रेलवे ने कवच 4.0, बरबिल दोहरीकरण और नई ट्रेन को मंज़ूरी दी
भारतीय रेल ने वाराणसी मंडल के 614.75 रूट किलोमीटर पर कवच 4.0, 6 किलोमीटर बरबिल दोहरीकरण और आंध्र प्रदेश में एक नई सप्ताह में तीन दिन वाली ट्रेन मंज़ूर की।

चर्चा में क्यों
28 सितंबर 2026 को भारतीय रेल ने तीन स्वीकृतियों की घोषणा की - वाराणसी मंडल में कवच 4.0, दक्षिण पूर्व रेलवे का बरबिल-बोलानीखदान दोहरीकरण और आंध्र प्रदेश में मछलीपट्टनम तथा कर्नूल सिटी के बीच नई सप्ताह में तीन दिन वाली ट्रेन।
भारतीय रेल ने एक ही दिन तीन अलग-अलग प्रस्तावों को हरी झंडी दी - उत्तर प्रदेश के एक मंडल के लिए टक्कररोधी प्रणाली, ओडिशा की खनिज पट्टी में छोटा किंतु भारी भरकम दोहरीकरण, और आंध्र प्रदेश में एक नई यात्री सेवा।
वाराणसी मंडल में कवच 4.0
कवच के संस्करण 4.0 को पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी (बीएसबी) मंडल के 614.75 रूट किलोमीटर पर 223 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति मिली है। यह काम मंडल के उन बचे हुए खंडों को कवर करेगा जहाँ यह प्रणाली अब तक नहीं पहुँची थी। कवच देश में ही विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है; यह ट्रेन को खतरे का संकेत पार करने से रोकती है, आवश्यकता पड़ने पर स्वयं ब्रेक लगाती है और ट्रेन के संचालन पर नज़र रखती है।
बरबिल-बोलानीखदान लाइन का दोहरीकरण
दूसरी मंज़ूरी दक्षिण पूर्व रेलवे पर बरबिल और बोलानीखदान के बीच मात्र 6 किलोमीटर के दोहरीकरण की है, जिसकी पूर्णता लागत 122 करोड़ रुपये है। खंड छोटा है, पर यह ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट गलियारे पर पड़ता है और आज इकहरी लाइन है, जिस पर लगभग 9 एमटीपीए माल हर दिन करीब 6 लदी रेकों में जाता है। यह यातायात सेल की बोलानी खदानों तथा रुंगटा और खटाऊ नरभेराम जैसी निजी साइडिंगों से निकलने वाले उच्च श्रेणी के लौह अयस्क और पेलेट का है, जो इस्पात संयंत्रों और बंदरगाहों की ओर जाता है। दोहरीकरण के चालू होने पर 8.9 एमटीपीए अतिरिक्त माल ढुलाई की आशा है और मालगाड़ियों की देरी घटेगी।
आंध्र प्रदेश को नई ट्रेन
तीसरी स्वीकृति दक्षिण तट रेलवे पर विजयवाड़ा होते हुए मछलीपट्टनम और कर्नूल सिटी के बीच सप्ताह में तीन दिन चलने वाली सेवा की है, जो 499 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। मछलीपट्टनम-कर्नूल सिटी एक्सप्रेस 16:55 बजे चलकर अगली सुबह 05:45 बजे पहुँचेगी और सोमवार, बुधवार तथा शनिवार को चलेगी; वापसी सेवा कर्नूल सिटी से 09:30 बजे चलकर उसी दिन 21:35 बजे पहुँचेगी और मंगलवार, गुरुवार तथा रविवार को चलेगी। ठहराव गुडिवाडा, विजयवाड़ा, नरसरावपेट, विनुकोंडा, दोनाकोंडा, मार्कापुर रोड, कंबम, गिद्दलूर, दिगुवामेट्टा, नंद्याल, बेतमचेर्ला और ढोणे पर होंगे, जिससे तटीय जिले राज्य के भीतरी हिस्सों से जुड़ेंगे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| स्वीकृत कवच संस्करण | कवच 4.0 |
|---|---|
| कवच का दायरा | 614.75 रूट किलोमीटर, वाराणसी (बीएसबी) मंडल |
| क्षेत्र और लागत | पूर्वोत्तर रेलवे, 223 करोड़ रुपये |
| कवच क्या है | देश में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली |
| दोहरीकरण परियोजना | बरबिल-बोलानीखदान, 6 किलोमीटर, दक्षिण पूर्व रेलवे |
