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यूपीआई पी2पी और 96% व्यापारी लेन-देन पर निःशुल्क रहेगा

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नए एमडीआर ढांचे में सभी व्यक्तिगत लेन-देन और लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन पर यूपीआई निःशुल्क बना रहेगा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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यूपीआई पी2पी और 96% व्यापारी लेन-देन पर निःशुल्क रहेगा — GK24 title card

चर्चा में क्यों

15 सितंबर 2026 को वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नए यूपीआई ढांचे में सभी व्यक्तिगत लेन-देन तथा लगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन एमडीआर से मुक्त रहेंगे।

वित्त मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को नए यूपीआई ढांचे पर स्पष्टीकरण जारी किया। संदेश यह है कि आम उपयोगकर्ता को कुछ नहीं देना होगा। पर्सन-टू-पर्सन के सभी लेन-देन पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे, चाहे राशि कितनी भी हो। व्यापारियों को 2,000 रुपये तक के भुगतान भी निःशुल्क रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए शून्य एमडीआर वाले लेन-देन भी इसी श्रेणी में हैं।

एमडीआर क्या है और क्या नहीं

एमडीआर का अर्थ है मर्चेंट डिस्काउंट रेट। विज्ञप्ति के अनुसार यह न तो कोई कर है और न ही सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क। यह भुगतान प्रणाली के प्रतिभागियों के बीच बांटा जाता है। इनमें बैंक और भुगतान एप्लिकेशन प्रदाता शामिल हैं। यह राशि यूपीआई के संचालन और विस्तार में सहयोग करती है।

शुल्क किस पर लगेगा

भुगतान का प्रकारशुल्क
व्यक्ति से व्यक्ति, कोई भी राशिनिःशुल्क
2,000 रुपये तक का व्यापारी भुगताननिःशुल्क
क्यूआर कोड से प्रति माह 1 लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारीशून्य एमडीआर
2,000 रुपये से अधिक का व्यापारी भुगतान0.4 प्रतिशत, 75,000 रुपये और उससे अधिक पर अधिकतम 300 रुपये
मूलभूत क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिकप्रति लेन-देन एकसमान 5 रुपये
म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियां, स्टॉकब्रोकर एवं डीलर0.02 प्रतिशत, अधिकतम 300 रुपये

मूलभूत क्षेत्रों में रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट शामिल हैं। कुल लेन-देन मूल्य का 70 प्रतिशत व्यक्तिगत लेन-देन से आता है और वह पूरा हिस्सा शुल्क से बाहर रहेगा।

ग्राहकों की सुरक्षा

विज्ञप्ति में स्पष्ट कहा गया है कि ग्राहक एमडीआर नहीं देंगे। बैंकों से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि व्यापारी यह लागत ग्राहकों पर न डालें। एप्लिकेशन प्रदाता प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे शुल्क नहीं लगा सकते। लोगों को असीमित निःशुल्क उपयोग मिलता रहेगा, न कोई मासिक कोटा और न कोई सीमा। बैंकों तथा एनपीसीआई की 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की दैनिक सीमाएं जोखिम प्रबंधन के लिए हैं, शुल्क की सीमाएं नहीं।

दायरा और उद्देश्य

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह शुल्क केवल लगभग 4 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन पर लगेगा। इसीलिए लगभग 96 प्रतिशत लेन-देन अप्रभावित रहेंगे। कुल एमडीआर संग्रह के 5 प्रतिशत के बराबर राशि से एक समर्पित कोष बनेगा, जो छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई फैलाएगा। यह ढांचा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 पर आधारित है।

महत्वपूर्ण तथ्य

घोषणावित्त मंत्रालय, 15 सितंबर 2026
व्यक्तिगत लेन-देनपूरी तरह निःशुल्क, किसी भी राशि पर
निःशुल्क व्यापारी सीमा2,000 रुपये तक के भुगतान
सीमा से ऊपर एमडीआर0.4 प्रतिशत, 75,000 रुपये और अधिक पर 300 रुपये तक सीमित
मूलभूत क्षेत्र2,000 रुपये से अधिक पर प्रति लेन-देन 5 रुपये
पूंजी बाजार भुगतान0.02 प्रतिशत, अधिकतम 300 रुपये
छोटे व्यापारीक्यूआर कोड से प्रति माह 1 लाख रुपये तक शून्य एमडीआर
दायरालगभग 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन अप्रभावित
आधार कानूनभुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
सहायता कोषकुल एमडीआर संग्रह के 5 प्रतिशत के बराबर

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि एमडीआर कर नहीं है, व्यापारी भुगतान पर 2,000 रुपये तक छूट है, इससे ऊपर 0.4 प्रतिशत दर तथा 300 रुपये की सीमा है, मूलभूत क्षेत्रों में 5 रुपये एकसमान शुल्क है और ढांचा भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 पर आधारित है।

अभ्यास प्रश्न

Q1.बैंकिंग और वित्तआसान

नए ढांचे में यूपीआई से किए गए व्यापारी भुगतान कितनी राशि तक एमडीआर से मुक्त रहेंगे?

