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GK क्विजबैंकिंग और वित्तीय जागरूकता

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता मिश्रित क्विज: सेट 9

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

बैंकिंग और वित्तीय जागरूकता मिश्रित क्विज़ (सेट 9) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 11 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: ऋण, अग्रिम और ब्याज दरें, एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं, परक्राम्य लिखत और चेक और अन्य। इनमें से 9 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

सीमांत स्थायी सुविधा के अंतर्गत बैंक रिज़र्व बैंक से रातोंरात उधार किसके विरुद्ध लेता है?

  1. A.अपने नकद आरक्षित अनुपात के शेष के विरुद्ध
  2. B.अपनी सांविधिक चलनिधि अनुपात प्रतिभूतियों के विरुद्ध
  3. C.अपने पास रखे कॉर्पोरेट बॉन्ड के विरुद्ध
  4. D.किसी भी प्रतिभूति के बिना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अपनी सांविधिक चलनिधि अनुपात प्रतिभूतियों के विरुद्ध

व्याख्या

सही उत्तर B, अपनी सांविधिक चलनिधि अनुपात प्रतिभूतियों के विरुद्ध है। सीमांत स्थायी सुविधा बैंक को यह छूट देती है कि वह सांविधिक चलनिधि अनुपात के लिए रखी सरकारी प्रतिभूतियों में से निर्धारित सीमा तक निकालकर रिज़र्व बैंक से रातोंरात उधार ले। इसकी दर रेपो से ऊपर रहती है क्योंकि यह आपात खिड़की है, और बैंक दर इसी एमएसएफ दर से संबद्ध रहती है, इसलिए दोनों साथ चलती हैं।

विकल्प A गलत है क्योंकि नकद आरक्षित अनुपात का शेष रिज़र्व बैंक के पास नकद आरक्षित है और उसे प्रतिभूति के रूप में नहीं दिया जा सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि यह खिड़की केवल पात्र सरकारी प्रतिभूतियाँ स्वीकार करती है, कॉर्पोरेट बॉन्ड नहीं। विकल्प D स्थायी जमा सुविधा का वर्णन है, जिसमें रिज़र्व बैंक बैंकों से धन बिना प्रतिभूति दिए अवशोषित करता है, जो उधार लेने का उल्टा है।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: RRB NTPC · 17 June 2022, Shift 3मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में सूक्ष्म वित्त संस्थानों का मूल सिद्धांत नहीं है?

  1. A.भौतिक संपार्श्विक का अभाव
  2. B.सहकर्मी निगरानी
  3. C.महिला उधारकर्ताओं पर ध्यान
  4. D.बड़ी राशि का ऋण
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. बड़ी राशि का ऋण

व्याख्या

सही उत्तर है D, बड़ी राशि का ऋण। सूक्ष्म वित्त का अर्थ है उन गरीब परिवारों को छोटे ऋण देना जिन्हें बैंक बहुत जोखिम भरा मानते हैं, इसलिए बड़ी राशि का ऋण इस विचार के उलट है। रिजर्व बैंक सूक्ष्म वित्त ऋण को एक तय वार्षिक आय से नीचे के परिवार को दिया गया संपार्श्विक-मुक्त ऋण मानता है, और पूरा ढाँचा बड़ी रकम के बजाय छोटी तथा बार-बार होने वाली किस्तों पर टिका है। विकल्प A सच्चा सिद्धांत है, क्योंकि उधार लेने वाले के पास गिरवी रखने को जमीन या सोना नहीं होता और समूह का वचन ही सुरक्षा का काम करता है। विकल्प B भी सच्चा सिद्धांत है: संयुक्त देयता समूह के सदस्य एक-दूसरे की अदायगी पर नजर रखते हैं, और इसी दबाव से वसूली दर ऊँची रहती है। विकल्प C भी सही है, क्योंकि स्वयं सहायता समूह मुख्य रूप से महिलाओं के इर्द-गिर्द बनते हैं, जो अधिक नियमित रूप से बचत और अदायगी करती हैं। नाबार्ड के 1992 के एसएचजी-बैंक लिंकेज कार्यक्रम ने इस मॉडल को पूरे भारत में फैलाया। परीक्षा टिप: सूक्ष्म वित्त — छोटे, संपार्श्विक-मुक्त, समूह की गारंटी वाले ऋण, मुख्यतः महिलाओं को।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान निर्देश के अनुसार चेक उस पर लिखी तारीख से कितने समय तक वैध रहता है?