| दोहरीकरण लागत | 122 करोड़ रुपये |
| गलियारा | ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट गलियारा |
| अतिरिक्त माल क्षमता | चालू होने पर 8.9 एमटीपीए |
| नई ट्रेन | मछलीपट्टनम-कर्नूल सिटी एक्सप्रेस, सप्ताह में तीन दिन, विजयवाड़ा होकर |
| क्षेत्र और दूरी | दक्षिण तट रेलवे, 499 किलोमीटर |
परीक्षा की दृष्टि से
वाराणसी मंडल (पूर्वोत्तर रेलवे) के 614.75 रूट किलोमीटर पर 223 करोड़ रुपये का कवच 4.0 और कवच का काम; दक्षिण पूर्व रेलवे का 6 किलोमीटर बरबिल-बोलानीखदान दोहरीकरण 122 करोड़ रुपये में, ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट गलियारे पर, 8.9 एमटीपीए अतिरिक्त क्षमता; तथा दक्षिण तट रेलवे की 499 किलोमीटर लंबी मछलीपट्टनम-कर्नूल सिटी एक्सप्रेस - ये तथ्य याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
कवच संस्करण 4.0 वाराणसी मंडल के 614.75 रूट किलोमीटर पर किस रेलवे क्षेत्र में स्वीकृत हुआ है?
- A.उत्तर रेलवे
- B.पूर्वोत्तर रेलवे
- C.उत्तर मध्य रेलवे
- D.पूर्व मध्य रेलवे
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पूर्वोत्तर रेलवे
व्याख्या
सही उत्तर पूर्वोत्तर रेलवे है। वाराणसी मंडल, जिसका संक्षिप्त रूप बीएसबी है, इसी क्षेत्र के अधीन आता है, और 223 करोड़ रुपये की स्वीकृति उस मंडल के बचे हुए खंडों में कवच 4.0 को फैलाती है, जो कुल मिलाकर 614.75 रूट किलोमीटर बनते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि उत्तर रेलवे एक अलग क्षेत्र है और इस मंज़ूरी में जिस मंडल का नाम है वह उसके अधीन नहीं आता। विकल्प C गलत है क्योंकि उत्तर मध्य रेलवे भले ही देश के इसी बड़े भूभाग में काम करता हो, वाराणसी मंडल उसके अधीन नहीं है। विकल्प D भी इसी कारण गलत है। कवच स्वयं देश में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसका काम ट्रेन को खतरे का संकेत पार करने से रोकना और चालक के चूकने पर स्वयं ब्रेक लगाना है।
भारतीय रेल द्वारा स्वीकृत बरबिल-बोलानीखदान दोहरीकरण परियोजना किस गलियारे पर पड़ती है?
- A.ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट गलियारा
- B.स्वर्णिम चतुर्भुज गलियारा
- C.पूर्वी समर्पित माल गलियारा
- D.रेल सागर गलियारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट गलियारा
व्याख्या
सही उत्तर ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट गलियारा है, जिसके अंतर्गत भारतीय रेल ने इस खंड को चिह्नित किया है। यह हिस्सा केवल 6 किलोमीटर लंबा है, पर इस पर सेल की बोलानी खदानों और निजी साइडिंगों से उच्च श्रेणी का लौह अयस्क तथा पेलेट इस्पात संयंत्रों और बंदरगाहों की ओर जाता है; दोहरीकरण 122 करोड़ रुपये की पूर्णता लागत पर मंज़ूर हुआ है। विकल्प B गलत है क्योंकि स्वर्णिम चतुर्भुज बड़े महानगरों को जोड़ने वाला राजमार्ग नेटवर्क है, रेल परियोजना का ढाँचा नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि समर्पित माल गलियारे अलग से बनाई गई लाइनें हैं, जबकि यह मंज़ूरी पहले से मौजूद इकहरी लाइन के दोहरीकरण की है। विकल्प D गलत है क्योंकि इस नाम का कोई गलियारा इस स्वीकृति में नहीं आता। चालू होने पर 8.9 एमटीपीए अतिरिक्त माल ढुलाई की आशा है।
मछलीपट्टनम और कर्नूल सिटी के बीच स्वीकृत नई ट्रेन कितनी दूरी तय करेगी?
