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GK24
राष्ट्रीयकठिन

सम्मेलन में उल्लिखित नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला का आधार वर्ष कौन सा है?

  1. A.2011-12
  2. B.2017-18
  3. C.2022-23
  4. D.2024-25

सही उत्तर

C. 2022-23

व्याख्या

सही उत्तर 2022-23 है। अपने भाषण में डॉ. पी. के. मिश्रा ने 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार नई राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की संशोधित श्रृंखलाओं का उल्लेख किया और इसे अधिक डिजिटल, औपचारिक तथा परस्पर जुड़ी होती अर्थव्यवस्था के अनुरूप सांख्यिकीय पद्धतियां रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम कहा। विकल्प A यानी 2011-12 पुरानी राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला का आधार वर्ष था, इसलिए वही सबसे लुभावना गलत विकल्प है। विकल्प B और D में दिए वर्ष इस संशोधन के आधार के रूप में नहीं अपनाए गए। आधार वर्ष इसलिए मायने रखता है कि उस वर्ष की आर्थिक संरचना वृद्धि और कीमतें मापने के भार तय करती है, इसलिए पुराना आधार अनुमानों को वास्तविकता से दूर कर देता है। उन्होंने राज्यों के सांख्यिकीय तंत्र की क्षमता और केंद्र के साथ समन्वय बढ़ाने की बात भी कही।

पूरा लेख पढ़ें: विकसित भारत 2047 के लिए मजबूत सांख्यिकी जरूरी: पी के मिश्रा

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Q1.राष्ट्रीयमध्यम

अक्टूबर 2026 में एमओएसपीआई द्वारा आयोजित राज्यों के योजना, वित्त और आईटी सचिवों के सम्मेलन में मुख्य भाषण किसने दिया?

  1. A.केंद्रीय वित्त मंत्री
  2. B.प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
  3. C.नीति आयोग के उपाध्यक्ष
  4. D.भारत के मुख्य सांख्यिकीविद्
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव

व्याख्या

सही उत्तर प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा हैं, जिन्होंने नई दिल्ली में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाषण दिया। उन्होंने कहा कि साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मजबूत सांख्यिकीय तंत्र आवश्यक है, तथा सांख्यिकी को प्रशासनिक औपचारिकता की जगह सामरिक राष्ट्रीय संपत्ति बताया। विकल्प A यानी केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस सभा को संबोधित नहीं किया, भले सम्मेलन में राज्यों के वित्त सचिव शामिल थे। विकल्प C यानी नीति आयोग के उपाध्यक्ष भ्रम पैदा करता है; भाषण में नीति आयोग का नाम उन संस्थाओं में लिया गया जिनके साझा प्रयास की जरूरत है, वक्ता के रूप में नहीं। विकल्प D यानी मुख्य सांख्यिकीविद् सांख्यिकीय तंत्र के प्रमुख होते हैं, पर घोषणा में उन्हें मुख्य वक्ता नहीं बताया गया।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

सरकारी आंकड़ों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत विश्लेषण के बारे में डॉ. पी. के. मिश्रा ने क्या कहा?

  1. A.ये सर्वेक्षण आधारित सांख्यिकी को पूरी तरह बदल सकते हैं
  2. B.ये सांख्यिकी को मजबूत कर सकते हैं, पर गुणवत्ता की जगह नहीं ले सकते
  3. C.सरकारी आंकड़ों में इनका उपयोग नहीं होना चाहिए
  4. D.ये केवल जनगणना के काम में उपयोगी हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ये सांख्यिकी को मजबूत कर सकते हैं, पर गुणवत्ता की जगह नहीं ले सकते

व्याख्या

सही उत्तर यह है कि ये सांख्यिकी को मजबूत कर सकते हैं, पर गुणवत्ता की जगह नहीं ले सकते। डॉ. मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, भू-स्थानिक प्रणालियां, उपग्रह चित्र और उन्नत विश्लेषण सरकारी आंकड़ों की समयबद्धता, सटीकता तथा उपयोगिता सुधारने के वास्तविक अवसर देते हैं, फिर भी तकनीकी प्रगति को सांख्यिकीय गुणवत्ता, पारदर्शिता, निजता, सुरक्षा और जवाबदेही के दायरे में रहना होगा। उन्होंने साफ कहा कि तेजी सटीकता की कीमत पर और आंकड़ों का अधिक उपयोग गोपनीयता की कीमत पर नहीं हो सकता। विकल्प A उनकी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहता है, क्योंकि उन्होंने इन उपकरणों को स्थापित सांख्यिकीय काम का विकल्प नहीं बताया। विकल्प C उनकी बात के उलट है, क्योंकि उन्होंने इनके उपयोग का स्वागत किया। विकल्प D इनका दायरा जनगणना तक सीमित कर देता है, जो उन्होंने कभी नहीं कहा। उन्होंने सांख्यिकी को सहकारी संघवाद का साधन भी बताया।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

एनएचआरसी के 33वें स्थापना दिवस पर हुए राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय क्या था?

  1. A.जल जीवन का अमृत: जल के अधिकार के माध्यम से मानव गरिमा को आगे बढ़ाना
  2. B.सबके लिए गरिमा: डिजिटल युग में मानवाधिकार
  3. C.स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल, स्वच्छ भविष्य
  4. D.गरीबों के लिए मानवाधिकार और जलवायु न्याय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जल जीवन का अमृत: जल के अधिकार के माध्यम से मानव गरिमा को आगे बढ़ाना

व्याख्या

सही उत्तर जल जीवन का अमृत: जल के अधिकार के माध्यम से मानव गरिमा को आगे बढ़ाना है। आयोग ने अपने स्थापना दिवस समारोह के साथ इसी विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन रखा, जिसमें दो तकनीकी सत्र थे। पहला सत्र जलाशयों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर केंद्रित था तथा दूसरा पेयजल स्रोतों की सुरक्षा पर, ताकि सभी को सुरक्षित और टिकाऊ जल उपलब्ध हो। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने विषय के चयन की सराहना करते हुए कहा कि जल का अधिकार केवल वर्तमान का अधिकार नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति जिम्मेदारी भी है। विकल्प B और D में डिजिटल दुनिया तथा जलवायु और संपन्नता की बात है, जो अध्यक्ष के भाषण में आई थी, पर इनमें से कोई सम्मेलन का घोषित विषय नहीं था। विकल्प C स्वच्छता से जुड़ा सामान्य नारा है और वह भी विषय नहीं था।

Q4.राष्ट्रीयमध्यम

एनएचआरसी के 33वें स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि कौन थे?

  1. A.भारत के राष्ट्रपति
  2. B.भारत के मुख्य न्यायाधीश
  3. C.केंद्रीय गृह मंत्री
  4. D.भारत के उपराष्ट्रपति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत के मुख्य न्यायाधीश

व्याख्या

सही उत्तर भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं, जिन्होंने न्यायमूर्ति सूर्य कांत के रूप में मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में दी गई गरिमा, समानता, स्वतंत्रता और न्याय की प्रतिज्ञा हवालात, अस्पताल के वार्ड और सबसे दूर के गांव तक निभाई जानी चाहिए। उन्होंने आयोग की तुलना उस प्रकाश स्तंभ से की, जो अन्याय की लहरें नहीं रोक सकता, लेकिन अंधेरे में भटके लोगों को राह दिखाता है। उन्होंने आयोग के मोबाइल ऐप की शुरुआत और अभिलेखों के डिजिटलीकरण की सराहना भी की। विकल्प A गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति ने इस समारोह को संबोधित नहीं किया। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस आयोजन में गृह मंत्री की कोई भूमिका नहीं थी। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि उपराष्ट्रपति यहां मुख्य अतिथि नहीं थे। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया था।

Q5.राष्ट्रीयआसान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

  1. A.1990
  2. B.1993
  3. C.1997
  4. D.2000
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1993

व्याख्या

सही उत्तर 1993 है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना इसी वर्ष 12 अक्टूबर को हुई थी, इसलिए आयोग हर साल 12 अक्टूबर को स्थापना दिवस मनाता है। इस बार नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 33वां स्थापना दिवस मनाया गया, जहां जल के अधिकार पर राष्ट्रीय सम्मेलन भी हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि उस समय आयोग अस्तित्व में नहीं था और 33वें स्थापना दिवस से पीछे गिनने पर स्थापना तीन वर्ष बाद पड़ती है। विकल्प C भी इसी गणना से गलत है, क्योंकि उस वर्ष स्थापना मानने पर यह अवसर उनतीसवां स्थापना दिवस होता। विकल्प D स्पष्ट रूप से बाहर हो जाता है, क्योंकि उस वर्ष तक आयोग कई साल से काम कर रहा था और मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतें देख रहा था। स्थापना वर्ष तय करने का सबसे पक्का तरीका मौजूदा वर्ष से संस्करण संख्या घटाना है।