  1. A.एक महीना
  2. B.तीन महीने
  3. C.छह महीने
  4. D.एक वर्ष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तीन महीने

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन महीने है। भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्देश दिया कि चेक, ड्राफ्ट, पे ऑर्डर और बैंकर्स चेक लिखत की तारीख से तीन महीने तक देय रहेंगे, और यह 1 अप्रैल 2012 से प्रभावी हुआ, जिससे पहले की छह महीने की अवधि घट गई। इस अवधि के बाद प्रस्तुत चेक बासी या कालातीत चेक कहलाता है और अदत्त लौटा दिया जाता है।

विकल्प A, एक महीना वह अवधि है जिसमें धारा 138 के अंतर्गत वाद हेतुक उत्पन्न होने के बाद परिवाद दाखिल करना होता है, और अभ्यर्थी उसे यहां ले आते हैं। विकल्प C, छह महीने अप्रैल 2012 से पहले की स्थिति थी और सबसे आम गलत उत्तर है। विकल्प D, एक वर्ष कभी नियम नहीं रहा। यह भी ध्यान रखें कि वैधता चेक पर लिखी तारीख से चलती है, इसलिए पूर्व-दिनांकित चेक उस लिखी तारीख से तीन महीने तक ही अच्छा रहता है।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: SSC CPO · 16th March 2019, Shift 3मध्यम

भीम ऐप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कब लॉन्च किया गया था?

  1. A.15 अगस्त, 2016
  2. B.31 अक्टूबर, 2016
  3. C.26 जनवरी, 2016
  4. D.30 दिसंबर, 2016
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 30 दिसंबर, 2016

व्याख्या

सही उत्तर है D, 30 दिसंबर, 2016। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भीम ऐप 30 दिसंबर 2016 को लॉन्च किया था, नवंबर 2016 की नोटबंदी के कुछ ही सप्ताह बाद, ताकि लोग डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ें। भीम का पूरा नाम भारत इंटरफेस फॉर मनी है और यह डॉ बी आर आंबेडकर के नाम पर रखा गया, जिनका पूरा नाम भीमराव रामजी आंबेडकर था। यह ऐप भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने एकीकृत भुगतान इंटरफेस यानी यूपीआई पर बनाया है, इसलिए पैसा सीधे एक बैंक खाते से दूसरे में जाता है, चाहे यूपीआई पहचानकर्ता से भेजा जाए या मोबाइल नंबर से, और यह कई भारतीय भाषाओं में काम करता है। A गलत है क्योंकि 15 अगस्त 2016 को ऐसा कोई शुभारंभ नहीं हुआ। B गलत है क्योंकि 31 अक्टूबर 2016 नोटबंदी की घोषणा से पहले की तिथि है। C गलत है क्योंकि 26 जनवरी 2016 गणतंत्र दिवस था। परीक्षा टिप: भीम, एनपीसीआई, यूपीआई।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

यदि किसी जमा पर सांकेतिक ब्याज दर सात प्रतिशत है और महँगाई दर छह प्रतिशत है, तो वास्तविक ब्याज दर लगभग कितनी होगी?

  1. A.तेरह प्रतिशत
  2. B.सात प्रतिशत
  3. C.एक प्रतिशत
  4. D.छह प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. एक प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर C, लगभग एक प्रतिशत है। वास्तविक ब्याज दर सांकेतिक दर में से महँगाई दर घटाने पर मिलती है, इसलिए सात प्रतिशत में से छह प्रतिशत घटाकर लगभग एक प्रतिशत बचता है। यही संबंध फिशर समीकरण बताता है, और बचतकर्ता के लिए वास्तव में यही महत्व रखता है, क्योंकि जो धन सात प्रतिशत से बढ़े और कीमतें छह प्रतिशत से बढ़ें, वह वर्ष के अंत में केवल लगभग एक प्रतिशत अधिक वस्तुएँ खरीद पाता है।

विकल्प A, तेरह प्रतिशत, दोनों दरों को घटाने के स्थान पर जोड़ने से आता है, जो सबसे सामान्य भूल है। विकल्प B, सात प्रतिशत, सांकेतिक दर ही है और महँगाई को छोड़ देता है। विकल्प D, छह प्रतिशत, महँगाई दर है। ध्यान रखें कि जब महँगाई सांकेतिक दर से अधिक हो तो वास्तविक दर ऋणात्मक हो जाती है, और यही ऊँची महँगाई के समय बचत का मूल्य घटाती है।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: SSC MTS · 13 Sept, 2023, Shift 3आसान

निम्नलिखित में से कौन-सी सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस) की विशेषता है?

