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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 16

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 16) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 10 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: मौलिक कर्तव्य, अधीनस्थ न्यायालय, न्यायाधिकरण और लोक अदालत, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · 20 दिसंबर 2020कठिन

भारत के संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.मौलिक कर्तव्य मूल रूप से संविधान का हिस्सा नहीं थे
  2. B.सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना मौलिक कर्तव्य हैं
  3. C.इन्हें रिट के ज़रिए लागू नहीं कराया जा सकता
  4. D.इनका उपयोग कानूनों की संवैधानिकता तय करने में नहीं किया जा सकता
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. इनका उपयोग कानूनों की संवैधानिकता तय करने में नहीं किया जा सकता

व्याख्या

सही उत्तर इनका उपयोग कानूनों की संवैधानिकता तय करने में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह कथन गलत है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि जब कोई न्यायालय किसी कानून की संवैधानिकता जांचता है और पाता है कि वह कानून किसी मौलिक कर्तव्य को लागू करता है, तो वह उसे अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के तहत "युक्तियुक्त" मानकर सही ठहरा सकता है। इसलिए कर्तव्य खुद लागू न कराए जा सकें, फिर भी कानूनों की संवैधानिकता तय करने में मदद कर सकते हैं।

बाकी तीनों कथन सही हैं, और यही प्रश्न को कठिन बनाता है। मौलिक कर्तव्य 1950 के मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे; इन्हें 1976 में 42वें संशोधन ने जोड़ा। सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना एक मौलिक कर्तव्य, अनुच्छेद 51A का खंड (झ), है। और कर्तव्य रिट के ज़रिए लागू नहीं कराए जा सकते, क्योंकि ये न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं हैं: कोई न्यायालय किसी नागरिक को इनका पालन करने का आदेश नहीं दे सकता, हालांकि संसद सामान्य कानूनों से इन्हें लागू कर सकती है। "सही नहीं है" वाले प्रश्न में उत्तर चुनने से पहले हर कथन को अलग-अलग जांचें।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 6 Sept 2022, Shift 2आसान

अधीनस्थ न्यायालय की भूमिका क्या है?

  1. A.दीवानी और फौजदारी प्रकृति के मामलों पर विचार करना
  2. B.मूल अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए रिट जारी करना
  3. C.निचले न्यायालयों के निर्णयों पर अपील सुनना
  4. D.किसी भी न्यायालय से मामले अपने पास मँगाना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दीवानी और फौजदारी प्रकृति के मामलों पर विचार करना

व्याख्या

सही उत्तर है A, दीवानी और फौजदारी प्रकृति के मामलों पर विचार करना। अधीनस्थ न्यायालय जिला स्तर और उससे नीचे के न्यायालय हैं, जो दीवानी तथा फौजदारी मामलों की प्रारंभिक सुनवाई करते हैं।

भारतीय न्यायपालिका एकल पिरामिड के रूप में गठित है। शीर्ष पर उच्चतम न्यायालय, उसके बाद प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय और उसके नीचे अधीनस्थ न्यायालय होते हैं, जो उसी उच्च न्यायालय के नियंत्रण में कार्य करते हैं। दीवानी पक्ष में जिला न्यायाधीश सर्वोच्च होता है और उसके नीचे सिविल जज के न्यायालय आते हैं; फौजदारी पक्ष में सत्र न्यायाधीश सर्वोच्च होता है और नीचे न्यायिक मजिस्ट्रेट होते हैं। अनुच्छेद 233 से 237 इन्हीं न्यायालयों से संबंधित हैं, तथा जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है।

विकल्प B गलत है क्योंकि रिट उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 32 और उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के अंतर्गत जारी करते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि अपील सुनना मुख्यतः उच्च न्यायालय का कार्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि मामलों का स्थानांतरण उच्च न्यायालयों की शक्ति है।

परीक्षा टिप: जिला और सत्र न्यायालय अधीनस्थ न्यायालय हैं; रिट केवल उच्चतम और उच्च न्यायालय जारी करते हैं।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 23 मार्च 2018, शिफ्ट 2आसान