- A.399 किलोमीटर
- B.449 किलोमीटर
- C.499 किलोमीटर
- D.549 किलोमीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 499 किलोमीटर
व्याख्या
सही उत्तर 499 किलोमीटर है। यह नई सेवा दक्षिण तट रेलवे पर विजयवाड़ा होते हुए मछलीपट्टनम और कर्नूल सिटी के बीच चलेगी और दोनों छोरों के बीच यही दूरी तय करेगी। विकल्प A गलत है क्योंकि यात्रा इससे लंबी है; ट्रेन आंध्र प्रदेश की तटीय पट्टी से राज्य के भीतरी भाग तक जाती है और रास्ते में एक दर्जन ठहराव लेती है। विकल्प B भी इसी कारण गलत है और इस मार्ग से ऐसा कोई आँकड़ा जुड़ा नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि दूरी इतनी नहीं बढ़ाई गई है। ठहरावों का क्रम भी याद रखने योग्य है - गुडिवाडा, विजयवाड़ा, नरसरावपेट, विनुकोंडा, दोनाकोंडा, मार्कापुर रोड, कंबम, गिद्दलूर, दिगुवामेट्टा, नंद्याल, बेतमचेर्ला और ढोणे। जाने वाली सेवा सोमवार, बुधवार तथा शनिवार को और वापसी सेवा मंगलवार, गुरुवार तथा रविवार को चलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाराणसी मंडल में कवच 4.0 कितने रूट किलोमीटर पर स्वीकृत हुआ है?
पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी (बीएसबी) मंडल के 614.75 रूट किलोमीटर पर, 223 करोड़ रुपये की लागत से। कवच देश में विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है।
बरबिल-बोलानीखदान दोहरीकरण परियोजना क्या है?
यह दक्षिण पूर्व रेलवे पर 6 किलोमीटर का दोहरीकरण है, जिसकी पूर्णता लागत 122 करोड़ रुपये है। यह खंड ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट गलियारे पर है और चालू होने पर 8.9 एमटीपीए अतिरिक्त माल ढोएगा।
आंध्र प्रदेश में कौन सी नई ट्रेन मंज़ूर हुई है?
दक्षिण तट रेलवे पर विजयवाड़ा होते हुए मछलीपट्टनम और कर्नूल सिटी के बीच सप्ताह में तीन दिन चलने वाली ट्रेन, जो 499 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और गुडिवाडा, नरसरावपेट, विनुकोंडा, नंद्याल तथा ढोणे जैसे स्टेशनों पर रुकेगी।
स्रोत
- ہندوستانی ریلوے نے وارانسی ڈویژن کے 614.75 روٹ کلومیٹر پر کاوچ 4.0 کے لیے223 کروڑ روپے کی منظوری دی (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- ہندوستانی ریلوے نے ساؤتھ ایسٹرن ریلوے کے 6 کلومیٹر طویل باربل–بولانی کھدان لائن کو ڈبل کرنے کے منصوبے کے لیے 122 کروڑ روپے منظور کیے (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- भारतीय रेलवे ने दक्षिण तट रेलवे के विजयवाड़ा के माध्यम से मछलीपट्टनम और कुरनूल शहर के बीच नई त्रि-साप्ताहिक ट्रेन को मंजूरी दी (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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