  1. A.सरकारी कर्मचारियों को वित्तीय सेवा
  2. B.केंद्रीय मंत्रियों को वित्तीय सेवा
  3. C.कॉर्पोरेट को वित्तीय सेवा
  4. D.वंचित लोगों को वित्तीय सेवा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. वंचित लोगों को वित्तीय सेवा

व्याख्या

सही उत्तर है D, वंचित लोगों को वित्तीय सेवा। सूक्ष्म वित्त संस्था का काम उन गरीब और कम आय वाले लोगों को छोटी रकम उधार देना है, जो सामान्य बैंक की माँगी गई जमानत नहीं दे सकते। ये संस्थाएँ छोटे ऋण देती हैं, थोड़ी-थोड़ी बचत जमा करती हैं और सरल बीमा भी बेचती हैं। इनका काम आमतौर पर स्वयं सहायता समूहों या संयुक्त दायित्व समूहों के ज़रिए चलता है, जिनमें सदस्य एक-दूसरे की गारंटी बनते हैं, इसलिए अलग से जमानत नहीं चाहिए। ऋण की रकम छोटी होती है, किस्तें साप्ताहिक या मासिक होती हैं, और पैसा अक्सर छोटी दुकान, सिलाई मशीन, पशु या बीज के लिए लिया जाता है। भारत में ये संस्थाएँ भारतीय रिज़र्व बैंक के पास NBFC-MFI के रूप में पंजीकृत होती हैं, और नाबार्ड का स्वयं सहायता समूह-बैंक संबद्धता कार्यक्रम इसी विचार पर चलता है। A और B गलत हैं क्योंकि सरकारी कर्मचारी और केंद्रीय मंत्री नियमित वेतन पाते हैं तथा सामान्य बैंकों से ऋण ले सकते हैं। C गलत है क्योंकि कॉर्पोरेट ग्राहकों को वाणिज्यिक बैंक और पूँजी बाज़ार सेवा देते हैं। परीक्षा टिप: सूक्ष्म वित्त का अर्थ है गरीबों को बिना जमानत छोटे ऋण, स्वयं सहायता समूहों और RBI के अधीन NBFC-MFI के माध्यम से।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

विनिमय पत्र में कितने पक्षकार होते हैं?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.पांच
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तीन

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन है। परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 5 में परिभाषित विनिमय पत्र वह बिना शर्त लिखित आदेश है, जिससे लेखक किसी दूसरे व्यक्ति, अदाकर्ता, को निर्देश देता है कि वह निश्चित राशि आदाता को या उसके आदेश पर दे। इसलिए लेखक, अदाकर्ता और आदाता तीन पक्षकार होते हैं, और विनिमय पत्र अदाकर्ता की स्वीकृति के बाद ही उसे बाध्य करता है।

विकल्प A, दो वचन पत्र के पक्षकारों की संख्या है, जिसमें केवल लिखने वाला और आदाता होते हैं, और यही इस प्रश्न का जाल है। विकल्प C, चार और विकल्प D, पांच अधिनियम के किसी लिखत का वर्णन नहीं करते, यद्यपि व्यवहार में एक ही व्यक्ति दो भूमिकाएं निभा सकता है, जैसे जब लेखक अपने ही पक्ष में विनिमय पत्र लिखे। चेक भी विनिमय पत्र का एक प्रकार है, इसलिए उसमें भी तीन पक्षकार होते हैं और अदाकर्ता सदैव बैंक होता है।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: RRB JE · 1 Sept 2019, Shift 1मध्यम

गैर-बैंकिंग संस्थाओं द्वारा लगाए, स्वामित्व में रखे और संचालित किए जाने वाले स्वचालित टेलर मशीन (ATM) क्या कहलाते हैं?