भारत के राष्ट्रपति को पद की शपथ कौन दिलाता है?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.मुख्य न्यायाधीश
  3. C.लोकसभा अध्यक्ष
  4. D.राज्यसभा सभापति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मुख्य न्यायाधीश

व्याख्या

सही उत्तर भारत के मुख्य न्यायाधीश है। अनुच्छेद 60 के तहत राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश, और उनकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश, के सामने शपथ या प्रतिज्ञान लेते हैं। शपथ में राष्ट्रपति संविधान और कानून का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करने, और भारत की जनता की सेवा और कल्याण में लगे रहने का वचन देते हैं। मंत्रियों और न्यायाधीशों की शपथ तीसरी अनुसूची में है, लेकिन राष्ट्रपति की शपथ का प्रारूप खुद अनुच्छेद 60 में लिखा है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को शपथ नहीं दिलाते; उल्टा राष्ट्रपति ही प्रधानमंत्री और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों को शपथ दिलाते हैं। लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति की भी इसमें कोई भूमिका नहीं है। एक छोटी श्रृंखला याद रखें: मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति को शपथ दिलाते हैं; राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को; और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश राज्य के राज्यपाल को शपथ दिलाते हैं।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 15 Oct 2020, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने उस नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता की थी, जिसने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया?

  1. A.जे.एस. खेहर
  2. B.दीपक मिश्रा
  3. C.एच.जे. कनिया
  4. D.टी.एस. ठाकुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जे.एस. खेहर

व्याख्या

सही उत्तर है A, जे.एस. खेहर। न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश थे, जब 24 अगस्त 2017 को नौ न्यायाधीशों की पीठ ने न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में फैसला सुनाया, और उन्होंने ही पीठ की अध्यक्षता की। पीठ ने एकमत से माना कि निजता मौलिक अधिकार है, जो मुख्यतः अनुच्छेद 21 के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार तथा भाग III की स्वतंत्रताओं से सुरक्षित है। इसने एम.पी. शर्मा (1954) और खड़क सिंह (1962) के पुराने फैसले पलट दिए, जिनमें कहा गया था कि संविधान ऐसा कोई अधिकार नहीं देता। यह मामला आधार योजना की चुनौती से निकला था। खेहर भारत के पहले सिख मुख्य न्यायाधीश भी थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि दीपक मिश्रा एक सप्ताह बाद मुख्य न्यायाधीश बने और धारा 377 तथा व्यभिचार के फैसलों की पीठों में थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि एच.जे. कनिया 1950 में भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि टी.एस. ठाकुर जनवरी 2017 में सेवानिवृत्त हो गए थे। परीक्षा टिप: पुट्टस्वामी 2017, नौ न्यायाधीश, अनुच्छेद 21, सीजेआई खेहर।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CTET · 31st Dec 2021मध्यम

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही विकल्प चुनिए। कथन A: राज्य का प्रमुख राज्यपाल होता है। कथन B: राज्यपाल की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो कि वह राज्य संविधान के अनुसार चले।

  1. A.A सही है और B गलत है
  2. B.A गलत है और B सही है
  3. C.A और B, दोनों सही हैं
  4. D.A और B, दोनों गलत हैं
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. A सही है और B गलत है

व्याख्या

सही उत्तर है A, A सही है और B गलत है। कथन A सही है क्योंकि अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है और राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जिसके नाम पर राज्य की सारी कार्यपालिका कार्रवाई की जाती है। कथन B एक ही बात में गलत है: राज्यपाल की नियुक्ति अनुच्छेद 155 के अंतर्गत राष्ट्रपति करते हैं, राज्य सरकार नहीं, और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पाँच वर्ष के कार्यकाल के लिए पद पर रहता है। इसी कारण राज्यपाल राज्य की स्थिति पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकता है; राज्य के मंत्रिमंडल द्वारा नियुक्त व्यक्ति उस पर निगरानी कैसे रख पाता। शासन का वास्तविक कार्य मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद करते हैं, जो राज्यपाल को सलाह देते हैं। B गलत है क्योंकि कथन A सही है। C गलत है क्योंकि कथन B में नियुक्ति करने वाला पद ही गलत बताया गया है। D गलत है क्योंकि कथन A सही है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 153 – हर राज्य में राज्यपाल; अनुच्छेद 155 – राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 12 Feb 2025, Shift 1मध्यम

देश के किसी भी उच्च न्यायालय को रिट जारी करने का अधिकार संविधान का कौन-सा अनुच्छेद देता है?

