राष्ट्रीय एससी-एसटी हब के तहत वर्ष 2025-26 में एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से कितनी खरीद हुई?
- A.99.37 करोड़ रुपये
- B.356.10 करोड़ रुपये
- C.1,013.42 करोड़ रुपये
- D.4,013.42 करोड़ रुपये
सही उत्तर
D. 4,013.42 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 4,013.42 करोड़ रुपये है, जो वर्ष 2025-26 में 12,524 सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीदा गया। यह आंकड़ा इसलिए अहम है कि यह 2015-16 के 99.37 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 39 गुना वृद्धि दिखाता है, यानी विकल्प A शुरुआती बिंदु है, ताजा आंकड़ा नहीं। विकल्प B यानी 356.10 करोड़ रुपये विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना के तहत 2016 से मार्च 2026 तक दी गई राशि है, जिससे 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिलों में 3,160 उद्यमों को मदद मिली, इसलिए वह एक घटक का आंकड़ा है, कुल खरीद का नहीं। विकल्प C आधा-अधूरा याद रखने वालों को फंसाने के लिए रखा गया है। इसके साथ यह नीति भी याद रखें कि केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और सीपीएसई की सालाना खरीद का 25 प्रतिशत एमएसई से और कुल खरीद का 4 प्रतिशत एससी/एसटी उद्यमों से होना चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: राष्ट्रीय एससी-एसटी हब: खरीद करीब 39 गुना बढ़ी
अभ्यास प्रश्न
राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना किस संस्था के जरिये लागू की जाती है?
- A.भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक
- B.राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम
- C.खादी और ग्रामोद्योग आयोग
- D.राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम
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व्याख्या
सही उत्तर राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम है। राष्ट्रीय एससी-एसटी हब 18 अक्टूबर 2016 को शुरू हुआ था और इसे एनएसआईसी के जरिये लागू किया जाता है। यही निगम एकल बिंदु पंजीकरण योजना भी चलाता है, जिसमें पंजीकृत सूक्ष्म और लघु उद्यमों को निविदा दस्तावेज मुफ्त मिलते हैं और बयाना राशि जमा करने से छूट मिलती है। विकल्प A यानी भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक लघु उद्यम क्षेत्र के लिए विकास वित्त संस्थान है और उसे कर्ज देता है, पर इस योजना को लागू करने वाली संस्था वह नहीं है। विकल्प C यानी खादी और ग्रामोद्योग आयोग खादी तथा ग्रामोद्योग को बढ़ावा देता है और अलग रोजगार कार्यक्रम चलाता है। विकल्प D यानी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम दूसरे मंत्रालय के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों के लिए कर्ज पर काम करता है। परीक्षा के लिए याद रखें कि योजना का मूल मंत्रालय एमएसएमई है और लागू करने वाली संस्था एनएसआईसी।
सार्वजनिक खरीद नीति के तहत कुल खरीद का कितना हिस्सा एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए आरक्षित है?
- A.2 प्रतिशत
- B.4 प्रतिशत
- C.10 प्रतिशत
- D.25 प्रतिशत
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व्याख्या
सही उत्तर 4 प्रतिशत है। केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपनी सालाना खरीद का 25 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यमों से करना होता है, और इसी के भीतर कुल खरीद का 4 प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए आरक्षित है। विकल्प D यानी 25 प्रतिशत एमएसई से जुड़ा बड़ा प्रावधान है और इस सवाल में सबसे आम भ्रम भी यही है, इसलिए दोनों आंकड़े अलग-अलग याद रखने चाहिए। विकल्प A और C यानी 2 और 10 प्रतिशत इस नीति में नहीं आते। इसी प्रावधान के कारण एकल बिंदु पंजीकरण योजना महत्वपूर्ण है, क्योंकि एनएसआईसी के साथ पंजीकरण से निविदा दस्तावेज मुफ्त मिलते हैं और बयाना राशि से छूट मिलती है। यही वजह है कि एससी/एसटी उद्यमों से खरीद 2025-26 में 4,013.42 करोड़ रुपये तक पहुंची।
संस्थागत कर्ज से खरीदे गए संयंत्र और मशीनरी पर राष्ट्रीय एससी-एसटी हब कितनी पूंजी सब्सिडी देता है?
