश पर हटाया जा सकता है; यही आयोग की स्वतंत्रता की रक्षा करता है। विकल्प A, B और C गलत हैं, क्योंकि चार, तीन या पाँच वर्ष इस पद का निर्धारित कार्यकाल नहीं है। परीक्षा टिप: छह वर्ष या पैंसठ वर्ष की सीमा नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक तथा संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पर भी लागू होती है।

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