  1. A.अनुच्छेद 226
  2. B.अनुच्छेद 246
  3. C.अनुच्छेद 254
  4. D.अनुच्छेद 233
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अनुच्छेद 226

व्याख्या

सही उत्तर है A, अनुच्छेद 226। यह अनुच्छेद हर उच्च न्यायालय को अपने क्षेत्र में रिट जारी करने की शक्ति देता है। उच्च न्यायालय पांचों रिट, यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा, केवल मौलिक अधिकारों के लिए ही नहीं बल्कि 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए, यानी सामान्य कानूनी अधिकारों के लिए भी जारी कर सकता है। इसलिए उच्च न्यायालय की रिट शक्ति सर्वोच्च न्यायालय से ज्यादा व्यापक है, क्योंकि अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के लिए रिट जारी करता है। अनुच्छेद 32 खुद एक मौलिक अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 226 नहीं। B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 246 सातवीं अनुसूची के जरिए संघ और राज्यों के बीच कानून बनाने के विषय बांटता है। C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 254 समवर्ती सूची के विषय पर केंद्र और राज्य के कानूनों का टकराव सुलझाता है। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 233 जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ा है। परीक्षा टिप: सर्वोच्च न्यायालय की रिट अनुच्छेद 32 में, उच्च न्यायालय की रिट अनुच्छेद 226 में, और उच्च न्यायालय की शक्ति ज्यादा व्यापक है।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 02 May 2023, Shift 1मध्यम

किस अपराध में पुलिस किसी व्यक्ति को न्यायालय के आदेश के बिना गिरफ़्तार कर सकती है?

  1. A.संज्ञेय अपराध
  2. B.निरोध अपराध
  3. C.असंज्ञेय अपराध
  4. D.क्रॉस अपराध
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संज्ञेय अपराध

व्याख्या

सही उत्तर है A, संज्ञेय अपराध। संज्ञेय अपराध में पुलिस मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना मामला दर्ज कर सकती है, जाँच शुरू कर सकती है और गिरफ़्तारी कर सकती है। ये अधिक गंभीर अपराध होते हैं, जैसे हत्या, बलात्कार, डकैती, अपहरण और चोरी, और इनमें प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करना अनिवार्य है। असंज्ञेय अपराध में, जैसे साधारण चोट, मानहानि या लोक बाधा, पुलिस को जाँच या गिरफ़्तारी से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी पड़ती है। कोई अपराध संज्ञेय है या नहीं, और ज़मानती है या नहीं, यह दंड प्रक्रिया कानून में अपराध दर अपराध दर्ज है, जो 2024 से पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि निरोध अपराध नाम की कोई श्रेणी नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि असंज्ञेय अपराध में तो मजिस्ट्रेट का आदेश चाहिए ही होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि क्रॉस अपराध इस तरह की कोई श्रेणी नहीं है। परीक्षा टिप: संज्ञेय यानी FIR और बिना वारंट गिरफ़्तारी, असंज्ञेय यानी पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS (I) 2023, 16 Apr 2023मध्यम

भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.SGI सरकार का मुख्य विधि सलाहकार नहीं है।
  2. B.SGI देश का द्वितीय विधि अधिकारी है।
  3. C.SGI का पद एक संवैधानिक पद है।
  4. D.SGI की नियुक्ति मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति करती है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. SGI का पद एक संवैधानिक पद है।