  1. A.1,000 रुपये
  2. B.2,000 रुपये
  3. C.5,000 रुपये
  4. D.10,000 रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2,000 रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 2,000 रुपये है। इस राशि तक का प्रत्येक पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतान मर्चेंट डिस्काउंट रेट से मुक्त रहेगा और ग्राहकों को ऐसे भुगतान पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विज्ञप्ति इसी के आधार पर बताती है कि लगभग छियानबे प्रतिशत व्यापारी लेन-देन अप्रभावित क्यों रहेंगे। ये लेन-देन या तो इस सीमा से कम हैं या छोटे व्यापारियों के लिए शून्य शुल्क वाली व्यवस्था में आते हैं। विकल्प ए गलत है, क्योंकि ऐसी कोई सीमा ढांचे में तय नहीं की गई है। विकल्प सी और विकल्प डी भी इसी कारण गलत हैं और ये वही गोल आंकड़े हैं जिनका अनुमान अभ्यर्थी तब लगाते हैं जब सही सीमा याद न हो। सीमा को उसके ऊपर लगने वाली दर के साथ जोड़कर याद रखें।

Q2.बैंकिंग और वित्तमध्यम

नया यूपीआई ढांचा किस अधिनियम के अंतर्गत लाया गया है?

  1. A.बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949
  2. B.भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
  3. C.उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
  4. D.सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007

व्याख्या

सही उत्तर भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 है, जिसे विज्ञप्ति में ढांचे का आधार बताया गया है। यह ढांचा लागू दरों, परिचालन व्यवस्थाओं और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर यूपीआई संचालन समिति के विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लाया गया। विकल्प ए गलत है, क्योंकि वह अधिनियम बैंकों के विनियमन से जुड़ा है, भुगतान प्रणालियों से नहीं। विकल्प सी गलत है, क्योंकि उपभोक्ता संरक्षण कानून अनुचित व्यापार व्यवहार और भ्रामक विज्ञापनों से जुड़ा है, किसी भुगतान शुल्क की संरचना से नहीं। विकल्प डी गलत है, क्योंकि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और साइबर अपराधों को देखता है। यह भी याद रखें कि यह ढांचा वित्त संबंधी स्थायी समिति की सिफारिश के अनुरूप बताया गया है, जिसमें व्यवहार्य राजस्व के महत्व पर बल दिया गया था। ढांचे का उद्देश्य यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना और साथ ही आम लोगों तथा छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क से बचाना है।

Q3.बैंकिंग और वित्तकठिन

रेलवे, दूरसंचार और बीमा जैसे मूलभूत क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर कितना एमडीआर लगेगा?

  1. A.प्रति लेन-देन एकसमान 5 रुपये
  2. B.लेन-देन मूल्य का 0.4 प्रतिशत
  3. C.लेन-देन मूल्य का 0.02 प्रतिशत
  4. D.कोई शुल्क नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्रति लेन-देन एकसमान 5 रुपये

व्याख्या

सही उत्तर प्रति लेन-देन एकसमान पांच रुपये है। विज्ञप्ति इसका कारण भी बताती है। एक निश्चित राशि महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं और कम लाभ पर चलने वाले कारोबारों को लागत की निश्चितता देती है, जो प्रतिशत आधारित शुल्क से नहीं मिलती। विकल्प बी सीमा से ऊपर के सामान्य व्यापारी भुगतान की दर है और इन नामित क्षेत्रों के बाहर लागू होती है, इसलिए यही सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। विकल्प सी म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों से जुड़े भुगतानों की बहुत कम दर है, जो खुदरा निवेशकों को औपचारिक बाजार में बनाए रखने के लिए तय की गई है। विकल्प डी गलत है, क्योंकि ये क्षेत्र छूट में नहीं हैं, बस उन पर प्रतिशत के बदले एकसमान राशि लगती है। नामित क्षेत्रों की सूची भी याद रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या दो व्यक्तियों के बीच यूपीआई लेन-देन पर कोई शुल्क लगेगा?

नहीं। सभी पर्सन-टू-पर्सन यूपीआई लेन-देन राशि की परवाह किए बिना पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे और पैसा भेजने या प्राप्त करने पर कोई लेन-देन शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क या अन्य शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी भुगतान पर एमडीआर कितना है?

0.4 प्रतिशत का मामूली एमडीआर लगेगा। 75,000 रुपये और उससे अधिक के लेन-देन पर यह प्रति लेन-देन 300 रुपये तक सीमित रहेगा। म्यूचुअल फंड और प्रतिभूतियों से जुड़े भुगतान पर 0.02 प्रतिशत लगेगा।

क्या एमडीआर सरकारी कर है?

नहीं। विज्ञप्ति के अनुसार एमडीआर न तो कर है और न ही सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क। यह बैंकों और भुगतान एप्लिकेशन प्रदाताओं सहित भुगतान प्रणाली के प्रतिभागियों के बीच वितरित होता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLबैंकिंग