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सोयाबीन किस्मों NRC 268 और NRC 270 से 20 क्विंटल उपज के संकेत

आईसीएआर के इंदौर स्थित सोयाबीन संस्थान की उन्नत किस्मों NRC 268 और NRC 270 ने खराब मौसम के बावजूद लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज के संकेत दिए हैं।

लेखक प्रकाशित · अपडेट · 2 मिनट
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सोयाबीन किस्मों NRC 268 और NRC 270 से 20 क्विंटल उपज के संकेत

चर्चा में क्यों

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 13 अक्टूबर 2026 को बताया कि आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने 9 अक्टूबर 2026 को हुए सोयाबीन कटाई दिवस पर उन्नत किस्मों NRC 268 तथा NRC 270 से लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज के संकेत दर्ज किए।

आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने 9 अक्टूबर 2026 को सोयाबीन कटाई दिवस आयोजित किया, ताकि यह मापा जा सके कि उसकी उन्नत किस्में खेत में कितनी उपज दे सकती हैं। संस्थान में विकसित दो किस्मों, NRC 268 और NRC 270, को परखा गया। प्रत्येक किस्म के एक एकड़ क्षेत्र की कटाई की गई और शुरुआती आंकड़े दोनों किस्मों से लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की ओर संकेत करते हैं।

यह आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है

इस मौसम में परिस्थितियां प्रतिकूल रहीं, जिससे यह आंकड़ा और भी मायने रखता है। देश में सोयाबीन की औसत उपज इस समय करीब 10 से 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, अर्थात ये दोनों किस्में राष्ट्रीय औसत के लगभग दुगुने की ओर इशारा कर रही हैं। इस कवायद से वैज्ञानिक यह आंक सकते हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर उन्नत किस्में कैसा प्रदर्शन करती हैं।

अन्य परीक्षण क्या बताते हैं

संस्थान तथा अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत हुए काम से पता चलता है कि उन्नत किस्मों के साथ उपयुक्त उत्पादन पद्धतियां अपनाने वाले किसान के लिए 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज पहुंच में है। जहां परिस्थितियां अनुकूल हों, वहीं यही तरीका उत्पादन को लगभग 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक ले जा सकता है।

अधिकारियों ने क्या कहा

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने इन शुरुआती आंकड़ों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देश का सोयाबीन उत्पादन बढ़ाने में उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक उत्पादन तरीकों की बड़ी भूमिका है, तथा मौसम को देखते हुए इन दोनों किस्मों के संकेत बहुत उत्साहजनक बताए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण आगे की अनुसंधान रणनीति तय करेगा।

हर वर्ष आंकड़े क्यों जुटाए जाते हैं

इंदौर संस्थान के निदेशक ने बताया कि कटाई दिवस के आंकड़ों का महत्व एक मौसम तक सीमित नहीं है। कई वर्षों तक इन्हें जुटाने और विश्लेषण करने से यह दिखता है कि विभिन्न क्षेत्रों, किस्मों और उत्पादन परिस्थितियों में उत्पादकता कैसे बदलती है, और भविष्य की वृद्धि का अनुमान लगाने का वैज्ञानिक आधार मिलता है। दीर्घकालिक आंकड़े यह भी बताते हैं कि अनुसंधान तथा तकनीक का प्रसार कितना कारगर रहा। संस्थान ऐसे आयोजन नियमित रूप से करता है, जिससे अधिक उपज देने वाली किस्मों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी किसानों तक पहुंचे और अनुसंधान, कृषि विस्तार तथा खेत के बीच कड़ी मजबूत हो।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थानआईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर
आयोजनसोयाबीन कटाई दिवस, 9 अक्टूबर 2026
आंकी गई किस्मेंNRC 268 और NRC 270
कटाई क्षेत्रप्रत्येक किस्म का एक एकड़
संकेतित उपजलगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
वर्तमान राष्ट्रीय औसतलगभग 10 से 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
उन्नत पद्धति से संभव15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
अनुकूल दशा में क्षमतालगभग 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
उल्लिखित परियोजनाअखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना
महानिदेशक, आईसीएआरडॉ. एम. एल. जाट, सचिव, डीएआरई भी

परीक्षा की दृष्टि से

संस्थान आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर, किस्में NRC 268 और NRC 270, आयोजन सोयाबीन कटाई दिवस 9 अक्टूबर 2026, संकेतित उपज लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, राष्ट्रीय औसत 10 से 11 क्विंटल, संभावित सीमा 15 से 20 तथा अनुकूल दशा में 22 से 25, और डॉ. एम. एल. जाट का पद याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

सोयाबीन की उन्नत किस्में NRC 268 और NRC 270 किस संस्थान ने विकसित की हैं?