व्याख्या

सही उत्तर है C, SGI का पद एक संवैधानिक पद है। यही कथन गलत है, क्योंकि संविधान केवल महान्यायवादी (Attorney General) का पद बनाता है, सॉलिसिटर जनरल का नहीं। अनुच्छेद 76 में भारत के महान्यायवादी का प्रावधान है, जो सरकार का मुख्य विधि सलाहकार और देश का सबसे बड़ा विधि अधिकारी है। सॉलिसिटर जनरल दूसरे नंबर का विधि अधिकारी है, जो महान्यायवादी की सहायता करता है; यह पद विधि अधिकारी (सेवा शर्तें) नियम, 1987 पर टिका है, इसलिए गैर-संवैधानिक है। याद रखने लायक बात: अनुच्छेद 88 के तहत संसद के दोनों सदनों में बोलने का अधिकार केवल महान्यायवादी को है। A सही कथन है, क्योंकि मुख्य विधि सलाहकार महान्यायवादी है, SGI नहीं। B भी सही है, SGI महान्यायवादी के ठीक नीचे दूसरा विधि अधिकारी है। D भी सही है, SGI और अपर सॉलिसिटर जनरल की नियुक्ति मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति करती है। परीक्षा टिप: महान्यायवादी, अनुच्छेद 76, संवैधानिक पद; सॉलिसिटर जनरल, कोई अनुच्छेद नहीं, गैर-संवैधानिक पद।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 5 जुलाई 2024, शिफ्ट 4मध्यम

कौन-सी समिति मौलिक कर्तव्यों से संबंधित है?

  1. A.एल.एम. सिंघवी समिति
  2. B.वर्मा समिति
  3. C.वसंतराव नाइक समिति
  4. D.राजमन्नार समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वर्मा समिति

व्याख्या

सही उत्तर वर्मा समिति है। 1999 में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा की अध्यक्षता में बनी नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों पर समिति ने देखा कि इन कर्तव्यों को व्यवहार में कैसे लाया जाए। उसने उन मौजूदा कानूनों की पहचान की जो इनमें से कुछ को लागू करते हैं, जैसे राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और वन्यजीव तथा वनों से जुड़े कानून, और कर्तव्यों को सिखाने के तरीके सुझाए।

बाकी समितियां दूसरे विषयों से जुड़ी थीं। एल.एम. सिंघवी समिति (1986) ने स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की, जिससे 73वें और 74वें संशोधन का रास्ता बना। वसंतराव नाइक समिति महाराष्ट्र ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और पंचायती राज पर बनाई थी। राजमन्नार समिति (1969) तमिलनाडु सरकार ने केंद्र-राज्य संबंधों के अध्ययन के लिए बनाई थी। मौलिक कर्तव्यों के लिए दो समितियां याद रखें: स्वर्ण सिंह (1976) ने इनकी सिफारिश की, और वर्मा (1999) ने इन्हें लागू करने के तरीके देखे।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · DSSSB PRT, 7 Mar 2022, Shift 1मध्यम

भारतीय संविधान का ______ केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन से संबंधित है।

  1. A.अनुच्छेद 235
  2. B.अनुच्छेद 239
  3. C.अनुच्छेद 233
  4. D.अनुच्छेद 234
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 239

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 239। अनुच्छेद 239 कहता है कि हर केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति करेंगे, जो इसके लिए अपनी इच्छा से तय पदनाम वाला एक प्रशासक नियुक्त करते हैं। इसी कारण कुछ केंद्रशासित प्रदेशों, जैसे दिल्ली, लद्दाख और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, में उपराज्यपाल हैं, जबकि कुछ में प्रशासक। अनुच्छेद 239 संविधान के भाग VIII की शुरुआत करता है, जो केंद्रशासित प्रदेशों से जुड़ा है। बाद में जोड़े गए अनुच्छेद 239A और 239AA पुडुचेरी और दिल्ली को विधानमंडल देते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 235 अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय के नियंत्रण से जुड़ा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 233 उच्च न्यायालय से परामर्श करके राज्यपाल द्वारा ज़िला न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 234 ज़िला न्यायाधीशों के अलावा अन्य लोगों की राज्य न्यायिक सेवा में भर्ती से जुड़ा है। परीक्षा टिप: भाग VIII में अनुच्छेद 239 से 241 केंद्रशासित प्रदेशों के लिए हैं, और अनुच्छेद 239AA दिल्ली के लिए खास है।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 9 दिसंबर 2019, शिफ्ट 2आसान

राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा किसे संबोधित करके पद से त्यागपत्र दे सकते हैं?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.उपराष्ट्रपति
  3. C.मुख्य चुनाव आयुक्त
  4. D.लोकसभा अध्यक्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उपराष्ट्रपति

व्याख्या

सही उत्तर उपराष्ट्रपति है। अनुच्छेद 56(1)(क) कहता है कि राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा पद त्याग सकते हैं। इसके बाद उपराष्ट्रपति को यह त्यागपत्र बिना देर किए लोकसभा अध्यक्ष को सूचित करना होता है। इसी तरह उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को लिखकर त्यागपत्र देते हैं। अनुच्छेद 56 यह भी कहता है कि पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी राष्ट्रपति उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक पद पर बने रहते हैं, इसलिए केवल कार्यकाल खत्म होने से पद कभी खाली नहीं होता।

सरकार के प्रमुख प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति ही नियुक्त करते हैं, इसलिए वे राष्ट्रपति का त्यागपत्र नहीं ले सकते। मुख्य चुनाव आयुक्त राष्ट्रपति का चुनाव कराते हैं, पर त्यागपत्र में उनकी कोई भूमिका नहीं, और लोकसभा अध्यक्ष को केवल उपराष्ट्रपति से इसकी सूचना मिलती है। त्यागपत्र के प्रश्न जोड़ियों में आते हैं, इसलिए इन्हें साथ याद करें: राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति को, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को, प्रधानमंत्री और राज्यपाल राष्ट्रपति को, और लोकसभा अध्यक्ष उपाध्यक्ष को त्यागपत्र देते हैं।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 10 March, 2023, Shift 2मध्यम

भारत में दहेज प्रतिषेध अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ था?

  1. A.1973
  2. B.1982
  3. C.1961
  4. D.1954
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1961

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1961। दहेज प्रतिषेध अधिनियम संसद ने 1961 में पारित किया और यह 1 जुलाई 1961 से लागू हुआ। यह कानून दहेज देना और लेना, दोनों को अपराध बनाता है। दहेज माँगना तथा विवाह के बदले धन या संपत्ति देने का विज्ञापन छपवाना भी इसके अंतर्गत दंडनीय है। अधिनियम में दहेज की परिभाषा है - विवाह के संबंध में दी गई संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति; वधू को स्वेच्छा से दिए गए उपहार इस परिभाषा से बाहर रखे गए हैं। 1984 और 1986 के संशोधनों ने इसे और कड़ा किया, जिनके साथ भारतीय दंड संहिता में दहेज मृत्यु की धारा 304B और पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता की धारा 498A जोड़ी गईं। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1973 में दंड प्रक्रिया संहिता आई थी। विकल्प B गलत है, क्योंकि 1982 में दहेज से जुड़ा कोई कानून नहीं बना। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1954 विशेष विवाह अधिनियम का वर्ष है। परीक्षा टिप: दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, हिंदू विवाह अधिनियम 1955, विशेष विवाह अधिनियम 1954।

Q13.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 27 जून 2024, शिफ्ट 1आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय नागरिक का मौलिक कर्तव्य नहीं है?

  1. A.हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझना और उसका परिरक्षण करना
  2. B.सार्वजनिक चुनावों में मतदान करना
  3. C.सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना
  4. D.भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सार्वजनिक चुनावों में मतदान करना

व्याख्या

सही उत्तर सार्वजनिक चुनावों में मतदान करना है। मतदान अनुच्छेद 51A के ग्यारह मौलिक कर्तव्यों में शामिल नहीं है। मतदान का अधिकार अनुच्छेद 326 से आता है, जो वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव का प्रावधान करता है, और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 से। यह मौलिक अधिकार नहीं है, और मतदान करना मौलिक कर्तव्य भी नहीं है। आलोचक अक्सर कर चुकाने के साथ इसकी अनुपस्थिति को सूची की कमी बताते हैं।