- A.15 प्रतिशत, अधिकतम 15 लाख रुपये
- B.25 प्रतिशत, अधिकतम 25 लाख रुपये
- C.35 प्रतिशत, अधिकतम 50 लाख रुपये
- D.50 प्रतिशत, अधिकतम 1 करोड़ रुपये
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व्याख्या
सही उत्तर 25 प्रतिशत, अधिकतम 25 लाख रुपये है, जो विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना के तहत मिलता है। यह सब्सिडी नए और पहले से चल रहे एससी/एसटी स्वामित्व वाले सूक्ष्म तथा लघु उद्यमों को संस्थागत कर्ज के जरिये संयंत्र, मशीनरी और उपकरण में निवेश पर मिलती है, और इसमें उत्पाद या क्षेत्र की कोई पाबंदी नहीं है, यानी निर्माण तथा सेवा दोनों तरह के उद्यम शामिल हैं। बाकी विकल्पों में दी गई दरें और सीमाएं योजना में नहीं हैं। इसके साथ योजना का रिकॉर्ड भी याद रखें, यानी 2016 से मार्च 2026 तक 3,160 उद्यमों को 356.10 करोड़ रुपये की मदद और 27 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के 233 जिलों तक पहुंच। बाकी घटक वापसी के रूप में काम करते हैं, जैसे कर्ज प्रसंस्करण शुल्क, बैंक गारंटी शुल्क और परीक्षण शुल्क पर 80 प्रतिशत या 1 लाख रुपये तक।
बैठक में रखे गए जल सेवा अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार ग्रामीण जल आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा कारण क्या है?
- A.बिजली कटौती
- B.पाइपलाइन में रिसाव और टूटन
- C.भूजल का घटता स्तर
- D.प्रशिक्षित कर्मियों की कमी
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व्याख्या
सही उत्तर पाइपलाइन में रिसाव और टूटन है। जल सेवा अध्ययन के निष्कर्षों का हवाला देते हुए सचिव ने बैठक में कहा कि पाइपलाइन में रिसाव और टूटन ग्रामीण जल आपूर्ति बाधित होने का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं और इसके बाद बिजली कटौती तथा कम वोल्टेज की समस्याएं आती हैं। विकल्प A इसी कारण गलत है, क्योंकि बिजली से जुड़ी समस्याओं को दूसरे स्थान पर रखा गया है, हालांकि मिशन निदेशक ने यह जोड़ा कि कई क्षेत्रों में बिजली की खराब गुणवत्ता सेवा पर असर डालती है और लागत घटाने से टिकाऊ क्षमता सुधरेगी। विकल्प C गलत है, क्योंकि भूजल का घटता स्तर व्यापक चिंता होने पर भी यहां सबसे बड़ा कारण नहीं बताया गया। विकल्प D गलत है, क्योंकि कर्मियों की कमी से जुड़ा ऐसा कोई निष्कर्ष इस समीक्षा में नहीं आया।
जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक किस संस्थान में हुई?
- A.आईआईएम बंगलूरू
- B.आईआईएम अहमदाबाद
- C.आईआईटी मद्रास
- D.आईआईएम कोझिकोड
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व्याख्या
सही उत्तर आईआईएम बंगलूरू है। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग ने यह क्षेत्रीय समीक्षा बैठक भारतीय प्रबंध संस्थान बंगलूरू में आयोजित की, जहां इसी संस्थान में जल जीवन मिशन प्रोफेसर चेयर संभालने वाले प्रो. गोपाल नायक ने मिशन की योजनाओं में बिजली लागत के अनुकूलन पर अध्ययन भी प्रस्तुत किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि अहमदाबाद में ऐसी किसी बैठक की जानकारी नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि स्थान प्रबंध संस्थान था, प्रौद्योगिकी संस्थान नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि कोझिकोड परिसर की इस समीक्षा में कोई भूमिका नहीं थी और बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव अशोक के. के. मीना ने की थी। अभ्यर्थी इस संस्थान को प्रोफेसर चेयर तथा ग्रिड और सौर व्यवस्थाओं की तुलना वाले अध्ययन से जोड़कर याद रखें।