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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था क्विज: नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और महान्यायवादी

  • 12 प्रश्न
  • 12 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत "नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और महान्यायवादी" विषय पर यह क्विज़ 12 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं, जिनमें 4 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे गए हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

12 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC Civil Service 2016 Official Paperमध्यम

निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपना पद धारण करता है?

  1. A.भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
  2. B.मुख्य निर्वाचन आयुक्त
  3. C.लोक सभा का अध्यक्ष
  4. D.भारत का महान्यायवादी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. भारत का महान्यायवादी

व्याख्या

सही उत्तर D, भारत का महान्यायवादी है। अनुच्छेद 76 कहता है कि उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, तथा संविधान उसके लिए न कोई निश्चित कार्यकाल तय करता है न निष्कासन की कोई प्रक्रिया। विकल्प A गलत है क्योंकि नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक निश्चित है और उसे केवल उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की रीति से हटाया जा सकता है, जो प्रसादपर्यंत पद धारण करने का उलटा है। विकल्प B गलत है क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भी वही न्यायाधीश जैसा संरक्षण प्राप्त है और उसे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत नहीं हटाया जा सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि अध्यक्ष लोक सभा द्वारा अपने सदस्यों में से चुना जाता है और वह सदस्यता समाप्त होने, त्यागपत्र देने या सदन के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प पर ही पद छोड़ता है।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 2 Dec 2020, Shift 2मध्यम

भारत के महान्यायवादी के रूप में नियुक्ति के लिए कौन-सी अर्हता आवश्यक है?

  1. A.विधान सभा का सदस्य
  2. B.राज्य सभा का सभापति
  3. C.उच्च न्यायालय का न्यायाधीश
  4. D.उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश

व्याख्या

सही उत्तर D है। अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हो, इसलिए प्रश्नपत्र उत्तर को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश लिखता है। इस अर्हता का अर्थ है भारत का नागरिक जो पांच वर्ष तक उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो, या दस वर्ष तक उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा हो, या राष्ट्रपति की राय में प्रतिष्ठित विधिवेत्ता हो; उसका वास्तव में न्यायाधीश रहना आवश्यक नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होना उस अर्हता को पूरा करने का केवल एक मार्ग है, स्वयं शर्त नहीं। विकल्प A गलत है क्योंकि विधानमंडल की सदस्यता से इस पद का कोई संबंध नहीं, यह विधिक और राजनीतिक नहीं नियुक्ति है। विकल्प B गलत है क्योंकि राज्य सभा का सभापति भारत का उपराष्ट्रपति होता है, जो पूर्णतः भिन्न संवैधानिक पद है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 15 Oct 2018, Shift 3आसान

भारतीय संविधान में नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का पद किस देश से लिया गया है?

  1. A.ब्रिटेन
  2. B.आयरलैंड
  3. C.कनाडा
  4. D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ब्रिटेन

व्याख्या

सही उत्तर A, ब्रिटेन है। संविधान निर्माताओं ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का पद, संसदीय शासन, विधि का शासन, एकल नागरिकता और रिट प्रणाली के साथ ब्रिटिश संविधान से लिया, जहां इसी नाम का अधिकारी संसद के लिए सार्वजनिक व्यय की लेखापरीक्षा करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि आयरलैंड से भारत ने राज्य के नीति निदेशक तत्व, राज्य सभा में सदस्यों का नामनिर्देशन और राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति ली। विकल्प C गलत है क्योंकि कनाडा से सशक्त केंद्र वाला संघ, अवशिष्ट शक्तियां संघ के पास, राज्यपालों की नियुक्ति केंद्र द्वारा और उच्चतम न्यायालय का परामर्शी क्षेत्राधिकार लिया गया। विकल्प D गलत है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता तथा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक ली गई। इन चारों सूचियों को अलग-अलग याद रखें, क्योंकि प्रश्नपत्र इन्हें मिला देते हैं।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · 11 Nov 2019, Shift 3आसान

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के किसी राज्य के लेखाओं से संबंधित प्रतिवेदन ______ को प्रस्तुत किए जाते हैं।

  1. A.राज्य के राज्यपाल
  2. B.राज्य के मुख्यमंत्री
  3. C.राज्य के वित्त मंत्री
  4. D.राज्य के मुख्य आर्थिक सलाहकार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. राज्य के राज्यपाल

व्याख्या

सही उत्तर A, राज्य के राज्यपाल है। अनुच्छेद 151(2) कहता है कि नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के किसी राज्य के लेखाओं से संबंधित प्रतिवेदन राज्यपाल को प्रस्तुत किए जाएंगे, जो उन्हें राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाएगा। इसी के समानांतर अनुच्छेद 151(1) संघ के लेखाओं के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को भेजता है, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि मुख्यमंत्री उसी सरकार का प्रमुख है जिसके व्यय की जांच हो रही है, इसलिए उसे प्रतिवेदन भेजना स्वतंत्र लेखापरीक्षा के उद्देश्य को ही समाप्त कर देगा। विकल्प C इसी कारण गलत है, क्योंकि वित्त मंत्री भी उसी सरकार का अंग है। विकल्प D गलत है क्योंकि मुख्य आर्थिक सलाहकार केवल सलाहकार अधिकारी है और लेखापरीक्षा में उसकी कोई भूमिका नहीं। याद रखने का नियम है संघ के लिए राष्ट्रपति और राज्य के लिए राज्यपाल।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के पद का उपबंध करता है?

  1. A.अनुच्छेद 143
  2. B.अनुच्छेद 148
  3. C.अनुच्छेद 165
  4. D.अनुच्छेद 280
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 148

व्याख्या

सही उत्तर B, अनुच्छेद 148 है। यह उपबंध करता है कि भारत का एक नियंत्रक-महालेखापरीक्षक होगा, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा करेगा, और आगे शपथ, निष्कासन, वेतन तथा आगे के पद पर रोक की बात करता है। इसके बाद अनुच्छेद 149 संसद को उसके कर्तव्य और शक्तियां निर्धारित करने देता है, अनुच्छेद 150 लेखाओं के प्रारूप से और अनुच्छेद 151 उसके प्रतिवेदनों से संबंधित है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति की उच्चतम न्यायालय से विधि या तथ्य के प्रश्न पर परामर्श लेने की शक्ति है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 165 राज्य के महाधिवक्ता का उपबंध करता है, जो महान्यायवादी का राज्य स्तरीय समकक्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 280 वित्त आयोग का उपबंध करता है, जो संघ और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक कितनी अवधि तक पद धारण करता है?

  1. A.पांच वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
  2. B.छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो
  3. C.केवल छह वर्ष, आयु से निरपेक्ष
  4. D.70 वर्ष की आयु तक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो

व्याख्या

सही उत्तर B है। अनुच्छेद 149 के अंतर्गत बने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 के अनुसार वह पद ग्रहण की तिथि से छह वर्ष तक या 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, पद धारण करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पांच वर्ष और 62 वर्ष अन्य पदों से जुड़े हैं; 62 वर्ष उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य की सेवानिवृत्ति आयु है। विकल्प C गलत है क्योंकि 65 वर्ष की सीमा छह वर्ष पूरे न होने पर भी लागू होती है, इसलिए 61 वर्ष की आयु में नियुक्त व्यक्ति केवल चार वर्ष ही रहेगा। विकल्प D गलत है क्योंकि इस प्रकार का कोई संवैधानिक पदाधिकारी 70 वर्ष तक पद पर नहीं रहता; 65 वर्ष उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की भी सेवानिवृत्ति आयु है, जो इस पद को दी गई प्रतिष्ठा से मेल खाती है।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को किसकी रीति से पद से हटाया जा सकता है?

  1. A.उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश
  2. B.संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य
  3. C.भारत के महान्यायवादी
  4. D.किसी राज्य के राज्यपाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश

व्याख्या

सही उत्तर A, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश है। अनुच्छेद 148(1) कहता है कि नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जाएगा जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को, अर्थात सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर संसद के प्रत्येक सदन के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित समावेदन द्वारा। विकल्प B गलत है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य को उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद राष्ट्रपति हटाते हैं और उसमें संसद की कोई भूमिका नहीं होती। विकल्प C गलत है क्योंकि महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और उसके लिए कोई निष्कासन प्रक्रिया नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि राज्यपाल भी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और उसका स्थानांतरण या प्रतिस्थापन सरलता से हो सकता है।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

पद छोड़ने के बाद नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के विषय में निम्नलिखित में से कौन सही है?

  1. A.वह संघ के अधीन किसी पद पर नियुक्त हो सकता है, राज्य के अधीन नहीं
  2. B.वह संघ या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद के लिए पात्र नहीं रहता
  3. C.वह स्वतः उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त हो जाता है
  4. D.वह लोक लेखा समिति का पदेन सदस्य बन जाता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वह संघ या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद के लिए पात्र नहीं रहता

व्याख्या

सही उत्तर B है। अनुच्छेद 148(4) उपबंध करता है कि पद छोड़ने के बाद नियंत्रक-महालेखापरीक्षक भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद के लिए पात्र नहीं रहेगा। यह रोक इसलिए है कि कोई लेखापरीक्षक उस सरकार के प्रति उदार होने के प्रलोभन में न पड़े जो आगे उसे पद दे सकती है, और यही सुरक्षा संविधान लोक सेवा आयोगों के सदस्यों को भी देता है। विकल्प A गलत है क्योंकि रोक संघ और राज्यों दोनों पर लागू है। विकल्प C गलत है क्योंकि उच्चतम न्यायालय में नियुक्ति कॉलेजियम प्रक्रिया से होती है और इस पद से उसका कोई संबंध नहीं, चाहे वेतन न्यायाधीश के बराबर हो। विकल्प D गलत है क्योंकि लोक लेखा समिति संसद सदस्यों से बनती है और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक उसका मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक के रूप में केवल सहायता करता है।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को संसद की किस समिति का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक कहा जाता है?