  1. A.आईसीएआर-भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर
  2. B.आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर
  3. C.आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
  4. D.आईसीएआर-केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर

दोनों किस्में इसी संस्थान में विकसित हुई हैं, जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत काम करता है, और इसी संस्थान ने 9 अक्टूबर 2026 को सोयाबीन कटाई दिवस आयोजित किया जिसमें इनकी उत्पादन क्षमता आंकी गई।

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Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत में सोयाबीन की वर्तमान औसत उत्पादकता कितनी है?

  1. A.लगभग 5 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  2. B.लगभग 10 से 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  3. C.लगभग 18 से 19 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  4. D.लगभग 30 से 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लगभग 10 से 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

यही देश में सोयाबीन की वर्तमान औसत उत्पादकता है और इसी मानक के सामने NRC 268 तथा NRC 270 से मिले लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के संकेत आंके जा रहे हैं।

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Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

सोयाबीन उपज के आंकड़ों पर टिप्पणी करने वाले कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक कौन हैं?

  1. A.डॉ. एम. एल. जाट
  2. B.डॉ. हिमांशु पाठक
  3. C.डॉ. त्रिलोचन महापात्र
  4. D.डॉ. अभिलक्ष लिखी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. डॉ. एम. एल. जाट

वे कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक, दोनों पदों पर हैं, और उन्होंने ही दोनों किस्मों के शुरुआती आंकड़ों का स्वागत किया।

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Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

इंदौर संस्थान के परीक्षणों के साथ किस परियोजना के अंतर्गत सोयाबीन की 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज संभव बताई गई है?

  1. A.राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
  2. B.अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना
  3. C.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
  4. D.खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना

आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान और इस समन्वित परियोजना के अंतर्गत देशभर में हुए अनुसंधान तथा परीक्षण बताते हैं कि उन्नत किस्मों के साथ उपयुक्त उत्पादन तकनीकों को अपनाकर 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज प्राप्त की जा सकती है, और अनुकूल परिस्थितियों में उत्पादन लगभग 22 से 25…

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोयाबीन की किस्में NRC 268 और NRC 270 किस संस्थान ने विकसित की हैं?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत आईसीएआर-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने दोनों किस्में विकसित की हैं और 9 अक्टूबर 2026 को सोयाबीन कटाई दिवस पर उनका आकलन किया।

इन दोनों किस्मों से कितनी उपज के संकेत मिले?

प्रत्येक किस्म के एक एकड़ की कटाई से मिले शुरुआती आंकड़े लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताते हैं, जो उल्लेखनीय है क्योंकि मौसम प्रतिकूल रहा और देश की वर्तमान औसत उपज करीब 10 से 11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

परीक्षणों के अनुसार भारत में सोयाबीन की कितनी उपज संभव है?

संस्थान तथा अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना के अनुसंधान बताते हैं कि उन्नत किस्मों और उपयुक्त उत्पादन तकनीकों से 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिल सकता है, और अनुकूल परिस्थितियों में यह लगभग 22 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक जा सकता है।

संस्थान सोयाबीन कटाई दिवस क्यों आयोजित करता है?

विभिन्न किस्मों की वास्तविक उत्पादन क्षमता आंकने, उन्नत तकनीकों का प्रभाव समझने और किसानों तक अधिक उपज वाली किस्मों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी पहुंचाने के लिए। कई वर्षों के आंकड़े उत्पादकता की प्रगति आंकने का वैज्ञानिक आधार देते हैं।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 13 अक्टूबर 2026

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