  1. A.येलो लेबल ATM
  2. B.ब्लैक लेबल ATM
  3. C.व्हाइट लेबल ATM
  4. D.ग्रे लेबल ATM
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. व्हाइट लेबल ATM

व्याख्या

सही उत्तर है C, व्हाइट लेबल ATM। कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत किसी गैर-बैंकिंग कंपनी द्वारा लगाया, स्वामित्व में रखा और चलाया जाने वाला ATM व्हाइट लेबल ATM कहलाता है, क्योंकि उस पर किसी बैंक का लोगो नहीं होता। भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2012 में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के अंतर्गत इनकी अनुमति दी, ताकि छोटे शहरों और गाँवों तक नकदी की पहुँच बढ़े। भारत का पहला व्हाइट लेबल ATM टाटा कम्युनिकेशंस पेमेंट सॉल्यूशंस ने इंडिकैश नाम से शुरू किया था। मशीन में रखी नकदी और ग्राहक का खाता किसी प्रायोजक बैंक का ही होता है, जबकि गैर-बैंकिंग संचालक मशीन चलाता है और बैंकों से शुल्क कमाता है। इसके विपरीत ब्राउन लेबल ATM में हार्डवेयर सेवा प्रदाता का होता है, पर लाइसेंस और नकदी बैंक की होती है। A, B और D गलत हैं क्योंकि येलो, ब्लैक और ग्रे लेबल ATM रिज़र्व बैंक की मान्य श्रेणियाँ नहीं हैं। परीक्षा टिप: व्हाइट लेबल यानी गैर-बैंक का स्वामित्व, ब्राउन लेबल यानी बैंक का लाइसेंस और बाहरी हार्डवेयर।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

घरेलू अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक का कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य उसके समायोजित शुद्ध बैंक ऋण का कितना भाग है?

  1. A.अठारह प्रतिशत
  2. B.पच्चीस प्रतिशत
  3. C.चालीस प्रतिशत
  4. D.पचहत्तर प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चालीस प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर C, चालीस प्रतिशत है। घरेलू अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक को अपने समायोजित शुद्ध बैंक ऋण का, अथवा उससे अधिक होने पर अपने तुलन पत्र से बाहर के जोखिम के साख समतुल्य का, चालीस प्रतिशत प्राथमिकता क्षेत्र को देना होता है। इसकी श्रेणियाँ कृषि, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम, निर्यात साख, शिक्षा, आवास, सामाजिक अधिसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा तथा दुर्बल वर्ग हैं, और कमी की राशि नाबार्ड के ग्रामीण अधिसंरचना विकास निधि तथा अन्य निधियों में रखनी पड़ती है।

विकल्प A, अठारह प्रतिशत, उस चालीस प्रतिशत के भीतर कृषि का उप लक्ष्य है। विकल्प B, पच्चीस प्रतिशत, प्राथमिकता क्षेत्र का कोई आँकड़ा नहीं है। विकल्प D, पचहत्तर प्रतिशत, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और लघु वित्त बैंकों के लिए निर्धारित बहुत ऊँचा लक्ष्य है, जो इन्हीं उधारकर्ताओं की सेवा के लिए बने हैं, इसलिए बैंक श्रेणियाँ मिला देने वाले अभ्यर्थी के लिए यही जाल है।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: SSC MTS · 26 Oct 2021, Shift 3आसान

बेसल मानदंड वित्तीय प्रणाली के किस पहलू पर केंद्रित हैं?

  1. A.बीमा
  2. B.बैंकिंग
  3. C.शेयर बाजार
  4. D.वस्तु बाजार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. बैंकिंग

व्याख्या

सही उत्तर है B, बैंकिंग। बेसल मानदंड बैंकिंग पर्यवेक्षण के अंतरराष्ट्रीय मानक हैं।

