सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में काम करने वाली एनबीएफसी के लिए अलग श्रेणी (एनबीएफसी-एमएफआई) किस समिति की सिफारिशों के आधार पर बनाई गई थी?
- A.नरसिम्हन समिति
- B.मालेगम समिति
- C.दीपक पारेख समिति
- D.पी.के. मोहंती समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मालेगम समिति
व्याख्या
सही उत्तर है B, मालेगम समिति। सूक्ष्म वित्त कारोबार में बहुत ऊँची ब्याज दरों और कठोर वसूली की शिकायतों के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर 2010 में अपने केंद्रीय बोर्ड की यह उप-समिति वाई. एच. मालेगम की अध्यक्षता में बनाई। जनवरी 2011 की इसकी रिपोर्ट में कहा गया कि सूक्ष्म वित्त देने वाली कंपनियों को अलग वर्ग माना जाए, और इसके बाद रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी-एमएफआई श्रेणी बनाई, जिसमें अर्हक परिसंपत्तियों का हिस्सा, कर्जदार की आय और कर्ज की सीमा तथा मार्जिन और ब्याज दर की अधिकतम हद तय की गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1991 और 1998 की नरसिम्हम समितियाँ बैंकिंग सुधार, पूँजी पर्याप्तता और फँसे कर्जों पर थीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि दीपक पारेख समिति ने अवसंरचना के वित्तपोषण पर रिपोर्ट दी थी। विकल्प D गलत है, क्योंकि 2020 का पी. के. मोहंती कार्यसमूह निजी बैंकों के स्वामित्व और ढाँचे पर था। परीक्षा टिप: मालेगम यानी सूक्ष्म वित्त, नरसिम्हम यानी बैंकिंग सुधार।