बाकी तीनों विकल्प असली मौलिक कर्तव्य हैं: सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझना और उसका परिरक्षण करना खंड (च) है; सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना और हिंसा से दूर रहना खंड (झ) है; और भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना खंड (ग) है। जब भी "मौलिक कर्तव्य नहीं है" वाला प्रश्न आए, पहले मतदान, कर चुकाना, परिवार नियोजन या राष्ट्रगीत का आदर खोजें: इनमें से कोई सूची में नहीं है।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 12 April 2022, Shift 3आसान

अप्रैल 2021 तक निम्नलिखित में से कौन भारत के सबसे लंबे समय तक रहे प्रधानमंत्री थे?

  1. A.जवाहरलाल नेहरू
  2. B.इंदिरा गांधी
  3. C.आई.के. गुजराल
  4. D.नरेंद्र मोदी
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जवाहरलाल नेहरू

व्याख्या

सही उत्तर है A, जवाहरलाल नेहरू। जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 को अपने निधन तक प्रधानमंत्री रहे, यानी लगभग सोलह वर्ष नौ महीने, और भारत में किसी प्रधानमंत्री का कार्यकाल इससे लंबा नहीं रहा। वे एकमात्र प्रधानमंत्री हैं जो 1952, 1957 और 1962 के तीन आम चुनावों के आर-पार बिना विराम पद पर रहे। विकल्प B गलत है, क्योंकि इंदिरा गांधी दो चरणों में — 1966 से 1977 और 1980 से 1984 तक — कुल लगभग पंद्रह वर्ष ग्यारह महीने प्रधानमंत्री रहीं, जो नेहरू के करीब है पर उससे कम। विकल्प C गलत है, क्योंकि आई.के. गुजराल अप्रैल 1997 से मार्च 1998 तक, एक वर्ष से भी कम समय के लिए प्रधानमंत्री रहे। विकल्प D गलत है, क्योंकि नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में पद संभाला, इसलिए इस प्रश्नपत्र के समय उनका कार्यकाल नेहरू से बहुत कम था। परीक्षा टिप: सबसे लंबा कार्यकाल नेहरू का लगभग सोलह वर्ष नौ महीने है और उसके बाद इंदिरा गांधी का लगभग पंद्रह वर्ष ग्यारह महीने।

Q15.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 13 अक्टूबर 2021, शिफ्ट 3आसान

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 61 किससे संबंधित है?

  1. A.मौलिक कर्तव्य
  2. B.राष्ट्रपति पर महाभियोग
  3. C.वित्तीय आपातकाल
  4. D.राष्ट्रीय आपातकाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. राष्ट्रपति पर महाभियोग

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रपति पर महाभियोग है। अनुच्छेद 61 कार्यकाल पूरा होने से पहले राष्ट्रपति को हटाने का एकमात्र तरीका बताता है: "संविधान के अतिक्रमण" के लिए महाभियोग। आरोप किसी भी सदन में, उसके कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर वाले प्रस्ताव से, 14 दिन की सूचना के बाद लाया जा सकता है, और उस सदन को इसे अपनी कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई से पारित करना होता है। फिर दूसरा सदन जांच करता है, और अगर वह भी कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई से प्रस्ताव पारित कर दे, तो राष्ट्रपति पद से हट जाते हैं। किसी राष्ट्रपति पर आज तक महाभियोग नहीं चला।

बाकी विकल्प संविधान में दूसरी जगहों के हैं। मौलिक कर्तव्य भाग IVA के अनुच्छेद 51A में हैं। वित्तीय आपातकाल अनुच्छेद 360 और राष्ट्रीय आपातकाल अनुच्छेद 352 के तहत घोषित होते हैं, दोनों भाग XVIII में। ध्यान दें कि महाभियोग का विचार अमेरिका से लिया गया, लेकिन भारत में इसका एकमात्र आधार संविधान का अतिक्रमण है।

Q16.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · HSSC CET Group C, 6 Nov 2022, Shift 2मध्यम

आपातकाल की उद्घोषणा (अनुच्छेद 352) के प्रवर्तन में होने पर निम्नलिखित में से किस मूल अधिकार को निलंबित नहीं किया जा सकता है?

