निम्नलिखित में से कौन बैंक की निधि रहित साख सुविधा है?
- A.नकद ऋण
- B.ओवरड्राफ्ट
- C.साख पत्र
- D.सावधि ऋण
सही उत्तर
C. साख पत्र
व्याख्या
सही उत्तर C, साख पत्र है। निधि रहित सुविधा में बैंक सुविधा देते समय धन नहीं देता; वह केवल यह वचन देता है कि ग्राहक चूकने पर वह भुगतान करेगा, और उस वचन के लिए कमीशन लेता है। साख पत्र विक्रेता को दिया गया ऐसा ही वचन है कि क्रेता का बिल चुकाया जाएगा, और बैंक गारंटी दूसरा सामान्य उदाहरण है। यह जोखिम निधि आधारित तभी बनता है जब वचन का उपयोग कर लिया जाए।
विकल्प A, नकद ऋण, स्टॉक और प्राप्य के विरुद्ध चालू सीमा है और निधि आधारित है। विकल्प B, ओवरड्राफ्ट, निधि आधारित है क्योंकि ग्राहक खाते के शेष से अधिक धन वास्तव में निकालता है। विकल्प D, सावधि ऋण, स्पष्ट रूप से निधि आधारित है, क्योंकि स्वीकृत राशि स्थिर परिसंपत्ति के लिए वितरित होती है। बिल बट्टाकरण भी निधि आधारित है, क्योंकि बैंक विक्रेता को तत्काल भुगतान करता है।
पूरा लेख पढ़ें: ऋण, अग्रिम और ब्याज दरें: एमसीएलआर से एनपीए तक
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंग्रामीण साख और सूक्ष्म वित्त के संदर्भ में केसीसी का पूरा रूप क्या है?
- A.कृषि क्रेडिट कार्ड
- B.किसान क्रेडिट कार्ड
- C.कृषि क्रेडिट कॉर्पोरेशन
- D.किसान क्रेडिट कॉर्पोरेशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. किसान क्रेडिट कार्ड
व्याख्या
सही उत्तर B, किसान क्रेडिट कार्ड है। किसान क्रेडिट कार्ड योजना 1998 में आर वी गुप्ता समिति की संस्तुति पर आरंभ हुई और इसे वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा सहकारी बैंक चलाते हैं। यह किसान को बीज, उर्वरक, मजदूरी और अन्य फसल व्यय के लिए एक ही घूमती सीमा देती है, जो वार्षिक समीक्षा के साथ कई वर्ष तक वैध रहती है, जिससे उसे हर मौसम में नया आवेदन नहीं करना पड़ता। यह सीमा अब पशुपालन और मत्स्य पालन तक बढ़ा दी गई है, और इसके अल्पकालिक फसल ऋण पर ब्याज सहायता तथा समय पर चुकाने पर अतिरिक्त छूट मिलती है।
विकल्प A, कृषि क्रेडिट कार्ड, सबसे निकट का जाल है, परंतु योजना का नाम किसान पर है। विकल्प C और D दोनों कॉर्पोरेशन पर समाप्त होते हैं, जिससे वे किसी संस्था के नाम बन जाते हैं, साख साधन के नहीं।
स्वयं सहायता समूह का कौन सा मॉडल अंतरराष्ट्रीय मॉडल भी कहलाता है?
- A.सीडीएफ मॉडल
- B.सेवा मॉडल
- C.सपाप मॉडल
- D.डीडब्ल्यूसीआरए मॉडल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सपाप मॉडल
व्याख्या
सही उत्तर C, सपाप मॉडल है। दक्षिण एशिया गरीबी उपशमन कार्यक्रम का मॉडल स्वयं सहायता समूह निर्माण का अंतरराष्ट्रीय मॉडल कहलाता है, क्योंकि यह संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से चला और दक्षिण एशिया के कई देशों में एक ही रूपरेखा पर लागू हुआ, जिसका आरंभ भारत में आंध्र प्रदेश के जिलों से हुआ। यह तीन स्तरीय ढाँचा बनाता है, नीचे निर्धन महिलाओं का समूह, उसके ऊपर ग्राम संगठन और मंडल स्तर पर महासंघ, जिसमें पहले बचत और उसके बाद साख होती है।
विकल्प A, सीडीएफ मॉडल, आंध्र प्रदेश में सहकारी विकास प्रतिष्ठान का कार्य है, जो सहकारी बचत का मॉडल है। विकल्प B, सेवा मॉडल, अहमदाबाद की स्वरोजगार महिला संस्था और उसके बैंक से निकला। विकल्प D, डीडब्ल्यूसीआरए अर्थात ग्रामीण क्षेत्रों में महिला और बाल विकास, 1982 का सरकारी कार्यक्रम था और घरेलू मॉडल है।
भारत के बैंकों ने नए अस्थिर दर ऋणों का मूल्य निधियों की सीमांत लागत आधारित ऋण दर एमसीएलआर पर किस तिथि से तय करना आरंभ किया?
