इल्बर्ट बिल के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- A.इसमें प्रस्ताव था कि भारतीय मजिस्ट्रेट आपराधिक मामलों में यूरोपीयों पर मुकदमा चला सकेंगे।
- B.इसने भारतीयों को यूरोपीयों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दायर करने की अनुमति दी।
- C.इसने भारतीय आई.सी.एस. अधिकारियों को अदालतों में यूरोपीयों पर मुकदमा चलाने का अधिकार दिया।
- D.यह इल्बर्ट द्वारा राष्ट्रवादियों के समर्थन में चलाया गया आंदोलन था।
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इसमें प्रस्ताव था कि भारतीय मजिस्ट्रेट आपराधिक मामलों में यूरोपीयों पर मुकदमा चला सकेंगे।
व्याख्या
सही उत्तर है A, इसमें प्रस्ताव था कि भारतीय मजिस्ट्रेट आपराधिक मामलों में यूरोपीयों पर मुकदमा चला सकेंगे। 1883 का इल्बर्ट बिल उस नियम को हटाना चाहता था जिसके अनुसार यूरोपीय ब्रिटिश नागरिकों का मुकदमा केवल यूरोपीय न्यायाधीश ही सुन सकते थे। इसे लॉर्ड रिपन की परिषद के विधि सदस्य सर कोर्टनी इल्बर्ट ने तैयार किया था और इससे भारतीय जिला मजिस्ट्रेट तथा सेशन जज यूरोपीयों के आपराधिक मामले सुन सकते। भारत में रह रहे यूरोपीय समुदाय ने इतना तीखा विरोध किया कि 1884 में बिल को कमजोर कर दिया गया और यूरोपीय को ऐसी जूरी से सुनवाई का अधिकार मिला जिसके आधे सदस्य यूरोपीय हों। इस प्रकरण ने शिक्षित भारतीयों को संगठन का महत्व सिखाया और इसे 1885 में कांग्रेस की स्थापना के तात्कालिक कारणों में गिना जाता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि ऐसे मुकदमे भारतीय पहले से दायर कर सकते थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि बिल आम तौर पर भारतीय न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की बात करता था, केवल आई.सी.एस. अधिकारियों की नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि इल्बर्ट ने बिल लिखा था; आंदोलन तो इसके विरुद्ध हुआ। परीक्षा टिप: इल्बर्ट बिल 1883, लॉर्ड रिपन, कांग्रेस 1885।