इन्हें बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन जारी करती है, जो स्विट्जरलैंड के बेसल शहर में स्थित बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के अंतर्गत काम करती है। इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक अपने जोखिम के अनुपात में पर्याप्त पूँजी रखे, जिससे घाटा जमाकर्ताओं पर न पड़े। बेसल I (1988) ऋण जोखिम से जुड़ा था, बेसल II (2004) ने बाजार और परिचालन जोखिम के साथ पर्यवेक्षण और प्रकटीकरण जोड़ा, और 2008 के संकट के बाद बना बेसल III पूँजी की गुणवत्ता बढ़ाने तथा तरलता और उत्तोलन के नियम लाया। भारत में रिजर्व बैंक इन्हें लागू करता है और जोखिम भारित परिसंपत्तियों पर नौ प्रतिशत पूँजी अनुपात माँगता है।

विकल्प A, C और D गलत हैं क्योंकि बीमा का नियमन आईआरडीएआई करता है और शेयर तथा वस्तु बाजार का सेबी।

परीक्षा टिप: बेसल समिति - बेसल, स्विट्जरलैंड; भारत में सीआरएआर नौ प्रतिशत।

Q11.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

जब चेक पर 'नॉट निगोशिएबल' शब्दों के साथ रेखांकन किया जाता है, तो परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अंतर्गत उसका प्रभाव क्या होता है?

  1. A.चेक हस्तांतरित ही नहीं किया जा सकता
  2. B.लेने वाले को देने वाले से बेहतर हक नहीं मिलता
  3. C.चेक काउंटर पर नकद चुकाया जा सकता है
  4. D.चेक तीन महीने के बाद ही देय होता है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. लेने वाले को देने वाले से बेहतर हक नहीं मिलता

व्याख्या

सही उत्तर B, लेने वाले को देने वाले से बेहतर हक नहीं मिलता है। धारा 130 उपबंध करती है कि 'नॉट निगोशिएबल' रेखांकित चेक लेने वाले व्यक्ति को उससे बेहतर हक न होगा और न वह दे सकेगा, जिससे उसने लिया है। इसलिए लिखत हस्तांतरणीय बना रहता है, पर परक्राम्यता का वह विशेष गुण खो देता है जिससे सम्यक अनुक्रम में धारक को निर्दोष हक मिल जाता है, और हक का दोष श्रृंखला में आगे चला जाता है।

विकल्प A गलत है, क्योंकि ये शब्द हस्तांतरण नहीं रोकते; वे केवल हस्तांतरित होने वाले हक को सीमित करते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि चेक तब भी रेखांकित है और धारा 126 के अंतर्गत रेखांकित चेक काउंटर पर नहीं चुकाया जा सकता। विकल्प D रेखांकन को चेक की तीन महीने की वैधता से भ्रमित करता है, जिसका धारा 130 से कोई संबंध नहीं है। इसलिए B ही प्रभाव को ठीक बताता है।

Q12.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: उत्तर प्रदेश · 22nd Dec 2018, Shift 2मध्यम

भारत में बैंकिंग लोकपाल के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. A.बैंकिंग लोकपाल भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी होता है, जो ग्राहकों की शिकायतों का निवारण करता है।
  2. B.बैंकिंग लोकपाल योजना में केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ही आते हैं।
  3. C.शिकायतकर्ता के लिए निर्णय को पूरी तरह स्वीकार करना बाध्यकारी है।
  4. D.बैंकिंग लोकपाल शिकायत दर्ज करने और निपटाने के लिए मामूली शुल्क लेता है।
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बैंकिंग लोकपाल भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी होता है, जो ग्राहकों की शिकायतों का निवारण करता है।

व्याख्या

सही उत्तर है A। बैंकिंग लोकपाल भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी होता है, जो बैंकिंग सेवा में कमी से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतें सुनकर उनका निपटारा करता है। यह योजना पहली बार बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35क के तहत लाई गई थी, और लोकपाल भुगतान में देरी, गलत शुल्क वसूली, कार्ड तथा डिजिटल लेन-देन के विवाद और छोटे सिक्के न लेने जैसे मामलों पर निर्णय देता है। ग्राहक को पहले अपने बैंक में शिकायत करनी होती है और तीस दिन में जवाब न मिलने या असंतोषजनक जवाब मिलने पर ही वह लोकपाल के पास जा सकता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि निजी बैंक, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और अनुसूचित सहकारी बैंक भी इसमें आते हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि शिकायतकर्ता निर्णय को अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। विकल्प D गलत है, क्योंकि ग्राहक के लिए यह पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है। परीक्षा टिप: नियुक्ति आरबीआई करता है, पहले बैंक में शिकायत, सेवा निःशुल्क।

Q13.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत किशोर श्रेणी का ऋण किस सीमा में आता है?

