विकसित भारत 2047 के लिए मजबूत सांख्यिकी जरूरी: पी के मिश्रा
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा ने एमओएसपीआई के राज्य सचिवों के सम्मेलन में कहा कि विकसित भारत 2047 के लिए मजबूत सांख्यिकीय तंत्र आवश्यक है।

चर्चा में क्यों
13 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने नई दिल्ली में एमओएसपीआई द्वारा आयोजित राज्यों के योजना, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी सचिवों के सम्मेलन में मुख्य भाषण दिया।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में राज्यों के योजना, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी सचिवों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया। यह सम्मेलन सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने आयोजित किया।
उन्होंने क्या कहा
डॉ. मिश्रा ने कहा कि ठोस सांख्यिकीय तंत्र साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने का आधार है। उनके अनुसार सांख्यिकी, आंकड़े, तकनीक, नियोजन और शासन देश की विकास यात्रा में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और तंत्र ऐसा होना चाहिए जो सरकारों को राज्यों तथा जिलों में प्रगति मापने, नीतियों के नतीजे आंकने और यह देखने में मदद करे कि सार्वजनिक धन कहां परिणाम नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि जिसे मापा नहीं जा सकता, उसका प्रभावी प्रबंधन नहीं हो सकता, और जिसका प्रबंधन न हो, उसमें टिकाऊ बदलाव नहीं आ सकता। उन्होंने सांख्यिकी को प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सामरिक राष्ट्रीय संपत्ति बताया।
बदलती अर्थव्यवस्था की माप
आर्थिक माप को आधुनिक बनाने के संदर्भ में उन्होंने 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की संशोधित श्रृंखलाओं का उल्लेख किया और इसे अधिक डिजिटल तथा औपचारिक होती अर्थव्यवस्था के अनुरूप पद्धतियां रखने की दिशा में कदम कहा।
राज्य, तकनीक और संघवाद
उन्होंने कहा कि भारत की विकास गाथा असल में उसके राज्यों की गाथा है, जहां योजनाएं लागू होती हैं और नागरिक नतीजा महसूस करते हैं, इसलिए राज्यों के सांख्यिकीय तंत्र में संस्थागत क्षमता और केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, भू-स्थानिक प्रणालियां, उपग्रह चित्र और उन्नत विश्लेषण सरकारी आंकड़ों को तेज तथा उपयोगी बना सकते हैं, पर गुणवत्ता की जगह नहीं ले सकते और उन्हें पारदर्शिता, निजता, सुरक्षा तथा जवाबदेही के दायरे में रहना होगा। उन्होंने चेताया कि तेजी सटीकता की कीमत पर और आंकड़ों का अधिक उपयोग गोपनीयता की कीमत पर नहीं हो सकता।
उन्होंने क्या मांगा
सांख्यिकी को सहकारी संघवाद का साधन बताते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि 2047 की ओर बढ़ते देश में केवल राष्ट्रीय औसत से काम नहीं चलेगा और राज्य, जिला तथा स्थानीय स्तर के विस्तृत आंकड़े जरूरी होंगे। उन्होंने एमओएसपीआई, राज्यों के सांख्यिकीय कार्यालयों, वित्त, योजना और सूचना प्रौद्योगिकी विभागों, नीति आयोग तथा शिक्षण संस्थानों से मिलकर भरोसेमंद, पारदर्शी और नीति के लिए उपयोगी ढांचा खड़ा करने का आह्वान किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्यक्रम | राज्यों के योजना, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी सचिवों का सम्मेलन |
|---|---|
| आयोजक | सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) |
| तिथि और स्थान | 13 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली |
| मुख्य वक्ता | डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव |
| लक्ष्य | विकसित भारत 2047 |
| नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला का आधार वर्ष | 2022-23 |
| अन्य संशोधित श्रृंखलाएं | उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक |
| सांख्यिकी को बताया गया | सामरिक राष्ट्रीय संपत्ति और सहकारी संघवाद का साधन |
परीक्षा की दृष्टि से
वक्ता और उनका पद (डॉ. पी. के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव), आयोजक मंत्रालय (एमओएसपीआई), सम्मेलन का नाम, नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला का आधार वर्ष (2022-23), सीपीआई तथा आईआईपी का संशोधन, विकसित भारत 2047 का लक्ष्य और सांख्यिकी को सामरिक राष्ट्रीय संपत्ति कहने वाली बात याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
अक्टूबर 2026 में एमओएसपीआई द्वारा आयोजित राज्यों के योजना, वित्त और आईटी सचिवों के सम्मेलन में मुख्य भाषण किसने दिया?