- A.1 जुलाई 2010
- B.1 अप्रैल 2016
- C.1 अक्टूबर 2019
- D.1 अप्रैल 2003
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 अप्रैल 2016
व्याख्या
सही उत्तर B, 1 अप्रैल 2016 है। रिज़र्व बैंक ने एमसीएलआर इसी तिथि से लागू की, जिससे ऋण का मूल्य निधि जुटाने की सीमांत अर्थात नवीनतम लागत के अनुसार चले, पुरानी जमाओं की औसत लागत के अनुसार नहीं। एमसीएलआर जमाओं तथा उधारों की सीमांत लागत, नकद आरक्षित अनुपात के लिए रखे शेष पर ऋणात्मक वहन, परिचालन लागत और अवधि प्रीमियम से बनती है, और प्रत्येक बैंक इसे रातोंरात से एक वर्ष तक की अवधियों के लिए प्रकाशित करता है।
विकल्प A, 1 जुलाई 2010, वह तिथि है जब आधार दर लागू हुई। विकल्प C, 1 अक्टूबर 2019, वह तिथि है जब नए अस्थिर दर खुदरा और लघु व्यवसाय ऋणों को रेपो जैसे बाह्य बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य हुआ। विकल्प D, 2003, बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट व्यवस्था के आने के वर्ष के निकट है। तीनों तिथियाँ क्रम से 2010, 2016 और 2019 हैं।
रिज़र्व बैंक द्वारा जुलाई 2010 में लागू आधार दर व्यवस्था ने निम्नलिखित में से किसका स्थान लिया?
- A.निधियों की सीमांत लागत आधारित ऋण दर
- B.बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट
- C.बाह्य बेंचमार्क ऋण दर
- D.बैंक दर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट
व्याख्या
सही उत्तर B, बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट है। बीपीएलआर व्यवस्था में बैंक अपने सर्वोत्तम ग्राहकों के लिए एक प्राइम दर घोषित करता था और फिर अनेक उधारकर्ताओं को उससे नीचे ऋण देता था, इसलिए घोषित दर से ग्राहक को बहुत कम पता चलता था और ऋण बही पारदर्शी नहीं रहती थी। आधार दर, जो 1 जुलाई 2010 से लागू हुई, वह न्यूनतम सीमा थी जिसके नीचे कोई बैंक ऋण नहीं दे सकता था, कुछ अपवादों को छोड़कर जैसे अपनी ही जमाओं के विरुद्ध ऋण और अपने कर्मचारियों को ऋण।
विकल्प A, एमसीएलआर, आधार दर के चार वर्ष बाद आई, पहले नहीं। विकल्प C, बाह्य बेंचमार्क ऋण दर, 2019 में आई और तीनों व्यवस्थाओं में नवीनतम है। विकल्प D, बैंक दर, रिज़र्व बैंक की नीतिगत दर है जो सीमांत स्थायी सुविधा से संबद्ध है और किसी बैंक का अपना ऋण बेंचमार्क नहीं है।
चल संपत्ति पर बनने वाले निम्नलिखित प्रभारों में किसमें माल का कब्ज़ा उधारकर्ता के पास ही रहता है?
- A.गिरवी
- B.दृष्टिबंधक
- C.धारणाधिकार
- D.बंधक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दृष्टिबंधक
व्याख्या
सही उत्तर B, दृष्टिबंधक है। दृष्टिबंधक में चल संपत्ति पर प्रभार बनता है, जैसे वित्तपोषित वाहन या व्यापारी की दुकान का स्टॉक, और माल उधारकर्ता के ही पास रहता है तथा वह उसका उपयोग करता रहता है। चूँकि ऋणदाता के पास कब्ज़ा नहीं है, उसे बेचने से पहले परिसंपत्ति अधिकार में लेनी पड़ती है, इसीलिए चूक करने वाले उधारकर्ता की कार जब्त करनी पड़ती है, और 2002 का सरफेसी अधिनियम प्रतिभूत लेनदार को यही शक्ति देता है।
विकल्प A, गिरवी, वह प्रभार है जिसमें माल ऋणदाता को सौंपा जाता है, जैसे बैंक की तिजोरी में रखा स्वर्ण, और यह 1872 के भारतीय संविदा अधिनियम से शासित है। विकल्प C, धारणाधिकार, ऋणदाता का वह अधिकार है जिससे वह पहले से अपने पास आए माल या प्रतिभूति को बकाया चुकने तक रोक सकता है। विकल्प D, बंधक, अचल संपत्ति पर प्रभार है, इसलिए वह इस समूह में ही नहीं आता।