  1. A.पचास हजार रुपये तक
  2. B.पचास हजार से पाँच लाख रुपये
  3. C.पाँच लाख से दस लाख रुपये
  4. D.दस लाख से बीस लाख रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पचास हजार से पाँच लाख रुपये

व्याख्या

सही उत्तर B, पचास हजार से पाँच लाख रुपये है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अप्रैल 2015 में आरंभ हुई, जिसका उद्देश्य बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और सूक्ष्म वित्त संस्थाओं द्वारा गैर कृषि आय अर्जक गतिविधियों को दिए गए छोटे ऋणों का पुनर्वित्त करना है। इसकी तीन मूल श्रेणियाँ वृद्धि की अवस्थाओं के नाम पर रखी गईं, सबसे छोटे ऋण के लिए शिशु, मध्य श्रेणी के लिए किशोर और सबसे बड़े के लिए तरुण, और इन ऋणों पर संपार्श्विक प्रतिभूति नहीं ली जाती।

विकल्प A, पचास हजार रुपये तक, शिशु श्रेणी है, जो अभी काम आरंभ करने वाले के लिए है। विकल्प C, पाँच लाख से दस लाख रुपये, योजना के आरंभ के समय की तरुण श्रेणी है। विकल्प D उस ऊँची श्रेणी का वर्णन है जो बाद में उन उधारकर्ताओं के लिए जोड़ी गई जिन्होंने पहले का मुद्रा ऋण चुका दिया था। परीक्षक शिशु, किशोर, तरुण का बढ़ता क्रम ही जाँचता है।

Q14.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: दिल्ली · 6 April 2022, Shift 3कठिन

स्वयं सहायता समूह का कौन सा मॉडल अंतरराष्ट्रीय मॉडल भी कहलाता है?

  1. A.सीडीएफ मॉडल
  2. B.सेवा मॉडल
  3. C.सपाप मॉडल
  4. D.डीडब्ल्यूसीआरए मॉडल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सपाप मॉडल

व्याख्या

सही उत्तर C, सपाप मॉडल है। दक्षिण एशिया गरीबी उपशमन कार्यक्रम का मॉडल स्वयं सहायता समूह निर्माण का अंतरराष्ट्रीय मॉडल कहलाता है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से चला और दक्षिण एशिया के कई देशों में एक ही रूपरेखा पर लागू हुआ, जिसका आरंभ भारत में आंध्र प्रदेश के जिलों से हुआ। यह तीन स्तरीय ढाँचा बनाता है, नीचे निर्धन महिलाओं का समूह, उसके ऊपर ग्राम संगठन और मंडल स्तर पर महासंघ, जिसमें पहले बचत और उसके बाद साख होती है।

विकल्प A, सीडीएफ मॉडल, आंध्र प्रदेश में सहकारी विकास प्रतिष्ठान का कार्य है, जो सहकारी बचत का मॉडल है। विकल्प B, सेवा मॉडल, अहमदाबाद की स्वरोजगार महिला संस्था और उसके बैंक से निकला। विकल्प D, डीडब्ल्यूसीआरए अर्थात ग्रामीण क्षेत्रों में महिला और बाल विकास, 1982 का सरकारी कार्यक्रम था और घरेलू मॉडल है।

Q15.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अंतर्गत तारीख के बाद देय विनिमय पत्र या वचन पत्र की परिपक्वता की गणना में रियायत के कितने दिन जोड़े जाते हैं?