  1. A.दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार
  2. B.वाक्-स्वातंत्र्य का अधिकार
  3. C.समता का अधिकार
  4. D.धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार

व्याख्या

सही उत्तर है A, दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार। राष्ट्रीय आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन को निलंबित नहीं किया जा सकता। अनुच्छेद 21 प्राण और दैहिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है, जबकि अनुच्छेद 20 व्यक्ति को पिछली तारीख से लागू आपराधिक कानून, एक ही अपराध के लिए दो बार सज़ा और खुद के विरुद्ध गवाही देने की मजबूरी से बचाता है। यह सुरक्षा 44वें संशोधन, 1978 द्वारा जोड़ी गई, क्योंकि 1975-77 के आपातकाल में बंदी अपनी हिरासत को अदालत में चुनौती नहीं दे पाए थे। अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आपातकाल के दौरान अन्य मूल अधिकारों का प्रवर्तन निलंबित कर सकते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर आपातकाल घोषित होते ही अनुच्छेद 358 के तहत अनुच्छेद 19 की वाक्-स्वतंत्रता अपने आप निलंबित हो जाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 14 से 18 का समता का अधिकार अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति के आदेश से निलंबित हो सकता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 25 से 28 की धार्मिक स्वतंत्रता भी अनुच्छेद 359 के तहत निलंबित हो सकती है। परीक्षा टिप: आपातकाल में भी अनुच्छेद 20 और 21 हमेशा लागू रहते हैं।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · 10 अप्रैल 2022कठिन

भारत के संविधान के भाग IVA में निम्नलिखित में से किसका उल्लेख भारत के प्रत्येक नागरिक के कर्तव्य के रूप में नहीं है?

  1. A.आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करना
  2. B.स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करना
  3. C.एकात्मक राष्ट्रीय संस्कृति का महत्व समझना और उसका परिरक्षण करना
  4. D.ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करना
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एकात्मक राष्ट्रीय संस्कृति का महत्व समझना और उसका परिरक्षण करना

व्याख्या

सही उत्तर एकात्मक राष्ट्रीय संस्कृति का महत्व समझना और उसका परिरक्षण करना है। अनुच्छेद 51A(च) असल में नागरिकों से "हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझने और उसका परिरक्षण करने" को कहता है। शब्द मायने रखता है: भारत की संस्कृति को सामासिक, यानी अनेक परंपराओं, भाषाओं और आस्थाओं का मेल, बताया गया है, कोई एक एकात्मक संस्कृति नहीं। एक शब्द बदलकर परीक्षक असली कर्तव्य को झूठा बना देता है।

बाकी तीनों विकल्प असली कर्तव्य हैं। आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करना खंड (घ) का हिस्सा है। स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग करना खंड (ङ) का हिस्सा है, जो धर्म, भाषा और क्षेत्र की विविधताओं से परे समरसता बढ़ाने को भी कहता है। ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानववाद के साथ, खंड (ज) का हिस्सा है। यह प्रश्न याद दिलाता है कि कर्तव्यों के सटीक शब्द याद करें, क्योंकि सीडीएस और यूपीएससी की परीक्षाएं अक्सर पूरे विचार की जगह एक बदले हुए शब्द को परखती हैं।

Q18.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 27 जुलाई 2023, शिफ्ट 3आसान

भारत में निम्नलिखित में से किसके पास किसी अपराधी के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन करने या उसे लघुकृत करने की शक्ति है?