- A.केंद्रीय वित्त मंत्री
- B.प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
- C.नीति आयोग के उपाध्यक्ष
- D.भारत के मुख्य सांख्यिकीविद्
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा हैं, जिन्होंने नई दिल्ली में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाषण दिया। उन्होंने कहा कि साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मजबूत सांख्यिकीय तंत्र आवश्यक है, तथा सांख्यिकी को प्रशासनिक औपचारिकता की जगह सामरिक राष्ट्रीय संपत्ति बताया। विकल्प A यानी केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस सभा को संबोधित नहीं किया, भले सम्मेलन में राज्यों के वित्त सचिव शामिल थे। विकल्प C यानी नीति आयोग के उपाध्यक्ष भ्रम पैदा करता है; भाषण में नीति आयोग का नाम उन संस्थाओं में लिया गया जिनके साझा प्रयास की जरूरत है, वक्ता के रूप में नहीं। विकल्प D यानी मुख्य सांख्यिकीविद् सांख्यिकीय तंत्र के प्रमुख होते हैं, पर घोषणा में उन्हें मुख्य वक्ता नहीं बताया गया।
सम्मेलन में उल्लिखित नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला का आधार वर्ष कौन सा है?
- A.2011-12
- B.2017-18
- C.2022-23
- D.2024-25
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 2022-23 है। अपने भाषण में डॉ. पी. के. मिश्रा ने 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की संशोधित श्रृंखलाओं का उल्लेख किया और इसे अधिक डिजिटल, औपचारिक तथा परस्पर जुड़ी होती अर्थव्यवस्था के अनुरूप सांख्यिकीय पद्धतियां रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम कहा। विकल्प A यानी 2011-12 पुरानी राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला का आधार वर्ष था, इसलिए वही सबसे लुभावना गलत विकल्प है। विकल्प B और D में दिए वर्ष इस संशोधन के आधार के रूप में नहीं अपनाए गए। आधार वर्ष इसलिए मायने रखता है कि उस वर्ष की आर्थिक संरचना वृद्धि और कीमतें मापने के भार तय करती है, इसलिए पुराना आधार अनुमानों को वास्तविकता से दूर कर देता है। उन्होंने राज्यों के सांख्यिकीय तंत्र की क्षमता और केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाने की बात भी कही।
सरकारी आंकड़ों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत विश्लेषण के बारे में डॉ. पी. के. मिश्रा ने क्या कहा?
- A.ये सर्वेक्षण आधारित सांख्यिकी को पूरी तरह बदल सकते हैं
- B.ये सांख्यिकी को मजबूत कर सकते हैं, पर गुणवत्ता की जगह नहीं ले सकते
- C.सरकारी आंकड़ों में इनका उपयोग नहीं होना चाहिए
- D.ये केवल जनगणना के काम में उपयोगी हैं
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर यह है कि ये सांख्यिकी को मजबूत कर सकते हैं, पर गुणवत्ता की जगह नहीं ले सकते। डॉ. मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, भू-स्थानिक प्रणालियां, उपग्रह चित्र और उन्नत विश्लेषण सरकारी आंकड़ों की समयबद्धता, सटीकता तथा उपयोगिता सुधारने के वास्तविक अवसर देते हैं, फिर भी तकनीकी प्रगति को सांख्यिकीय गुणवत्ता, पारदर्शिता, निजता, सुरक्षा और जवाबदेही के दायरे में रहना होगा। उन्होंने साफ कहा कि तेजी सटीकता की कीमत पर और आंकड़ों का अधिक उपयोग गोपनीयता की कीमत पर नहीं हो सकता। विकल्प A उनकी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहता है, क्योंकि उन्होंने इन उपकरणों को स्थापित सांख्यिकीय काम का विकल्प नहीं बताया। विकल्प C उनकी बात के उलट है, क्योंकि उन्होंने इनके उपयोग का स्वागत किया। विकल्प D इनका दायरा जनगणना तक सीमित कर देता है, जो उन्होंने कभी नहीं कहा। उन्होंने सांख्यिकी को सहकारी संघवाद का साधन भी बताया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
13 अक्टूबर 2026 को एमओएसपीआई के सम्मेलन में मुख्य भाषण किसने दिया?
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने। उन्होंने नई दिल्ली में राज्यों के योजना, वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी सचिवों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाषण दिया।
नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला का आधार वर्ष क्या है?
2022-23। डॉ. मिश्रा ने इसे तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की संशोधित श्रृंखलाओं को बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप पद्धतियां ढालने का कदम बताया।
सरकारी आंकड़ों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर उन्होंने क्या कहा?
उनके अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, भू-स्थानिक प्रणालियां और उपग्रह चित्र समयबद्धता तथा सटीकता सुधार सकते हैं, पर सांख्यिकीय गुणवत्ता की जगह नहीं ले सकते और पारदर्शिता, निजता तथा जवाबदेही जरूरी है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322662 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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