  1. A.दो दिन
  2. B.तीन दिन
  3. C.पांच दिन
  4. D.सात दिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तीन दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन दिन है। अधिनियम की धारा 22 उपबंध करती है कि निश्चित अवधि के बाद देय वचन पत्र या विनिमय पत्र की परिपक्वता वह दिन है जिस दिन वह अवधि समाप्त होती है, और उस तारीख की गणना में रियायत के तीन दिन जोड़े जाते हैं। इसलिए किसी तारीख से एक महीने बाद देय विनिमय पत्र उस महीने की समाप्ति के तीन दिन बाद परिपक्व होता है, और यदि परिपक्वता का दिन सार्वजनिक अवकाश हो तो धारा 25 उसे ठीक पहले के कार्य दिवस पर देय बनाती है।

विकल्प A, C और D गोल संख्याएं हैं, जो यह देखने के लिए रखी जाती हैं कि अभ्यर्थी को ठीक आंकड़ा याद है या नहीं, और इनमें से कोई अधिनियम में नहीं आती। एक और बात याद रखने योग्य है कि रियायत के दिन केवल तारीख या दर्शन के बाद देय लिखतों पर लागू होते हैं; चेक पर कभी नहीं, क्योंकि चेक सदैव मांग पर देय होता है।

Q16.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: SSC CHSL · 1 Jul 2019, Shift 3आसान

भारत के बैंकिंग क्षेत्र के संदर्भ में IMPS का पूर्ण रूप क्या है?

  1. A.इंस्टैंट पेमेंट सेक्टर
  2. B.इमीडिएट पेमेंट सर्विस
  3. C.इमीडिएट पेमेंट सेक्टर
  4. D.इंस्टैंट पेमेंट सर्विस
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इमीडिएट पेमेंट सर्विस

व्याख्या

सही उत्तर है B, इमीडिएट पेमेंट सर्विस। आईएमपीएस अंतर-बैंक धन अंतरण सेवा है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी एनपीसीआई चलाता है और जो नवंबर 2010 में शुरू हुई थी। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह चौबीसों घंटे, छुट्टी के दिन और रात में भी काम करती है तथा पैसा कुछ ही सेकंड में लाभार्थी तक पहुँच जाता है। भुगतान खाता संख्या और आईएफएससी कोड से किया जा सकता है, या मोबाइल नंबर तथा एमएमआईडी से, और इसे मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम या शाखा से शुरू किया जा सकता है। एनपीसीआई 2008 में खुदरा भुगतानों की शीर्ष संस्था के रूप में बना और यूपीआई, रुपे, नैच, एईपीएस तथा फास्टैग भी चलाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि अंतिम अक्षर S का अर्थ सर्विस है, सेक्टर नहीं। विकल्प C भी इसी कारण गलत है। विकल्प D गलत है, क्योंकि पहला शब्द इमीडिएट है, इंस्टैंट नहीं। परीक्षा टिप: एनईएफटी और आरटीजीएस रिज़र्व बैंक चलाता है, आईएमपीएस और यूपीआई एनपीसीआई।

Q17.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

निम्नलिखित में से कौन बैंक की निधि रहित साख सुविधा है?

  1. A.नकद ऋण
  2. B.ओवरड्राफ्ट
  3. C.साख पत्र
  4. D.सावधि ऋण
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. साख पत्र

व्याख्या

सही उत्तर C, साख पत्र है। निधि रहित सुविधा में बैंक सुविधा देते समय धन नहीं देता; वह केवल यह वचन देता है कि ग्राहक चूकने पर वह भुगतान करेगा, और उस वचन के लिए कमीशन लेता है। साख पत्र विक्रेता को दिया गया ऐसा ही वचन है कि क्रेता का बिल चुकाया जाएगा, और बैंक गारंटी दूसरा सामान्य उदाहरण है। यह जोखिम निधि आधारित तभी बनता है जब वचन का उपयोग कर लिया जाए।

विकल्प A, नकद ऋण, स्टॉक और प्राप्य के विरुद्ध चालू सीमा है और निधि आधारित है। विकल्प B, ओवरड्राफ्ट, निधि आधारित है क्योंकि ग्राहक खाते के शेष से अधिक धन वास्तव में निकालता है। विकल्प D, सावधि ऋण, स्पष्ट रूप से निधि आधारित है, क्योंकि स्वीकृत राशि स्थिर परिसंपत्ति के लिए वितरित होती है। बिल बट्टाकरण भी निधि आधारित है, क्योंकि बैंक विक्रेता को तत्काल भुगतान करता है।

Q18.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतापूछा गया: SSC CPO · 25 November 2020, Shift 1आसान

'द नेम यू कैन बैंक अपॉन' निम्नलिखित में से किस बैंक का स्लोगन है?