  1. A.प्राक्कलन समिति
  2. B.सार्वजनिक उपक्रम समिति
  3. C.लोक लेखा समिति
  4. D.कार्य मंत्रणा समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लोक लेखा समिति

व्याख्या

सही उत्तर C, लोक लेखा समिति है। यह समिति संघ के विनियोग और वित्त लेखाओं की तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की जांच करती है, और चूंकि उसका सारा कार्य उन प्रतिवेदनों से आरंभ होता है तथा उसके अधिकारी समिति को उन्हें समझने में सहायता करते हैं, इसलिए उसे इस समिति का मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्राक्कलन समिति बजट अनुमानों की जांच कर मितव्ययिता के सुझाव देती है और उसमें नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की सहायता नहीं होती। विकल्प B गलत है क्योंकि सार्वजनिक उपक्रम समिति उपक्रमों से संबंधित प्रतिवेदनों का उपयोग करती है, परंतु यह वाक्यांश परंपरा से लोक लेखा समिति से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि कार्य मंत्रणा समिति केवल सदन में सरकारी कार्य के लिए समय आवंटित करती है। यह भी याद रखें कि लोक लेखा समिति का सभापति परंपरा से लोक सभा में विपक्ष से होता है।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भारत के महान्यायवादी से संबंधित है?

  1. A.अनुच्छेद 72
  2. B.अनुच्छेद 76
  3. C.अनुच्छेद 78
  4. D.अनुच्छेद 88
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 76

व्याख्या

सही उत्तर B, अनुच्छेद 76 है। यह उपबंध करता है कि राष्ट्रपति ऐसे व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करेगा जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित हो, उसका कर्तव्य भारत सरकार को विधिक विषयों पर परामर्श देना बताता है, और कहता है कि वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा तथा ऐसा पारिश्रमिक पाएगा जो राष्ट्रपति निर्धारित करे। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 78 प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति को सूचना देने के कर्तव्य से संबंधित है। विकल्प D आकर्षक पर गलत है: अनुच्छेद 88 केवल महान्यायवादी को, मंत्रियों के साथ, किसी भी सदन की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार देता है, वह पद का सृजन नहीं करता। अनुच्छेद 76 को पद और अनुच्छेद 88 को बोलने के अधिकार के रूप में पक्का कर लें।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संसद में भारत के महान्यायवादी के विषय में कौन-सा कथन सही है?

  1. A.वह दोनों सदनों में बोल सकता है और मत भी दे सकता है
  2. B.वह दोनों सदनों में बोल सकता है परंतु मत नहीं दे सकता
  3. C.वह केवल राज्य सभा में उपस्थित हो सकता है
  4. D.उसे किसी भी सदन में प्रवेश का अधिकार नहीं है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वह दोनों सदनों में बोल सकता है परंतु मत नहीं दे सकता

व्याख्या

सही उत्तर B है। अनुच्छेद 88 महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही, किसी संयुक्त बैठक तथा उस समिति में, जिसका वह नामित सदस्य हो, बोलने और अन्यथा भाग लेने का अधिकार देता है, और अनुच्छेद 105 उसे सदस्य जैसे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां देता है। वह मत नहीं दे सकता, क्योंकि मतदान केवल सदन के सदस्यों का अधिकार है। इसलिए विकल्प A अपने दूसरे भाग में गलत है। विकल्प C गलत है क्योंकि उसका अधिकार दोनों सदनों पर है, केवल राज्य सभा पर नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 88 का पूरा उद्देश्य ही यह है कि सरकार का प्रथम विधि अधिकारी सदन को विधिक प्रश्न समझा सके। समानांतर बात याद रखें: एक सदन का सदस्य मंत्री भी अनुच्छेद 88 के अंतर्गत दूसरे सदन में बोल सकता है, परंतु मत केवल अपने सदन में दे सकता है।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

किसी राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी कौन होता है और यह पद किस अनुच्छेद से बना है?

  1. A.महाधिवक्ता, अनुच्छेद 165 के अंतर्गत
  2. B.सॉलिसिटर जनरल, अनुच्छेद 76 के अंतर्गत
  3. C.महान्यायवादी, अनुच्छेद 165 के अंतर्गत
  4. D.लोक अभियोजक, अनुच्छेद 148 के अंतर्गत
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. महाधिवक्ता, अनुच्छेद 165 के अंतर्गत

व्याख्या

सही उत्तर A, महाधिवक्ता, अनुच्छेद 165 के अंतर्गत है। राज्यपाल ऐसे व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश होने के लिए अर्हित हो, जो राज्य सरकार को विधिक विषयों पर परामर्श देता है और राज्यपाल द्वारा सौंपे विधिक कार्य करता है; वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और अनुच्छेद 177 के अंतर्गत राज्य विधानमंडल में बोल सकता है, मत नहीं दे सकता। विकल्प B दो कारणों से गलत है, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल का संविधान में उल्लेख ही नहीं है और अनुच्छेद 76 महान्यायवादी से संबंधित है। विकल्प C गलत है क्योंकि महान्यायवादी अनुच्छेद 76 के अंतर्गत संघ का विधि अधिकारी है, राज्य का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लोक अभियोजक की नियुक्ति दंड प्रक्रिया विधि के अंतर्गत होती है और अनुच्छेद 148 नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के पद का सृजन करता है।

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