  1. A.प्रधानमंत्री
  2. B.भारत के महान्यायवादी
  3. C.राष्ट्रपति
  4. D.उपराष्ट्रपति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. राष्ट्रपति

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रपति है। अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को क्षमा, प्रविलंबन, विराम या परिहार देने, और दंड को निलंबित करने, कम करने या लघुकृत करने की शक्ति देता है। यह उन सभी मामलों पर लागू होती है जिनमें दंड सेना न्यायालय ने दिया हो, संघ की कार्यपालिका शक्ति वाले विषय से जुड़े कानून के विरुद्ध हर अपराध पर, और हर मृत्युदंड पर। राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं।

प्रधानमंत्री उस परिषद के प्रमुख हैं, लेकिन उनके पास अपनी कोई क्षमादान शक्ति नहीं है। अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त महान्यायवादी सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार हैं और न्यायालय में उसकी ओर से पेश होते हैं, पर किसी को क्षमा नहीं कर सकते। उपराष्ट्रपति के पास भी यह शक्ति नहीं है, सिवाय तब जब वे राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर रहे हों। राज्य स्तर पर राज्यपाल के पास अनुच्छेद 161 के तहत ऐसी ही शक्ति है, लेकिन वह सेना न्यायालय के दंड पर लागू नहीं होती, जिसे केवल राष्ट्रपति क्षमा कर सकते हैं।

Q19.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 10 May 2022, Shift 1आसान

नागरिकों के मूल कर्तव्य भारत के संविधान में ________________ द्वारा जोड़े गए थे।

  1. A.51वाँ संशोधन अधिनियम
  2. B.23वाँ संशोधन अधिनियम
  3. C.42वाँ संशोधन अधिनियम
  4. D.पहला संशोधन अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 42वाँ संशोधन अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है C, 42वाँ संशोधन अधिनियम। मूल कर्तव्य संविधान में 1976 में 42वें संशोधन के द्वारा जोड़े गए थे, और इसकी संस्तुति सरदार स्वर्ण सिंह समिति ने की थी; यह विचार तत्कालीन सोवियत संघ के संविधान से लिया गया। इन्हें एक नए भाग IVA में रखा गया, जिसमें केवल एक अनुच्छेद 51A है। आरंभ में इसमें दस कर्तव्य गिनाए गए थे, जैसे संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, पर्यावरण की रक्षा करना और सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना। ग्यारहवाँ कर्तव्य, जिसमें माता-पिता या अभिभावक को छह से चौदह वर्ष के बच्चे को शिक्षा के अवसर देने को कहा गया है, 2002 के 86वें संशोधन से जोड़ा गया। ये कर्तव्य न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते। A गलत है क्योंकि 51वें संशोधन ने कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटें आरक्षित कीं। B गलत है क्योंकि 23वें संशोधन ने अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण की अवधि बढ़ाई थी। D गलत है क्योंकि 1951 के पहले संशोधन ने नौवीं अनुसूची जोड़ी थी। परीक्षा टिप: 42वें संशोधन को लघु संविधान कहा जाता है।

Q20.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 19 सितंबर 2022, शिफ्ट 3आसान

भारत के संविधान का अनुच्छेद 123 निम्नलिखित में से किसे अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है?

  1. A.उपराष्ट्रपति
  2. B.प्रधानमंत्री
  3. C.राष्ट्रपति
  4. D.लोकसभा अध्यक्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. राष्ट्रपति

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रपति है। अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को तब अध्यादेश जारी करने देता है जब संसद का कोई सदन सत्र में न हो और राष्ट्रपति को विश्वास हो कि परिस्थितियों में तुरंत कार्रवाई ज़रूरी है। अध्यादेश की शक्ति संसद के अधिनियम जैसी होती है, लेकिन सदनों के दोबारा बैठने पर इसे दोनों के सामने रखना होता है, और पहले मंज़ूरी न मिले तो उसके छह सप्ताह बाद यह समाप्त हो जाता है। इसे कभी भी वापस लिया जा सकता है, और इससे संविधान में संशोधन नहीं हो सकता।

उपराष्ट्रपति के पास कानून बनाने की शक्ति नहीं है; प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की सलाह देते हैं, पर खुद जारी नहीं कर सकते; और लोकसभा अध्यक्ष सदन की अध्यक्षता करते हैं, पर उनके पास अध्यादेश की शक्ति नहीं है। राज्य स्तर पर इसके समकक्ष अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल की शक्ति है। यह भी याद रखें कि अध्यादेश की अधिकतम अवधि छह महीने और छह सप्ताह है, क्योंकि संसद को हर छह महीने में कम से कम एक बार बैठना होता है।

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