  1. A.पंजाब नेशनल बैंक
  2. B.भारतीय स्टेट बैंक
  3. C.एचडीएफसी बैंक
  4. D.केनरा बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पंजाब नेशनल बैंक

व्याख्या

सही उत्तर है A, पंजाब नेशनल बैंक। 'द नेम यू कैन बैंक अपॉन' स्लोगन पंजाब नेशनल बैंक का है। पीएनबी की स्थापना 1894 में लाहौर में हुई थी और यह पूरी तरह भारतीय पूँजी से शुरू होने वाला पहला भारतीय बैंक था, जिसके पीछे लाला लाजपत राय जैसे नाम थे; अब इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। ऐसे स्लोगन परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि हर बड़ा बैंक अपनी पंक्ति वर्षों तक बनाए रखता है। B गलत है क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक का स्लोगन 'द बैंकर टू एवरी इंडियन' है और पहले 'विद यू ऑल द वे' था। C गलत है क्योंकि एचडीएफसी बैंक 'वी अंडरस्टैंड योर वर्ल्ड' का प्रयोग करता है। D गलत है क्योंकि केनरा बैंक का स्लोगन 'टुगेदर वी कैन' है। परीक्षा टिप: बैंक, स्थापना वर्ष और स्लोगन तीनों साथ याद रखें।

Q19.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत नोटिस मिलने के कितने दिनों में लेखक को भुगतान कर देना चाहिए जिससे अपराध न बने?

  1. A.सात दिन
  2. B.पंद्रह दिन
  3. C.तीस दिन
  4. D.पैंतालीस दिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. पंद्रह दिन

व्याख्या

सही उत्तर B, पंद्रह दिन है। धारा 138 की समय-सीमा तीन चरणों में चलती है। आदाता को बैंक से यह सूचना मिलने के तीस दिन के भीतर लेखक को भुगतान की मांग करता लिखित नोटिस देना होता है कि चेक अदत्त लौट आया है। इसके बाद लेखक को उस नोटिस की प्राप्ति से पंद्रह दिन मिलते हैं, जिनमें भुगतान करना होता है। यदि उन पंद्रह दिनों में भुगतान नहीं होता, तभी वाद हेतुक उत्पन्न होता है और उस तारीख से एक महीने के भीतर परिवाद दाखिल करना होता है।

विकल्प A, सात दिन इस योजना के किसी भाग में नहीं आते। विकल्प C, तीस दिन नोटिस भेजने की अवधि है, भुगतान की नहीं, और यही सबसे आम गलत चयन है। विकल्प D, पैंतालीस दिन अधिनियम में नहीं है। इस क्रम को तीस, पंद्रह और एक महीना के रूप में याद रखें, क्योंकि प्रश्नपत्र तीनों आंकड़े बारी-बारी पूछता है।

Q20.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत में बैंक जिन केवाईसी नियमों का पालन करते हैं, वे मुख्य रूप से किस कानून के अंतर्गत बने हैं?

  1. A.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
  2. B.धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002
  3. C.परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
  4. D.विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002

व्याख्या

सही उत्तर B, धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 है। अपने ग्राहक को जानिए के नियम इसलिए बने हैं कि बैंकिंग व्यवस्था का उपयोग अपराध से कमाए धन को वैध बनाने या आतंक के वित्तपोषण में न हो। 2002 का अधिनियम और उसके अंतर्गत बने 2005 के धन शोधन निवारण (अभिलेख रखरखाव) नियम हर बैंककारी कंपनी से अपने ग्राहकों की पहचान सत्यापित करने तथा अभिलेख रखने की अपेक्षा करते हैं, और रिजर्व बैंक ने ये दायित्व अपने केवाईसी मास्टर निर्देश में संग्रहित किए हैं।

विकल्प A, 1949 का बैंककारी विनियमन अधिनियम बैंकों के लाइसेंस, प्रबंधन और पर्यवेक्षण को नियंत्रित करता है, पर केवाईसी का स्रोत नहीं है। विकल्प C, 1881 का परक्राम्य लिखत अधिनियम चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र से संबंधित है। विकल्प D, 1999 का फेमा विदेशी मुद्रा लेनदेन और अनिवासी खातों को नियंत्रित करता है। हर विकल्प सच्चा बैंकिंग कानून है, इसीलिए यह प्रश्न ध्यान माँगता है।

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