भारत के संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.मौलिक कर्तव्य मूल रूप से संविधान का हिस्सा नहीं थे
- B.सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना मौलिक कर्तव्य हैं
- C.इन्हें रिट के ज़रिए लागू नहीं कराया जा सकता
- D.इनका उपयोग कानूनों की संवैधानिकता तय करने में नहीं किया जा सकता
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. इनका उपयोग कानूनों की संवैधानिकता तय करने में नहीं किया जा सकता
व्याख्या
सही उत्तर इनका उपयोग कानूनों की संवैधानिकता तय करने में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह कथन गलत है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि जब कोई न्यायालय किसी कानून की संवैधानिकता जांचता है और पाता है कि वह कानून किसी मौलिक कर्तव्य को लागू करता है, तो वह उसे अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के तहत "युक्तियुक्त" मानकर सही ठहरा सकता है। इसलिए कर्तव्य खुद लागू न कराए जा सकें, फिर भी कानूनों की संवैधानिकता तय करने में मदद कर सकते हैं।
बाकी तीनों कथन सही हैं, और यही प्रश्न को कठिन बनाता है। मौलिक कर्तव्य 1950 के मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे; इन्हें 1976 में 42वें संशोधन ने जोड़ा। सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना एक मौलिक कर्तव्य, अनुच्छेद 51A का खंड (झ), है। और कर्तव्य रिट के ज़रिए लागू नहीं कराए जा सकते, क्योंकि ये न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं: कोई न्यायालय किसी नागरिक को इनका पालन करने का आदेश नहीं दे सकता, हालांकि संसद सामान्य कानूनों से इन्हें लागू कर सकती है। "सही नहीं है" वाले प्रश्न में उत्तर चुनने से पहले हर कथन को अलग-अलग जांचें।